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कृषि भवन की 100 साल पुरानी कदीमी मस्जिद को हटाना क्यों है जरूरी? केंद्र सरकार ने दिल्ली हाईकोर्ट में दिया जवाब दो बच्चों की शर्त पर सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: कहा—’जनसंख्या नियंत्रण के नाम पर राजनीतिक अधिकारों से वंचित करना गलत’ कांकेर में पीडीएस व्यवस्था होगी सुदृढ़: 111 जर्जर और 26 भवनविहीन राशन दुकानों के कायाकल्प का प्रस्ताव तैयार छत्तीसगढ़ राज्योत्सव: कोरबा में स्वामित्व योजना के 200 हितग्राहियों को मिले अधिकार अभिलेख IMD Weather Alert: 13 राज्यों में भारी बारिश और 90 किमी/घंटा की रफ्तार से आंधी का अलर्ट, जानें आज के मौसम का हाल राहुल गांधी के ‘विदेशी मदद’ वाले बयान पर भड़की बीजेपी: ‘थर्ड क्लास झूठ बोलने वाले धोखेबाज’ करार, सी.आर. केशवन ने खड़े किए गंभीर सवाल

कृषि भवन की 100 साल पुरानी कदीमी मस्जिद को हटाना क्यों है जरूरी? केंद्र सरकार ने दिल्ली हाईकोर्ट में दिया जवाब

नई दिल्ली 04/11/2026: केंद्र सरकार ने दिल्ली हाईकोर्ट में एक अहम हलफनामा दाखिल कर यह स्पष्ट किया है कि कृषि भवन परिसर में स्थित करीब 100 साल पुरानी ‘कदीमी मस्जिद’ को हटाना क्यों आवश्यक है। सरकार ने इसके पीछे सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना का हवाला दिया है। सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट का है हिस्सा सरकार ने कोर्ट को बताया कि यह कार्रवाई ‘सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना’ के तहत की जा रही है। इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट के तहत कृषि भवन और शास्त्री भवन को हटाकर नई ‘कॉमन सेंट्रल सेक्रेटेरिएट’ की इमारतें बनाई जानी हैं। यह पूरी जमीन भारत सरकार के स्वामित्व में है और राष्ट्रीय महत्व की इस परियोजना के मार्ग में आने के कारण मस्जिद को हटाना जरूरी हो गया है। सरकार का तर्क- सरकारी जमीन धर्मनिरपेक्ष स्वरूप के अनुरूप हो  हलफनामे में केंद्र सरकार ने कड़ा रुख अपनाते हुए तर्क दिया है कि सरकारी दफ्तरों के परिसरों में किसी भी स्थायी धार्मिक ढांचे का बने रहना सरकारी संपत्ति के धर्मनिरपेक्ष स्वरूप के अनुरूप नहीं है। सरकार ने स्पष्ट किया कि सरकारी जमीन को किसी भी धार्मिक स्थल के लिए स्थायी रूप से आरक्षित नहीं किया जा सकता है, और न ही प्रशासन इसके एवज में परिसर के भीसरकारतर कोई वैकल्पिक जमीन देने के लिए बाध्य है। हालांकि, सरकार ने विकल्प के तौर पर कृषि भवन से लगभग 2 किलोमीटर के दायरे में इंडिया गेट के पास स्थित शाही मस्जिद (जब्ता गंज) का जिक्र किया है। हाईकोर्ट ने सरकार से पूछे तीखे सवाल मामले की सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति अनीश दयाल ने केंद्र सरकार से यह सवाल किया कि क्या सरकारी परिसरों में धार्मिक संरचनाओं या नमाज की सुविधाओं पर प्रतिबंध लगाने वाला कोई विशिष्ट नियम मौजूद है। इसके साथ ही, कोर्ट ने विभिन्न धर्मों के लोगों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था के संबंध में भी स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए हैं। क्या है कदीमी मस्जिद का इतिहास? याचिकाकर्ताओं और कदीमी मस्जिद कमेटी के अनुसार, कृषि भवन परिसर में स्थित यह मस्जिद 114 साल से अधिक पुरानी है। यह 1912 या उससे पहले के लुटियंस दिल्ली के नक्शों में भी दर्ज है और इसके ऐतिहासिक दस्तावेज साल 1945 तक के मिलते हैं। इसके बाद दिल्ली वक्फ बोर्ड ने साल 1970 में इस मस्जिद को ‘वक्फ संपत्ति’ के रूप में अधिसूचित किया था।

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कृषि भवन की 100 साल पुरानी कदीमी मस्जिद को हटाना क्यों है जरूरी? केंद्र सरकार ने दिल्ली हाईकोर्ट में दिया जवाब

नई दिल्ली 04/11/2026: केंद्र सरकार ने दिल्ली हाईकोर्ट में एक अहम हलफनामा दाखिल कर यह स्पष्ट किया है कि कृषि भवन परिसर में स्थित करीब 100 साल पुरानी ‘कदीमी मस्जिद’

राहुल गांधी के ‘विदेशी मदद’ वाले बयान पर भड़की बीजेपी: ‘थर्ड क्लास झूठ बोलने वाले धोखेबाज’ करार, सी.आर. केशवन ने खड़े किए गंभीर सवाल

नई दिल्ली 04/11/2026 BJP vs Congress : भारतीय राजनीति में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के बीच जुबानी जंग एक बार फिर बेहद तल्ख मोड़ पर

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राहुल गांधी के ‘विदेशी मदद’ वाले बयान पर भड़की बीजेपी: ‘थर्ड क्लास झूठ बोलने वाले धोखेबाज’ करार, सी.आर. केशवन ने खड़े किए गंभीर सवाल

नई दिल्ली 04/11/2026 BJP vs Congress : भारतीय राजनीति में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के बीच जुबानी जंग एक बार फिर बेहद तल्ख मोड़ पर पहुँच गई है। (आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज) , कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष (LoP) राहुल गांधी द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर ‘विदेशी ताकतों की मदद से सत्ता में बने रहने’ का आरोप लगाने के बाद बीजेपी ने आक्रामक रुख अपनाते हुए करारा पलटवार किया है। बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता सी.आर. केशवन ने राहुल गांधी पर तीखा हमला बोलते हुए उन्हें “बेहद घटिया किस्म का धोखेबाज” करार दिया और आरोप लगाया कि उनका पाखंड और झूठा प्रचार हमेशा उन पर ही उल्टा पड़ता है। ‘थर्ड क्लास झूठ हमेशा उल्टे पड़ते हैं’: बीजेपी का हमला बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता सी.आर. केशवन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर राहुल गांधी पर हमला बोलते हुए लिखा कि राहुल गांधी के दावे खोखले हैं। केशवन ने लिखा: “राहुल गांधी इतने घटिया किस्म के धोखेबाज हैं कि उनके थर्ड क्लास झूठ हमेशा उन पर ही उल्टे पड़ते हैं और अंत में उन्हें शर्मिंदा होना पड़ता है।” केशवन ने राहुल गांधी का एक पुराना वीडियो शेयर करते हुए मार्च 2023 की उनकी लंदन (UK) यात्रा की याद दिलाई। (आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज) बीजेपी प्रवक्ता ने कहा कि 2023 के लोकसभा चुनाव से पहले लंदन में भाषण देते हुए राहुल गांधी ने खुद भारत के आंतरिक मामलों में विदेशी शक्तियों से हस्तक्षेप की अपील की थी और कहा था कि “यह सिर्फ भारत की लड़ाई नहीं है।” बीजेपी का तर्क है कि जो नेता खुद विदेशी मंचों पर जाकर देश के मामलों में दखल की मांग करता है, उसका दूसरों पर आरोप लगाना हास्यास्पद है। सोनिया गांधी, जॉर्ज सोरोस और हिंडनबर्ग पर बीजेपी के तीखे सवाल बीजेपी प्रवक्ता सी.आर. केशवन ने कांग्रेस पार्टी और राहुल गांधी से कई तीखे सवाल पूछे और उनकी चुप्पी पर निशाना साधा: सोनिया गांधी और इंटरनेशनल फोरम: बीजेपी ने सवाल उठाया कि कांग्रेस ने इस आरोप का जवाब क्यों नहीं दिया कि सोनिया गांधी ‘एशिया-पैसिफिक में डेमोक्रेटिक लीडर्स के फोरम’ की सह-अध्यक्ष रही थीं। इस फोरम ने अतीत में कश्मीर को एक स्वतंत्र राष्ट्र बनाने के विचार का समर्थन किया था और इसके तार अरबपति जॉर्ज सोरोस से जुड़े बताए जाते हैं। हिंडनबर्ग व विदेशी संस्थाओं से संबंध: केशवन ने पूछा कि राहुल गांधी और कांग्रेस हिंडनबर्ग रिसर्च तथा कॉर्नेलिया वोल जैसे व्यक्तियों व संगठनों के साथ अपने संबंधों पर रहस्यमयी चुप्पी क्यों साधे हुए हैं, जिन्हें जॉर्ज सोरोस जैसे तत्वों से फंडिंग मिलती है? गुप्त विदेश यात्राओं पर सवाल: बीजेपी नेता ने राहुल गांधी की बार-बार होने वाली विदेश यात्राओं पर राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा उठाते हुए कहा, “राहुल गांधी अक्सर अचानक विदेश क्यों चले जाते हैं? वे वहां गुप्त रूप से किससे मिलते हैं और इन मुलाकातों का एजेंडा क्या होता है? चूंकि वे देश के नेता प्रतिपक्ष (LoP) हैं, इसलिए देश को सच जानने का हक है। उनकी गुप्त यात्राएं राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा हैं।” विवाद की शुरुआत: राहुल गांधी का ‘खुली बहस’ का दावा इस पूरे विवाद की शुरुआत तब हुई जब राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘राष्ट्रीय एकता दिवस’ के भाषण पर प्रतिक्रिया देते हुए उन पर निशाना साधा। पीएम मोदी द्वारा देश को ‘विदेशी साजिशों’ से आगाह किए जाने के बयान को उन्हीं के खिलाफ मोड़ते हुए राहुल गांधी ने बिना कोई ठोस सबूत दिए आरोप लगाया कि मोदी सरकार और देश का वित्तीय ढांचा बाहरी ताकतों के सहारे टिका हुआ है। राहुल गांधी ने पीएम मोदी को चुनौती देते हुए कहा था: “मैं आपको इस मुद्दे पर खुली बहस की चुनौती देता हूं। कोई भी मंच हो, कोई भी समय हो। अगर हिम्मत है तो सामने आइए। लेकिन आप ऐसा करने की हिम्मत नहीं करेंगे, क्योंकि आप डरे हुए हैं कि मुझे आपके बारे में क्या-क्या पता है।” पीएम मोदी का इशारा: देश विरोधी ताकतों और गुप्त मुलाकातों की चेतावनी इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में देशवासियों को विदेशी शक्तियों और उनके साथ मिलकर देश को कमजोर करने वाले तत्वों से सतर्क रहने का आह्वान किया था। पीएम मोदी ने कहा था कि एक दशक की हताशा के बाद कुछ बाधा डालने वाली ताकतें अब खुलकर सामने आ गई हैं। ( आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज)पीएम ने सवाल उठाया था कि विदेश में कौन किससे गुप्त रूप से मिल रहा है, भारत-विरोधी ताकतें किसका समर्थन कर रही हैं और कौन भारत के दुश्मनों की भाषा बोल रहा है? पीएम ने देशवासियों से ऐसी ताकतों के तौर-तरीकों को पहचानकर एकजुट होकर उनका मुकाबला करने की अपील की थी।

