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झुंझुनू हादसा: करंट की चपेट में आने से 8 मजदूरों की दर्दनाक मौत, प्रधानमंत्री और सीएम ने जताया गहरा शोक ममता बनर्जी का बदला राजनीतिक अंदाज: दिल्ली की रैली में सोनिया गांधी को बताया अपनी नेता, विपक्षी समीकरणों पर टकटकी ‘ये हिंदुस्तान आपके अब्बू जान का नहीं…’: रामलीला मैदान रैली पर बीजेपी का राहुल गांधी पर तीखा पलटवार, मेगा रैली को बताया ‘फ्लॉप शो’  वोट बचाओ, देश बचाओ’ के नारे से गूंजा रामलीला मैदान: विपक्ष ने दिखाई एकजुटता, 10 लाख की भीड़ का दावा .. देखें तस्वीर छत्तीसगढ़ स्थापना दिवस: प्रधानमंत्री मोदी की शुभकामनाओं से मिली नई ऊर्जा, मुख्यमंत्री साय ने जताया आभार कोरबा कलेक्टर ने की बड़ी कार्रवाई: काम में लापरवाही और अनुपस्थिति पर पटवारी निलंबित

झुंझुनू हादसा: करंट की चपेट में आने से 8 मजदूरों की दर्दनाक मौत, प्रधानमंत्री और सीएम ने जताया गहरा शोक

  झुंझुनूं 02/11/2026:राजस्थान के झुंझुनू जिले से एक दिल दहला देने वाला सड़क हादसा सामने आया है, जहां सड़क निर्माण कार्य के दौरान करंट की चपेट में आने से एक साथ 8 मजदूरों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से झुलस गए हैं। इस भीषण दुर्घटना के बाद से इलाके में कोहराम मचा हुआ है और मृतकों के परिवारों में मातम पसरा हुआ है। कैसे हुआ हादसा? पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, झुंझुनू जिले के छापोली गांव में सड़क निर्माण का कार्य चल रहा था। काम के दौरान रोड़ी मिलाने वाली एक मशीन ऊपर से गुजर रही 11 हजार वोल्ट की हाईटेंशन विद्युत लाइन के संपर्क में आ गई। लाइन के टच होते ही पूरी मशीन में हाई-वोल्टेज करंट दौड़ गया और वहां काम कर रहे मजदूर इसकी चपेट में आ गए। हादसे में आठ मजदूरों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। दिग्गजों ने जताया दुख और मदद का ऐलान इस भीषण दुर्घटना पर देश और प्रदेश के शीर्ष नेतृत्व ने गहरा शोक व्यक्त किया है: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी: पीएमओ के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हादसे पर दुख जताते हुए शोक संतप्त परिवारों के प्रति संवेदनाएं व्यक्त की हैं और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की है। आर्थिक सहायता: प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (PMNRF) से जान गंवाने वाले मजदूरों के परिजनों को 2 लाख रुपये और घायलों को 50,000 रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की गई है। भजनलाल शर्मा और अशोक गहलोत: राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी इस दर्दनाक हादसे पर गहरी संवेदनाएं प्रकट की हैं।

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‘पीस बॉन्ड’ क्या है और लोकतंत्र में इसका इस्तेमाल क्यों बना चर्चा का विषय?

नई दिल्ली 24/10/2026: लोकतंत्र में विरोध दर्ज कराने के अधिकार और सार्वजनिक शांति बनाए रखने की जवाबदेही के बीच संतुलन हमेशा से बहस का विषय रहा है. हाल ही में

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कोरबा कलेक्टर ने की बड़ी कार्रवाई: काम में लापरवाही और अनुपस्थिति पर पटवारी निलंबित

कोरबा 01/10/2026: सरकारी कामकाज में लगातार लापरवाही और बिना सूचना के गायब रहने वाले कर्मचारियों पर प्रशासन ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। कोरबा कलेक्टर कुणाल दुदावत ने प्रशासनिक

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ममता बनर्जी का बदला राजनीतिक अंदाज: दिल्ली की रैली में सोनिया गांधी को बताया अपनी नेता, विपक्षी समीकरणों पर टकटकी

नई दिल्ली 2/10/2026 INDIA Alliance : दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित ‘INDIA’ गठबंधन की 1 नवम्बर की रैली में तृणमूल कांग्रेस (TMC) सुप्रीमो और पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का एक नया और बदला हुआ राजनीतिक तेवर देखने को मिला। ‘वोट चोरी’ के खिलाफ आयोजित इस महारैली में ममता बनर्जी के बयानों और कांग्रेस नेतृत्व के प्रति उनके नरम रुख ने राष्ट्रीय राजनीति में नए कयासों को जन्म दे दिया है। 1. सोनिया गांधी को ‘नेता’ कहना और राहुल गांधी की तारीफ ममता बनर्जी ने अपने भाषण की शुरुआत कांग्रेस संसदीय दल की chairperson सोनिया गांधी को “मेरी नेता” कहकर अभिवादन करने के साथ की। इसके अलावा, उन्होंने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी को जमीन पर संघर्ष करने वाला एक “युवा नेता” बताकर उनकी जमकर सराहना की। राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा है कि ममता बनर्जी का यह अंदाज कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व के साथ उनके मजबूत होते संबंधों को दर्शाता है। 2. वामदलों और अन्य सहयोगियों को साधना अपने संबोधन के दौरान ममता बनर्जी ने न सिर्फ कांग्रेस नेताओं बल्कि समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव, राजद नेता तेजस्वी यादव और अपने पुराने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के महासचिव एमए बेबी का भी विशेष रूप से नाम लिया। मंच पर उनकी यह एकजुटता विपक्षी दलों के बीच आपसी मतभेदों को दरकिनार कर राष्ट्रीय स्तर पर एक साझा मंच तैयार करने की रणनीति का संकेत देती है। 3. पश्चिम बंगाल चुनाव के बाद बदली सियासी हवा पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद से ममता बनर्जी और कांग्रेस के रिश्तों में एक नई गर्माहट देखने को मिली है। चुनाव परिणामों पर जब ममता ने सवाल उठाए थे, तब राहुल गांधी ने खुलकर उनका समर्थन किया था। इसके बाद ममता की दिल्ली यात्रा और सोनिया-राहुल से उनकी मुलाकात ने दोनों दलों के बीच की दूरियों को काफी हद तक कम किया है। 4. एक ही कार में सफर और मंच की नजदीकी रामलीला मैदान की इस रैली में ममता बनर्जी का एक्शन केवल भाषण तक सीमित नहीं था। वह राहुल गांधी के साथ एक ही कार में बैठकर रैली स्थल तक पहुंचीं और मंच पर भी सोनिया गांधी के ठीक बगल में बैठी नजर आईं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह केवल शिष्टाचार नहीं, बल्कि भाजपा के खिलाफ राष्ट्रीय स्तर पर एक कड़ा संदेश देने की सोची-समझी रणनीति है।

‘ये हिंदुस्तान आपके अब्बू जान का नहीं…’: रामलीला मैदान रैली पर बीजेपी का राहुल गांधी पर तीखा पलटवार, मेगा रैली को बताया ‘फ्लॉप शो’

