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अयोध्या का 10वां दीपोत्सव 2026: सरयू के 56 घाटों पर 30 लाख दीयों की जगमग, सीएम योगी का विपक्ष पर तीखा हमला कहा “कोप भवन में बैठे हैं मंथरा और मारीच” बाबरी विध्वंस पर सोनिया गांधी का बयान: गरमाई देश की राजनीति, बीजेपी का पलटवार—”कांग्रेस के दिल में आज भी बाबर” मोक्ष और न्याय की अनूठी चौखट: ग्वालियर का मारकंडेश्वर मंदिर, जहाँ शिव संग होती है यमराज की पूजा बिलासपुर में महासमुंद फैमिली कोर्ट जज के खिलाफ FIR का मामला: सरकंडा थाना प्रभारी प्रदीप आर्य लाइन अटैच चेक बाउंस मामलों में बड़ा कानूनी बदलाव: अब आरोपित के बरी होने पर हाई कोर्ट की अनुमति बिना सीधे सेशन कोर्ट में होगी अपील छत्तीसगढ़ में जनजातीय गौरव दिवस: बीजेपी अध्यक्ष नितिन नबीन से पहले 11 नवंबर को मैदान संभालेंगी स्मृति ईरानी

अयोध्या का 10वां दीपोत्सव 2026: सरयू के 56 घाटों पर 30 लाख दीयों की जगमग, सीएम योगी का विपक्ष पर तीखा हमला कहा “कोप भवन में बैठे हैं मंथरा और मारीच”

  Ayodhya Deepotsav : रामनगरी अयोध्या में इस बार का दीपोत्सव बेहद भव्य और ऐतिहासिक रहा। सरयू नदी के तट पर स्थित 56 घाटों को 30 लाख से अधिक मिट्टी के दीपों से रोशन किया गया, जिससे पूरी नगरी राममय हो उठी। इस अलौकिक आयोजन में उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सहभागिता की। दोनों ने सबसे पहले भगवान श्रीराम और माता जानकी की पूजा-अर्चना की और सरयू तट पर आरती उतारी। 10वें दीपोत्सव की मुख्य विशेषताएँ भव्य दीयों की संख्या: ‘राम की पैड़ी’ सहित सरयू नदी के कुल 56 घाटों पर 30 लाख से अधिक दीये प्रज्वलित किए गए। विशिष्ट उपस्थिति: उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दीपोत्सव कार्यक्रम में शिरकत कर दीप जलाए। पारंपरिक शुरुआत: मुख्यमंत्री योगी ने साल 2017 में शुरू हुए इस ऐतिहासिक दीपोत्सव के सफर को याद करते हुए इसके सांस्कृतिक महत्व को रेखांकित किया। सीएम योगी आदित्यनाथ का संबोधन: “कोप भवन में बैठे हैं मंथरा और मारीच” दीपोत्सव 2026 के अवसर पर जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विपक्ष और देश विरोधी ताकतों पर करारा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि आज देश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ‘विरासत’ और ‘विकास’ के पथ पर आगे बढ़ रहा है, लेकिन कुछ लोग इससे असहज हैं। “एक ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विरासत, विकास और लोक कल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से विकसित भारत का संकल्प आगे बढ़ रहा है, लेकिन दूसरी ओर कोप भवन में बैठे हुए मंथरा और मारीच इस पूरी व्यवस्था को प्रभावित करने के लिए अराजकता पैदा कर रहे हैं।” योगी ने आगे कहा कि नया भारत आतंकवाद और नक्सलवाद को नेस्तनाबूत कर रहा है, और तमाम साजिशों के बावजूद ‘सत्यमेव जयते’ और ‘धर्मेव जयते’ का संकल्प सिद्ध होकर रहेगा।

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दिवाली पर महकता घर और सेहत का ख्याल: पूजा के दौरान इन बातों का रखें विशेष ध्यान

नई दिल्ली 06/11/2026 Festival Safety, दिवाली की शाम पूजा-पाठ और रोशनी के साथ घर सुगंधित दीपों और अगरबत्तियों की खुशबू से महक उठता है। हालांकि, त्योहार के इस उल्लास के बीच

विदेश

अयोध्या का 10वां दीपोत्सव 2026: सरयू के 56 घाटों पर 30 लाख दीयों की जगमग, सीएम योगी का विपक्ष पर तीखा हमला कहा “कोप भवन में बैठे हैं मंथरा और मारीच”

  Ayodhya Deepotsav : रामनगरी अयोध्या में इस बार का दीपोत्सव बेहद भव्य और ऐतिहासिक रहा। सरयू नदी के तट पर स्थित 56 घाटों को 30 लाख से अधिक मिट्टी

छत्तीसगढ़ में जनजातीय गौरव दिवस: बीजेपी अध्यक्ष नितिन नबीन से पहले 11 नवंबर को मैदान संभालेंगी स्मृति ईरानी

मुख्य आकर्षण अग्रिम दौरा: बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के आगमन से चार दिन पहले 11 नवंबर को प्रदेश प्रभारी स्मृति ईरानी छत्तीसगढ़ पहुंचेंगी। पहला प्रवास: राष्ट्रीय अध्यक्ष की

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बाबरी विध्वंस पर सोनिया गांधी का बयान: गरमाई देश की राजनीति, बीजेपी का पलटवार—”कांग्रेस के दिल में आज भी बाबर”

नई दिल्ली 07/11/2026 Indian Politics : 6 दिसंबर 1992 को अयोध्या में हुए बाबरी मस्जिद विध्वंस की यादें एक बार फिर भारतीय राजनीति के केंद्र में आ गई हैं। इस राजनीतिक घमासान की वजह कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी का एक हालिया इंटरव्यू है। (आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज) ब्रिटिश समाचार पत्र ‘द गार्जियन’ को दिए इस साक्षात्कार में सोनिया गांधी ने उस दौर की अपनी व्यक्तिगत प्रतिक्रिया और पार्टी की राजनीतिक कमियों पर खुलकर बात की है, जिस पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने तीखा हमला बोला है। टीवी पर दृश्य देखकर रो पड़ी थीं सोनिया गांधी  ‘द गार्जियन’ से बातचीत के दौरान सोनिया गांधी ने 6 दिसंबर 1992 का जिक्र करते हुए कहा कि बाबरी मस्जिद गिराए जाने की घटना को उन्होंने टेलीविजन पर देखा था। उन्होंने बताया कि उस दृश्य को देखकर वे रो पड़ी थीं और उसी पल उन्हें यह अहसास हो गया था कि महात्मा गांधी और पंडित जवाहरलाल नेहरू द्वारा देखे गए ‘धर्मनिरपेक्ष भारत’ के विचार को बचाए रखने के लिए एक लंबी और कठिन लड़ाई लड़नी होगी। कांग्रेस ने स्वीकार कीं अपनी राजनीतिक गलतियाँ सोनिया गांधी ने इंटरव्यू में न केवल बाबरी विध्वंस पर अपनी संवेदनशीलता जताई, बल्कि कांग्रेस की ऐतिहासिक राजनीतिक चूक को भी खुलकर स्वीकार किया। उन्होंने माना कि पार्टी की कुछ नाकामियों और जरूरत से ज्यादा बेफिक्र (निश्चिंत) रहने के रवैये ने देश में बीजेपी और उसकी हिंदुत्व की राजनीति के उभार को जगह दी। बीजेपी का चौतरफा हमला: “सोनिया बाबरी और बाटला हाउस के लिए रोती हैं” उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव से ठीक पहले आए सोनिया गांधी के इस बयान ने बीजेपी को कांग्रेस पर हमलावर होने का नया मौका दे दिया है। प्रदीप भंडारी का आरोप: बीजेपी प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर निशाना साधते हुए लिखा, “सोनिया गांधी बाबरी के लिए आंसू बहाती हैं, सोनिया गांधी बाटला हाउस के लिए आंसू बहाती हैं। सोनिया गांधी साबित करती हैं कि कांग्रेस ‘बाबर-समर्थक’ और ‘भगवान राम-विरोधी’ है। उनकी यह वोट बैंक की राजनीति हमेशा हारती रहेगी।” सुधांशु त्रिवेदी का तीखा सवाल: बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता और सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस के रुख पर सवाल उठाते हुए कहा: “1990 में कश्मीर में जो अत्याचार हुआ, उसके लिए आपकी आँखों में कभी आंसू क्यों नहीं आए? 2005 में जब श्री राम जन्मभूमि पर आतंकी हमला हुआ, तब क्या बीती? आज जब पूरा देश अयोध्या में दीपोत्सव का नया कीर्तिमान बना रहा है, तब कांग्रेस के अंदर का यह अंधकार साफ दिखाई दे रहा है।” सुधांशु त्रिवेदी ने गांधी परिवार पर निशाना साधते हुए आगे कहा कि जवाहरलाल नेहरू (1959), इंदिरा गांधी (1968) और राहुल गांधी (2005) ने काबुल में बाबर की कब्र पर जाकर सिजदा किया। इसके साथ ही उन्होंने एक तकनीकी सवाल भी उठाया कि 1992 में दूरदर्शन पर दिनभर का सीधा प्रसारण नहीं होता था, ऐसे में सोनिया गांधी ने उस वक्त टीवी पर यह दृश्य कब और कैसे देखा? 1992 के विध्वंस से 2024 के राम मंदिर तक 6 दिसंबर 1992 को अयोध्या में कारसेवकों द्वारा विवादित ढांचे को गिराए जाने के बाद देशभर में भीषण सांप्रदायिक दंगे भड़क उठे थे। (आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज) इस घटना के तीन दशक से भी अधिक समय बाद, जनवरी 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उसी स्थान पर भव्य राम मंदिर का उद्घाटन किया, जिसके साथ ही बीजेपी का दशकों पुराना वैचारिक संकल्प पूरा हुआ। सोनिया गांधी के ताजा बयानों ने एक बार फिर अयोध्या विवाद और भारत की धर्मनिरपेक्षता की बहस को देश के राजनीतिक पटल पर ला खड़ा किया है। 📍