रामलीला मैदान की महारैली: INDIA गठबंधन की एकजुटता और सत्ता पक्ष के लिए बड़ी चुनौती

  दिल्ली के रामलीला मैदान में ‘INDIA’ गठबंधन द्वारा आयोजित मेगा रैली और ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ के नारे के साथ निकाला गया पैदल मार्च भारतीय राजनीति में एक बड़ा मोड़ साबित हो सकता है। (आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज) राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे, अखिलेश यादव और ममता बनर्जी जैसे दिग्गज नेताओं की मौजूदगी ने यह साफ कर दिया है कि विपक्ष चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर आक्रामक रुख अपनाने जा रहा है। इस विस्तृत आलेख में हम इस रैली के विभिन्न पहलुओं, इसके राजनीतिक संदेशों और आगामी चुनावों पर पड़ने वाले प्रभावों का गहराई से विश्लेषण करेंगे। 1. रामलीला मैदान रैली के मुख्य बिंदु और केंद्रीय मुद्दे रविवार को मिंटो रोड से रामलीला मैदान तक निकाले गए इस ऐतिहासिक पैदल मार्च और रैली का मुख्य केंद्र बिंदु मतदाता सूची (SIR) में कथित अनियमितताएं और मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग रहा। लोकतंत्र और मतदान अधिकार की रक्षा: विपक्षी नेताओं ने इसे केवल तकनीकी मुद्दा न मानकर सीधे तौर पर संविधान और जनता के मताधिकार पर हमला बताया। सामूहिक आक्रामकता: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने स्पष्ट किया कि जब तक मुख्य चुनाव आयुक्त इस्तीफा नहीं देते, तब तक यह विरोध प्रदर्शन विभिन्न रूपों में जारी रहेगा। क्षेत्रीय मुद्दों की गूंज: समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश में मतदाताओं के नाम गायब होने के गंभीर आरोप लगाए और राज्य सरकार को घेरा। 2. क्या INDIA गठबंधन में लौटी है एकजुटता? 2024 के आम चुनावों के बाद से विभिन्न राज्यों में विपक्षी दलों के बीच आपसी मतभेद, नेतृत्व के सवाल और सीटों के बंटवारे को लेकर अनबन की खबरें सामने आ रही थीं।( आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज) ऐसे में रामलीला मैदान की इस रैली की सबसे बड़ी राजनीतिक उपलब्धि यह रही कि तमाम वैचारिक और क्षेत्रीय भिन्नताओं को दरकिनार कर सभी दल एक साझा मंच पर आए। कांग्रेस, वाम दलों, समाजवादी पार्टी और तृणमूल कांग्रेस के शीर्ष नेताओं की एक मंच पर उपस्थिति यह दर्शाती है कि विपक्ष छिटपुट आवाज उठाने के बजाय सत्ता पक्ष पर सामूहिक और बड़ा दबाव बनाने की रणनीति पर काम कर रहा है। 3. आगामी 2027 के विधानसभा चुनावों पर प्रभाव वर्ष 2027 में उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर—इन पांच महत्वपूर्ण राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं। इन राज्यों में इस रैली के अलग-अलग मायने हैं: उत्तर प्रदेश का विशेष संदर्भ: 403 सीटों वाले इस सबसे बड़े सूबे में सपा और कांग्रेस का गठबंधन पहले ही 2024 के लोकसभा चुनावों (80 में से 43 सीटें जीतना) में अपनी ताकत दिखा चुका है। यह रैली यूपी के कार्यकर्ताओं में नया जोश भरने का काम करेगी। अन्य राज्य (पंजाब, उत्तराखंड, गोवा, मणिपुर): हालांकि इन राज्यों में विपक्षी दलों की राजनीतिक जमीन और चुनौतियां अलग-अलग हैं (जैसे पंजाब में ‘आप’ और कांग्रेस आमने-सामने हैं), लेकिन दिल्ली की इस राष्ट्रीय रैली ने सभी को एक साझा राष्ट्रीय और संस्थागत मुद्दा प्रदान किया है। 4. मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग: राजनीतिक नफा-नुकसान सड़क से लेकर संसद तक दबाव: CEC के इस्तीफे की मांग ने विपक्ष के विरोध प्रदर्शन को एक स्पष्ट, तीखा और आक्रामक राजनीतिक लक्ष्य दिया है। (आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज) अब यह मुद्दा सिर्फ बयानों तक सीमित न रहकर सीधे सड़क पर आ गया है। संवैधानिक वास्तविकता: राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि केवल राजनीतिक रैलियों में मांग उठाने से संवैधानिक पदों पर बैठे अधिकारियों को नहीं हटाया जा सकता, क्योंकि इसके लिए एक निश्चित कानूनी प्रक्रिया होती है। फिर भी, जनता के बीच अविश्वास का माहौल बनाने में यह रणनीति सफल हो सकती है। 5. क्या विपक्ष को चुनावी फायदा मिलना तय है? इसका सीधा और एकमुश्त जवाब देना अभी कठिन है। नेताओं की उपस्थिति और कार्यकर्ताओं की भीड़ से विपक्ष को एक मनोवैज्ञानिक बढ़त अवश्य मिली है, लेकिन असली परीक्षा अभी बाकी है: मुद्दों का दायरा: यदि विपक्ष इस आंदोलन को केवल SIR और चुनाव आयोग तक ही सीमित रखेगा, तो इसका दायरा छोटा हो सकता है। जनता से जुड़े सवाल: जनता को जोड़े रखने के लिए विपक्ष को इस मुहिम के साथ-साथ बेरोजगारी, महंगाई, किसानों की समस्याएं, शिक्षा और स्थानीय शासन जैसे बुनियादी मुद्दों को भी आक्रामक तरीके से उठाना होगा।

ममता बनर्जी का बदला राजनीतिक अंदाज: दिल्ली की रैली में सोनिया गांधी को बताया अपनी नेता, विपक्षी समीकरणों पर टकटकी

नई दिल्ली 2/10/2026 INDIA Alliance : दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित ‘INDIA’ गठबंधन की 1 नवम्बर की रैली में तृणमूल कांग्रेस (TMC) सुप्रीमो और पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का एक नया और बदला हुआ राजनीतिक तेवर देखने को मिला। ‘वोट चोरी’ के खिलाफ आयोजित इस महारैली में ममता बनर्जी के बयानों और कांग्रेस नेतृत्व के प्रति उनके नरम रुख ने राष्ट्रीय राजनीति में नए कयासों को जन्म दे दिया है। 1. सोनिया गांधी को ‘नेता’ कहना और राहुल गांधी की तारीफ ममता बनर्जी ने अपने भाषण की शुरुआत कांग्रेस संसदीय दल की chairperson सोनिया गांधी को “मेरी नेता” कहकर अभिवादन करने के साथ की। इसके अलावा, उन्होंने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी को जमीन पर संघर्ष करने वाला एक “युवा नेता” बताकर उनकी जमकर सराहना की। राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा है कि ममता बनर्जी का यह अंदाज कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व के साथ उनके मजबूत होते संबंधों को दर्शाता है। 2. वामदलों और अन्य सहयोगियों को साधना अपने संबोधन के दौरान ममता बनर्जी ने न सिर्फ कांग्रेस नेताओं बल्कि समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव, राजद नेता तेजस्वी यादव और अपने पुराने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के महासचिव एमए बेबी का भी विशेष रूप से नाम लिया। मंच पर उनकी यह एकजुटता विपक्षी दलों के बीच आपसी मतभेदों को दरकिनार कर राष्ट्रीय स्तर पर एक साझा मंच तैयार करने की रणनीति का संकेत देती है। 3. पश्चिम बंगाल चुनाव के बाद बदली सियासी हवा पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद से ममता बनर्जी और कांग्रेस के रिश्तों में एक नई गर्माहट देखने को मिली है। चुनाव परिणामों पर जब ममता ने सवाल उठाए थे, तब राहुल गांधी ने खुलकर उनका समर्थन किया था। इसके बाद ममता की दिल्ली यात्रा और सोनिया-राहुल से उनकी मुलाकात ने दोनों दलों के बीच की दूरियों को काफी हद तक कम किया है। 4. एक ही कार में सफर और मंच की नजदीकी रामलीला मैदान की इस रैली में ममता बनर्जी का एक्शन केवल भाषण तक सीमित नहीं था। वह राहुल गांधी के साथ एक ही कार में बैठकर रैली स्थल तक पहुंचीं और मंच पर भी सोनिया गांधी के ठीक बगल में बैठी नजर आईं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह केवल शिष्टाचार नहीं, बल्कि भाजपा के खिलाफ राष्ट्रीय स्तर पर एक कड़ा संदेश देने की सोची-समझी रणनीति है।

