मुंबई/लंदन 11 सितंबर Kalyan MP Dr Shrikant Shinde :लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स एंड पॉलिटिकल साइंस (LSE) का परिसर इन दिनों एक विशेष घटना को लेकर चर्चा में है।

जिस प्रतिष्ठित संस्थान से लगभग एक सदी पहले भारतरत्न डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर ने उच्च शिक्षा प्राप्त की थी, उसी संस्थान में अब महाराष्ट्र के कल्याण लोकसभा क्षेत्र से सांसद डॉ. श्रीकांत शिंदे ने एक छात्र के रूप में अपनी नई शैक्षणिक यात्रा का शुभारंभ किया है। डॉ. शिंदे ने LSE में ‘TRIUM ग्लोबल एग्जीक्यूटिव MBA’ के पहले मॉड्यूल की पढ़ाई शुरू कर दी है। ऑर्थोपेडिक सर्जरी (MS Orthopedics) की डिग्री हासिल करने के बाद, अब वे अर्थव्यवस्था, सार्वजनिक नीति और वैश्विक नेतृत्व की बारीकियों को समझने के लिए इस अंतरराष्ट्रीय पाठ्यक्रम से जुड़े हैं।
LSE परिसर में डॉ. आंबेडकर की प्रतिमा देख हुए भावुक

LSE में अपने पहले दिन के अनुभव को साझा करते हुए डॉ. श्रीकांत शिंदे ने बताया कि कक्षा का पहला व्याख्यान काफी ज्ञानवर्धक था, लेकिन सबसे अधिक भावुक कर देने वाला क्षण परिसर में स्थापित डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की प्रतिमा के समक्ष खड़ा होना रहा। उन्होंने कहा कि कल्याण क्षेत्र के सांसद होने के बावजूद, उस पल उनकी प्राथमिक पहचान केवल एक विद्यार्थी की थी। डॉ. शिंदे के अनुसार, उस क्षण उन्हें यह गहराई से महसूस हुआ कि शिक्षा, विचार और दृढ़ संकल्प किसी भी व्यक्ति को सफलता के सर्वोच्च शिखरों तक पहुँचा सकते हैं। यह केवल किसी विदेशी विश्वविद्यालय में पढ़ाई का अवसर नहीं, बल्कि एक ऐतिहासिक और प्रेरणादायक विरासत से सीधा जुड़ने का अनुभव है।
चिकित्सा से सार्वजनिक नीति तक का सफर
यह डॉ. श्रीकांत शिंदे की दूसरी मास्टर डिग्री होगी। एक कुशल ऑर्थोपेडिक सर्जन के रूप में मरीजों का इलाज करने के बाद, अब सार्वजनिक जीवन और नीति-निर्माण की जिम्मेदारियों को और अधिक प्रभावी ढंग से निभाने के लिए वे अर्थशास्त्र और प्रशासनिक नेतृत्व का अध्ययन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भले ही चिकित्सा और अर्थशास्त्र दो अलग-अलग क्षेत्र हैं, लेकिन ज्ञान अर्जित करने की जिज्ञासा और सीखने की ललक आज भी उतनी ही मजबूत है।
युवाओं के लिए संदेश: जीवन भर शिक्षार्थी बने रहें
LSE से देश के युवाओं को संदेश देते हुए डॉ. शिंदे ने कहा कि कोई डिग्री, नौकरी या प्रशासनिक पद प्राप्त कर लेने से सीखने की प्रक्रिया कभी समाप्त नहीं होनी चाहिए। आज की तेज़ी से बदलती दुनिया में खुद को प्रासंगिक बनाए रखने के लिए निरंतर नया सीखना और अपडेट रहना बेहद आवश्यक है। जनप्रतिनिधि के रूप में बड़ी जिम्मेदारियाँ संभालने के बाद भी वे स्वयं को सदैव एक विद्यार्थी ही मानते हैं।