मुख्य बातें: दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित इंडिया गठबंधन की मेगा रैली पर बीजेपी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कड़ा हमला बोला। बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने राहुल गांधी के भाषण को ‘समय की बर्बादी’ करार देते हुए तीखे शब्दों में निशाना साधा। रैली में उमड़ी भीड़ के दावों पर सवाल उठाते हुए बीजेपी ने इसे पूरी तरह से फ्लॉप शो बताया और रामलीला मैदान की खाली कुर्सियों के आंकड़े सामने रखे। नई दिल्ली 2/11/2026: दिल्ली के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में आयोजित इंडिया गठबंधन की मेगा रैली के बाद सियासी पारा पूरी तरह से चढ़ गया है। रैली के समाप्त होने के तुरंत बाद भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर विपक्ष और खासकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर जोरदार पलटवार किया। बीजेपी राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने राहुल गांधी के बयानों और गठबंधन के दावों की धज्जियां उड़ाते हुए इसे ‘समय की बर्बादी’ और ‘अराजकता की धमाचौकड़ी’ करार दिया। ‘यह हिंदुस्तान आपके अब्बू जान का नहीं’ प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान संबित पात्रा ने राहुल गांधी के भाषण पर कड़ा ऐतराज जताया। राहुल गांधी के 2024 के चुनावों को अवैध बताने वाले बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए पात्रा ने कहा कि अगर चुनाव अवैध था, तो विपक्ष कोर्ट क्यों नहीं गया? उन्होंने तीखा तंज कसते हुए कहा, “आप कह रहे थे कि प्रधानमंत्री और गृहमंत्री बन नहीं सकते थे। मुगल सम्राट होते थे, वो ऐसे ही बात करते थे। ये हिंदुस्तान आपके अब्बू जान का नहीं है, यह इस देश के 140 करोड़ लोगों का है।” पात्रा ने आगे कहा कि राहुल गांधी की पुरानी टेप रिकॉर्डर वाली आदत अभी भी बदली नहीं है। वे लगातार चुनावों और संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल खड़े कर रहे हैं। यदि 2024 का चुनाव अवैध था, तो राहुल गांधी खुद अवैध एलओपी (नेता प्रतिपक्ष) हैं, और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, सोनिया गांधी व प्रियंका गांधी भी अवैध सांसद और नेता माने जाएंगे। 10 लाख भीड़ के दावे पर बीजेपी का करारा प्रहार इंडिया गठबंधन के नेताओं (केसी वेणुगोपाल और पवन खेड़ा) द्वारा रैली में 10 लाख से अधिक लोगों के जुटने के दावे की हवा निकालते हुए संबित पात्रा ने इसके आंकड़े पेश किए। रामलीला मैदान की स्थिति: पात्रा ने कहा कि रामलीला मैदान लगभग 10-12 एकड़ में फैला है, जिसमें स्टेज और डीजी एरिया करीब 15 प्रतिशत जगह घेर लेता है। खाली कुर्सियां: उन्होंने दावा किया कि रैली में कुल 28,000 कुर्सियां डाली गई थीं, जिनमें से मध्य और पीछे का हिस्सा पूरी तरह खाली पड़ा था। 5 से 7 हजार कुर्सियां खाली थीं और मैदान का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा सूना नजर आया। ट्रिक फोटोग्राफी: बीजेपी प्रवक्ता ने कटाक्ष करते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी ट्रिक फोटोग्राफी के माध्यम से भीड़ दिखाने की कोशिश करती है, लेकिन इस तरह के हथकंडों से कोई प्रधानमंत्री नहीं बनता। प्रधानमंत्री पसीने और मेहनत के दम पर बनते हैं, जो विपक्ष ने कभी नहीं की। त्योहारों के समय राजनीति करने का आरोप त्योहारों के सीजन में इस तरह के आयोजनों पर सवाल उठाते हुए पात्रा ने कहा कि ऐसे आयोजनों से आम जनजीवन प्रभावित होता है और लोग त्योहारों के समय एक-दूसरे के घर नहीं जा पा रहे हैं। उन्होंने राहुल गांधी के ‘शिव की बारात’ वाले बयान पर निशाना साधते हुए कहा कि जो लोग देश में अराजकता फैलाना चाहते हैं, वे कभी शिव की बारात का हिस्सा नहीं हो सकते। उन्होंने कहा कि देश की जनता इस अराजकता का जवाब आने वाले चुनावों में परिणामों के जरिए देगी। ‘140 करोड़ जनता का आशीर्वाद मोदी जी के साथ’ राहुल गांधी के बयानों और विपक्ष की कार्यशैली पर कड़ा प्रहार करते हुए पात्रा ने कहा कि वे लगातार पीएम मोदी को गालियां देते हैं और अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल करते हैं। यह ‘मोहब्बत की दुकान’ नहीं, बल्कि राजनीति का अतिक्रमण है जिसे जनता ध्वस्त कर देगी। उन्होंने अंत में विश्वास जताते हुए कहा कि देश के 140 करोड़ लोगों का आशीर्वाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ है और वे कहीं नहीं जाने वाले।

 वोट बचाओ, देश बचाओ’ के नारे से गूंजा रामलीला मैदान: विपक्ष ने दिखाई एकजुटता, 10 लाख की भीड़ का दावा .. देखें तस्वीर

नई दिल्ली 2 नवम्बर 2026: चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली में कथित गड़बड़ियों और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के विरोध में कांग्रेस की अगुवाई में 1 नवम्बर को एक विशाल मेगा रैली आयोजित की गई। इस महारैली के माध्यम से विपक्षी दलों ने चुनावी निष्पक्षता और लोकतांत्रिक संस्थाओं की साख पर बड़े सवाल उठाते हुए सत्तापक्ष पर सीधा हमला बोला। रामलीला मैदान में विपक्ष के इस विशाल शक्ति प्रदर्शन ने देश के राजनीतिक घटनाक्रम में अचानक से भारी उछाल ला दिया है। चुनाव आयोग और सरकार के खिलाफ विपक्ष के इस आक्रामक तेवर ने सत्ता के गलियारों में सियासी सरगर्मी और तपिश को कई गुना बढ़ा दिया है। मिंटो रोड-कनॉट प्लेस जंक्शन से शुरू हुआ मार्च चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और कथित चुनावी गड़बड़ियों (SIR) के विरोध में ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन ने रविवार, 1 नवंबर को दिल्ली में मिंटो रोड-कनॉट प्लेस जंक्शन से एक विशाल मार्च निकाला। इस प्रदर्शन के तहत रामलीला मैदान में आयोजित विशाल महारैली में देश भर से हजारों विपक्षी समर्थक और कार्यकर्ता पहुंचे। रैली का नेतृत्व कांग्रेस नेता राहुल गांधी, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी और अन्य प्रमुख विपक्षी नेताओं ने किया। नेताओं के साथ समर्थकों ने बड़ी संख्या में लिया हिस्सा INDIA गठबंधन की दिल्ली रैली और मार्च को लेकर 10 लाख लोगों के जुटने की उम्मीद जताई गई थी, जबकि पुलिस अनुमान के अनुसार भीड़ 50,000 के करीब रही। नेताओं के साथ-साथ छात्र समूहों, नागरिक समाज संगठनों, श्रमिक संघों, महिलाओं और युवाओं ने भी इस प्रदर्शन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी को सुनने के लिए उत्सुक दिखे लोग कांग्रेस सांसद राहुल गांधी को सुनने के लिए उत्सुक दिखे लोग रामलीला मैदान में लोकसभा नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी को सुनने के लिए बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। दिल्ली के रामलीला मैदान में ‘वोट बचाओ, देश बचाओ महारैली’ को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने पीएम मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और सीईसी ज्ञानेश कुमार पर देश की आत्मा व संविधान पर हमला करने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि चुनावों में बड़े पैमाने पर धांधली हुई है और 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद लगभग 13.5 करोड़ (15%) मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए गए, जिसे उन्होंने “देशद्रोह” करार दिया। केंद्र सरकार और बीजेपी शासित राज्यों सरकारों पर साधा निशाना दिल्ली के रामलीला मैदान में ‘इंडिया’ गठबंधन की ‘वोट चोरी’ विरोधी महारैली को संबोधित करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र, यूपी, बिहार और महाराष्ट्र की सरकारों को ‘चोरी की सरकार’ करार दिया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि मोदी जी खुद को ही चुनते हैं, उन्हें जनता नहीं चुनती है और उनके सत्ता से बाहर होने पर ही देश का लोकतंत्र सुरक्षित रह सकता है। INDIA गठबंधन के नेताओं को साथ सैंकड़ों लोगों का मिला साथ मोदी सरकार, चुनाव आयोग और मतदाता सूची के विवादास्पद विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) की निंदा करने वाले झंडों, बैनरों और तख्तियों का एक विशाल समूह धीमी गति से चल रहे जुलूस के साथ-साथ चल रहा था। रामलीला मैदान हजारों इंडिया ब्लॉक समर्थकों से भर गया था, जिनमें युवा और छात्र समूह भी शामिल थे। पार्टी कार्यकर्ता कई राज्यों से राजधानी पहुंचे थे, जिनमें से कई रविवार सुबह ही आ गए थे और कई एक दिन पहले ही दिल्ली पहुंच चुके थे। सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव भी आए नजर   ‘इंडिया’ गठबंधन की महारैली को ‘लोकतंत्र की हल्दीघाटी’ करार देते हुए सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने अमित शाह के ‘अंगद के पैर’ वाले बयान पर तंज कसा कि जब जनाधार की जमीन ही खिसक चुकी है, तो पैर कहां टिकेगा। उन्होंने यूपी में 1.27 लाख मतदाताओं के नाम काटे जाने का मुद्दा उठाते हुए आरोप लगाया कि अपनी हार सामने देख भाजपा अब चुनाव आयोग के सहारे मतदाता सूची में हेराफेरी का खेल खेल रही है। मंच पर साथ दिखीं ममत बनर्जी और सोनिया गांधी महारैली के दौरान तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी का एक नया और बदला हुआ राजनीतिक अंदाज देखने को मिला। उन्होंने अपने भाषण की शुरुआत “मेरी नेता सोनिया जी को मेरा नमस्ते” कहकर की और राहुल गांधी को ‘लड़ाई लड़ रहे युवा नेता’ के रूप में संबोधित किया। मंच पर सोनिया गांधी के साथ उनकी नजदीकी और लंबे समय तक प्रतिद्वंद्वी रही माकपा के नेता एम ए बेबी का नाम लेना विपक्षी गठबंधन के भीतर बदलते सियासी समीकरणों को दर्शाता है। विपक्षी दलों में दिखाई दी एकजुटता   रामलीला मैदान से कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव, तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी, राजद नेता तेजस्वी यादव और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की नेता सुप्रिया सुले समेत विभिन्न विपक्षी दलों के वरिष्ठ नेता मंच पर दिखाई दिए  