‘ये हिंदुस्तान आपके अब्बू जान का नहीं…’: रामलीला मैदान रैली पर बीजेपी का राहुल गांधी पर तीखा पलटवार, मेगा रैली को बताया ‘फ्लॉप शो’

मुख्य बातें: दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित इंडिया गठबंधन की मेगा रैली पर बीजेपी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कड़ा हमला बोला। बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने राहुल गांधी के भाषण को ‘समय की बर्बादी’ करार देते हुए तीखे शब्दों में निशाना साधा। रैली में उमड़ी भीड़ के दावों पर सवाल उठाते हुए बीजेपी ने इसे पूरी तरह से फ्लॉप शो बताया और रामलीला मैदान की खाली कुर्सियों के आंकड़े सामने रखे। नई दिल्ली 2/11/2026: दिल्ली के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में आयोजित इंडिया गठबंधन की मेगा रैली के बाद सियासी पारा पूरी तरह से चढ़ गया है। रैली के समाप्त होने के तुरंत बाद भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर विपक्ष और खासकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर जोरदार पलटवार किया। बीजेपी राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने राहुल गांधी के बयानों और गठबंधन के दावों की धज्जियां उड़ाते हुए इसे ‘समय की बर्बादी’ और ‘अराजकता की धमाचौकड़ी’ करार दिया। ‘यह हिंदुस्तान आपके अब्बू जान का नहीं’ प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान संबित पात्रा ने राहुल गांधी के भाषण पर कड़ा ऐतराज जताया। राहुल गांधी के 2024 के चुनावों को अवैध बताने वाले बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए पात्रा ने कहा कि अगर चुनाव अवैध था, तो विपक्ष कोर्ट क्यों नहीं गया? उन्होंने तीखा तंज कसते हुए कहा, “आप कह रहे थे कि प्रधानमंत्री और गृहमंत्री बन नहीं सकते थे। मुगल सम्राट होते थे, वो ऐसे ही बात करते थे। ये हिंदुस्तान आपके अब्बू जान का नहीं है, यह इस देश के 140 करोड़ लोगों का है।” पात्रा ने आगे कहा कि राहुल गांधी की पुरानी टेप रिकॉर्डर वाली आदत अभी भी बदली नहीं है। वे लगातार चुनावों और संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल खड़े कर रहे हैं। यदि 2024 का चुनाव अवैध था, तो राहुल गांधी खुद अवैध एलओपी (नेता प्रतिपक्ष) हैं, और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, सोनिया गांधी व प्रियंका गांधी भी अवैध सांसद और नेता माने जाएंगे। 10 लाख भीड़ के दावे पर बीजेपी का करारा प्रहार इंडिया गठबंधन के नेताओं (केसी वेणुगोपाल और पवन खेड़ा) द्वारा रैली में 10 लाख से अधिक लोगों के जुटने के दावे की हवा निकालते हुए संबित पात्रा ने इसके आंकड़े पेश किए। रामलीला मैदान की स्थिति: पात्रा ने कहा कि रामलीला मैदान लगभग 10-12 एकड़ में फैला है, जिसमें स्टेज और डीजी एरिया करीब 15 प्रतिशत जगह घेर लेता है। खाली कुर्सियां: उन्होंने दावा किया कि रैली में कुल 28,000 कुर्सियां डाली गई थीं, जिनमें से मध्य और पीछे का हिस्सा पूरी तरह खाली पड़ा था। 5 से 7 हजार कुर्सियां खाली थीं और मैदान का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा सूना नजर आया। ट्रिक फोटोग्राफी: बीजेपी प्रवक्ता ने कटाक्ष करते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी ट्रिक फोटोग्राफी के माध्यम से भीड़ दिखाने की कोशिश करती है, लेकिन इस तरह के हथकंडों से कोई प्रधानमंत्री नहीं बनता। प्रधानमंत्री पसीने और मेहनत के दम पर बनते हैं, जो विपक्ष ने कभी नहीं की। त्योहारों के समय राजनीति करने का आरोप त्योहारों के सीजन में इस तरह के आयोजनों पर सवाल उठाते हुए पात्रा ने कहा कि ऐसे आयोजनों से आम जनजीवन प्रभावित होता है और लोग त्योहारों के समय एक-दूसरे के घर नहीं जा पा रहे हैं। उन्होंने राहुल गांधी के ‘शिव की बारात’ वाले बयान पर निशाना साधते हुए कहा कि जो लोग देश में अराजकता फैलाना चाहते हैं, वे कभी शिव की बारात का हिस्सा नहीं हो सकते। उन्होंने कहा कि देश की जनता इस अराजकता का जवाब आने वाले चुनावों में परिणामों के जरिए देगी। ‘140 करोड़ जनता का आशीर्वाद मोदी जी के साथ’ राहुल गांधी के बयानों और विपक्ष की कार्यशैली पर कड़ा प्रहार करते हुए पात्रा ने कहा कि वे लगातार पीएम मोदी को गालियां देते हैं और अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल करते हैं। यह ‘मोहब्बत की दुकान’ नहीं, बल्कि राजनीति का अतिक्रमण है जिसे जनता ध्वस्त कर देगी। उन्होंने अंत में विश्वास जताते हुए कहा कि देश के 140 करोड़ लोगों का आशीर्वाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ है और वे कहीं नहीं जाने वाले।

 वोट बचाओ, देश बचाओ’ के नारे से गूंजा रामलीला मैदान: विपक्ष ने दिखाई एकजुटता, 10 लाख की भीड़ का दावा .. देखें तस्वीर

