
कोरबा में मासूम से दरिंदगी पर फूटा जनसैलाब, जनता बोली— “फांसी से कम कुछ मंजूर नहीं!”
कोरबा 24/10/2026 छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के रजगामार में 7 साल की मासूम के साथ हुई अमानवीय और घृणित दरिंदगी ने इंसानियत को शर्मसार कर दिया है। आरोपी अजय उर्फ अमित चौहान (42 वर्ष) की गिरफ्तारी के बाद भी जनता का खून खौल रहा है। लोगों का गुस्सा इस कदर सातवें आसमान पर है कि कानून और न्याय की लंबी प्रक्रियाओं से मोहभंग हो चुका है। अब जनता की जुबान पर सिर्फ एक ही बात है— “ऐसे राक्षसों के लिए कोर्ट-कचहरी नहीं, सीधा मौत का फंदा या बीच चौराहे पर सजा!” वकीलों का फूटा गुस्सा आरोपी को जब पुलिस ने न्यायालय में पेश किया, तो वकीलों का गुस्सा फूट पड़ा। वकीलों ने साफ कर दिया है कि इसशीघ्रता और हैवानियत के सौदागर का कोई भी वकील केस नहीं लड़ेगा। वकीलों ने कोर्ट परिसर में ही आरोपी की जमकर धुनाई कर दी, जो जनता के गुस्से का साफ सबूत है। वहीं, कांग्रेस ने कैंडल मार्च निकालकर मासूम भव्या को श्रद्धांजलि दी और पीड़ित परिवार के लिए 50 लाख रुपये का मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की हुंकार भरी है। “लंबी कानूनी प्रक्रिया नहीं, मौके पर मिले सजा!” इस जघन्य घटना ने हर माता-पिता की रूह कंपा दी है। बेटियों की सुरक्षा को लेकर अभिभावकों में गहरी दहशत और आक्रोश है। जनता अब सिर्फ फांसी की सजा से संतुष्ट होने वाली नहीं है। आम जनता में सुलग रहे गुस्से की आग इतनी तेज है कि लोग खुलेआम कह रहे हैं— “ऐसी वारदातों के लिए लंबी अदबारी तारीखों की क्या जरूरत?” “ऐसे दरिंदों को बीच चौराहे पर खड़ा कर जिंदा जला देना चाहिए!” यह तीखी प्रतिक्रियाएं उस असहनीय दर्द और चीख का नतीजा हैं, जो उस मासूम ने झेली होगी और आज उसका परिवार भोग रहा है। इंसाफ की मांग: स्पीडी ट्रायल और मिसाल बनने वाली सजा भले ही कानूनी और न्यायिक प्रक्रिया के तहत आरोपी को सजा मिलनी तय है, लेकिन अब जनता का सब्र जवाब दे चुका है। लोगों की सख्त अपेक्षा है कि पुलिस और न्यायपालिका इस केस को फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलाए। दोषियों को ऐसी खौफनाक और त्वरित सजा दी जाए, जो देश के हर एक दरिंदे की रूह कंपा दे और भविष्य में ऐसी नापाक हरकत करने से पहले हरशीघ्रता अपराधी कांप उठे!












































