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बसपा में परिवारवाद पर मायावती का बड़ा फैसला: आकाश और ईशान को झटका, भतीजी दीपिका के लिए खोला उत्तराधिकार का रास्ता

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नई दिल्ली 13 सितंबर Bahujan Samaj Party  : बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती ने पार्टी संगठन और उत्तराधिकार को लेकर जारी तमाम अटकलों पर विराम लगाते हुए एक बड़ा निर्णय लिया है। उन्होंने घोषणा की है कि उनके छोटे भाई आनंद कुमार के दोनों बेटों—आकाश आनंद और ईशान आनंद—को भविष्य में पार्टी के किसी भी छोटे या बड़े पद पर राजनीति करने का अवसर नहीं दिया जाएगा।

अविवाहित होने की मजबूरी और बेटों पर फैसला

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपनी बात रखते हुए मायावती ने कहा कि वह पार्टी संस्थापक कांशीराम की शिष्या हैं और पूरी तरह से परिवारवाद के खिलाफ हैं। उन्होंने स्पष्ट किया, “यदि मैं महिला नहीं होती, तो भाई-बहनों में से किसी को अपने साथ नहीं रखती। अविवाहित होने के कारण मुझे मजबूरी में छोटे भाई आनंद कुमार को साथ रखना पड़ा, जो मेरी देखभाल के साथ पार्टी की जिम्मेदारियां भी संभाल रहे हैं।”

मायावती ने आगे कहा कि उनके भतीजों के शादीशुदा होने के बाद उन्हें काफी कुछ झेलना पड़ा है, लेकिन वह किसी के भी मोह में पड़कर पार्टी का नुकसान नहीं होने देंगी। इसलिए उन्होंने यह अंतिम फैसला और प्रतिज्ञा ली है कि आनंद कुमार के बेटों या उनके बच्चों को बसपा में कोई पद नहीं मिलेगा।

भतीजी दीपिका आनंद को मिल सकती है जिम्मेदारी

मायावती ने संकेत दिया कि यदि आनंद कुमार को अपनी मदद के लिए किसी की आवश्यकता होती है, तो वह अपनी इकलौती बेटी कुमारी दीपिका आनंद की सहायता ले सकते हैं। बाद में दीपिका की ईमानदारी, वफादारी और कार्यक्षमता को देखकर उन्हें जरूरत के हिसाब से पार्टी में जिम्मेदारी भी सौंपी जा सकती है।

उन्होंने यह भी साफ किया कि यदि दीपिका राजनीति के लिए तैयार नहीं होती हैं, तो आनंद कुमार पार्टी की आम सहमति से किसी अन्य निष्ठावान दलित मिशनरी कार्यकर्ता को जिम्मेदारी सौंप सकते हैं।

लंदन से वकालत कर रही हैं दीपिका

22 वर्षीय कुमारी दीपिका आनंद फिलहाल लंदन में वकालत की पढ़ाई कर रही हैं। वह अब तक राजनीति से पूरी तरह दूर रही हैं और कभी किसी राजनीतिक मंच पर नजर नहीं आई हैं। मायावती के इस बयान के बाद दीपिका के बसपा की संभावित राजनीतिक उत्तराधिकारी बनने की चर्चाएं तेज हो गई हैं।

संगठन में जेन-जी को 50 प्रतिशत हिस्सेदारी

मायावती ने बताया कि बसपा के संगठन में जेन-जी (युवा पीढ़ी) को लगभग 50 प्रतिशत हिस्सेदारी देने की प्रक्रिया जारी है। आगामी उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब विधानसभा चुनावों में सर्वसमाज के कर्मठ एवं युवा प्रत्याशियों को प्राथमिकता दी जाएगी। इसके अलावा, उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया कि अनुशासनहीनता के कारण पार्टी से निष्कासित किए गए नेताओं की बसपा में वापसी नहीं होगी।

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