नई दिल्ली 2 नवम्बर 2026: चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली में कथित गड़बड़ियों और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के विरोध में कांग्रेस की अगुवाई में 1 नवम्बर को एक विशाल मेगा रैली आयोजित की गई। इस महारैली के माध्यम से विपक्षी दलों ने चुनावी निष्पक्षता और लोकतांत्रिक संस्थाओं की साख पर बड़े सवाल उठाते हुए सत्तापक्ष पर सीधा हमला बोला। रामलीला मैदान में विपक्ष के इस विशाल शक्ति प्रदर्शन ने देश के राजनीतिक घटनाक्रम में अचानक से भारी उछाल ला दिया है। चुनाव आयोग और सरकार के खिलाफ विपक्ष के इस आक्रामक तेवर ने सत्ता के गलियारों में सियासी सरगर्मी और तपिश को कई गुना बढ़ा दिया है। मिंटो रोड-कनॉट प्लेस जंक्शन से शुरू हुआ मार्च चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और कथित चुनावी गड़बड़ियों (SIR) के विरोध में ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन ने रविवार, 1 नवंबर को दिल्ली में मिंटो रोड-कनॉट प्लेस जंक्शन से एक विशाल मार्च निकाला। इस प्रदर्शन के तहत रामलीला मैदान में आयोजित विशाल महारैली में देश भर से हजारों विपक्षी समर्थक और कार्यकर्ता पहुंचे। रैली का नेतृत्व कांग्रेस नेता राहुल गांधी, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी और अन्य प्रमुख विपक्षी नेताओं ने किया। नेताओं के साथ समर्थकों ने बड़ी संख्या में लिया हिस्सा INDIA गठबंधन की दिल्ली रैली और मार्च को लेकर 10 लाख लोगों के जुटने की उम्मीद जताई गई थी, जबकि पुलिस अनुमान के अनुसार भीड़ 50,000 के करीब रही। नेताओं के साथ-साथ छात्र समूहों, नागरिक समाज संगठनों, श्रमिक संघों, महिलाओं और युवाओं ने भी इस प्रदर्शन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी को सुनने के लिए उत्सुक दिखे लोग कांग्रेस सांसद राहुल गांधी को सुनने के लिए उत्सुक दिखे लोग रामलीला मैदान में लोकसभा नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी को सुनने के लिए बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। दिल्ली के रामलीला मैदान में ‘वोट बचाओ, देश बचाओ महारैली’ को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने पीएम मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और सीईसी ज्ञानेश कुमार पर देश की आत्मा व संविधान पर हमला करने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि चुनावों में बड़े पैमाने पर धांधली हुई है और 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद लगभग 13.5 करोड़ (15%) मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए गए, जिसे उन्होंने “देशद्रोह” करार दिया। केंद्र सरकार और बीजेपी शासित राज्यों सरकारों पर साधा निशाना दिल्ली के रामलीला मैदान में ‘इंडिया’ गठबंधन की ‘वोट चोरी’ विरोधी महारैली को संबोधित करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र, यूपी, बिहार और महाराष्ट्र की सरकारों को ‘चोरी की सरकार’ करार दिया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि मोदी जी खुद को ही चुनते हैं, उन्हें जनता नहीं चुनती है और उनके सत्ता से बाहर होने पर ही देश का लोकतंत्र सुरक्षित रह सकता है। INDIA गठबंधन के नेताओं को साथ सैंकड़ों लोगों का मिला साथ मोदी सरकार, चुनाव आयोग और मतदाता सूची के विवादास्पद विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) की निंदा करने वाले झंडों, बैनरों और तख्तियों का एक विशाल समूह धीमी गति से चल रहे जुलूस के साथ-साथ चल रहा था। रामलीला मैदान हजारों इंडिया ब्लॉक समर्थकों से भर गया था, जिनमें युवा और छात्र समूह भी शामिल थे। पार्टी कार्यकर्ता कई राज्यों से राजधानी पहुंचे थे, जिनमें से कई रविवार सुबह ही आ गए थे और कई एक दिन पहले ही दिल्ली पहुंच चुके थे। सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव भी आए नजर   ‘इंडिया’ गठबंधन की महारैली को ‘लोकतंत्र की हल्दीघाटी’ करार देते हुए सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने अमित शाह के ‘अंगद के पैर’ वाले बयान पर तंज कसा कि जब जनाधार की जमीन ही खिसक चुकी है, तो पैर कहां टिकेगा। उन्होंने यूपी में 1.27 लाख मतदाताओं के नाम काटे जाने का मुद्दा उठाते हुए आरोप लगाया कि अपनी हार सामने देख भाजपा अब चुनाव आयोग के सहारे मतदाता सूची में हेराफेरी का खेल खेल रही है। मंच पर साथ दिखीं ममत बनर्जी और सोनिया गांधी महारैली के दौरान तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी का एक नया और बदला हुआ राजनीतिक अंदाज देखने को मिला। उन्होंने अपने भाषण की शुरुआत “मेरी नेता सोनिया जी को मेरा नमस्ते” कहकर की और राहुल गांधी को ‘लड़ाई लड़ रहे युवा नेता’ के रूप में संबोधित किया। मंच पर सोनिया गांधी के साथ उनकी नजदीकी और लंबे समय तक प्रतिद्वंद्वी रही माकपा के नेता एम ए बेबी का नाम लेना विपक्षी गठबंधन के भीतर बदलते सियासी समीकरणों को दर्शाता है। विपक्षी दलों में दिखाई दी एकजुटता   रामलीला मैदान से कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव, तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी, राजद नेता तेजस्वी यादव और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की नेता सुप्रिया सुले समेत विभिन्न विपक्षी दलों के वरिष्ठ नेता मंच पर दिखाई दिए  

महाराष्ट्र की राजनीति में भूचाल: क्या फिर एक होंगे उद्धव और शिंदे? एक नेता के बयान से सियासी पारे में उबाल

मुंबई 1 नवंबर 2026 Maharashtra politics :  महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर दोनों शिवसेनाओं (शिंदे गुट और उद्धव गुट) के एक साथ आने की सुगबुगाहट तेज हो गई है। शिवसेना (शिंदे गुट) के विधान परिषद सदस्य (MLC) हेमंत पाटिल के एक ताजा और बेहद सनसनीखेज बयान ने राज्य के राजनीतिक गलियारों में बड़ी हलचल पैदा कर दी है। (आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज) इस बयान के बाद सियासी गलियारों में यह सवाल सबसे बड़ा बन गया है कि क्या जिन दो धड़ों ने एक-दूसरे के खिलाफ जंग लड़ी थी, वे भविष्य में फिर से हाथ मिला सकते हैं? राजनीति में कुछ भी संभव: “जिंदगी भर जिनके खिलाफ हथियार उठाए, आज साथ बैठने का वक्त” हेमंत पाटिल ने राजनीति के अनिश्चित और अप्रत्याशित स्वभाव पर खुलकर बात की। उन्होंने टिप्पणी करते हुए कहा कि राजनीति में कभी भी कुछ भी हो सकता है। (आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज) इस दौरान उन्होंने एक बहुत बड़ा राजनीतिक सच बयां करते हुए कहा कि “जिंदगी भर जिनके खिलाफ हथियार उठाए, आज उन्हीं के साथ बैठने का वक्त आ चुका है।” दोनों शिवसेनाओं के एकजुट होने के फैसले पर उन्होंने स्पष्ट किया कि इस संबंध में मुख्यमंत्री/नेता एकनाथ शिंदे जो भी योग्य फैसला लेंगे, वह फैसला पार्टी के सभी नेताओं और कार्यकर्ताओं को पूरी तरह से मान्य होगा। जमीनी हकीकत: आम शिवसैनिकों का आपसी प्यार और नांदेड का दर्द पाटिल ने जमीनी स्तर पर काम करने वाले शिवसैनिकों के आपसी संबंधों का जिक्र करते हुए एक अहम बात रखी। उन्होंने कहा कि भले ही पार्टी टूट चुकी है और दो अलग-अलग शिवसेनाएं बन चुकी हैं, लेकिन आम शिवसैनिकों के बीच एक-दूसरे के प्रति आत्मीयता और लगाव का भाव आज भी वैसा ही बना हुआ है। शिवसैनिक आज भी एक-दूसरे के सुख-दुख में बढ़-चढ़कर शामिल होते हैं। उन्होंने नांदेड जिले की स्थिति का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि यदि शिवसेना अंदर से एक होती, (आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज) तो आज पूरे महाराष्ट्र और खासतौर पर नांदेड में पार्टी और कार्यकर्ताओं को जिस कड़े संघर्ष और परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, वह नौबत कभी नहीं आती। भाजपा से स्थानीय मतभेद और पालकमंत्री को सीधी सलाह बयान के दौरान हेमंत पाटिल ने सत्ताधारी महायुति गठबंधन में शामिल भारतीय जनता पार्टी (BJP) और शिवसेना के रिश्तों पर भी अपनी बेबाक राय रखी। उन्होंने खुले तौर पर स्वीकार किया कि जमीनी व स्थानीय स्तर पर भाजपा और शिवसेना के बीच निश्चित रूप से मतभेद और मनमुटाव मौजूद हैं। इन मतभेदों को दूर करने का सुझाव देते हुए उन्होंने कहा कि जो भी जिले के पालकमंत्री हैं, उन्हें खुद पहल करके आगे आना चाहिए और इन स्थानीय विवादों को तुरंत सुलझाना चाहिए ताकि कार्यकर्ताओं में सामंजस्य बन सके। महायुति गठबंधन पर रुख और वरिष्ठ नेताओं को चेतावनी गठबंधन की मौजूदा स्थिति के बारे में स्पष्टीकरण देते हुए पाटिल ने कहा कि फिलहाल महायुति गठबंधन में कोई बहुत बड़ी दरार या खटास नहीं पड़ी है। (आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज) हालांकि, उन्होंने चेतावनी भरे अंदाज में यह भी जोड़ा कि यदि समय रहते इन छोटी-छोटी स्थानीय परेशानियों को दूर नहीं किया गया, तो भविष्य में दिक्कतें बढ़ सकती हैं, इसलिए वरिष्ठ नेताओं को इस स्थिति पर समय रहते ध्यान देने की सख्त जरूरत है। क्या है बड़ा सवाल? हेमंत पाटिल के इस सस्पेंस से भरे बयान ने यह बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या आने वाले दिनों में शिंदे गुट और उद्धव ठाकरे गुट के बीच अंदरखाने कोई सियासी समीकरण या तालमेल बन रहा है? हालांकि अंतिम फैसला पूरी तरह से एकनाथ शिंदे के हाथ में है, लेकिन इस बयान ने महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर नई बहस छेड़ दी है।