राहुल गांधी के घर दिवाली मिलन: 5 राज्यों के पूर्व मुख्यमंत्री एक साथ आए नजर, डीके शिवकुमार बोले- ‘कांग्रेस को मजबूत करने का संदेश’

नई दिल्ली 07/11/2026 : लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के दिल्ली स्थित आवास पर शुक्रवार (6 नवंबर) को एक विशेष ‘दिवाली मिलन’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज इस मौके पर कांग्रेस के कई दिग्गज नेता, पार्टी पदाधिकारी और 5 राज्यों के पूर्व मुख्यमंत्री एक साथ नजर आए। राहुल गांधी ने सभी नेताओं से मुलाकात कर दिवाली की शुभकामनाएं दीं। चाय पर हुई इस मुलाकात के जरिए पार्टी में एकजुटता का बड़ा संदेश देने की कोशिश की गई। कार्यक्रम में शामिल हुए ये 5 पूर्व मुख्यमंत्री इस दिवाली मिलन समारोह में राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, छत्तीसगढ़ के पूर्व सीएम भूपेश बघेल, हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा, उत्तराखंड के पूर्व सीएम हरीश रावत और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह विशेष रूप से मौजूद रहे। इनके अलावा कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा, जयराम रमेश, सचिन पायलट, कुमारी शैलजा और हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू सहित संगठन के कई वरिष्ठ पदाधिकारियों और राज्य प्रभारियों ने भी हिस्सा लिया। ‘राजनीतिक चर्चा नहीं, सिर्फ चाय और त्योहार की खुशियां’ उत्तर प्रदेश के AICC प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि यह पूरी तरह से एक अनौपचारिक और त्योहार से जुड़ा कार्यक्रम था। उन्होंने स्पष्ट किया, “आज कोई पॉलिटिकल चर्चा नहीं हुई; हमने बस साथ में चाय पी और त्योहार की खुशियां साझा कीं।” राहुल गांधी का संदेश: पार्टी के लिए वफादार कार्यकर्ता बनें मजबूत कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि राहुल गांधी संगठन के प्रति समर्पित नेताओं और कार्यकर्ताओं को एकजुट रखना चाहते हैं। आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज उन्होंने कहा, “राहुल गांधी चाहते हैं कि लंबे समय से पार्टी के साथ बने रहने वाले और वफादार कार्यकर्ता और मजबूत बनें। सभी ने प्रेम, शांति और एकता के साथ त्योहार का आनंद लिया।” दिल्ली प्रदूषण पर भी बोले राजेंद्र पाल गौतम समारोह के दौरान दिल्ली-NCR में बढ़ते वायु प्रदूषण के मुद्दे पर राजेंद्र पाल गौतम ने चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि आरोप-प्रत्यारोप से प्रदूषण का समाधान नहीं निकलेगा। आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार और पड़ोसी राज्यों को विशेषज्ञों के साथ बैठकर इसके वास्तविक कारणों की पहचान करनी चाहिए और एक ठोस कार्ययोजना तैयार करनी चाहिए।

मप्र सीएम मोहन यादव के जुबान फिसलने वाले बयान पर छत्तीसगढ़ में सियासत तेज, भूपेश बघेल और अजय चंद्राकर आमने-सामने

भोपाल /रायपुर 06/11/2026:छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश की राजनीति में इन दिनों भाजपा के ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ अभियान को लेकर बयानबाजी तेज हो गई है। इस बीच मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव का एक वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा में आ गया है। भोपाल में 4 नवंबर को आयोजित कार्यक्रम के दौरान मोहन यादव की जुबान ऐसी फिसली कि उन्होंने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के सामने ही ‘जेपी नड्डा मुर्दाबाद’ का नारा लगा दिया। हालांकि, गलती का एहसास होते ही उन्होंने तुरंत नारा सुधारते हुए ‘जेपी नड्डा जिंदाबाद’ कहा। इस वीडियो को छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस महासचिव भूपेश बघेल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा किया। उन्होंने इस घटना को लेकर भाजपा पर निशाना साधते हुए लिखा कि राहुल गांधी के सामने सबकी लाइन और लेंथ बिगड़ गई है। बघेल ने एक अन्य वीडियो भी साझा किया, जिसमें छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय कांग्रेस को लेकर बयान देते सुनाई दे रहे हैं। इस वीडियो के जरिए भी उन्होंने भाजपा नेताओं पर तंज कसा। अजय चंद्राकर ने भूपेश बघेल के बयान पर किया पलटवार भूपेश बघेल के बयान के बाद भाजपा विधायक और पूर्व मंत्री अजय चंद्राकर ने पलटवार किया। उन्होंने कांग्रेस की स्थिति पर टिप्पणी करते हुए कहा कि जिस पार्टी की गाड़ी की चेसिस ही बैंड हो, वह दूसरों की लाइन और लेंथ बिगड़ने की बात कर रही है। अजय चंद्राकर ने आगे कहा कि कांग्रेस की हालत ऐसी है कि अब मरम्मत कराने से भी उसकी चेसिस ठीक नहीं हो सकती। उनके मुताबिक, जनता द्वारा नकारे जाने के बाद कांग्रेस के पास कोई मुद्दा नहीं बचा है। इसलिए पार्टी के नेता भाजपा नेताओं के वीडियो पर ध्यान देते रहते हैं। सोशल मीडिया पर वीडियो को लेकर सियासी चर्चा मोहन यादव के नारे वाले वीडियो और भूपेश बघेल की टिप्पणी के बाद भाजपा और कांग्रेस नेताओं के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। एक तरफ कांग्रेस इस वीडियो के जरिए भाजपा पर निशाना साध रही है, तो दूसरी तरफ भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने कांग्रेस पर पलटवार किया है। फिलहाल दोनों दलों के नेताओं के बयान और सोशल मीडिया पोस्ट राजनीतिक चर्चा का विषय बने हुए हैं।