महाराष्ट्र की राजनीति में भूचाल: क्या फिर एक होंगे उद्धव और शिंदे? एक नेता के बयान से सियासी पारे में उबाल

मुंबई 1 नवंबर 2026 Maharashtra politics :  महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर दोनों शिवसेनाओं (शिंदे गुट और उद्धव गुट) के एक साथ आने की सुगबुगाहट तेज हो गई है। शिवसेना (शिंदे गुट) के विधान परिषद सदस्य (MLC) हेमंत पाटिल के एक ताजा और बेहद सनसनीखेज बयान ने राज्य के राजनीतिक गलियारों में बड़ी हलचल पैदा कर दी है। (आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज) इस बयान के बाद सियासी गलियारों में यह सवाल सबसे बड़ा बन गया है कि क्या जिन दो धड़ों ने एक-दूसरे के खिलाफ जंग लड़ी थी, वे भविष्य में फिर से हाथ मिला सकते हैं? राजनीति में कुछ भी संभव: “जिंदगी भर जिनके खिलाफ हथियार उठाए, आज साथ बैठने का वक्त” हेमंत पाटिल ने राजनीति के अनिश्चित और अप्रत्याशित स्वभाव पर खुलकर बात की। उन्होंने टिप्पणी करते हुए कहा कि राजनीति में कभी भी कुछ भी हो सकता है। (आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज) इस दौरान उन्होंने एक बहुत बड़ा राजनीतिक सच बयां करते हुए कहा कि “जिंदगी भर जिनके खिलाफ हथियार उठाए, आज उन्हीं के साथ बैठने का वक्त आ चुका है।” दोनों शिवसेनाओं के एकजुट होने के फैसले पर उन्होंने स्पष्ट किया कि इस संबंध में मुख्यमंत्री/नेता एकनाथ शिंदे जो भी योग्य फैसला लेंगे, वह फैसला पार्टी के सभी नेताओं और कार्यकर्ताओं को पूरी तरह से मान्य होगा। जमीनी हकीकत: आम शिवसैनिकों का आपसी प्यार और नांदेड का दर्द पाटिल ने जमीनी स्तर पर काम करने वाले शिवसैनिकों के आपसी संबंधों का जिक्र करते हुए एक अहम बात रखी। उन्होंने कहा कि भले ही पार्टी टूट चुकी है और दो अलग-अलग शिवसेनाएं बन चुकी हैं, लेकिन आम शिवसैनिकों के बीच एक-दूसरे के प्रति आत्मीयता और लगाव का भाव आज भी वैसा ही बना हुआ है। शिवसैनिक आज भी एक-दूसरे के सुख-दुख में बढ़-चढ़कर शामिल होते हैं। उन्होंने नांदेड जिले की स्थिति का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि यदि शिवसेना अंदर से एक होती, (आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज) तो आज पूरे महाराष्ट्र और खासतौर पर नांदेड में पार्टी और कार्यकर्ताओं को जिस कड़े संघर्ष और परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, वह नौबत कभी नहीं आती। भाजपा से स्थानीय मतभेद और पालकमंत्री को सीधी सलाह बयान के दौरान हेमंत पाटिल ने सत्ताधारी महायुति गठबंधन में शामिल भारतीय जनता पार्टी (BJP) और शिवसेना के रिश्तों पर भी अपनी बेबाक राय रखी। उन्होंने खुले तौर पर स्वीकार किया कि जमीनी व स्थानीय स्तर पर भाजपा और शिवसेना के बीच निश्चित रूप से मतभेद और मनमुटाव मौजूद हैं। इन मतभेदों को दूर करने का सुझाव देते हुए उन्होंने कहा कि जो भी जिले के पालकमंत्री हैं, उन्हें खुद पहल करके आगे आना चाहिए और इन स्थानीय विवादों को तुरंत सुलझाना चाहिए ताकि कार्यकर्ताओं में सामंजस्य बन सके। महायुति गठबंधन पर रुख और वरिष्ठ नेताओं को चेतावनी गठबंधन की मौजूदा स्थिति के बारे में स्पष्टीकरण देते हुए पाटिल ने कहा कि फिलहाल महायुति गठबंधन में कोई बहुत बड़ी दरार या खटास नहीं पड़ी है। (आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज) हालांकि, उन्होंने चेतावनी भरे अंदाज में यह भी जोड़ा कि यदि समय रहते इन छोटी-छोटी स्थानीय परेशानियों को दूर नहीं किया गया, तो भविष्य में दिक्कतें बढ़ सकती हैं, इसलिए वरिष्ठ नेताओं को इस स्थिति पर समय रहते ध्यान देने की सख्त जरूरत है। क्या है बड़ा सवाल? हेमंत पाटिल के इस सस्पेंस से भरे बयान ने यह बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या आने वाले दिनों में शिंदे गुट और उद्धव ठाकरे गुट के बीच अंदरखाने कोई सियासी समीकरण या तालमेल बन रहा है? हालांकि अंतिम फैसला पूरी तरह से एकनाथ शिंदे के हाथ में है, लेकिन इस बयान ने महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर नई बहस छेड़ दी है।

रामलीला मैदान रैली: राहुल गांधी ने मिंटो रोड से अजमेरी गेट तक पैदल यात्रा का किया आह्वान, दिल्ली पुलिस बोली– ‘नहीं मांगी गई मार्च की अनुमति’