टेक्नोलॉजी

क्या AI खत्म कर देगा पारंपरिक बैंकिंग? शेखर कपूर के सवाल पर छिड़ी नई बहस

नई दिल्ली 16 अक्टूबर 2026 Artificial Intelligence : आने वाले समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) बैंकिंग सेक्टर के कामकाज और कारोबार को पूरी तरह से बदल सकता है। मशहूर फिल्म निर्माता शेखर कपूर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म लिंक्डइन पर एक विचारोत्तेजक पोस्ट शेयर करते हुए सवाल उठाया है—“अगर एआई खुद लोगों के पैसे संभालने, निवेश के बेहतर विकल्प खोजने और अधिक ब्याज दिलाने का काम करने लगे, तो फिर पारंपरिक बैंकों की जरूरत ही क्यों पड़ेगी?” शेखर कपूर की इस पोस्ट ने इंटरनेट पर एक नई बहस को जन्म दे दिया है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि एआई बैंकिंग उद्योग को बड़ा नुकसान पहुंचा सकता है, वहीं अन्य का कहना है कि बैंक बंद नहीं होंगे, बल्कि उनका काम करने का तरीका पूरी तरह बदल जाएगा। Advt बैंकों की कमाई पर कैसे पड़ेगा असर? शेखर कपूर के अनुसार, बैंक जमाकर्ताओं के पैसे को कर्ज या निवेश में लगाकर बड़ी कमाई करते हैं और उसके बदले ग्राहकों को बहुत कम ब्याज देते हैं। बैंकों का मुनाफा उन ग्राहकों से भी होता है, जो आलस या झंझट के कारण बेहतर ब्याज दरों की तलाश में अपना पैसा दूसरी जगह ट्रांसफर नहीं करते। लेकिन अगर AI एजेंट हर रात ग्राहक के फंड के लिए खुद ही सबसे ज्यादा ब्याज देने वाले विकल्प खोजने लगें, तो ग्राहकों को खुद मेहनत नहीं करनी पड़ेगी। ऐसे में बैंक ग्राहकों को कम ब्याज दर देकर पहले की तरह आसानी से मुनाफा नहीं कमा सकेंगे। क्या AI पूरी तरह से बैंकों की जगह ले सकता है? बहस में शामिल कई विशेषज्ञों का मानना है कि सिर्फ एआई बैंकिंग का विकल्प नहीं बन सकता। सुरक्षा और जिम्मेदारी: लिंक्डइन यूजर अनय महिमकर ने लिखा कि एआई वित्तीय फैसले लेने में मदद तो कर सकता है, लेकिन कर्ज देना, जोखिम उठाना, सरकारी नियमों (Compliance) का पालन करना और भरोसा कायम रखना बैंकों की प्राथमिक जिम्मेदारी रहेगी। सटीक लोन प्रक्रिया: विशेषज्ञ कृष्णा लक्मसानी का कहना है कि एआई ग्राहकों की आमदनी और खर्चों का विश्लेषण करके उधार देने वालों और लेने वालों के बीच सीधा संपर्क बना सकता है। इससे बिचौलियों का असर कम होगा और एआई एजेंट ग्राहकों की ओर से बेहतर ब्याज दरों के लिए बातचीत (Negotiation) भी कर सकेंगे। बैंकों का भविष्य: क्या होंगी नई चुनौतियां? विशेषज्ञों का मानना है कि पैसों की सुरक्षा, डिजिटल पेमेंट और सरकारी योजनाओं के लाभ के लिए बैंकों की प्रासंगिकता बनी रहेगी। हालाँकि, बैंकों के सामने सबसे बड़ी चुनौती ग्राहकों को अपने साथ बनाए रखने की होगी। जो बैंक नई तकनीक, बेहतर ब्याज दरें और एआई-आधारित सेवाएं अपनाएंगे, वे ही भविष्य की बैंकिंग रेस में आगे टिक पाएंगे। 📍

व्यापार

राहुल गांधी के ‘विदेशी मदद’ वाले बयान पर भड़की बीजेपी: ‘थर्ड क्लास झूठ बोलने वाले धोखेबाज’ करार, सी.आर. केशवन ने खड़े किए गंभीर सवाल

नई दिल्ली 04/11/2026 BJP vs Congress : भारतीय राजनीति में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के बीच जुबानी जंग एक बार फिर बेहद तल्ख मोड़ पर पहुँच गई है। (आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज) , कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष (LoP) राहुल गांधी द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर ‘विदेशी ताकतों की मदद से सत्ता में बने रहने’ का आरोप लगाने के बाद बीजेपी ने आक्रामक रुख अपनाते हुए करारा पलटवार किया है। बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता सी.आर. केशवन ने राहुल गांधी पर तीखा हमला बोलते हुए उन्हें “बेहद घटिया किस्म का धोखेबाज” करार दिया और आरोप लगाया कि उनका पाखंड और झूठा प्रचार हमेशा उन पर ही उल्टा पड़ता है। ‘थर्ड क्लास झूठ हमेशा उल्टे पड़ते हैं’: बीजेपी का हमला बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता सी.आर. केशवन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर राहुल गांधी पर हमला बोलते हुए लिखा कि राहुल गांधी के दावे खोखले हैं। केशवन ने लिखा: “राहुल गांधी इतने घटिया किस्म के धोखेबाज हैं कि उनके थर्ड क्लास झूठ हमेशा उन पर ही उल्टे पड़ते हैं और अंत में उन्हें शर्मिंदा होना पड़ता है।” केशवन ने राहुल गांधी का एक पुराना वीडियो शेयर करते हुए मार्च 2023 की उनकी लंदन (UK) यात्रा की याद दिलाई। (आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज) बीजेपी प्रवक्ता ने कहा कि 2023 के लोकसभा चुनाव से पहले लंदन में भाषण देते हुए राहुल गांधी ने खुद भारत के आंतरिक मामलों में विदेशी शक्तियों से हस्तक्षेप की अपील की थी और कहा था कि “यह सिर्फ भारत की लड़ाई नहीं है।” बीजेपी का तर्क है कि जो नेता खुद विदेशी मंचों पर जाकर देश के मामलों में दखल की मांग करता है, उसका दूसरों पर आरोप लगाना हास्यास्पद है। सोनिया गांधी, जॉर्ज सोरोस और हिंडनबर्ग पर बीजेपी के तीखे सवाल बीजेपी प्रवक्ता सी.आर. केशवन ने कांग्रेस पार्टी और राहुल गांधी से कई तीखे सवाल पूछे और उनकी चुप्पी पर निशाना साधा: सोनिया गांधी और इंटरनेशनल फोरम: बीजेपी ने सवाल उठाया कि कांग्रेस ने इस आरोप का जवाब क्यों नहीं दिया कि सोनिया गांधी ‘एशिया-पैसिफिक में डेमोक्रेटिक लीडर्स के फोरम’ की सह-अध्यक्ष रही थीं। इस फोरम ने अतीत में कश्मीर को एक स्वतंत्र राष्ट्र बनाने के विचार का समर्थन किया था और इसके तार अरबपति जॉर्ज सोरोस से जुड़े बताए जाते हैं। हिंडनबर्ग व विदेशी संस्थाओं से संबंध: केशवन ने पूछा कि राहुल गांधी और कांग्रेस हिंडनबर्ग रिसर्च तथा कॉर्नेलिया वोल जैसे व्यक्तियों व संगठनों के साथ अपने संबंधों पर रहस्यमयी चुप्पी क्यों साधे हुए हैं, जिन्हें जॉर्ज सोरोस जैसे तत्वों से फंडिंग मिलती है? गुप्त विदेश यात्राओं पर सवाल: बीजेपी नेता ने राहुल गांधी की बार-बार होने वाली विदेश यात्राओं पर राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा उठाते हुए कहा, “राहुल गांधी अक्सर अचानक विदेश क्यों चले जाते हैं? वे वहां गुप्त रूप से किससे मिलते हैं और इन मुलाकातों का एजेंडा क्या होता है? चूंकि वे देश के नेता प्रतिपक्ष (LoP) हैं, इसलिए देश को सच जानने का हक है। उनकी गुप्त यात्राएं राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा हैं।” विवाद की शुरुआत: राहुल गांधी का ‘खुली बहस’ का दावा इस पूरे विवाद की शुरुआत तब हुई जब राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘राष्ट्रीय एकता दिवस’ के भाषण पर प्रतिक्रिया देते हुए उन पर निशाना साधा। पीएम मोदी द्वारा देश को ‘विदेशी साजिशों’ से आगाह किए जाने के बयान को उन्हीं के खिलाफ मोड़ते हुए राहुल गांधी ने बिना कोई ठोस सबूत दिए आरोप लगाया कि मोदी सरकार और देश का वित्तीय ढांचा बाहरी ताकतों के सहारे टिका हुआ है। राहुल गांधी ने पीएम मोदी को चुनौती देते हुए कहा था: “मैं आपको इस मुद्दे पर खुली बहस की चुनौती देता हूं। कोई भी मंच हो, कोई भी समय हो। अगर हिम्मत है तो सामने आइए। लेकिन आप ऐसा करने की हिम्मत नहीं करेंगे, क्योंकि आप डरे हुए हैं कि मुझे आपके बारे में क्या-क्या पता है।” पीएम मोदी का इशारा: देश विरोधी ताकतों और गुप्त मुलाकातों की चेतावनी इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में देशवासियों को विदेशी शक्तियों और उनके साथ मिलकर देश को कमजोर करने वाले तत्वों से सतर्क रहने का आह्वान किया था। पीएम मोदी ने कहा था कि एक दशक की हताशा के बाद कुछ बाधा डालने वाली ताकतें अब खुलकर सामने आ गई हैं। ( आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज)पीएम ने सवाल उठाया था कि विदेश में कौन किससे गुप्त रूप से मिल रहा है, भारत-विरोधी ताकतें किसका समर्थन कर रही हैं और कौन भारत के दुश्मनों की भाषा बोल रहा है? पीएम ने देशवासियों से ऐसी ताकतों के तौर-तरीकों को पहचानकर एकजुट होकर उनका मुकाबला करने की अपील की थी।

रामलीला मैदान की महारैली: INDIA गठबंधन की एकजुटता और सत्ता पक्ष के लिए बड़ी चुनौती

