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वंदे मातरम पर सियासी घमासान: उमर अब्दुल्ला का कांग्रेस पर पलटवार, कहा- ‘कानून से बंधे हैं, क्या कांग्रेस चाहती है कश्मीरी जेल जाएं?’

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श्रीनगर 11 सितंबर 

जम्मू-कश्मीर में वंदे मातरम (राष्ट्रगीत) के गायन को लेकर सत्ताधारी नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) और उसकी सहयोगी कांग्रेस के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। हाल ही में एक सरकारी कार्यक्रम में राष्ट्रगीत की पूरी पंक्तियां (पूरा स्टैंजा) बजाए जाने पर कांग्रेस द्वारा जताए गए एतराज के बाद मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला का बड़ा बयान सामने आया है। उमर अब्दुल्ला ने कांग्रेस के रुख पर सवाल उठाते हुए साफ किया कि यह एक कानूनी प्रक्रिया और वैधानिक दायित्व है, जिसका पालन करना सभी के लिए अनिवार्य है।

‘हम कानून से बंधे हैं, पूरे देश में लागू है नियम’

गुरुवार (10 सितंबर) को पत्रकारों से बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि वंदे मातरम से जुड़ा नियम सिर्फ जम्मू-कश्मीर के लिए नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए है। उन्होंने कहा:

“यह कानून बना हुआ है और वंदे मातरम का पूरा स्टैंजा बजाना अब लाजमी है। जिन राज्यों में कांग्रेस की सरकार है, वहां भी सरकारी कार्यक्रमों में यही नियम लागू होगा। यदि कोई इस दौरान प्रोटोकॉल का पालन नहीं करता या खड़ा नहीं होता, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सकती है।”

कांग्रेस पर तीखा हमला: ‘क्या कश्मीरियों को जेल भेजना चाहती है कांग्रेस?’

कांग्रेस की ओर से की गई आलोचना पर कड़ा रुख अपनाते हुए मुख्यमंत्री ने कहा:

“कांग्रेस वाले आखिर क्या चाहते हैं? क्या वे चाहते हैं कि कश्मीरी और जेलों में भरे जाएं? मैं तो दुआ करता हूं कि केंद्र में जल्द से जल्द कांग्रेस की सरकार आए और वे संसद में इस कानून को रद्द कर दें। हमें इसमें कोई ऐतराज नहीं होगा। हमने एक राजनीतिक पार्टी के तौर पर कभी वंदे मातरम को नहीं अपनाया है और न ही आगे अपनाएंगे, लेकिन जब तक यह कानून है, तब तक एक सरकार के रूप में वैधानिक दायित्वों को पूरा करना हमारी मजबूरी है।”

विवाद की शुरुआत: फिल्म फेस्टिवल की घटना

इस पूरे सियासी विवाद की जड़ सोमवार को आयोजित ‘इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ जम्मू एंड कश्मीर’ की एक घटना है।

  • कार्यक्रम में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला मौजूद थे।

  • कार्यक्रम के दौरान पूरे राष्ट्रगीत (वंदे मातरम) का गायन किया गया, जिसके सम्मान में उमर अब्दुल्ला और फारूक अब्दुल्ला खड़े रहे।

  • जम्मू-कश्मीर सरकार को बाहर से समर्थन दे रही कांग्रेस ने इस घटना पर सार्वजनिक रूप से कड़ी असहमति व्यक्त की।

कांग्रेस की आपत्ति: “ऐतिहासिक रूप से स्वीकृत दो अंतरे ही गाए जाएं”

मामला तब गरमाया जब कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने श्रीनगर कार्यक्रम का वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर साझा करते हुए आपत्ति जताई। उन्होंने अपनी सहयोगी पार्टी नेशनल कॉन्फ्रेंस से इस मुद्दे पर कांग्रेस के रुख का समर्थन करने का आह्वान किया।

वेणुगोपाल का तर्क है कि सार्वजनिक व राजनीतिक कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम’ का वही रूप अपनाया जाना चाहिए, जिसे ऐतिहासिक रूप से स्वीकार किया गया था। कांग्रेस के अनुसार, स्वतंत्रता संग्राम के दौरान राष्ट्रगीत के शुरुआती दो अंतरों को ही राष्ट्रीय कार्यक्रमों के लिए अपनाया गया था ताकि इसे लेकर किसी तरह का सांप्रदायिक विवाद पैदा न हो।

कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस के बीच बयानबाजी

वहीं इस मामले में कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष तारिक हमीद कर्रा ने नेकां सरकार के इस कदम पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर लिखा कि राष्ट्रीय प्रतीकों को भारत के संवैधानिक मिजाज और विविधता को प्रतिबिंबित करना चाहिए। उनका कहना था कि राष्ट्रीय प्रतीकों की गरिमा तब बढ़ती है जब वे विविधता को समाहित करते हैं, न कि तब जब विविधता पर किसी चीज को थोपा जाता है।

इसके जवाब में नेशनल कॉन्फ्रेंस के मुख्य प्रवक्ता तनवीर सादिक ने स्पष्ट किया कि सरकारी प्रोटोकॉल और पार्टी की विचारधारा दो अलग-अलग बातें हैं। सरकार में रहते हुए संवैधानिक और कानूनी प्रोटोकॉल का पालन करना हर जनप्रतिनिधि की जिम्मेदारी है।

बीजेपी का तीखा हमला: “कांग्रेस बन चुकी है 21वीं सदी की नई मुस्लिम लीग”

इस राजनीतिक विवाद के तूल पकड़ते ही भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने कांग्रेस के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता और सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कांग्रेस के रुख पर तीखा हमला बोला।

त्रिवेदी ने आरोप लगाया कि ‘वंदे मातरम’ के पूरे संस्करण पर आपत्ति जताना कांग्रेस की तुष्टीकरण की राजनीति और बदलते राजनीतिक चरित्र को उजागर करता है। उन्होंने हमला बोलते हुए कहा कि “कांग्रेस अब 21वीं सदी की नई मुस्लिम लीग बन चुकी है, जो देश के राष्ट्रीय प्रतीकों और राष्ट्रगीत का सम्मान करने के बजाय उसमें विवाद ढूंढती है।”

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