नई दिल्ली 31/10/2026: इलेक्शन कमीशन द्वारा ‘SIR’ में कथित गड़बड़ी और मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन 1 नवंबर को दिल्ली के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में एक बड़ी महारैली आयोजित करने जा रहा है। रैली की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। पैदल यात्रा का रूट और समय: लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया के जरिए आम जनता, नागरिक समाज के प्रतिनिधियों और विपक्षी दलों को इस रैली व पैदल यात्रा में शामिल होने का निमंत्रण दिया है। राहुल गांधी के अनुसार, रविवार (1 नवंबर) दोपहर 12 बजे कनॉट प्लेस के पास मिंटो रोड जंक्शन से यह पैदल यात्रा शुरू होगी, जो अजमेरी गेट होते हुए रामलीला मैदान पर समाप्त होगी। दिल्ली पुलिस का रुख और सुरक्षा व्यवस्था: दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस के सूत्रों का कहना है कि कनॉट प्लेस से रामलीला मैदान तक इस तरह के मार्च के लिए कोई आधिकारिक अनुमति नहीं मांगी गई है। पुलिस ने स्पष्ट किया कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत नई दिल्ली क्षेत्र (चुनाव आयोग क्षेत्र सहित) में लोगों के एकत्रित होने पर प्रतिबंध लागू है। इसके अलावा, जंतर-मंतर को भी अब आधिकारिक प्रदर्शन स्थल नहीं माना जा रहा है। हालांकि, रामलीला मैदान में सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए दिल्ली पुलिस के साथ-साथ अर्धसैनिक बलों की भारी तैनाती की जाएगी। CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आज सार्वजनिक कार्यक्रम: बारिश के कारण शुक्रवार को स्थगित हुआ विपक्ष का कार्यक्रम अब शनिवार (31 अक्टूबर) दोपहर 3:30 बजे कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के 10, राजाजी मार्ग स्थित आवास पर आयोजित किया जा रहा है। राहुल गांधी ने बताया कि खराब मौसम के कारण वरिष्ठ नेताओं की सुविधा को देखते हुए यह फैसला लिया गया था। केंद्र सरकार और गृह मंत्री पर आरोप: राहुल गांधी ने केंद्र सरकार और गृह मंत्री पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, तेलंगाना और पंजाब से आने वाले कार्यकर्ताओं व आम लोगों को दिल्ली पहुँचने से रोकने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि यह पूरी लड़ाई भारतीय लोकतंत्र की रक्षा के लिए है। 🔴

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खात्मे के बाद सियासी घमासान: सुधांशु त्रिवेदी बोले— ‘जंगल से नक्सलवाद गया, पर दिल्ली में ‘दिमागी नक्सल’ बाकी’

रायपुर 31/10/2026:छत्तीसगढ़ में उग्रवाद के सफाए के बाद अब सूबे की सियासत एक नए और तीखे दौर में प्रवेश कर चुकी है। रायपुर में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता और सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस पार्टी और राहुल गांधी पर तीखा वैचारिक प्रहार किया। उन्होंने व्यंग्य कसते हुए कहा कि भले ही छत्तीसगढ़ की धरती से नक्सलवाद का खात्मा हो चुका है, लेकिन वैचारिक और ‘दिमागी नक्सल’ के अवशेष अभी भी दिल्ली में बैठे हुए हैं, जो लगातार भ्रम फैलाने का काम कर रहे हैं। ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ अभियान के तहत निशाना शुक्रवार को भाजपा के इस विशेष अभियान के तहत मीडिया से मुखातिब होते हुए त्रिवेदी ने देश की लोकतांत्रिक संस्थाओं की साख पर सवाल उठाने को लेकर विपक्ष को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि आज जब भारत दुनिया के सबसे बड़े और मजबूत लोकतंत्र के रूप में वैश्विक पटल पर उभर रहा है, तो कई विदेशी ताकतों को यह तरक्की रास नहीं आ रही है। उनके मुताबिक, देश को कमजोर करने के लिए अंदरूनी और बाहरी मोर्चों पर कई तरह के षड्यंत्र रचे जा रहे हैं। मतदाता सूची (SIR) के मुद्दे पर कांग्रेस को घेरा स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) यानी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण पर कांग्रेस द्वारा उठाए जा रहे सवालों का करारा जवाब देते हुए भाजपा सांसद ने पूरी प्रक्रिया का कच्चा-चिट्ठा सामने रखा। उन्होंने स्पष्ट किया कि: बूथ लेवल ऑफिसर (BLO): हर मतदाता के घर सूची में नाम जोड़ने के लिए तीन बार जाते हैं। राजनीतिक दलों की सहभागिता: इस पूरी प्रक्रिया पर नजर रखने के लिए देश भर में राजनीतिक दलों के करीब 22 लाख एजेंट तैनात रहते हैं। त्रिवेदी ने कांग्रेस से तीखा सवाल पूछते हुए कहा कि जब इस पूरी पारदर्शी प्रक्रिया में खुद उनके दल के कार्यकर्ता और एजेंट शामिल हैं, तो क्या कांग्रेस अपने ही कार्यकर्ताओं की निष्ठा और भूमिका पर संदेह जता रही है? समय रहते जिला या प्रदेश स्तर पर आपत्तियां दर्ज न कराने की नाकामी किसकी है? ’45 दिन के बजाय 15 दिन में ही मचाया जा रहा शोर’ भाजपा सांसद ने कांग्रेस को नसीहत देते हुए कहा कि चुनाव परिणामों को आए अभी महज 15 दिन ही बीते हैं, जबकि आपत्तियां और दावे दर्ज कराने के लिए चुनाव आयोग ने 45 दिन का पर्याप्त समय दिया है। प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही सवालिया निशान खड़े करना विपक्ष की हताशा को दर्शाता है। ‘बांटो और बर्बाद करो’ की राह पर कांग्रेस ईवीएम (EVM) के बाद अब मतदाता सूची को कटघरे में खड़े करने पर तंज कसते हुए सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि कांग्रेस का मूल एजेंडा सिर्फ सत्ता हथियाना नहीं, बल्कि राष्ट्र में अविश्वास और अराजकता का माहौल पैदा करना है। उन्होंने अंग्रेजों की ‘फूट डालो और राज करो’ की नीति की तर्ज पर कांग्रेस पर हमला करते हुए कहा कि आज की कांग्रेस ‘बांटो और बर्बाद करो’ के सिद्धांत पर काम कर रही है। पृष्ठभूमि: राहुल गांधी के आरोप और चुनाव आयोग पर सवाल गौरतलब है कि हाल ही में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यों के चुनावों में ‘वोट चोरी’ होने के गंभीर आरोप लगाए थे। दिल्ली में बुलाई गई एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े किए थे। इसी वाकये के बाद से देश की राजनीति में पक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी जंग चरम पर पहुंच गई

टेक्नोलॉजी

क्या AI खत्म कर देगा पारंपरिक बैंकिंग? शेखर कपूर के सवाल पर छिड़ी नई बहस

नई दिल्ली 16 अक्टूबर 2026 Artificial Intelligence : आने वाले समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) बैंकिंग सेक्टर के कामकाज और कारोबार को पूरी तरह से बदल सकता है। मशहूर फिल्म निर्माता शेखर कपूर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म लिंक्डइन पर एक विचारोत्तेजक पोस्ट शेयर करते हुए सवाल उठाया है—“अगर एआई खुद लोगों के पैसे संभालने, निवेश के बेहतर विकल्प खोजने और अधिक ब्याज दिलाने का काम करने लगे, तो फिर पारंपरिक बैंकों की जरूरत ही क्यों पड़ेगी?” शेखर कपूर की इस पोस्ट ने इंटरनेट पर एक नई बहस को जन्म दे दिया है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि एआई बैंकिंग उद्योग को बड़ा नुकसान पहुंचा सकता है, वहीं अन्य का कहना है कि बैंक बंद नहीं होंगे, बल्कि उनका काम करने का तरीका पूरी तरह बदल जाएगा। Advt बैंकों की कमाई पर कैसे पड़ेगा असर? शेखर कपूर के अनुसार, बैंक जमाकर्ताओं के पैसे को कर्ज या निवेश में लगाकर बड़ी कमाई करते हैं और उसके बदले ग्राहकों को बहुत कम ब्याज देते हैं। बैंकों का मुनाफा उन ग्राहकों से भी होता है, जो आलस या झंझट के कारण बेहतर ब्याज दरों की तलाश में अपना पैसा दूसरी जगह ट्रांसफर नहीं करते। लेकिन अगर AI एजेंट हर रात ग्राहक के फंड के लिए खुद ही सबसे ज्यादा ब्याज देने वाले विकल्प खोजने लगें, तो ग्राहकों को खुद मेहनत नहीं करनी पड़ेगी। ऐसे में बैंक ग्राहकों को कम ब्याज दर देकर पहले की तरह आसानी से मुनाफा नहीं कमा सकेंगे। क्या AI पूरी तरह से बैंकों की जगह ले सकता है? बहस में शामिल कई विशेषज्ञों का मानना है कि सिर्फ एआई बैंकिंग का विकल्प नहीं बन सकता। सुरक्षा और जिम्मेदारी: लिंक्डइन यूजर अनय महिमकर ने लिखा कि एआई वित्तीय फैसले लेने में मदद तो कर सकता है, लेकिन कर्ज देना, जोखिम उठाना, सरकारी नियमों (Compliance) का पालन करना और भरोसा कायम रखना बैंकों की प्राथमिक जिम्मेदारी रहेगी। सटीक लोन प्रक्रिया: विशेषज्ञ कृष्णा लक्मसानी का कहना है कि एआई ग्राहकों की आमदनी और खर्चों का विश्लेषण करके उधार देने वालों और लेने वालों के बीच सीधा संपर्क बना सकता है। इससे बिचौलियों का असर कम होगा और एआई एजेंट ग्राहकों की ओर से बेहतर ब्याज दरों के लिए बातचीत (Negotiation) भी कर सकेंगे। बैंकों का भविष्य: क्या होंगी नई चुनौतियां? विशेषज्ञों का मानना है कि पैसों की सुरक्षा, डिजिटल पेमेंट और सरकारी योजनाओं के लाभ के लिए बैंकों की प्रासंगिकता बनी रहेगी। हालाँकि, बैंकों के सामने सबसे बड़ी चुनौती ग्राहकों को अपने साथ बनाए रखने की होगी। जो बैंक नई तकनीक, बेहतर ब्याज दरें और एआई-आधारित सेवाएं अपनाएंगे, वे ही भविष्य की बैंकिंग रेस में आगे टिक पाएंगे। 📍