  दिल्ली के रामलीला मैदान में ‘INDIA’ गठबंधन द्वारा आयोजित मेगा रैली और ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ के नारे के साथ निकाला गया पैदल मार्च भारतीय राजनीति में एक बड़ा मोड़ साबित हो सकता है। (आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज) राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे, अखिलेश यादव और ममता बनर्जी जैसे दिग्गज नेताओं की मौजूदगी ने यह साफ कर दिया है कि विपक्ष चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर आक्रामक रुख अपनाने जा रहा है। इस विस्तृत आलेख में हम इस रैली के विभिन्न पहलुओं, इसके राजनीतिक संदेशों और आगामी चुनावों पर पड़ने वाले प्रभावों का गहराई से विश्लेषण करेंगे। 1. रामलीला मैदान रैली के मुख्य बिंदु और केंद्रीय मुद्दे रविवार को मिंटो रोड से रामलीला मैदान तक निकाले गए इस ऐतिहासिक पैदल मार्च और रैली का मुख्य केंद्र बिंदु मतदाता सूची (SIR) में कथित अनियमितताएं और मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग रहा। लोकतंत्र और मतदान अधिकार की रक्षा: विपक्षी नेताओं ने इसे केवल तकनीकी मुद्दा न मानकर सीधे तौर पर संविधान और जनता के मताधिकार पर हमला बताया। सामूहिक आक्रामकता: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने स्पष्ट किया कि जब तक मुख्य चुनाव आयुक्त इस्तीफा नहीं देते, तब तक यह विरोध प्रदर्शन विभिन्न रूपों में जारी रहेगा। क्षेत्रीय मुद्दों की गूंज: समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश में मतदाताओं के नाम गायब होने के गंभीर आरोप लगाए और राज्य सरकार को घेरा। 2. क्या INDIA गठबंधन में लौटी है एकजुटता? 2024 के आम चुनावों के बाद से विभिन्न राज्यों में विपक्षी दलों के बीच आपसी मतभेद, नेतृत्व के सवाल और सीटों के बंटवारे को लेकर अनबन की खबरें सामने आ रही थीं।( आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज) ऐसे में रामलीला मैदान की इस रैली की सबसे बड़ी राजनीतिक उपलब्धि यह रही कि तमाम वैचारिक और क्षेत्रीय भिन्नताओं को दरकिनार कर सभी दल एक साझा मंच पर आए। कांग्रेस, वाम दलों, समाजवादी पार्टी और तृणमूल कांग्रेस के शीर्ष नेताओं की एक मंच पर उपस्थिति यह दर्शाती है कि विपक्ष छिटपुट आवाज उठाने के बजाय सत्ता पक्ष पर सामूहिक और बड़ा दबाव बनाने की रणनीति पर काम कर रहा है। 3. आगामी 2027 के विधानसभा चुनावों पर प्रभाव वर्ष 2027 में उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर—इन पांच महत्वपूर्ण राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं। इन राज्यों में इस रैली के अलग-अलग मायने हैं: उत्तर प्रदेश का विशेष संदर्भ: 403 सीटों वाले इस सबसे बड़े सूबे में सपा और कांग्रेस का गठबंधन पहले ही 2024 के लोकसभा चुनावों (80 में से 43 सीटें जीतना) में अपनी ताकत दिखा चुका है। यह रैली यूपी के कार्यकर्ताओं में नया जोश भरने का काम करेगी। अन्य राज्य (पंजाब, उत्तराखंड, गोवा, मणिपुर): हालांकि इन राज्यों में विपक्षी दलों की राजनीतिक जमीन और चुनौतियां अलग-अलग हैं (जैसे पंजाब में ‘आप’ और कांग्रेस आमने-सामने हैं), लेकिन दिल्ली की इस राष्ट्रीय रैली ने सभी को एक साझा राष्ट्रीय और संस्थागत मुद्दा प्रदान किया है। 4. मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग: राजनीतिक नफा-नुकसान सड़क से लेकर संसद तक दबाव: CEC के इस्तीफे की मांग ने विपक्ष के विरोध प्रदर्शन को एक स्पष्ट, तीखा और आक्रामक राजनीतिक लक्ष्य दिया है। (आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज) अब यह मुद्दा सिर्फ बयानों तक सीमित न रहकर सीधे सड़क पर आ गया है। संवैधानिक वास्तविकता: राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि केवल राजनीतिक रैलियों में मांग उठाने से संवैधानिक पदों पर बैठे अधिकारियों को नहीं हटाया जा सकता, क्योंकि इसके लिए एक निश्चित कानूनी प्रक्रिया होती है। फिर भी, जनता के बीच अविश्वास का माहौल बनाने में यह रणनीति सफल हो सकती है। 5. क्या विपक्ष को चुनावी फायदा मिलना तय है? इसका सीधा और एकमुश्त जवाब देना अभी कठिन है। नेताओं की उपस्थिति और कार्यकर्ताओं की भीड़ से विपक्ष को एक मनोवैज्ञानिक बढ़त अवश्य मिली है, लेकिन असली परीक्षा अभी बाकी है: मुद्दों का दायरा: यदि विपक्ष इस आंदोलन को केवल SIR और चुनाव आयोग तक ही सीमित रखेगा, तो इसका दायरा छोटा हो सकता है। जनता से जुड़े सवाल: जनता को जोड़े रखने के लिए विपक्ष को इस मुहिम के साथ-साथ बेरोजगारी, महंगाई, किसानों की समस्याएं, शिक्षा और स्थानीय शासन जैसे बुनियादी मुद्दों को भी आक्रामक तरीके से उठाना होगा।

ममता बनर्जी का बदला राजनीतिक अंदाज: दिल्ली की रैली में सोनिया गांधी को बताया अपनी नेता, विपक्षी समीकरणों पर टकटकी

नई दिल्ली 2/10/2026 INDIA Alliance : दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित ‘INDIA’ गठबंधन की 1 नवम्बर की रैली में तृणमूल कांग्रेस (TMC) सुप्रीमो और पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का एक नया और बदला हुआ राजनीतिक तेवर देखने को मिला। ‘वोट चोरी’ के खिलाफ आयोजित इस महारैली में ममता बनर्जी के बयानों और कांग्रेस नेतृत्व के प्रति उनके नरम रुख ने राष्ट्रीय राजनीति में नए कयासों को जन्म दे दिया है। 1. सोनिया गांधी को ‘नेता’ कहना और राहुल गांधी की तारीफ ममता बनर्जी ने अपने भाषण की शुरुआत कांग्रेस संसदीय दल की chairperson सोनिया गांधी को “मेरी नेता” कहकर अभिवादन करने के साथ की। इसके अलावा, उन्होंने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी को जमीन पर संघर्ष करने वाला एक “युवा नेता” बताकर उनकी जमकर सराहना की। राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा है कि ममता बनर्जी का यह अंदाज कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व के साथ उनके मजबूत होते संबंधों को दर्शाता है। 2. वामदलों और अन्य सहयोगियों को साधना अपने संबोधन के दौरान ममता बनर्जी ने न सिर्फ कांग्रेस नेताओं बल्कि समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव, राजद नेता तेजस्वी यादव और अपने पुराने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के महासचिव एमए बेबी का भी विशेष रूप से नाम लिया। मंच पर उनकी यह एकजुटता विपक्षी दलों के बीच आपसी मतभेदों को दरकिनार कर राष्ट्रीय स्तर पर एक साझा मंच तैयार करने की रणनीति का संकेत देती है। 3. पश्चिम बंगाल चुनाव के बाद बदली सियासी हवा पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद से ममता बनर्जी और कांग्रेस के रिश्तों में एक नई गर्माहट देखने को मिली है। चुनाव परिणामों पर जब ममता ने सवाल उठाए थे, तब राहुल गांधी ने खुलकर उनका समर्थन किया था। इसके बाद ममता की दिल्ली यात्रा और सोनिया-राहुल से उनकी मुलाकात ने दोनों दलों के बीच की दूरियों को काफी हद तक कम किया है। 4. एक ही कार में सफर और मंच की नजदीकी रामलीला मैदान की इस रैली में ममता बनर्जी का एक्शन केवल भाषण तक सीमित नहीं था। वह राहुल गांधी के साथ एक ही कार में बैठकर रैली स्थल तक पहुंचीं और मंच पर भी सोनिया गांधी के ठीक बगल में बैठी नजर आईं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह केवल शिष्टाचार नहीं, बल्कि भाजपा के खिलाफ राष्ट्रीय स्तर पर एक कड़ा संदेश देने की सोची-समझी रणनीति है।

‘ये हिंदुस्तान आपके अब्बू जान का नहीं…’: रामलीला मैदान रैली पर बीजेपी का राहुल गांधी पर तीखा पलटवार, मेगा रैली को बताया ‘फ्लॉप शो’

