खैरागढ़ (9 जुलाई): छत्तीसगढ़ सरकार की महत्वाकांक्षी ‘महतारी वंदन योजना’ में लापरवाही का एक बड़ा मामला सामने आया है। जिले के ग्राम मुढ़ीपार में एक पुरुष के नाम पर योजना का आवेदन न सिर्फ मंजूर हो गया, बल्कि करीब एक साल तक उसके खाते में पैसे भी ट्रांसफर होते रहे। हैरानी की बात यह है कि ऑनलाइन आवेदन फॉर्म में हितग्राही (महिला) और पति, दोनों ही कॉलम में एक ही पुरुष का नाम दर्ज था, फिर भी इसे अधिकारियों द्वारा स्वीकृत कर दिया गया।
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सीएससी संचालक ने ‘टेस्टिंग’ के लिए किया था आवेदन
जांच में सामने आया कि मुढ़ीपार निवासी तिलोक साहू, जो एक कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) चलाता है, ने इस योजना के लिए आवेदन किया था। तिलोक साहू का कहना है कि जब यह योजना शुरू हुई थी, तब उसने केवल पोर्टल की प्रक्रिया को समझने और उसकी जांच (टेस्टिंग) करने के उद्देश्य से अपना नाम दोनों कॉलम में भरकर फॉर्म सबमिट किया था।
सत्यापन प्रक्रिया पर उठे सवाल
नियमों के मुताबिक, यह योजना केवल पात्र महिलाओं के लिए है। इसके बावजूद, इस आवेदन को पहले आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और फिर सुपरवाइजर स्तर पर सत्यापित (वेरिफाई) कर दिया गया। किसी भी स्तर पर यह ध्यान नहीं दिया गया कि आवेदनकर्ता एक पुरुष है। इस गड़बड़ी का खुलासा तब हुआ जब एक आरटीआई (RTI) कार्यकर्ता ने हितग्राहियों की सूची में तिलोक साहू का नाम देखकर इसकी शिकायत विभाग से की। ऑनलाइन रिकॉर्ड की जांच में पुष्टि हुई कि उसके खाते में 12 महीने तक राशि जमा की गई थी।
रिकवरी के आदेश और आवेदन होल्ड
मामला उजागर होने के बाद एकीकृत बाल विकास सेवा परियोजना ने बैंक को पत्र लिखकर शासन के खाते में 10 हजार रुपये वापस जमा कराने के निर्देश दिए हैं। हालांकि, रिकॉर्ड में 12 महीने के भुगतान की बात है, जबकि रिकवरी सिर्फ 10 हजार रुपये की ही की जा रही है, जिस पर अब सवाल उठ रहे हैं। फिलहाल, संबंधित आवेदन को हमेशा के लिए होल्ड पर डाल दिया गया है और ‘बेनिफिट सरेंडर’ का अनुरोध स्वीकार कर लिया गया है।
अधिकारी का बयान: परियोजना अधिकारी रंजना श्रीवास्तव ने बताया कि संबंधित व्यक्ति से योजना की राशि वापस ले ली गई है। मामले की विस्तृत जांच अभी जारी है, जिसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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