राहुल गांधी के ‘विदेशी मदद’ वाले बयान पर भड़की बीजेपी: ‘थर्ड क्लास झूठ बोलने वाले धोखेबाज’ करार, सी.आर. केशवन ने खड़े किए गंभीर सवाल

नई दिल्ली 04/11/2026 BJP vs Congress : भारतीय राजनीति में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के बीच जुबानी जंग एक बार फिर बेहद तल्ख मोड़ पर पहुँच गई है। (आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज) , कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष (LoP) राहुल गांधी द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर ‘विदेशी ताकतों की मदद से सत्ता में बने रहने’ का आरोप लगाने के बाद बीजेपी ने आक्रामक रुख अपनाते हुए करारा पलटवार किया है। बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता सी.आर. केशवन ने राहुल गांधी पर तीखा हमला बोलते हुए उन्हें “बेहद घटिया किस्म का धोखेबाज” करार दिया और आरोप लगाया कि उनका पाखंड और झूठा प्रचार हमेशा उन पर ही उल्टा पड़ता है। ‘थर्ड क्लास झूठ हमेशा उल्टे पड़ते हैं’: बीजेपी का हमला बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता सी.आर. केशवन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर राहुल गांधी पर हमला बोलते हुए लिखा कि राहुल गांधी के दावे खोखले हैं। केशवन ने लिखा: “राहुल गांधी इतने घटिया किस्म के धोखेबाज हैं कि उनके थर्ड क्लास झूठ हमेशा उन पर ही उल्टे पड़ते हैं और अंत में उन्हें शर्मिंदा होना पड़ता है।” केशवन ने राहुल गांधी का एक पुराना वीडियो शेयर करते हुए मार्च 2023 की उनकी लंदन (UK) यात्रा की याद दिलाई। (आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज) बीजेपी प्रवक्ता ने कहा कि 2023 के लोकसभा चुनाव से पहले लंदन में भाषण देते हुए राहुल गांधी ने खुद भारत के आंतरिक मामलों में विदेशी शक्तियों से हस्तक्षेप की अपील की थी और कहा था कि “यह सिर्फ भारत की लड़ाई नहीं है।” बीजेपी का तर्क है कि जो नेता खुद विदेशी मंचों पर जाकर देश के मामलों में दखल की मांग करता है, उसका दूसरों पर आरोप लगाना हास्यास्पद है। सोनिया गांधी, जॉर्ज सोरोस और हिंडनबर्ग पर बीजेपी के तीखे सवाल बीजेपी प्रवक्ता सी.आर. केशवन ने कांग्रेस पार्टी और राहुल गांधी से कई तीखे सवाल पूछे और उनकी चुप्पी पर निशाना साधा: सोनिया गांधी और इंटरनेशनल फोरम: बीजेपी ने सवाल उठाया कि कांग्रेस ने इस आरोप का जवाब क्यों नहीं दिया कि सोनिया गांधी ‘एशिया-पैसिफिक में डेमोक्रेटिक लीडर्स के फोरम’ की सह-अध्यक्ष रही थीं। इस फोरम ने अतीत में कश्मीर को एक स्वतंत्र राष्ट्र बनाने के विचार का समर्थन किया था और इसके तार अरबपति जॉर्ज सोरोस से जुड़े बताए जाते हैं। हिंडनबर्ग व विदेशी संस्थाओं से संबंध: केशवन ने पूछा कि राहुल गांधी और कांग्रेस हिंडनबर्ग रिसर्च तथा कॉर्नेलिया वोल जैसे व्यक्तियों व संगठनों के साथ अपने संबंधों पर रहस्यमयी चुप्पी क्यों साधे हुए हैं, जिन्हें जॉर्ज सोरोस जैसे तत्वों से फंडिंग मिलती है? गुप्त विदेश यात्राओं पर सवाल: बीजेपी नेता ने राहुल गांधी की बार-बार होने वाली विदेश यात्राओं पर राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा उठाते हुए कहा, “राहुल गांधी अक्सर अचानक विदेश क्यों चले जाते हैं? वे वहां गुप्त रूप से किससे मिलते हैं और इन मुलाकातों का एजेंडा क्या होता है? चूंकि वे देश के नेता प्रतिपक्ष (LoP) हैं, इसलिए देश को सच जानने का हक है। उनकी गुप्त यात्राएं राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा हैं।” विवाद की शुरुआत: राहुल गांधी का ‘खुली बहस’ का दावा इस पूरे विवाद की शुरुआत तब हुई जब राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘राष्ट्रीय एकता दिवस’ के भाषण पर प्रतिक्रिया देते हुए उन पर निशाना साधा। पीएम मोदी द्वारा देश को ‘विदेशी साजिशों’ से आगाह किए जाने के बयान को उन्हीं के खिलाफ मोड़ते हुए राहुल गांधी ने बिना कोई ठोस सबूत दिए आरोप लगाया कि मोदी सरकार और देश का वित्तीय ढांचा बाहरी ताकतों के सहारे टिका हुआ है। राहुल गांधी ने पीएम मोदी को चुनौती देते हुए कहा था: “मैं आपको इस मुद्दे पर खुली बहस की चुनौती देता हूं। कोई भी मंच हो, कोई भी समय हो। अगर हिम्मत है तो सामने आइए। लेकिन आप ऐसा करने की हिम्मत नहीं करेंगे, क्योंकि आप डरे हुए हैं कि मुझे आपके बारे में क्या-क्या पता है।” पीएम मोदी का इशारा: देश विरोधी ताकतों और गुप्त मुलाकातों की चेतावनी इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में देशवासियों को विदेशी शक्तियों और उनके साथ मिलकर देश को कमजोर करने वाले तत्वों से सतर्क रहने का आह्वान किया था। पीएम मोदी ने कहा था कि एक दशक की हताशा के बाद कुछ बाधा डालने वाली ताकतें अब खुलकर सामने आ गई हैं। ( आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज)पीएम ने सवाल उठाया था कि विदेश में कौन किससे गुप्त रूप से मिल रहा है, भारत-विरोधी ताकतें किसका समर्थन कर रही हैं और कौन भारत के दुश्मनों की भाषा बोल रहा है? पीएम ने देशवासियों से ऐसी ताकतों के तौर-तरीकों को पहचानकर एकजुट होकर उनका मुकाबला करने की अपील की थी।

रामलीला मैदान की महारैली: INDIA गठबंधन की एकजुटता और सत्ता पक्ष के लिए बड़ी चुनौती