मुख्य बातें: दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित इंडिया गठबंधन की मेगा रैली पर बीजेपी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कड़ा हमला बोला। बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने राहुल गांधी के भाषण को ‘समय की बर्बादी’ करार देते हुए तीखे शब्दों में निशाना साधा। रैली में उमड़ी भीड़ के दावों पर सवाल उठाते हुए बीजेपी ने इसे पूरी तरह से फ्लॉप शो बताया और रामलीला मैदान की खाली कुर्सियों के आंकड़े सामने रखे। नई दिल्ली 2/11/2026: दिल्ली के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में आयोजित इंडिया गठबंधन की मेगा रैली के बाद सियासी पारा पूरी तरह से चढ़ गया है। रैली के समाप्त होने के तुरंत बाद भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर विपक्ष और खासकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर जोरदार पलटवार किया। बीजेपी राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने राहुल गांधी के बयानों और गठबंधन के दावों की धज्जियां उड़ाते हुए इसे ‘समय की बर्बादी’ और ‘अराजकता की धमाचौकड़ी’ करार दिया। ‘यह हिंदुस्तान आपके अब्बू जान का नहीं’ प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान संबित पात्रा ने राहुल गांधी के भाषण पर कड़ा ऐतराज जताया। राहुल गांधी के 2024 के चुनावों को अवैध बताने वाले बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए पात्रा ने कहा कि अगर चुनाव अवैध था, तो विपक्ष कोर्ट क्यों नहीं गया? उन्होंने तीखा तंज कसते हुए कहा, “आप कह रहे थे कि प्रधानमंत्री और गृहमंत्री बन नहीं सकते थे। मुगल सम्राट होते थे, वो ऐसे ही बात करते थे। ये हिंदुस्तान आपके अब्बू जान का नहीं है, यह इस देश के 140 करोड़ लोगों का है।” पात्रा ने आगे कहा कि राहुल गांधी की पुरानी टेप रिकॉर्डर वाली आदत अभी भी बदली नहीं है। वे लगातार चुनावों और संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल खड़े कर रहे हैं। यदि 2024 का चुनाव अवैध था, तो राहुल गांधी खुद अवैध एलओपी (नेता प्रतिपक्ष) हैं, और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, सोनिया गांधी व प्रियंका गांधी भी अवैध सांसद और नेता माने जाएंगे। 10 लाख भीड़ के दावे पर बीजेपी का करारा प्रहार इंडिया गठबंधन के नेताओं (केसी वेणुगोपाल और पवन खेड़ा) द्वारा रैली में 10 लाख से अधिक लोगों के जुटने के दावे की हवा निकालते हुए संबित पात्रा ने इसके आंकड़े पेश किए। रामलीला मैदान की स्थिति: पात्रा ने कहा कि रामलीला मैदान लगभग 10-12 एकड़ में फैला है, जिसमें स्टेज और डीजी एरिया करीब 15 प्रतिशत जगह घेर लेता है। खाली कुर्सियां: उन्होंने दावा किया कि रैली में कुल 28,000 कुर्सियां डाली गई थीं, जिनमें से मध्य और पीछे का हिस्सा पूरी तरह खाली पड़ा था। 5 से 7 हजार कुर्सियां खाली थीं और मैदान का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा सूना नजर आया। ट्रिक फोटोग्राफी: बीजेपी प्रवक्ता ने कटाक्ष करते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी ट्रिक फोटोग्राफी के माध्यम से भीड़ दिखाने की कोशिश करती है, लेकिन इस तरह के हथकंडों से कोई प्रधानमंत्री नहीं बनता। प्रधानमंत्री पसीने और मेहनत के दम पर बनते हैं, जो विपक्ष ने कभी नहीं की। त्योहारों के समय राजनीति करने का आरोप त्योहारों के सीजन में इस तरह के आयोजनों पर सवाल उठाते हुए पात्रा ने कहा कि ऐसे आयोजनों से आम जनजीवन प्रभावित होता है और लोग त्योहारों के समय एक-दूसरे के घर नहीं जा पा रहे हैं। उन्होंने राहुल गांधी के ‘शिव की बारात’ वाले बयान पर निशाना साधते हुए कहा कि जो लोग देश में अराजकता फैलाना चाहते हैं, वे कभी शिव की बारात का हिस्सा नहीं हो सकते। उन्होंने कहा कि देश की जनता इस अराजकता का जवाब आने वाले चुनावों में परिणामों के जरिए देगी। ‘140 करोड़ जनता का आशीर्वाद मोदी जी के साथ’ राहुल गांधी के बयानों और विपक्ष की कार्यशैली पर कड़ा प्रहार करते हुए पात्रा ने कहा कि वे लगातार पीएम मोदी को गालियां देते हैं और अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल करते हैं। यह ‘मोहब्बत की दुकान’ नहीं, बल्कि राजनीति का अतिक्रमण है जिसे जनता ध्वस्त कर देगी। उन्होंने अंत में विश्वास जताते हुए कहा कि देश के 140 करोड़ लोगों का आशीर्वाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ है और वे कहीं नहीं जाने वाले।

 वोट बचाओ, देश बचाओ’ के नारे से गूंजा रामलीला मैदान: विपक्ष ने दिखाई एकजुटता, 10 लाख की भीड़ का दावा .. देखें तस्वीर

नई दिल्ली 2 नवम्बर 2026: चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली में कथित गड़बड़ियों और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के विरोध में कांग्रेस की अगुवाई में 1 नवम्बर को एक विशाल मेगा रैली आयोजित की गई। इस महारैली के माध्यम से विपक्षी दलों ने चुनावी निष्पक्षता और लोकतांत्रिक संस्थाओं की साख पर बड़े सवाल उठाते हुए सत्तापक्ष पर सीधा हमला बोला। रामलीला मैदान में विपक्ष के इस विशाल शक्ति प्रदर्शन ने देश के राजनीतिक घटनाक्रम में अचानक से भारी उछाल ला दिया है। चुनाव आयोग और सरकार के खिलाफ विपक्ष के इस आक्रामक तेवर ने सत्ता के गलियारों में सियासी सरगर्मी और तपिश को कई गुना बढ़ा दिया है। मिंटो रोड-कनॉट प्लेस जंक्शन से शुरू हुआ मार्च चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और कथित चुनावी गड़बड़ियों (SIR) के विरोध में ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन ने रविवार, 1 नवंबर को दिल्ली में मिंटो रोड-कनॉट प्लेस जंक्शन से एक विशाल मार्च निकाला। इस प्रदर्शन के तहत रामलीला मैदान में आयोजित विशाल महारैली में देश भर से हजारों विपक्षी समर्थक और कार्यकर्ता पहुंचे। रैली का नेतृत्व कांग्रेस नेता राहुल गांधी, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी और अन्य प्रमुख विपक्षी नेताओं ने किया। नेताओं के साथ समर्थकों ने बड़ी संख्या में लिया हिस्सा INDIA गठबंधन की दिल्ली रैली और मार्च को लेकर 10 लाख लोगों के जुटने की उम्मीद जताई गई थी, जबकि पुलिस अनुमान के अनुसार भीड़ 50,000 के करीब रही। नेताओं के साथ-साथ छात्र समूहों, नागरिक समाज संगठनों, श्रमिक संघों, महिलाओं और युवाओं ने भी इस प्रदर्शन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी को सुनने के लिए उत्सुक दिखे लोग कांग्रेस सांसद राहुल गांधी को सुनने के लिए उत्सुक दिखे लोग रामलीला मैदान में लोकसभा नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी को सुनने के लिए बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। दिल्ली के रामलीला मैदान में ‘वोट बचाओ, देश बचाओ महारैली’ को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने पीएम मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और सीईसी ज्ञानेश कुमार पर देश की आत्मा व संविधान पर हमला करने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि चुनावों में बड़े पैमाने पर धांधली हुई है और 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद लगभग 13.5 करोड़ (15%) मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए गए, जिसे उन्होंने “देशद्रोह” करार दिया। केंद्र सरकार और बीजेपी शासित राज्यों सरकारों पर साधा निशाना दिल्ली के रामलीला मैदान में ‘इंडिया’ गठबंधन की ‘वोट चोरी’ विरोधी महारैली को संबोधित करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र, यूपी, बिहार और महाराष्ट्र की सरकारों को ‘चोरी की सरकार’ करार दिया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि मोदी जी खुद को ही चुनते हैं, उन्हें जनता नहीं चुनती है और उनके सत्ता से बाहर होने पर ही देश का लोकतंत्र सुरक्षित रह सकता है। INDIA गठबंधन के नेताओं को साथ सैंकड़ों लोगों का मिला साथ मोदी सरकार, चुनाव आयोग और मतदाता सूची के विवादास्पद विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) की निंदा करने वाले झंडों, बैनरों और तख्तियों का एक विशाल समूह धीमी गति से चल रहे जुलूस के साथ-साथ चल रहा था। रामलीला मैदान हजारों इंडिया ब्लॉक समर्थकों से भर गया था, जिनमें युवा और छात्र समूह भी शामिल थे। पार्टी कार्यकर्ता कई राज्यों से राजधानी पहुंचे थे, जिनमें से कई रविवार सुबह ही आ गए थे और कई एक दिन पहले ही दिल्ली पहुंच चुके थे। सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव भी आए नजर   ‘इंडिया’ गठबंधन की महारैली को ‘लोकतंत्र की हल्दीघाटी’ करार देते हुए सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने अमित शाह के ‘अंगद के पैर’ वाले बयान पर तंज कसा कि जब जनाधार की जमीन ही खिसक चुकी है, तो पैर कहां टिकेगा। उन्होंने यूपी में 1.27 लाख मतदाताओं के नाम काटे जाने का मुद्दा उठाते हुए आरोप लगाया कि अपनी हार सामने देख भाजपा अब चुनाव आयोग के सहारे मतदाता सूची में हेराफेरी का खेल खेल रही है। मंच पर साथ दिखीं ममत बनर्जी और सोनिया गांधी महारैली के दौरान तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी का एक नया और बदला हुआ राजनीतिक अंदाज देखने को मिला। उन्होंने अपने भाषण की शुरुआत “मेरी नेता सोनिया जी को मेरा नमस्ते” कहकर की और राहुल गांधी को ‘लड़ाई लड़ रहे युवा नेता’ के रूप में संबोधित किया। मंच पर सोनिया गांधी के साथ उनकी नजदीकी और लंबे समय तक प्रतिद्वंद्वी रही माकपा के नेता एम ए बेबी का नाम लेना विपक्षी गठबंधन के भीतर बदलते सियासी समीकरणों को दर्शाता है। विपक्षी दलों में दिखाई दी एकजुटता   रामलीला मैदान से कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव, तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी, राजद नेता तेजस्वी यादव और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की नेता सुप्रिया सुले समेत विभिन्न विपक्षी दलों के वरिष्ठ नेता मंच पर दिखाई दिए  

