
जिंदगी की जंग जीतीं 63 वर्षीय लक्ष्मी सोरी: न्यूरोसर्जन डॉ. दिविक मित्तल के कुशल नेतृत्व और शिवाय हॉस्पिटल, कोरबा की बदौलत लौटी खुशियां
कोरबा 29/10/2026 brain stroke treatment: जिंदगी कब कौन सा इम्तिहान ले ले, यह कोई नहीं जानता। कई बार खुशियों भरा परिवार पलभर में चिंता और अनहोनी के साए में घिर जाता है। ऐसा ही कुछ कोरबा के एक परिवार के साथ तब हुआ, जब 63 वर्षीय श्रीमती लक्ष्मी सोरी अचानक गंभीर ब्रेन स्ट्रोक की शिकार हो गईं। लेकिन, समय पर सही फैसला, कुशल डॉक्टरों की देखरेख और मजबूत इच्छाशक्ति के दम पर उन्होंने मौत और लाचारी को मात दे दी है। 14 मई 2026: वह सुबह जिसने परिवार को झकझोर दिया घटना 14 मई 2026 की सुबह की है। अचानक आए तेज चक्कर, उल्टियों और बेहोशी ने लक्ष्मी सोरी के परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया। इस अचानक स्वास्थ्य आघात के कारण उनके शरीर का बायां हिस्सा पूरी तरह सुन्न और कमजोर पड़ गया था। बोलने की क्षमता छिन चुकी थी और उनकी याददाश्त पर भी विपरीत असर पड़ा था। परिवार के लिए यह किसी बड़े झटके से कम नहीं था, क्योंकि उनके सामने प्रियजन की असहाय स्थिति थी। हालांकि, परिवार ने बिना एक पल गंवाए सूझबूझ का परिचय दिया और उन्हें तुरंत टी.पी. नगर, न्यू बस स्टैंड स्थित शिवाय हॉस्पिटल पहुंचाया। डॉ. दिविक मित्तल के नेतृत्व में शुरू हुआ आपातकालीन उपचार अस्पताल पहुंचते ही डॉक्टरों ने स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए तुरंत जांच शुरू की। जांच में मामला गंभीर इस्कीमिक ब्रेन स्ट्रोक (Ischemic Brain Stroke) का निकला। शिवाय हॉस्पिटल के वरिष्ठ न्यूरोसर्जन एवं डायरेक्टर डॉ. दिविक मित्तल के नेतृत्व में एक विशेषज्ञ चिकित्सा टीम ने फौरन मोर्चा संभाला। स्ट्रोक के मामलों में ‘गोल्डन ऑवर’ यानी शुरुआती समय बेहद अहम होता है। मस्तिष्क में रक्त का प्रवाह बाधित होने के कारण जो जानलेवा स्थिति बनी थी, डॉ. दिविक मित्तल की देखरेख में उस पर तुरंत नियंत्रण पाने के प्रयास शुरू किए गए। पुनर्वास (Rehabilitation) और थेरेपी से मिली नई रफ्तार जान बचाना ही इलाज का अंत नहीं होता, बल्कि मरीज को दोबारा सामान्य जिंदगी देना असली चुनौती होती है। अस्पताल से छुट्टी मिलने और खतरे से बाहर आने के बाद लक्ष्मी सोरी के पुनर्वास का दौर शुरू हुआ। फिजियोथेरेपी: फिजियोथेरेपिस्ट अमन श्रीवास्तव के मार्गदर्शन में उनके कमजोर पड़ चुके बाएं अंगों को दोबारा सक्रिय करने और चलने-फिरने की क्षमता सुधारने के लिए विशेष कसरत कराई गई। स्पीच और मेडिसिन विभाग: बोलने में आ रही रुकावट और याददाश्त की कमजोरी को दूर करने के लिए स्पीच थेरेपी तथा मेडिसिन विभाग ने मिलकर बेहतरीन समन्वय दिखाया। परिवार का संबल: डॉक्टरों के प्रयासों के साथ-साथ परिजनों के अटूट हौसले और देखभाल ने इस रिकवरी को संभव बनाया। स्वस्थ होकर लौटीं घर, चेहरे पर लौटी मुस्कान जिस हालत में परिवार लक्ष्मी सोरी को अस्पताल लेकर आया था, उस समय किसी को उम्मीद नहीं थी कि वे इतनी जल्दी अपने पैरों पर खड़ी हो सकेंगी। लेकिन उपचार, थेरेपी और मजबूत इच्छाशक्ति के बल पर वे न केवल पूरी तरह होश में आईं, बल्कि सामान्य रूप से बातचीत करते हुए अपने पैरों पर चलकर अपने घर लौटीं। यह पल परिवार के लिए बेहद भावुक और राहत भरा था। विश्व स्ट्रोक दिवस पर शिवाय हॉस्पिटल का संदेश: ‘लक्षण दिखें तो बिल्कुल न करें देर’ इस सफल मामले के बाद शिवाय हॉस्पिटल और डॉ. दिविक मित्तल की टीम ने समाज के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश जारी किया है। अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि ब्रेन स्ट्रोक एक मेडिकल इमरजेंसी है। इसके मुख्य लक्षण इस प्रकार हैं: अचानक चेहरा एक तरफ टेढ़ा हो जाना। शरीर के एक हिस्से (हाथ या पैर) में अचानक कमजोरी या सुन्नपन महसूस होना। बोलने या सामने वाले की बात समझने में भारी परेशानी होना। अचानक आंखों के आगे अंधेरा छाना या संतुलन बिगड़ जाना। यदि ऐसे कोई भी लक्षण दिखाई दें, तो घर पर घरेलू नुस्खों या लक्षणों के अपने-आप ठीक होने का इंतजार बिल्कुल न करें। तुरंत नजदीकी अस्पताल या एंबुलेंस की मदद लें, क्योंकि जरा सी देरी मरीज के मस्तिष्क को स्थायी क्षति पहुंचा सकती है या जानलेवा साबित हो सकती है। लक्ष्मी सोरी की यह कहानी इस बात का जीवंत उदाहरण है कि आधुनिक चिकित्सा विज्ञान, समय पर मिला उपचार और सही पुनर्वास गंभीर से गंभीर बीमारी को भी हरा सकते हैं। 📍












