  दिल्ली के रामलीला मैदान में ‘INDIA’ गठबंधन द्वारा आयोजित मेगा रैली और ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ के नारे के साथ निकाला गया पैदल मार्च भारतीय राजनीति में एक बड़ा मोड़ साबित हो सकता है। (आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज) राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे, अखिलेश यादव और ममता बनर्जी जैसे दिग्गज नेताओं की मौजूदगी ने यह साफ कर दिया है कि विपक्ष चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर आक्रामक रुख अपनाने जा रहा है। इस विस्तृत आलेख में हम इस रैली के विभिन्न पहलुओं, इसके राजनीतिक संदेशों और आगामी चुनावों पर पड़ने वाले प्रभावों का गहराई से विश्लेषण करेंगे। 1. रामलीला मैदान रैली के मुख्य बिंदु और केंद्रीय मुद्दे रविवार को मिंटो रोड से रामलीला मैदान तक निकाले गए इस ऐतिहासिक पैदल मार्च और रैली का मुख्य केंद्र बिंदु मतदाता सूची (SIR) में कथित अनियमितताएं और मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग रहा। लोकतंत्र और मतदान अधिकार की रक्षा: विपक्षी नेताओं ने इसे केवल तकनीकी मुद्दा न मानकर सीधे तौर पर संविधान और जनता के मताधिकार पर हमला बताया। सामूहिक आक्रामकता: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने स्पष्ट किया कि जब तक मुख्य चुनाव आयुक्त इस्तीफा नहीं देते, तब तक यह विरोध प्रदर्शन विभिन्न रूपों में जारी रहेगा। क्षेत्रीय मुद्दों की गूंज: समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश में मतदाताओं के नाम गायब होने के गंभीर आरोप लगाए और राज्य सरकार को घेरा। 2. क्या INDIA गठबंधन में लौटी है एकजुटता? 2024 के आम चुनावों के बाद से विभिन्न राज्यों में विपक्षी दलों के बीच आपसी मतभेद, नेतृत्व के सवाल और सीटों के बंटवारे को लेकर अनबन की खबरें सामने आ रही थीं।( आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज) ऐसे में रामलीला मैदान की इस रैली की सबसे बड़ी राजनीतिक उपलब्धि यह रही कि तमाम वैचारिक और क्षेत्रीय भिन्नताओं को दरकिनार कर सभी दल एक साझा मंच पर आए। कांग्रेस, वाम दलों, समाजवादी पार्टी और तृणमूल कांग्रेस के शीर्ष नेताओं की एक मंच पर उपस्थिति यह दर्शाती है कि विपक्ष छिटपुट आवाज उठाने के बजाय सत्ता पक्ष पर सामूहिक और बड़ा दबाव बनाने की रणनीति पर काम कर रहा है। 3. आगामी 2027 के विधानसभा चुनावों पर प्रभाव वर्ष 2027 में उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर—इन पांच महत्वपूर्ण राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं। इन राज्यों में इस रैली के अलग-अलग मायने हैं: उत्तर प्रदेश का विशेष संदर्भ: 403 सीटों वाले इस सबसे बड़े सूबे में सपा और कांग्रेस का गठबंधन पहले ही 2024 के लोकसभा चुनावों (80 में से 43 सीटें जीतना) में अपनी ताकत दिखा चुका है। यह रैली यूपी के कार्यकर्ताओं में नया जोश भरने का काम करेगी। अन्य राज्य (पंजाब, उत्तराखंड, गोवा, मणिपुर): हालांकि इन राज्यों में विपक्षी दलों की राजनीतिक जमीन और चुनौतियां अलग-अलग हैं (जैसे पंजाब में ‘आप’ और कांग्रेस आमने-सामने हैं), लेकिन दिल्ली की इस राष्ट्रीय रैली ने सभी को एक साझा राष्ट्रीय और संस्थागत मुद्दा प्रदान किया है। 4. मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग: राजनीतिक नफा-नुकसान सड़क से लेकर संसद तक दबाव: CEC के इस्तीफे की मांग ने विपक्ष के विरोध प्रदर्शन को एक स्पष्ट, तीखा और आक्रामक राजनीतिक लक्ष्य दिया है। (आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज) अब यह मुद्दा सिर्फ बयानों तक सीमित न रहकर सीधे सड़क पर आ गया है। संवैधानिक वास्तविकता: राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि केवल राजनीतिक रैलियों में मांग उठाने से संवैधानिक पदों पर बैठे अधिकारियों को नहीं हटाया जा सकता, क्योंकि इसके लिए एक निश्चित कानूनी प्रक्रिया होती है। फिर भी, जनता के बीच अविश्वास का माहौल बनाने में यह रणनीति सफल हो सकती है। 5. क्या विपक्ष को चुनावी फायदा मिलना तय है? इसका सीधा और एकमुश्त जवाब देना अभी कठिन है। नेताओं की उपस्थिति और कार्यकर्ताओं की भीड़ से विपक्ष को एक मनोवैज्ञानिक बढ़त अवश्य मिली है, लेकिन असली परीक्षा अभी बाकी है: मुद्दों का दायरा: यदि विपक्ष इस आंदोलन को केवल SIR और चुनाव आयोग तक ही सीमित रखेगा, तो इसका दायरा छोटा हो सकता है। जनता से जुड़े सवाल: जनता को जोड़े रखने के लिए विपक्ष को इस मुहिम के साथ-साथ बेरोजगारी, महंगाई, किसानों की समस्याएं, शिक्षा और स्थानीय शासन जैसे बुनियादी मुद्दों को भी आक्रामक तरीके से उठाना होगा।

ममता बनर्जी का बदला राजनीतिक अंदाज: दिल्ली की रैली में सोनिया गांधी को बताया अपनी नेता, विपक्षी समीकरणों पर टकटकी

नई दिल्ली 2/10/2026 INDIA Alliance : दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित ‘INDIA’ गठबंधन की 1 नवम्बर की रैली में तृणमूल कांग्रेस (TMC) सुप्रीमो और पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का एक नया और बदला हुआ राजनीतिक तेवर देखने को मिला। ‘वोट चोरी’ के खिलाफ आयोजित इस महारैली में ममता बनर्जी के बयानों और कांग्रेस नेतृत्व के प्रति उनके नरम रुख ने राष्ट्रीय राजनीति में नए कयासों को जन्म दे दिया है। 1. सोनिया गांधी को ‘नेता’ कहना और राहुल गांधी की तारीफ ममता बनर्जी ने अपने भाषण की शुरुआत कांग्रेस संसदीय दल की chairperson सोनिया गांधी को “मेरी नेता” कहकर अभिवादन करने के साथ की। इसके अलावा, उन्होंने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी को जमीन पर संघर्ष करने वाला एक “युवा नेता” बताकर उनकी जमकर सराहना की। राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा है कि ममता बनर्जी का यह अंदाज कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व के साथ उनके मजबूत होते संबंधों को दर्शाता है। 2. वामदलों और अन्य सहयोगियों को साधना अपने संबोधन के दौरान ममता बनर्जी ने न सिर्फ कांग्रेस नेताओं बल्कि समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव, राजद नेता तेजस्वी यादव और अपने पुराने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के महासचिव एमए बेबी का भी विशेष रूप से नाम लिया। मंच पर उनकी यह एकजुटता विपक्षी दलों के बीच आपसी मतभेदों को दरकिनार कर राष्ट्रीय स्तर पर एक साझा मंच तैयार करने की रणनीति का संकेत देती है। 3. पश्चिम बंगाल चुनाव के बाद बदली सियासी हवा पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद से ममता बनर्जी और कांग्रेस के रिश्तों में एक नई गर्माहट देखने को मिली है। चुनाव परिणामों पर जब ममता ने सवाल उठाए थे, तब राहुल गांधी ने खुलकर उनका समर्थन किया था। इसके बाद ममता की दिल्ली यात्रा और सोनिया-राहुल से उनकी मुलाकात ने दोनों दलों के बीच की दूरियों को काफी हद तक कम किया है। 4. एक ही कार में सफर और मंच की नजदीकी रामलीला मैदान की इस रैली में ममता बनर्जी का एक्शन केवल भाषण तक सीमित नहीं था। वह राहुल गांधी के साथ एक ही कार में बैठकर रैली स्थल तक पहुंचीं और मंच पर भी सोनिया गांधी के ठीक बगल में बैठी नजर आईं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह केवल शिष्टाचार नहीं, बल्कि भाजपा के खिलाफ राष्ट्रीय स्तर पर एक कड़ा संदेश देने की सोची-समझी रणनीति है।