महाराष्ट्र की राजनीति में भूचाल: क्या फिर एक होंगे उद्धव और शिंदे? एक नेता के बयान से सियासी पारे में उबाल

मुंबई 1 नवंबर 2026 Maharashtra politics :  महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर दोनों शिवसेनाओं (शिंदे गुट और उद्धव गुट) के एक साथ आने की सुगबुगाहट तेज हो गई है। शिवसेना (शिंदे गुट) के विधान परिषद सदस्य (MLC) हेमंत पाटिल के एक ताजा और बेहद सनसनीखेज बयान ने राज्य के राजनीतिक गलियारों में बड़ी हलचल पैदा कर दी है। (आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज) इस बयान के बाद सियासी गलियारों में यह सवाल सबसे बड़ा बन गया है कि क्या जिन दो धड़ों ने एक-दूसरे के खिलाफ जंग लड़ी थी, वे भविष्य में फिर से हाथ मिला सकते हैं? राजनीति में कुछ भी संभव: “जिंदगी भर जिनके खिलाफ हथियार उठाए, आज साथ बैठने का वक्त” हेमंत पाटिल ने राजनीति के अनिश्चित और अप्रत्याशित स्वभाव पर खुलकर बात की। उन्होंने टिप्पणी करते हुए कहा कि राजनीति में कभी भी कुछ भी हो सकता है। (आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज) इस दौरान उन्होंने एक बहुत बड़ा राजनीतिक सच बयां करते हुए कहा कि “जिंदगी भर जिनके खिलाफ हथियार उठाए, आज उन्हीं के साथ बैठने का वक्त आ चुका है।” दोनों शिवसेनाओं के एकजुट होने के फैसले पर उन्होंने स्पष्ट किया कि इस संबंध में मुख्यमंत्री/नेता एकनाथ शिंदे जो भी योग्य फैसला लेंगे, वह फैसला पार्टी के सभी नेताओं और कार्यकर्ताओं को पूरी तरह से मान्य होगा। जमीनी हकीकत: आम शिवसैनिकों का आपसी प्यार और नांदेड का दर्द पाटिल ने जमीनी स्तर पर काम करने वाले शिवसैनिकों के आपसी संबंधों का जिक्र करते हुए एक अहम बात रखी। उन्होंने कहा कि भले ही पार्टी टूट चुकी है और दो अलग-अलग शिवसेनाएं बन चुकी हैं, लेकिन आम शिवसैनिकों के बीच एक-दूसरे के प्रति आत्मीयता और लगाव का भाव आज भी वैसा ही बना हुआ है। शिवसैनिक आज भी एक-दूसरे के सुख-दुख में बढ़-चढ़कर शामिल होते हैं। उन्होंने नांदेड जिले की स्थिति का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि यदि शिवसेना अंदर से एक होती, (आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज) तो आज पूरे महाराष्ट्र और खासतौर पर नांदेड में पार्टी और कार्यकर्ताओं को जिस कड़े संघर्ष और परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, वह नौबत कभी नहीं आती। भाजपा से स्थानीय मतभेद और पालकमंत्री को सीधी सलाह बयान के दौरान हेमंत पाटिल ने सत्ताधारी महायुति गठबंधन में शामिल भारतीय जनता पार्टी (BJP) और शिवसेना के रिश्तों पर भी अपनी बेबाक राय रखी। उन्होंने खुले तौर पर स्वीकार किया कि जमीनी व स्थानीय स्तर पर भाजपा और शिवसेना के बीच निश्चित रूप से मतभेद और मनमुटाव मौजूद हैं। इन मतभेदों को दूर करने का सुझाव देते हुए उन्होंने कहा कि जो भी जिले के पालकमंत्री हैं, उन्हें खुद पहल करके आगे आना चाहिए और इन स्थानीय विवादों को तुरंत सुलझाना चाहिए ताकि कार्यकर्ताओं में सामंजस्य बन सके। महायुति गठबंधन पर रुख और वरिष्ठ नेताओं को चेतावनी गठबंधन की मौजूदा स्थिति के बारे में स्पष्टीकरण देते हुए पाटिल ने कहा कि फिलहाल महायुति गठबंधन में कोई बहुत बड़ी दरार या खटास नहीं पड़ी है। (आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज) हालांकि, उन्होंने चेतावनी भरे अंदाज में यह भी जोड़ा कि यदि समय रहते इन छोटी-छोटी स्थानीय परेशानियों को दूर नहीं किया गया, तो भविष्य में दिक्कतें बढ़ सकती हैं, इसलिए वरिष्ठ नेताओं को इस स्थिति पर समय रहते ध्यान देने की सख्त जरूरत है। क्या है बड़ा सवाल? हेमंत पाटिल के इस सस्पेंस से भरे बयान ने यह बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या आने वाले दिनों में शिंदे गुट और उद्धव ठाकरे गुट के बीच अंदरखाने कोई सियासी समीकरण या तालमेल बन रहा है? हालांकि अंतिम फैसला पूरी तरह से एकनाथ शिंदे के हाथ में है, लेकिन इस बयान ने महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर नई बहस छेड़ दी है।

धर्म

धीरेंद्र शास्त्री की राम-कृष्ण टिप्पणी पर गर्माई राजनीति: दिग्विजय बोले ‘मूर्ख’, बघेल का कटाक्ष- ‘रेबीज की जांच हो’

भोपाल/रायपुर 03/11/2026 Bageshwar Dham Controversy  : बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री द्वारा भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण को लेकर की गई एक टिप्पणी के बाद उपजा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। यद्यपि पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने इस बयान पर सार्वजनिक रूप से माफी मांग ली है, लेकिन मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के राजनीतिक गलियारों में इस मुद्दे पर जमकर बयानबाजी हो रही है। क्या था पूरा विवाद? विवाद की शुरुआत 28 अक्टूबर को मध्यप्रदेश के शिवपुरी (करैरा) में आयोजित रामकथा के दौरान हुई। कथा सुनाते हुए धीरेंद्र शास्त्री ने भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण के स्वरूप की तुलना की थी। उन्होंने कहा था कि भगवान राम सीधे खड़े रहते हैं, जबकि श्रीकृष्ण तीन जगह से टेढ़े (त्रिभंगी मुद्रा) दिखाई देते हैं। इस दौरान उन्होंने श्रीकृष्ण के खड़े होने के अंदाज और बांसुरी बजाने की शैली का भी जिक्र किया था। जैसे ही इस वक्तव्य का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, मथुरा के संतों और श्रद्धालुओं ने इस तुलना पर कड़ा ऐतराज जताया और इसे धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाला बताया। धीरेंद्र शास्त्री ने मांगी माफी बढ़ते विवाद को देखते हुए धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने एक वीडियो संदेश जारी कर अपनी सफाई दी और माफी मांगी। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य भगवान राम और कृष्ण में कोई भेद करना या किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं था। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे संत पद की व्याख्या करते हुए भावुकता में यह बात कह गए थे और वे स्वयं श्रीकृष्ण के अनन्य भक्त हैं। कांग्रेस नेताओं का तीखा हमला दिग्विजय सिंह: अपनी ‘सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा’ के दौरान दिग्विजय सिंह ने धीरेंद्र शास्त्री को ‘मूर्ख’ करार दिया और सवाल उठाया कि वे कब से बाबा बन गए। उनके साथ मौजूद कंप्यूटर बाबा ने भी शास्त्री को ‘राजनीतिक बाबा’ बताते हुए कहा कि बिना ज्ञान के कुछ लोगों को राजनीतिक लाभ के लिए आगे बढ़ाया जाता है। भूपेश बघेल: छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सोशल मीडिया पर तीखा प्रहार करते हुए लिखा कि “कोई तो केमिकल लोचा है, इनकी रेबीज वगैरह की जांच करवाना ठीक होगा।” उन्होंने सवाल उठाया कि हिंदुओं के आराध्यों का उपहास उड़ाए जाने पर अब धर्म के ठेकेदारों की भावनाएं आहत क्यों नहीं हो रही हैं? लक्ष्मण सिंह: पूर्व सांसद लक्ष्मण सिंह ने एक वीडियो जारी कर जनता से धीरेंद्र शास्त्री का पूर्ण बहिष्कार करने की अपील की। गौरतलब है कि एक तरफ जहाँ लक्ष्मण सिंह बहिष्कार की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ उनके भतीजे जयवर्धन सिंह और उनका परिवार शास्त्री का अनुयायी माना जाता है और उन्होंने पूर्व में शास्त्री को राघौगढ़ किले में आमंत्रित भी किया था। धीरेंद्र शास्त्री की माफी के बावजूद इस मुद्दे ने अब एक बड़े राजनीतिक विवाद का रूप ले लिया है।

धीरेंद्र शास्त्री की राम-कृष्ण टिप्पणी पर गर्माई राजनीति: दिग्विजय बोले ‘मूर्ख’, बघेल का कटाक्ष- ‘रेबीज की जांच हो’

भोपाल/रायपुर 03/11/2026 Bageshwar Dham Controversy  : बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र

मां बम्लेश्वरी के भक्तों के लिए बड़ी खबर: डोंगरगढ़ नवरात्रि मेले में 1100 जवानों का पहरा, पदयात्रियों को मिलेंगे 20 हजार रेडियम स्टिकर, जानें सुरक्षा और ट्रैफिक का पूरा प्लान

रायपुर/राजनांदगांव 11 अक्टूबर 2025 Dongargarh Navratri Mela:  शारदीय नवरात्रि के पावन अवसर

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