व्यापार

ममता बनर्जी का बदला राजनीतिक अंदाज: दिल्ली की रैली में सोनिया गांधी को बताया अपनी नेता, विपक्षी समीकरणों पर टकटकी

नई दिल्ली 2/10/2026 INDIA Alliance : दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित ‘INDIA’ गठबंधन की 1 नवम्बर की रैली में तृणमूल कांग्रेस (TMC) सुप्रीमो और पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का एक नया और बदला हुआ राजनीतिक तेवर देखने को मिला। ‘वोट चोरी’ के खिलाफ आयोजित इस महारैली में ममता बनर्जी के बयानों और कांग्रेस नेतृत्व के प्रति उनके नरम रुख ने राष्ट्रीय राजनीति में नए कयासों को जन्म दे दिया है। 1. सोनिया गांधी को ‘नेता’ कहना और राहुल गांधी की तारीफ ममता बनर्जी ने अपने भाषण की शुरुआत कांग्रेस संसदीय दल की chairperson सोनिया गांधी को “मेरी नेता” कहकर अभिवादन करने के साथ की। इसके अलावा, उन्होंने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी को जमीन पर संघर्ष करने वाला एक “युवा नेता” बताकर उनकी जमकर सराहना की। राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा है कि ममता बनर्जी का यह अंदाज कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व के साथ उनके मजबूत होते संबंधों को दर्शाता है। 2. वामदलों और अन्य सहयोगियों को साधना अपने संबोधन के दौरान ममता बनर्जी ने न सिर्फ कांग्रेस नेताओं बल्कि समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव, राजद नेता तेजस्वी यादव और अपने पुराने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के महासचिव एमए बेबी का भी विशेष रूप से नाम लिया। मंच पर उनकी यह एकजुटता विपक्षी दलों के बीच आपसी मतभेदों को दरकिनार कर राष्ट्रीय स्तर पर एक साझा मंच तैयार करने की रणनीति का संकेत देती है। 3. पश्चिम बंगाल चुनाव के बाद बदली सियासी हवा पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद से ममता बनर्जी और कांग्रेस के रिश्तों में एक नई गर्माहट देखने को मिली है। चुनाव परिणामों पर जब ममता ने सवाल उठाए थे, तब राहुल गांधी ने खुलकर उनका समर्थन किया था। इसके बाद ममता की दिल्ली यात्रा और सोनिया-राहुल से उनकी मुलाकात ने दोनों दलों के बीच की दूरियों को काफी हद तक कम किया है। 4. एक ही कार में सफर और मंच की नजदीकी रामलीला मैदान की इस रैली में ममता बनर्जी का एक्शन केवल भाषण तक सीमित नहीं था। वह राहुल गांधी के साथ एक ही कार में बैठकर रैली स्थल तक पहुंचीं और मंच पर भी सोनिया गांधी के ठीक बगल में बैठी नजर आईं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह केवल शिष्टाचार नहीं, बल्कि भाजपा के खिलाफ राष्ट्रीय स्तर पर एक कड़ा संदेश देने की सोची-समझी रणनीति है।

‘ये हिंदुस्तान आपके अब्बू जान का नहीं…’: रामलीला मैदान रैली पर बीजेपी का राहुल गांधी पर तीखा पलटवार, मेगा रैली को बताया ‘फ्लॉप शो’

मुख्य बातें: दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित इंडिया गठबंधन की मेगा रैली पर बीजेपी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कड़ा हमला बोला। बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने राहुल गांधी के भाषण को ‘समय की बर्बादी’ करार देते हुए तीखे शब्दों में निशाना साधा। रैली में उमड़ी भीड़ के दावों पर सवाल उठाते हुए बीजेपी ने इसे पूरी तरह से फ्लॉप शो बताया और रामलीला मैदान की खाली कुर्सियों के आंकड़े सामने रखे। नई दिल्ली 2/11/2026: दिल्ली के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में आयोजित इंडिया गठबंधन की मेगा रैली के बाद सियासी पारा पूरी तरह से चढ़ गया है। रैली के समाप्त होने के तुरंत बाद भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर विपक्ष और खासकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर जोरदार पलटवार किया। बीजेपी राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने राहुल गांधी के बयानों और गठबंधन के दावों की धज्जियां उड़ाते हुए इसे ‘समय की बर्बादी’ और ‘अराजकता की धमाचौकड़ी’ करार दिया। ‘यह हिंदुस्तान आपके अब्बू जान का नहीं’ प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान संबित पात्रा ने राहुल गांधी के भाषण पर कड़ा ऐतराज जताया। राहुल गांधी के 2024 के चुनावों को अवैध बताने वाले बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए पात्रा ने कहा कि अगर चुनाव अवैध था, तो विपक्ष कोर्ट क्यों नहीं गया? उन्होंने तीखा तंज कसते हुए कहा, “आप कह रहे थे कि प्रधानमंत्री और गृहमंत्री बन नहीं सकते थे। मुगल सम्राट होते थे, वो ऐसे ही बात करते थे। ये हिंदुस्तान आपके अब्बू जान का नहीं है, यह इस देश के 140 करोड़ लोगों का है।” पात्रा ने आगे कहा कि राहुल गांधी की पुरानी टेप रिकॉर्डर वाली आदत अभी भी बदली नहीं है। वे लगातार चुनावों और संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल खड़े कर रहे हैं। यदि 2024 का चुनाव अवैध था, तो राहुल गांधी खुद अवैध एलओपी (नेता प्रतिपक्ष) हैं, और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, सोनिया गांधी व प्रियंका गांधी भी अवैध सांसद और नेता माने जाएंगे। 10 लाख भीड़ के दावे पर बीजेपी का करारा प्रहार इंडिया गठबंधन के नेताओं (केसी वेणुगोपाल और पवन खेड़ा) द्वारा रैली में 10 लाख से अधिक लोगों के जुटने के दावे की हवा निकालते हुए संबित पात्रा ने इसके आंकड़े पेश किए। रामलीला मैदान की स्थिति: पात्रा ने कहा कि रामलीला मैदान लगभग 10-12 एकड़ में फैला है, जिसमें स्टेज और डीजी एरिया करीब 15 प्रतिशत जगह घेर लेता है। खाली कुर्सियां: उन्होंने दावा किया कि रैली में कुल 28,000 कुर्सियां डाली गई थीं, जिनमें से मध्य और पीछे का हिस्सा पूरी तरह खाली पड़ा था। 5 से 7 हजार कुर्सियां खाली थीं और मैदान का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा सूना नजर आया। ट्रिक फोटोग्राफी: बीजेपी प्रवक्ता ने कटाक्ष करते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी ट्रिक फोटोग्राफी के माध्यम से भीड़ दिखाने की कोशिश करती है, लेकिन इस तरह के हथकंडों से कोई प्रधानमंत्री नहीं बनता। प्रधानमंत्री पसीने और मेहनत के दम पर बनते हैं, जो विपक्ष ने कभी नहीं की। त्योहारों के समय राजनीति करने का आरोप त्योहारों के सीजन में इस तरह के आयोजनों पर सवाल उठाते हुए पात्रा ने कहा कि ऐसे आयोजनों से आम जनजीवन प्रभावित होता है और लोग त्योहारों के समय एक-दूसरे के घर नहीं जा पा रहे हैं। उन्होंने राहुल गांधी के ‘शिव की बारात’ वाले बयान पर निशाना साधते हुए कहा कि जो लोग देश में अराजकता फैलाना चाहते हैं, वे कभी शिव की बारात का हिस्सा नहीं हो सकते। उन्होंने कहा कि देश की जनता इस अराजकता का जवाब आने वाले चुनावों में परिणामों के जरिए देगी। ‘140 करोड़ जनता का आशीर्वाद मोदी जी के साथ’ राहुल गांधी के बयानों और विपक्ष की कार्यशैली पर कड़ा प्रहार करते हुए पात्रा ने कहा कि वे लगातार पीएम मोदी को गालियां देते हैं और अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल करते हैं। यह ‘मोहब्बत की दुकान’ नहीं, बल्कि राजनीति का अतिक्रमण है जिसे जनता ध्वस्त कर देगी। उन्होंने अंत में विश्वास जताते हुए कहा कि देश के 140 करोड़ लोगों का आशीर्वाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ है और वे कहीं नहीं जाने वाले।