टेक्नोलॉजी

क्या AI खत्म कर देगा पारंपरिक बैंकिंग? शेखर कपूर के सवाल पर छिड़ी नई बहस

नई दिल्ली 16 अक्टूबर 2026 Artificial Intelligence : आने वाले समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) बैंकिंग सेक्टर के कामकाज और कारोबार को पूरी तरह से बदल सकता है। मशहूर फिल्म निर्माता शेखर कपूर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म लिंक्डइन पर एक विचारोत्तेजक पोस्ट शेयर करते हुए सवाल उठाया है—“अगर एआई खुद लोगों के पैसे संभालने, निवेश के बेहतर विकल्प खोजने और अधिक ब्याज दिलाने का काम करने लगे, तो फिर पारंपरिक बैंकों की जरूरत ही क्यों पड़ेगी?” शेखर कपूर की इस पोस्ट ने इंटरनेट पर एक नई बहस को जन्म दे दिया है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि एआई बैंकिंग उद्योग को बड़ा नुकसान पहुंचा सकता है, वहीं अन्य का कहना है कि बैंक बंद नहीं होंगे, बल्कि उनका काम करने का तरीका पूरी तरह बदल जाएगा। Advt बैंकों की कमाई पर कैसे पड़ेगा असर? शेखर कपूर के अनुसार, बैंक जमाकर्ताओं के पैसे को कर्ज या निवेश में लगाकर बड़ी कमाई करते हैं और उसके बदले ग्राहकों को बहुत कम ब्याज देते हैं। बैंकों का मुनाफा उन ग्राहकों से भी होता है, जो आलस या झंझट के कारण बेहतर ब्याज दरों की तलाश में अपना पैसा दूसरी जगह ट्रांसफर नहीं करते। लेकिन अगर AI एजेंट हर रात ग्राहक के फंड के लिए खुद ही सबसे ज्यादा ब्याज देने वाले विकल्प खोजने लगें, तो ग्राहकों को खुद मेहनत नहीं करनी पड़ेगी। ऐसे में बैंक ग्राहकों को कम ब्याज दर देकर पहले की तरह आसानी से मुनाफा नहीं कमा सकेंगे। क्या AI पूरी तरह से बैंकों की जगह ले सकता है? बहस में शामिल कई विशेषज्ञों का मानना है कि सिर्फ एआई बैंकिंग का विकल्प नहीं बन सकता। सुरक्षा और जिम्मेदारी: लिंक्डइन यूजर अनय महिमकर ने लिखा कि एआई वित्तीय फैसले लेने में मदद तो कर सकता है, लेकिन कर्ज देना, जोखिम उठाना, सरकारी नियमों (Compliance) का पालन करना और भरोसा कायम रखना बैंकों की प्राथमिक जिम्मेदारी रहेगी। सटीक लोन प्रक्रिया: विशेषज्ञ कृष्णा लक्मसानी का कहना है कि एआई ग्राहकों की आमदनी और खर्चों का विश्लेषण करके उधार देने वालों और लेने वालों के बीच सीधा संपर्क बना सकता है। इससे बिचौलियों का असर कम होगा और एआई एजेंट ग्राहकों की ओर से बेहतर ब्याज दरों के लिए बातचीत (Negotiation) भी कर सकेंगे। बैंकों का भविष्य: क्या होंगी नई चुनौतियां? विशेषज्ञों का मानना है कि पैसों की सुरक्षा, डिजिटल पेमेंट और सरकारी योजनाओं के लाभ के लिए बैंकों की प्रासंगिकता बनी रहेगी। हालाँकि, बैंकों के सामने सबसे बड़ी चुनौती ग्राहकों को अपने साथ बनाए रखने की होगी। जो बैंक नई तकनीक, बेहतर ब्याज दरें और एआई-आधारित सेवाएं अपनाएंगे, वे ही भविष्य की बैंकिंग रेस में आगे टिक पाएंगे। 📍

व्यापार

बाबरी विध्वंस पर सोनिया गांधी का बयान: गरमाई देश की राजनीति, बीजेपी का पलटवार—”कांग्रेस के दिल में आज भी बाबर”

नई दिल्ली 07/11/2026 Indian Politics : 6 दिसंबर 1992 को अयोध्या में हुए बाबरी मस्जिद विध्वंस की यादें एक बार फिर भारतीय राजनीति के केंद्र में आ गई हैं। इस राजनीतिक घमासान की वजह कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी का एक हालिया इंटरव्यू है। (आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज) ब्रिटिश समाचार पत्र ‘द गार्जियन’ को दिए इस साक्षात्कार में सोनिया गांधी ने उस दौर की अपनी व्यक्तिगत प्रतिक्रिया और पार्टी की राजनीतिक कमियों पर खुलकर बात की है, जिस पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने तीखा हमला बोला है। टीवी पर दृश्य देखकर रो पड़ी थीं सोनिया गांधी  ‘द गार्जियन’ से बातचीत के दौरान सोनिया गांधी ने 6 दिसंबर 1992 का जिक्र करते हुए कहा कि बाबरी मस्जिद गिराए जाने की घटना को उन्होंने टेलीविजन पर देखा था। उन्होंने बताया कि उस दृश्य को देखकर वे रो पड़ी थीं और उसी पल उन्हें यह अहसास हो गया था कि महात्मा गांधी और पंडित जवाहरलाल नेहरू द्वारा देखे गए ‘धर्मनिरपेक्ष भारत’ के विचार को बचाए रखने के लिए एक लंबी और कठिन लड़ाई लड़नी होगी। कांग्रेस ने स्वीकार कीं अपनी राजनीतिक गलतियाँ सोनिया गांधी ने इंटरव्यू में न केवल बाबरी विध्वंस पर अपनी संवेदनशीलता जताई, बल्कि कांग्रेस की ऐतिहासिक राजनीतिक चूक को भी खुलकर स्वीकार किया। उन्होंने माना कि पार्टी की कुछ नाकामियों और जरूरत से ज्यादा बेफिक्र (निश्चिंत) रहने के रवैये ने देश में बीजेपी और उसकी हिंदुत्व की राजनीति के उभार को जगह दी। बीजेपी का चौतरफा हमला: “सोनिया बाबरी और बाटला हाउस के लिए रोती हैं” उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव से ठीक पहले आए सोनिया गांधी के इस बयान ने बीजेपी को कांग्रेस पर हमलावर होने का नया मौका दे दिया है। प्रदीप भंडारी का आरोप: बीजेपी प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर निशाना साधते हुए लिखा, “सोनिया गांधी बाबरी के लिए आंसू बहाती हैं, सोनिया गांधी बाटला हाउस के लिए आंसू बहाती हैं। सोनिया गांधी साबित करती हैं कि कांग्रेस ‘बाबर-समर्थक’ और ‘भगवान राम-विरोधी’ है। उनकी यह वोट बैंक की राजनीति हमेशा हारती रहेगी।” सुधांशु त्रिवेदी का तीखा सवाल: बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता और सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस के रुख पर सवाल उठाते हुए कहा: “1990 में कश्मीर में जो अत्याचार हुआ, उसके लिए आपकी आँखों में कभी आंसू क्यों नहीं आए? 2005 में जब श्री राम जन्मभूमि पर आतंकी हमला हुआ, तब क्या बीती? आज जब पूरा देश अयोध्या में दीपोत्सव का नया कीर्तिमान बना रहा है, तब कांग्रेस के अंदर का यह अंधकार साफ दिखाई दे रहा है।” सुधांशु त्रिवेदी ने गांधी परिवार पर निशाना साधते हुए आगे कहा कि जवाहरलाल नेहरू (1959), इंदिरा गांधी (1968) और राहुल गांधी (2005) ने काबुल में बाबर की कब्र पर जाकर सिजदा किया। इसके साथ ही उन्होंने एक तकनीकी सवाल भी उठाया कि 1992 में दूरदर्शन पर दिनभर का सीधा प्रसारण नहीं होता था, ऐसे में सोनिया गांधी ने उस वक्त टीवी पर यह दृश्य कब और कैसे देखा? 1992 के विध्वंस से 2024 के राम मंदिर तक 6 दिसंबर 1992 को अयोध्या में कारसेवकों द्वारा विवादित ढांचे को गिराए जाने के बाद देशभर में भीषण सांप्रदायिक दंगे भड़क उठे थे। (आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज) इस घटना के तीन दशक से भी अधिक समय बाद, जनवरी 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उसी स्थान पर भव्य राम मंदिर का उद्घाटन किया, जिसके साथ ही बीजेपी का दशकों पुराना वैचारिक संकल्प पूरा हुआ। सोनिया गांधी के ताजा बयानों ने एक बार फिर अयोध्या विवाद और भारत की धर्मनिरपेक्षता की बहस को देश के राजनीतिक पटल पर ला खड़ा किया है। 📍

राहुल गांधी के घर दिवाली मिलन: 5 राज्यों के पूर्व मुख्यमंत्री एक साथ आए नजर, डीके शिवकुमार बोले- ‘कांग्रेस को मजबूत करने का संदेश’