 वोट बचाओ, देश बचाओ’ के नारे से गूंजा रामलीला मैदान: विपक्ष ने दिखाई एकजुटता, 10 लाख की भीड़ का दावा .. देखें तस्वीर

नई दिल्ली 2 नवम्बर 2026: चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली में कथित गड़बड़ियों और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के विरोध में कांग्रेस की अगुवाई में 1 नवम्बर को एक विशाल मेगा रैली आयोजित की गई। इस महारैली के माध्यम से विपक्षी दलों ने चुनावी निष्पक्षता और लोकतांत्रिक संस्थाओं की साख पर बड़े सवाल उठाते हुए सत्तापक्ष पर सीधा हमला बोला। रामलीला मैदान में विपक्ष के इस विशाल शक्ति प्रदर्शन ने देश के राजनीतिक घटनाक्रम में अचानक से भारी उछाल ला दिया है। चुनाव आयोग और सरकार के खिलाफ विपक्ष के इस आक्रामक तेवर ने सत्ता के गलियारों में सियासी सरगर्मी और तपिश को कई गुना बढ़ा दिया है। मिंटो रोड-कनॉट प्लेस जंक्शन से शुरू हुआ मार्च चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और कथित चुनावी गड़बड़ियों (SIR) के विरोध में ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन ने रविवार, 1 नवंबर को दिल्ली में मिंटो रोड-कनॉट प्लेस जंक्शन से एक विशाल मार्च निकाला। इस प्रदर्शन के तहत रामलीला मैदान में आयोजित विशाल महारैली में देश भर से हजारों विपक्षी समर्थक और कार्यकर्ता पहुंचे। रैली का नेतृत्व कांग्रेस नेता राहुल गांधी, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी और अन्य प्रमुख विपक्षी नेताओं ने किया। नेताओं के साथ समर्थकों ने बड़ी संख्या में लिया हिस्सा INDIA गठबंधन की दिल्ली रैली और मार्च को लेकर 10 लाख लोगों के जुटने की उम्मीद जताई गई थी, जबकि पुलिस अनुमान के अनुसार भीड़ 50,000 के करीब रही। नेताओं के साथ-साथ छात्र समूहों, नागरिक समाज संगठनों, श्रमिक संघों, महिलाओं और युवाओं ने भी इस प्रदर्शन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी को सुनने के लिए उत्सुक दिखे लोग कांग्रेस सांसद राहुल गांधी को सुनने के लिए उत्सुक दिखे लोग रामलीला मैदान में लोकसभा नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी को सुनने के लिए बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। दिल्ली के रामलीला मैदान में ‘वोट बचाओ, देश बचाओ महारैली’ को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने पीएम मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और सीईसी ज्ञानेश कुमार पर देश की आत्मा व संविधान पर हमला करने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि चुनावों में बड़े पैमाने पर धांधली हुई है और 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद लगभग 13.5 करोड़ (15%) मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए गए, जिसे उन्होंने “देशद्रोह” करार दिया। केंद्र सरकार और बीजेपी शासित राज्यों सरकारों पर साधा निशाना दिल्ली के रामलीला मैदान में ‘इंडिया’ गठबंधन की ‘वोट चोरी’ विरोधी महारैली को संबोधित करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र, यूपी, बिहार और महाराष्ट्र की सरकारों को ‘चोरी की सरकार’ करार दिया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि मोदी जी खुद को ही चुनते हैं, उन्हें जनता नहीं चुनती है और उनके सत्ता से बाहर होने पर ही देश का लोकतंत्र सुरक्षित रह सकता है। INDIA गठबंधन के नेताओं को साथ सैंकड़ों लोगों का मिला साथ मोदी सरकार, चुनाव आयोग और मतदाता सूची के विवादास्पद विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) की निंदा करने वाले झंडों, बैनरों और तख्तियों का एक विशाल समूह धीमी गति से चल रहे जुलूस के साथ-साथ चल रहा था। रामलीला मैदान हजारों इंडिया ब्लॉक समर्थकों से भर गया था, जिनमें युवा और छात्र समूह भी शामिल थे। पार्टी कार्यकर्ता कई राज्यों से राजधानी पहुंचे थे, जिनमें से कई रविवार सुबह ही आ गए थे और कई एक दिन पहले ही दिल्ली पहुंच चुके थे। सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव भी आए नजर   ‘इंडिया’ गठबंधन की महारैली को ‘लोकतंत्र की हल्दीघाटी’ करार देते हुए सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने अमित शाह के ‘अंगद के पैर’ वाले बयान पर तंज कसा कि जब जनाधार की जमीन ही खिसक चुकी है, तो पैर कहां टिकेगा। उन्होंने यूपी में 1.27 लाख मतदाताओं के नाम काटे जाने का मुद्दा उठाते हुए आरोप लगाया कि अपनी हार सामने देख भाजपा अब चुनाव आयोग के सहारे मतदाता सूची में हेराफेरी का खेल खेल रही है। मंच पर साथ दिखीं ममत बनर्जी और सोनिया गांधी महारैली के दौरान तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी का एक नया और बदला हुआ राजनीतिक अंदाज देखने को मिला। उन्होंने अपने भाषण की शुरुआत “मेरी नेता सोनिया जी को मेरा नमस्ते” कहकर की और राहुल गांधी को ‘लड़ाई लड़ रहे युवा नेता’ के रूप में संबोधित किया। मंच पर सोनिया गांधी के साथ उनकी नजदीकी और लंबे समय तक प्रतिद्वंद्वी रही माकपा के नेता एम ए बेबी का नाम लेना विपक्षी गठबंधन के भीतर बदलते सियासी समीकरणों को दर्शाता है। विपक्षी दलों में दिखाई दी एकजुटता   रामलीला मैदान से कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव, तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी, राजद नेता तेजस्वी यादव और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की नेता सुप्रिया सुले समेत विभिन्न विपक्षी दलों के वरिष्ठ नेता मंच पर दिखाई दिए  

महाराष्ट्र की राजनीति में भूचाल: क्या फिर एक होंगे उद्धव और शिंदे? एक नेता के बयान से सियासी पारे में उबाल