नई दिल्ली 07/11/2026 : लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के दिल्ली स्थित आवास पर शुक्रवार (6 नवंबर) को एक विशेष ‘दिवाली मिलन’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज इस मौके पर कांग्रेस के कई दिग्गज नेता, पार्टी पदाधिकारी और 5 राज्यों के पूर्व मुख्यमंत्री एक साथ नजर आए। राहुल गांधी ने सभी नेताओं से मुलाकात कर दिवाली की शुभकामनाएं दीं। चाय पर हुई इस मुलाकात के जरिए पार्टी में एकजुटता का बड़ा संदेश देने की कोशिश की गई। कार्यक्रम में शामिल हुए ये 5 पूर्व मुख्यमंत्री इस दिवाली मिलन समारोह में राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, छत्तीसगढ़ के पूर्व सीएम भूपेश बघेल, हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा, उत्तराखंड के पूर्व सीएम हरीश रावत और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह विशेष रूप से मौजूद रहे। इनके अलावा कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा, जयराम रमेश, सचिन पायलट, कुमारी शैलजा और हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू सहित संगठन के कई वरिष्ठ पदाधिकारियों और राज्य प्रभारियों ने भी हिस्सा लिया। ‘राजनीतिक चर्चा नहीं, सिर्फ चाय और त्योहार की खुशियां’ उत्तर प्रदेश के AICC प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि यह पूरी तरह से एक अनौपचारिक और त्योहार से जुड़ा कार्यक्रम था। उन्होंने स्पष्ट किया, “आज कोई पॉलिटिकल चर्चा नहीं हुई; हमने बस साथ में चाय पी और त्योहार की खुशियां साझा कीं।” राहुल गांधी का संदेश: पार्टी के लिए वफादार कार्यकर्ता बनें मजबूत कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि राहुल गांधी संगठन के प्रति समर्पित नेताओं और कार्यकर्ताओं को एकजुट रखना चाहते हैं। आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज उन्होंने कहा, “राहुल गांधी चाहते हैं कि लंबे समय से पार्टी के साथ बने रहने वाले और वफादार कार्यकर्ता और मजबूत बनें। सभी ने प्रेम, शांति और एकता के साथ त्योहार का आनंद लिया।” दिल्ली प्रदूषण पर भी बोले राजेंद्र पाल गौतम समारोह के दौरान दिल्ली-NCR में बढ़ते वायु प्रदूषण के मुद्दे पर राजेंद्र पाल गौतम ने चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि आरोप-प्रत्यारोप से प्रदूषण का समाधान नहीं निकलेगा। आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार और पड़ोसी राज्यों को विशेषज्ञों के साथ बैठकर इसके वास्तविक कारणों की पहचान करनी चाहिए और एक ठोस कार्ययोजना तैयार करनी चाहिए।

मप्र सीएम मोहन यादव के जुबान फिसलने वाले बयान पर छत्तीसगढ़ में सियासत तेज, भूपेश बघेल और अजय चंद्राकर आमने-सामने

भोपाल /रायपुर 06/11/2026:छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश की राजनीति में इन दिनों भाजपा के ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ अभियान को लेकर बयानबाजी तेज हो गई है। इस बीच मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव का एक वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा में आ गया है। भोपाल में 4 नवंबर को आयोजित कार्यक्रम के दौरान मोहन यादव की जुबान ऐसी फिसली कि उन्होंने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के सामने ही ‘जेपी नड्डा मुर्दाबाद’ का नारा लगा दिया। हालांकि, गलती का एहसास होते ही उन्होंने तुरंत नारा सुधारते हुए ‘जेपी नड्डा जिंदाबाद’ कहा। इस वीडियो को छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस महासचिव भूपेश बघेल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा किया। उन्होंने इस घटना को लेकर भाजपा पर निशाना साधते हुए लिखा कि राहुल गांधी के सामने सबकी लाइन और लेंथ बिगड़ गई है। बघेल ने एक अन्य वीडियो भी साझा किया, जिसमें छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय कांग्रेस को लेकर बयान देते सुनाई दे रहे हैं। इस वीडियो के जरिए भी उन्होंने भाजपा नेताओं पर तंज कसा। अजय चंद्राकर ने भूपेश बघेल के बयान पर किया पलटवार भूपेश बघेल के बयान के बाद भाजपा विधायक और पूर्व मंत्री अजय चंद्राकर ने पलटवार किया। उन्होंने कांग्रेस की स्थिति पर टिप्पणी करते हुए कहा कि जिस पार्टी की गाड़ी की चेसिस ही बैंड हो, वह दूसरों की लाइन और लेंथ बिगड़ने की बात कर रही है। अजय चंद्राकर ने आगे कहा कि कांग्रेस की हालत ऐसी है कि अब मरम्मत कराने से भी उसकी चेसिस ठीक नहीं हो सकती। उनके मुताबिक, जनता द्वारा नकारे जाने के बाद कांग्रेस के पास कोई मुद्दा नहीं बचा है। इसलिए पार्टी के नेता भाजपा नेताओं के वीडियो पर ध्यान देते रहते हैं। सोशल मीडिया पर वीडियो को लेकर सियासी चर्चा मोहन यादव के नारे वाले वीडियो और भूपेश बघेल की टिप्पणी के बाद भाजपा और कांग्रेस नेताओं के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। एक तरफ कांग्रेस इस वीडियो के जरिए भाजपा पर निशाना साध रही है, तो दूसरी तरफ भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने कांग्रेस पर पलटवार किया है। फिलहाल दोनों दलों के नेताओं के बयान और सोशल मीडिया पोस्ट राजनीतिक चर्चा का विषय बने हुए हैं।

राहुल गांधी के ‘विदेशी मदद’ वाले बयान पर भड़की बीजेपी: ‘थर्ड क्लास झूठ बोलने वाले धोखेबाज’ करार, सी.आर. केशवन ने खड़े किए गंभीर सवाल