मुंबई 1 नवंबर 2026 Maharashtra politics :  महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर दोनों शिवसेनाओं (शिंदे गुट और उद्धव गुट) के एक साथ आने की सुगबुगाहट तेज हो गई है। शिवसेना (शिंदे गुट) के विधान परिषद सदस्य (MLC) हेमंत पाटिल के एक ताजा और बेहद सनसनीखेज बयान ने राज्य के राजनीतिक गलियारों में बड़ी हलचल पैदा कर दी है। (आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज) इस बयान के बाद सियासी गलियारों में यह सवाल सबसे बड़ा बन गया है कि क्या जिन दो धड़ों ने एक-दूसरे के खिलाफ जंग लड़ी थी, वे भविष्य में फिर से हाथ मिला सकते हैं? राजनीति में कुछ भी संभव: “जिंदगी भर जिनके खिलाफ हथियार उठाए, आज साथ बैठने का वक्त” हेमंत पाटिल ने राजनीति के अनिश्चित और अप्रत्याशित स्वभाव पर खुलकर बात की। उन्होंने टिप्पणी करते हुए कहा कि राजनीति में कभी भी कुछ भी हो सकता है। (आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज) इस दौरान उन्होंने एक बहुत बड़ा राजनीतिक सच बयां करते हुए कहा कि “जिंदगी भर जिनके खिलाफ हथियार उठाए, आज उन्हीं के साथ बैठने का वक्त आ चुका है।” दोनों शिवसेनाओं के एकजुट होने के फैसले पर उन्होंने स्पष्ट किया कि इस संबंध में मुख्यमंत्री/नेता एकनाथ शिंदे जो भी योग्य फैसला लेंगे, वह फैसला पार्टी के सभी नेताओं और कार्यकर्ताओं को पूरी तरह से मान्य होगा। जमीनी हकीकत: आम शिवसैनिकों का आपसी प्यार और नांदेड का दर्द पाटिल ने जमीनी स्तर पर काम करने वाले शिवसैनिकों के आपसी संबंधों का जिक्र करते हुए एक अहम बात रखी। उन्होंने कहा कि भले ही पार्टी टूट चुकी है और दो अलग-अलग शिवसेनाएं बन चुकी हैं, लेकिन आम शिवसैनिकों के बीच एक-दूसरे के प्रति आत्मीयता और लगाव का भाव आज भी वैसा ही बना हुआ है। शिवसैनिक आज भी एक-दूसरे के सुख-दुख में बढ़-चढ़कर शामिल होते हैं। उन्होंने नांदेड जिले की स्थिति का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि यदि शिवसेना अंदर से एक होती, (आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज) तो आज पूरे महाराष्ट्र और खासतौर पर नांदेड में पार्टी और कार्यकर्ताओं को जिस कड़े संघर्ष और परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, वह नौबत कभी नहीं आती। भाजपा से स्थानीय मतभेद और पालकमंत्री को सीधी सलाह बयान के दौरान हेमंत पाटिल ने सत्ताधारी महायुति गठबंधन में शामिल भारतीय जनता पार्टी (BJP) और शिवसेना के रिश्तों पर भी अपनी बेबाक राय रखी। उन्होंने खुले तौर पर स्वीकार किया कि जमीनी व स्थानीय स्तर पर भाजपा और शिवसेना के बीच निश्चित रूप से मतभेद और मनमुटाव मौजूद हैं। इन मतभेदों को दूर करने का सुझाव देते हुए उन्होंने कहा कि जो भी जिले के पालकमंत्री हैं, उन्हें खुद पहल करके आगे आना चाहिए और इन स्थानीय विवादों को तुरंत सुलझाना चाहिए ताकि कार्यकर्ताओं में सामंजस्य बन सके। महायुति गठबंधन पर रुख और वरिष्ठ नेताओं को चेतावनी गठबंधन की मौजूदा स्थिति के बारे में स्पष्टीकरण देते हुए पाटिल ने कहा कि फिलहाल महायुति गठबंधन में कोई बहुत बड़ी दरार या खटास नहीं पड़ी है। (आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज) हालांकि, उन्होंने चेतावनी भरे अंदाज में यह भी जोड़ा कि यदि समय रहते इन छोटी-छोटी स्थानीय परेशानियों को दूर नहीं किया गया, तो भविष्य में दिक्कतें बढ़ सकती हैं, इसलिए वरिष्ठ नेताओं को इस स्थिति पर समय रहते ध्यान देने की सख्त जरूरत है। क्या है बड़ा सवाल? हेमंत पाटिल के इस सस्पेंस से भरे बयान ने यह बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या आने वाले दिनों में शिंदे गुट और उद्धव ठाकरे गुट के बीच अंदरखाने कोई सियासी समीकरण या तालमेल बन रहा है? हालांकि अंतिम फैसला पूरी तरह से एकनाथ शिंदे के हाथ में है, लेकिन इस बयान ने महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर नई बहस छेड़ दी है।

रामलीला मैदान रैली: राहुल गांधी ने मिंटो रोड से अजमेरी गेट तक पैदल यात्रा का किया आह्वान, दिल्ली पुलिस बोली– ‘नहीं मांगी गई मार्च की अनुमति’

नई दिल्ली 31/10/2026: इलेक्शन कमीशन द्वारा ‘SIR’ में कथित गड़बड़ी और मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन 1 नवंबर को दिल्ली के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में एक बड़ी महारैली आयोजित करने जा रहा है। रैली की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। पैदल यात्रा का रूट और समय: लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया के जरिए आम जनता, नागरिक समाज के प्रतिनिधियों और विपक्षी दलों को इस रैली व पैदल यात्रा में शामिल होने का निमंत्रण दिया है। राहुल गांधी के अनुसार, रविवार (1 नवंबर) दोपहर 12 बजे कनॉट प्लेस के पास मिंटो रोड जंक्शन से यह पैदल यात्रा शुरू होगी, जो अजमेरी गेट होते हुए रामलीला मैदान पर समाप्त होगी। दिल्ली पुलिस का रुख और सुरक्षा व्यवस्था: दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस के सूत्रों का कहना है कि कनॉट प्लेस से रामलीला मैदान तक इस तरह के मार्च के लिए कोई आधिकारिक अनुमति नहीं मांगी गई है। पुलिस ने स्पष्ट किया कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत नई दिल्ली क्षेत्र (चुनाव आयोग क्षेत्र सहित) में लोगों के एकत्रित होने पर प्रतिबंध लागू है। इसके अलावा, जंतर-मंतर को भी अब आधिकारिक प्रदर्शन स्थल नहीं माना जा रहा है। हालांकि, रामलीला मैदान में सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए दिल्ली पुलिस के साथ-साथ अर्धसैनिक बलों की भारी तैनाती की जाएगी। CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आज सार्वजनिक कार्यक्रम: बारिश के कारण शुक्रवार को स्थगित हुआ विपक्ष का कार्यक्रम अब शनिवार (31 अक्टूबर) दोपहर 3:30 बजे कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के 10, राजाजी मार्ग स्थित आवास पर आयोजित किया जा रहा है। राहुल गांधी ने बताया कि खराब मौसम के कारण वरिष्ठ नेताओं की सुविधा को देखते हुए यह फैसला लिया गया था। केंद्र सरकार और गृह मंत्री पर आरोप: राहुल गांधी ने केंद्र सरकार और गृह मंत्री पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, तेलंगाना और पंजाब से आने वाले कार्यकर्ताओं व आम लोगों को दिल्ली पहुँचने से रोकने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि यह पूरी लड़ाई भारतीय लोकतंत्र की रक्षा के लिए है। 🔴

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खात्मे के बाद सियासी घमासान: सुधांशु त्रिवेदी बोले— ‘जंगल से नक्सलवाद गया, पर दिल्ली में ‘दिमागी नक्सल’ बाकी’