नई दिल्ली 04/11/2026 BJP vs Congress : भारतीय राजनीति में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के बीच जुबानी जंग एक बार फिर बेहद तल्ख मोड़ पर पहुँच गई है। (आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज) , कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष (LoP) राहुल गांधी द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर ‘विदेशी ताकतों की मदद से सत्ता में बने रहने’ का आरोप लगाने के बाद बीजेपी ने आक्रामक रुख अपनाते हुए करारा पलटवार किया है। बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता सी.आर. केशवन ने राहुल गांधी पर तीखा हमला बोलते हुए उन्हें “बेहद घटिया किस्म का धोखेबाज” करार दिया और आरोप लगाया कि उनका पाखंड और झूठा प्रचार हमेशा उन पर ही उल्टा पड़ता है। ‘थर्ड क्लास झूठ हमेशा उल्टे पड़ते हैं’: बीजेपी का हमला बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता सी.आर. केशवन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर राहुल गांधी पर हमला बोलते हुए लिखा कि राहुल गांधी के दावे खोखले हैं। केशवन ने लिखा: “राहुल गांधी इतने घटिया किस्म के धोखेबाज हैं कि उनके थर्ड क्लास झूठ हमेशा उन पर ही उल्टे पड़ते हैं और अंत में उन्हें शर्मिंदा होना पड़ता है।” केशवन ने राहुल गांधी का एक पुराना वीडियो शेयर करते हुए मार्च 2023 की उनकी लंदन (UK) यात्रा की याद दिलाई। (आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज) बीजेपी प्रवक्ता ने कहा कि 2023 के लोकसभा चुनाव से पहले लंदन में भाषण देते हुए राहुल गांधी ने खुद भारत के आंतरिक मामलों में विदेशी शक्तियों से हस्तक्षेप की अपील की थी और कहा था कि “यह सिर्फ भारत की लड़ाई नहीं है।” बीजेपी का तर्क है कि जो नेता खुद विदेशी मंचों पर जाकर देश के मामलों में दखल की मांग करता है, उसका दूसरों पर आरोप लगाना हास्यास्पद है। सोनिया गांधी, जॉर्ज सोरोस और हिंडनबर्ग पर बीजेपी के तीखे सवाल बीजेपी प्रवक्ता सी.आर. केशवन ने कांग्रेस पार्टी और राहुल गांधी से कई तीखे सवाल पूछे और उनकी चुप्पी पर निशाना साधा: सोनिया गांधी और इंटरनेशनल फोरम: बीजेपी ने सवाल उठाया कि कांग्रेस ने इस आरोप का जवाब क्यों नहीं दिया कि सोनिया गांधी ‘एशिया-पैसिफिक में डेमोक्रेटिक लीडर्स के फोरम’ की सह-अध्यक्ष रही थीं। इस फोरम ने अतीत में कश्मीर को एक स्वतंत्र राष्ट्र बनाने के विचार का समर्थन किया था और इसके तार अरबपति जॉर्ज सोरोस से जुड़े बताए जाते हैं। हिंडनबर्ग व विदेशी संस्थाओं से संबंध: केशवन ने पूछा कि राहुल गांधी और कांग्रेस हिंडनबर्ग रिसर्च तथा कॉर्नेलिया वोल जैसे व्यक्तियों व संगठनों के साथ अपने संबंधों पर रहस्यमयी चुप्पी क्यों साधे हुए हैं, जिन्हें जॉर्ज सोरोस जैसे तत्वों से फंडिंग मिलती है? गुप्त विदेश यात्राओं पर सवाल: बीजेपी नेता ने राहुल गांधी की बार-बार होने वाली विदेश यात्राओं पर राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा उठाते हुए कहा, “राहुल गांधी अक्सर अचानक विदेश क्यों चले जाते हैं? वे वहां गुप्त रूप से किससे मिलते हैं और इन मुलाकातों का एजेंडा क्या होता है? चूंकि वे देश के नेता प्रतिपक्ष (LoP) हैं, इसलिए देश को सच जानने का हक है। उनकी गुप्त यात्राएं राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा हैं।” विवाद की शुरुआत: राहुल गांधी का ‘खुली बहस’ का दावा इस पूरे विवाद की शुरुआत तब हुई जब राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘राष्ट्रीय एकता दिवस’ के भाषण पर प्रतिक्रिया देते हुए उन पर निशाना साधा। पीएम मोदी द्वारा देश को ‘विदेशी साजिशों’ से आगाह किए जाने के बयान को उन्हीं के खिलाफ मोड़ते हुए राहुल गांधी ने बिना कोई ठोस सबूत दिए आरोप लगाया कि मोदी सरकार और देश का वित्तीय ढांचा बाहरी ताकतों के सहारे टिका हुआ है। राहुल गांधी ने पीएम मोदी को चुनौती देते हुए कहा था: “मैं आपको इस मुद्दे पर खुली बहस की चुनौती देता हूं। कोई भी मंच हो, कोई भी समय हो। अगर हिम्मत है तो सामने आइए। लेकिन आप ऐसा करने की हिम्मत नहीं करेंगे, क्योंकि आप डरे हुए हैं कि मुझे आपके बारे में क्या-क्या पता है।” पीएम मोदी का इशारा: देश विरोधी ताकतों और गुप्त मुलाकातों की चेतावनी इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में देशवासियों को विदेशी शक्तियों और उनके साथ मिलकर देश को कमजोर करने वाले तत्वों से सतर्क रहने का आह्वान किया था। पीएम मोदी ने कहा था कि एक दशक की हताशा के बाद कुछ बाधा डालने वाली ताकतें अब खुलकर सामने आ गई हैं। ( आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज)पीएम ने सवाल उठाया था कि विदेश में कौन किससे गुप्त रूप से मिल रहा है, भारत-विरोधी ताकतें किसका समर्थन कर रही हैं और कौन भारत के दुश्मनों की भाषा बोल रहा है? पीएम ने देशवासियों से ऐसी ताकतों के तौर-तरीकों को पहचानकर एकजुट होकर उनका मुकाबला करने की अपील की थी।

रामलीला मैदान की महारैली: INDIA गठबंधन की एकजुटता और सत्ता पक्ष के लिए बड़ी चुनौती

  दिल्ली के रामलीला मैदान में ‘INDIA’ गठबंधन द्वारा आयोजित मेगा रैली और ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ के नारे के साथ निकाला गया पैदल मार्च भारतीय राजनीति में एक बड़ा मोड़ साबित हो सकता है। (आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज) राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे, अखिलेश यादव और ममता बनर्जी जैसे दिग्गज नेताओं की मौजूदगी ने यह साफ कर दिया है कि विपक्ष चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर आक्रामक रुख अपनाने जा रहा है। इस विस्तृत आलेख में हम इस रैली के विभिन्न पहलुओं, इसके राजनीतिक संदेशों और आगामी चुनावों पर पड़ने वाले प्रभावों का गहराई से विश्लेषण करेंगे। 1. रामलीला मैदान रैली के मुख्य बिंदु और केंद्रीय मुद्दे रविवार को मिंटो रोड से रामलीला मैदान तक निकाले गए इस ऐतिहासिक पैदल मार्च और रैली का मुख्य केंद्र बिंदु मतदाता सूची (SIR) में कथित अनियमितताएं और मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग रहा। लोकतंत्र और मतदान अधिकार की रक्षा: विपक्षी नेताओं ने इसे केवल तकनीकी मुद्दा न मानकर सीधे तौर पर संविधान और जनता के मताधिकार पर हमला बताया। सामूहिक आक्रामकता: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने स्पष्ट किया कि जब तक मुख्य चुनाव आयुक्त इस्तीफा नहीं देते, तब तक यह विरोध प्रदर्शन विभिन्न रूपों में जारी रहेगा। क्षेत्रीय मुद्दों की गूंज: समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश में मतदाताओं के नाम गायब होने के गंभीर आरोप लगाए और राज्य सरकार को घेरा। 2. क्या INDIA गठबंधन में लौटी है एकजुटता? 2024 के आम चुनावों के बाद से विभिन्न राज्यों में विपक्षी दलों के बीच आपसी मतभेद, नेतृत्व के सवाल और सीटों के बंटवारे को लेकर अनबन की खबरें सामने आ रही थीं।( आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज) ऐसे में रामलीला मैदान की इस रैली की सबसे बड़ी राजनीतिक उपलब्धि यह रही कि तमाम वैचारिक और क्षेत्रीय भिन्नताओं को दरकिनार कर सभी दल एक साझा मंच पर आए। कांग्रेस, वाम दलों, समाजवादी पार्टी और तृणमूल कांग्रेस के शीर्ष नेताओं की एक मंच पर उपस्थिति यह दर्शाती है कि विपक्ष छिटपुट आवाज उठाने के बजाय सत्ता पक्ष पर सामूहिक और बड़ा दबाव बनाने की रणनीति पर काम कर रहा है। 3. आगामी 2027 के विधानसभा चुनावों पर प्रभाव वर्ष 2027 में उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर—इन पांच महत्वपूर्ण राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं। इन राज्यों में इस रैली के अलग-अलग मायने हैं: उत्तर प्रदेश का विशेष संदर्भ: 403 सीटों वाले इस सबसे बड़े सूबे में सपा और कांग्रेस का गठबंधन पहले ही 2024 के लोकसभा चुनावों (80 में से 43 सीटें जीतना) में अपनी ताकत दिखा चुका है। यह रैली यूपी के कार्यकर्ताओं में नया जोश भरने का काम करेगी। अन्य राज्य (पंजाब, उत्तराखंड, गोवा, मणिपुर): हालांकि इन राज्यों में विपक्षी दलों की राजनीतिक जमीन और चुनौतियां अलग-अलग हैं (जैसे पंजाब में ‘आप’ और कांग्रेस आमने-सामने हैं), लेकिन दिल्ली की इस राष्ट्रीय रैली ने सभी को एक साझा राष्ट्रीय और संस्थागत मुद्दा प्रदान किया है। 4. मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग: राजनीतिक नफा-नुकसान सड़क से लेकर संसद तक दबाव: CEC के इस्तीफे की मांग ने विपक्ष के विरोध प्रदर्शन को एक स्पष्ट, तीखा और आक्रामक राजनीतिक लक्ष्य दिया है। (आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज) अब यह मुद्दा सिर्फ बयानों तक सीमित न रहकर सीधे सड़क पर आ गया है। संवैधानिक वास्तविकता: राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि केवल राजनीतिक रैलियों में मांग उठाने से संवैधानिक पदों पर बैठे अधिकारियों को नहीं हटाया जा सकता, क्योंकि इसके लिए एक निश्चित कानूनी प्रक्रिया होती है। फिर भी, जनता के बीच अविश्वास का माहौल बनाने में यह रणनीति सफल हो सकती है। 5. क्या विपक्ष को चुनावी फायदा मिलना तय है? इसका सीधा और एकमुश्त जवाब देना अभी कठिन है। नेताओं की उपस्थिति और कार्यकर्ताओं की भीड़ से विपक्ष को एक मनोवैज्ञानिक बढ़त अवश्य मिली है, लेकिन असली परीक्षा अभी बाकी है: मुद्दों का दायरा: यदि विपक्ष इस आंदोलन को केवल SIR और चुनाव आयोग तक ही सीमित रखेगा, तो इसका दायरा छोटा हो सकता है। जनता से जुड़े सवाल: जनता को जोड़े रखने के लिए विपक्ष को इस मुहिम के साथ-साथ बेरोजगारी, महंगाई, किसानों की समस्याएं, शिक्षा और स्थानीय शासन जैसे बुनियादी मुद्दों को भी आक्रामक तरीके से उठाना होगा।

ममता बनर्जी का बदला राजनीतिक अंदाज: दिल्ली की रैली में सोनिया गांधी को बताया अपनी नेता, विपक्षी समीकरणों पर टकटकी

नई दिल्ली 2/10/2026 INDIA Alliance : दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित ‘INDIA’ गठबंधन की 1 नवम्बर की रैली में तृणमूल कांग्रेस (TMC) सुप्रीमो और पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का एक नया और बदला हुआ राजनीतिक तेवर देखने को मिला। ‘वोट चोरी’ के खिलाफ आयोजित इस महारैली में ममता बनर्जी के बयानों और कांग्रेस नेतृत्व के प्रति उनके नरम रुख ने राष्ट्रीय राजनीति में नए कयासों को जन्म दे दिया है। 1. सोनिया गांधी को ‘नेता’ कहना और राहुल गांधी की तारीफ ममता बनर्जी ने अपने भाषण की शुरुआत कांग्रेस संसदीय दल की chairperson सोनिया गांधी को “मेरी नेता” कहकर अभिवादन करने के साथ की। इसके अलावा, उन्होंने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी को जमीन पर संघर्ष करने वाला एक “युवा नेता” बताकर उनकी जमकर सराहना की। राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा है कि ममता बनर्जी का यह अंदाज कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व के साथ उनके मजबूत होते संबंधों को दर्शाता है। 2. वामदलों और अन्य सहयोगियों को साधना अपने संबोधन के दौरान ममता बनर्जी ने न सिर्फ कांग्रेस नेताओं बल्कि समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव, राजद नेता तेजस्वी यादव और अपने पुराने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के महासचिव एमए बेबी का भी विशेष रूप से नाम लिया। मंच पर उनकी यह एकजुटता विपक्षी दलों के बीच आपसी मतभेदों को दरकिनार कर राष्ट्रीय स्तर पर एक साझा मंच तैयार करने की रणनीति का संकेत देती है। 3. पश्चिम बंगाल चुनाव के बाद बदली सियासी हवा पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद से ममता बनर्जी और कांग्रेस के रिश्तों में एक नई गर्माहट देखने को मिली है। चुनाव परिणामों पर जब ममता ने सवाल उठाए थे, तब राहुल गांधी ने खुलकर उनका समर्थन किया था। इसके बाद ममता की दिल्ली यात्रा और सोनिया-राहुल से उनकी मुलाकात ने दोनों दलों के बीच की दूरियों को काफी हद तक कम किया है। 4. एक ही कार में सफर और मंच की नजदीकी रामलीला मैदान की इस रैली में ममता बनर्जी का एक्शन केवल भाषण तक सीमित नहीं था। वह राहुल गांधी के साथ एक ही कार में बैठकर रैली स्थल तक पहुंचीं और मंच पर भी सोनिया गांधी के ठीक बगल में बैठी नजर आईं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह केवल शिष्टाचार नहीं, बल्कि भाजपा के खिलाफ राष्ट्रीय स्तर पर एक कड़ा संदेश देने की सोची-समझी रणनीति है।

धर्म

अयोध्या का 10वां दीपोत्सव 2026: सरयू के 56 घाटों पर 30 लाख दीयों की जगमग, सीएम योगी का विपक्ष पर तीखा हमला कहा “कोप भवन में बैठे हैं मंथरा और मारीच”

  Ayodhya Deepotsav : रामनगरी अयोध्या में इस बार का दीपोत्सव बेहद भव्य और ऐतिहासिक रहा। सरयू नदी के तट पर स्थित 56 घाटों को 30 लाख से अधिक मिट्टी के दीपों से रोशन किया गया, जिससे पूरी नगरी राममय हो उठी। इस अलौकिक आयोजन में उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सहभागिता की। दोनों ने सबसे पहले भगवान श्रीराम और माता जानकी की पूजा-अर्चना की और सरयू तट पर आरती उतारी। 10वें दीपोत्सव की मुख्य विशेषताएँ भव्य दीयों की संख्या: ‘राम की पैड़ी’ सहित सरयू नदी के कुल 56 घाटों पर 30 लाख से अधिक दीये प्रज्वलित किए गए। विशिष्ट उपस्थिति: उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दीपोत्सव कार्यक्रम में शिरकत कर दीप जलाए। पारंपरिक शुरुआत: मुख्यमंत्री योगी ने साल 2017 में शुरू हुए इस ऐतिहासिक दीपोत्सव के सफर को याद करते हुए इसके सांस्कृतिक महत्व को रेखांकित किया। सीएम योगी आदित्यनाथ का संबोधन: “कोप भवन में बैठे हैं मंथरा और मारीच” दीपोत्सव 2026 के अवसर पर जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विपक्ष और देश विरोधी ताकतों पर करारा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि आज देश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ‘विरासत’ और ‘विकास’ के पथ पर आगे बढ़ रहा है, लेकिन कुछ लोग इससे असहज हैं। “एक ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विरासत, विकास और लोक कल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से विकसित भारत का संकल्प आगे बढ़ रहा है, लेकिन दूसरी ओर कोप भवन में बैठे हुए मंथरा और मारीच इस पूरी व्यवस्था को प्रभावित करने के लिए अराजकता पैदा कर रहे हैं।” योगी ने आगे कहा कि नया भारत आतंकवाद और नक्सलवाद को नेस्तनाबूत कर रहा है, और तमाम साजिशों के बावजूद ‘सत्यमेव जयते’ और ‘धर्मेव जयते’ का संकल्प सिद्ध होकर रहेगा।

अयोध्या का 10वां दीपोत्सव 2026: सरयू के 56 घाटों पर 30 लाख दीयों की जगमग, सीएम योगी का विपक्ष पर तीखा हमला कहा “कोप भवन में बैठे हैं मंथरा और मारीच”

  Ayodhya Deepotsav : रामनगरी अयोध्या में इस बार का दीपोत्सव बेहद

धीरेंद्र शास्त्री की राम-कृष्ण टिप्पणी पर गर्माई राजनीति: दिग्विजय बोले ‘मूर्ख’, बघेल का कटाक्ष- ‘रेबीज की जांच हो’

भोपाल/रायपुर 03/11/2026 Bageshwar Dham Controversy  : बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र

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