रायपुर 31/10/2026:छत्तीसगढ़ में उग्रवाद के सफाए के बाद अब सूबे की सियासत एक नए और तीखे दौर में प्रवेश कर चुकी है। रायपुर में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता और सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस पार्टी और राहुल गांधी पर तीखा वैचारिक प्रहार किया। उन्होंने व्यंग्य कसते हुए कहा कि भले ही छत्तीसगढ़ की धरती से नक्सलवाद का खात्मा हो चुका है, लेकिन वैचारिक और ‘दिमागी नक्सल’ के अवशेष अभी भी दिल्ली में बैठे हुए हैं, जो लगातार भ्रम फैलाने का काम कर रहे हैं। ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ अभियान के तहत निशाना शुक्रवार को भाजपा के इस विशेष अभियान के तहत मीडिया से मुखातिब होते हुए त्रिवेदी ने देश की लोकतांत्रिक संस्थाओं की साख पर सवाल उठाने को लेकर विपक्ष को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि आज जब भारत दुनिया के सबसे बड़े और मजबूत लोकतंत्र के रूप में वैश्विक पटल पर उभर रहा है, तो कई विदेशी ताकतों को यह तरक्की रास नहीं आ रही है। उनके मुताबिक, देश को कमजोर करने के लिए अंदरूनी और बाहरी मोर्चों पर कई तरह के षड्यंत्र रचे जा रहे हैं। मतदाता सूची (SIR) के मुद्दे पर कांग्रेस को घेरा स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) यानी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण पर कांग्रेस द्वारा उठाए जा रहे सवालों का करारा जवाब देते हुए भाजपा सांसद ने पूरी प्रक्रिया का कच्चा-चिट्ठा सामने रखा। उन्होंने स्पष्ट किया कि: बूथ लेवल ऑफिसर (BLO): हर मतदाता के घर सूची में नाम जोड़ने के लिए तीन बार जाते हैं। राजनीतिक दलों की सहभागिता: इस पूरी प्रक्रिया पर नजर रखने के लिए देश भर में राजनीतिक दलों के करीब 22 लाख एजेंट तैनात रहते हैं। त्रिवेदी ने कांग्रेस से तीखा सवाल पूछते हुए कहा कि जब इस पूरी पारदर्शी प्रक्रिया में खुद उनके दल के कार्यकर्ता और एजेंट शामिल हैं, तो क्या कांग्रेस अपने ही कार्यकर्ताओं की निष्ठा और भूमिका पर संदेह जता रही है? समय रहते जिला या प्रदेश स्तर पर आपत्तियां दर्ज न कराने की नाकामी किसकी है? ’45 दिन के बजाय 15 दिन में ही मचाया जा रहा शोर’ भाजपा सांसद ने कांग्रेस को नसीहत देते हुए कहा कि चुनाव परिणामों को आए अभी महज 15 दिन ही बीते हैं, जबकि आपत्तियां और दावे दर्ज कराने के लिए चुनाव आयोग ने 45 दिन का पर्याप्त समय दिया है। प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही सवालिया निशान खड़े करना विपक्ष की हताशा को दर्शाता है। ‘बांटो और बर्बाद करो’ की राह पर कांग्रेस ईवीएम (EVM) के बाद अब मतदाता सूची को कटघरे में खड़े करने पर तंज कसते हुए सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि कांग्रेस का मूल एजेंडा सिर्फ सत्ता हथियाना नहीं, बल्कि राष्ट्र में अविश्वास और अराजकता का माहौल पैदा करना है। उन्होंने अंग्रेजों की ‘फूट डालो और राज करो’ की नीति की तर्ज पर कांग्रेस पर हमला करते हुए कहा कि आज की कांग्रेस ‘बांटो और बर्बाद करो’ के सिद्धांत पर काम कर रही है। पृष्ठभूमि: राहुल गांधी के आरोप और चुनाव आयोग पर सवाल गौरतलब है कि हाल ही में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यों के चुनावों में ‘वोट चोरी’ होने के गंभीर आरोप लगाए थे। दिल्ली में बुलाई गई एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े किए थे। इसी वाकये के बाद से देश की राजनीति में पक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी जंग चरम पर पहुंच गई

धर्म

चारधाम यात्रा 2026: श्रद्धालुओं का ऐतिहासिक रिकॉर्ड, 60 लाख से अधिक भक्तों ने किए दर्शन

देहरादून 23 अक्टूबर 2026 Char Dham Yatra 2026 : उत्तराखंड की प्रसिद्ध चारधाम यात्रा इस वर्ष अपने अंतिम चरण में प्रवेश कर चुकी है। हिमालयी तीर्थस्थलों के दर्शन के लिए इस सीजन में आस्था का जनसैलाब उमड़ा, जिसने पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस सीजन में अब तक 60 लाख (6 मिलियन) से अधिक तीर्थयात्री चारों पवित्र धामों—बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री—के दर्शन कर चुके हैं। बद्रीनाथ धाम शीर्ष पर, केदारनाथ दूसरे स्थान पर प्रशासन द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष श्रद्धालुओं की पहली पसंद बद्रीनाथ धाम रहा, जहाँ सबसे अधिक 20,69,866 तीर्थयात्री पहुँचे। आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज वहीं, केदारनाथ धाम 17,75,059 श्रद्धालुओं की उपस्थिति के साथ दूसरे स्थान पर रहा। उल्लेखनीय है कि पिछले वर्षों की तुलना में इस बार श्रद्धालुओं की संख्या में भारी वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2023 में 56 लाख और वर्ष 2024 में 50 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने दर्शन किए थे, जबकि इस बार यह संख्या 60 लाख के पार पहुँच गई है। 16 नवंबर को कपाट बंद होने के साथ समाप्त होगा ग्रीष्मकालीन चरण 19 अप्रैल 2026 को शुरू हुई यह पवित्र यात्रा आगामी 16 नवंबर को बद्रीनाथ धाम के कपाट बंद होने के साथ ही शीतकाल के लिए विश्राम लेगी। हालांकि, इसके बाद शीतकालीन चारधाम यात्रा का शुभारंभ होगा। आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज उत्तरकाशी के जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने बताया कि प्रशासन शीतकालीन यात्रा की तैयारियों पर मुस्तैदी से काम कर रहा है। माँ गंगा के मुखबा और माँ यमुना के खरसाली स्थित शीतकालीन निवासों पर विराजमान होने के बाद भक्त वहाँ दर्शन कर सकेंगे। इसी तरह केदारनाथ धाम के कपाट बंद होने के बाद उखीमठ में श्रद्धालु बाबा केदार के दर्शन जारी रख सकेंगे। मानसून और आपदा की चुनौतियों के बीच सुगम संचालन इस वर्ष मानसून के दौरान प्राकृतिक आपदाओं की चुनौतियाँ सामने आईं, लेकिन राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन के त्वरित प्रयासों से यात्रा को सुरक्षित रूप से जारी रखा गया। श्रद्धालुओं के लिए मार्गों पर स्वास्थ्य, सुरक्षा, यातायात और आपातकालीन सुविधाओं को मुस्तैद किया गया था। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा: “60 लाख से अधिक श्रद्धालुओं का आगमन उत्तराखंड की पवित्रता और लोगों की अटूट आस्था को दर्शाता है। राज्य सरकार हर श्रद्धालु की यात्रा को सुरक्षित, सुगम और सुव्यवस्थित बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत है।”

मां बम्लेश्वरी के भक्तों के लिए बड़ी खबर: डोंगरगढ़ नवरात्रि मेले में 1100 जवानों का पहरा, पदयात्रियों को मिलेंगे 20 हजार रेडियम स्टिकर, जानें सुरक्षा और ट्रैफिक का पूरा प्लान

रायपुर/राजनांदगांव 11 अक्टूबर 2025 Dongargarh Navratri Mela:  शारदीय नवरात्रि के पावन अवसर

रामदेव पीर जयंती पर भव्य समारोह: गुजराती समाज की नवीन कार्यकारिणी का हुआ शपथ ग्रहण, कैबिनेट मंत्री लखनलाल देवांगन ने की 20 लाख की घोषणा

समारोह में कैबिनेट मंत्री लखनलाल देवांगन,जिला भाजपाध्यक्ष गोपाल मोदी एवं निगम सभापति

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