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स्मृति ईरानी का बड़ा हमला: राहुल गांधी की उम्र पर तंज, कहा- “अब लड़ाई अमेठी तक सीमित नहीं, सीधे राजधानी में आ गई है” ED और EOW का छत्तीसगढ़ में बड़ा एक्शन: रायपुर, बिलासपुर और राजनांदगांव में कई ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी गढ़ में बड़ी हार: क्या वाराणसी और नागपुर के चुनावी नतीजों से कमजोर हुआ राहुल गांधी का ‘वोट चोरी’ नैरेटिव? भाजपा ने पांच राज्यों में किए सोशल मीडिया संगठन में बदलाव, छत्तीसगढ़ के दो नेताओं को मिली बड़ी जिम्मेदारी प्रयागराज: घर में ज़मीन के नीचे दबे नीले ड्रमों से मिले करोड़ों रुपये, नोटबंदी के काले धन का सनसनीखेज खुलासा Honda CB350C का नया डार्क लुक: दिवाली से पहले कंपनी ने पेश किया ऑल-ब्लैक स्टाइल वेरिएंट

स्मृति ईरानी का बड़ा हमला: राहुल गांधी की उम्र पर तंज, कहा- “अब लड़ाई अमेठी तक सीमित नहीं, सीधे राजधानी में आ गई है”

नई दिल्ली 30/10/2026: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने हाल ही में रिपब्लिक टीवी को दिए एक इंटरव्यू में विपक्ष पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने राहुल गांधी की उम्र, सीजेपी (कॉकरोच जनता पार्टी) के आंदोलन और देश की राजनीति से जुड़े कई अहम मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखी। राहुल गांधी और ‘यूथ’ राजनीति पर तंज स्मृति ईरानी ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए उनकी उम्र पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, “56 साल का आदमी यूथ बनकर घूम रहा है। वो अपने आप को यूथ कह दें, इससे हकीकत नहीं बदलती।” सीजेपी नेताओं पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने आगे कहा कि 31 साल के लोग खुद को युवा बता रहे हैं, और इस हिसाब से तो मल्लिकार्जुन खरगे जी बाल अवस्था में हैं। “संसद के खिलाफ जंग का ऐलान कर चुके हैं राहुल” स्मृति ईरानी ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने चुनाव आयोग और सुप्रीम कोर्ट का अपमान किया है। उन्होंने कहा कि यह कोई रैंडम सोच नहीं, बल्कि सोच-समझकर किया गया कृत्य है। उन्होंने राहुल गांधी के उस बयान का जिक्र किया जिसमें उन्होंने कथित तौर पर ‘इंडियन स्टेट’ के खिलाफ लड़ने की बात कही थी। ईरानी ने कहा, “इंडियन स्टेट भारत की संसद है, जिसे 90 करोड़ हिंदुस्तानी चुनते हैं। राहुल गांधी ने 90 करोड़ हिंदुस्तानियों के खिलाफ जंग का ऐलान किया है।” कॉकरोच जनता पार्टी और लोकतंत्र पर विचार सीजेपी (कॉकरोच जनता पार्टी) के आंदोलन पर बात करते हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार का दायित्व हर नागरिक की बात सुनना है और यह नागरिकों का संवैधानिक अधिकार है। लोकतंत्र की ताकत कड़वी बातें सुनने में भी है। उन्होंने कहा, “उन्हें आप कॉकरोच कहें या कुछ भी कहें, जब वे जमीन पर ताकत आजमाते हैं तो जनता उन्हें बूथ पर हराती है।” “अब लड़ाई अमेठी में नहीं, सीधे राजधानी में है” जब उनसे पूछा गया कि क्या वे 2029 में एक बार फिर राहुल गांधी के खिलाफ चुनाव लड़ेंगी, तो उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी यह तय करती है कि कौन कहां से चुनाव लड़ेगा, लेकिन वे देश के हित के लिए हमेशा तैयार रहती हैं। अमेठी की राजनीति पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि अब लड़ाई सिर्फ अमेठी तक सीमित नहीं रह गई है। उन्होंने दावा किया कि देश की राजधानी में कुछ लोगों द्वारा ‘रिजीम चेंज’ (सत्ता परिवर्तन) की मांग करने और आतंक का समर्थन करने वालों के चलते अब असली रणभूमि दिल्ली बन चुकी है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी स्पष्ट किया है कि यह कुर्सी किसी की जागीर नहीं है, इसे जनता ही देती है और वही वापस लेती है।

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मैच ग्रुप की नई पहल: टिंडर और हिंज पर स्क्रीनशॉट बंद, सुरक्षा के लिए बायोमेट्रिक सत्यापन और I4C से हाथ मिलाया

नई दिल्ली / डिजिटल डेस्क 21 अक्टूबर 2026 Match Group India :ऑनलाइन डेटिंग प्लेटफॉर्म्स को उपयोगकर्ताओं—विशेषकर महिलाओं—के लिए सुरक्षित और भरोसेमंद बनाने की दिशा में मैच ग्रुप (Match Group) ने

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स्मृति ईरानी का बड़ा हमला: राहुल गांधी की उम्र पर तंज, कहा- “अब लड़ाई अमेठी तक सीमित नहीं, सीधे राजधानी में आ गई है”

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नई दिल्ली 29/10/2026 Honda CB350C : होंडा ने अपनी लोकप्रिय रेट्रो स्टाइल बाइक Honda CB350C को एक नए और आकर्षक ब्लैक लुक में पेश किया है। त्यौहारों के सीजन यानी दिवाली

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स्मृति ईरानी का बड़ा हमला: राहुल गांधी की उम्र पर तंज, कहा- “अब लड़ाई अमेठी तक सीमित नहीं, सीधे राजधानी में आ गई है”

नई दिल्ली 30/10/2026: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने हाल ही में रिपब्लिक टीवी को दिए एक इंटरव्यू में विपक्ष पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने राहुल गांधी की उम्र, सीजेपी (कॉकरोच जनता पार्टी) के आंदोलन और देश की राजनीति से जुड़े कई अहम मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखी। राहुल गांधी और ‘यूथ’ राजनीति पर तंज स्मृति ईरानी ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए उनकी उम्र पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, “56 साल का आदमी यूथ बनकर घूम रहा है। वो अपने आप को यूथ कह दें, इससे हकीकत नहीं बदलती।” सीजेपी नेताओं पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने आगे कहा कि 31 साल के लोग खुद को युवा बता रहे हैं, और इस हिसाब से तो मल्लिकार्जुन खरगे जी बाल अवस्था में हैं। “संसद के खिलाफ जंग का ऐलान कर चुके हैं राहुल” स्मृति ईरानी ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने चुनाव आयोग और सुप्रीम कोर्ट का अपमान किया है। उन्होंने कहा कि यह कोई रैंडम सोच नहीं, बल्कि सोच-समझकर किया गया कृत्य है। उन्होंने राहुल गांधी के उस बयान का जिक्र किया जिसमें उन्होंने कथित तौर पर ‘इंडियन स्टेट’ के खिलाफ लड़ने की बात कही थी। ईरानी ने कहा, “इंडियन स्टेट भारत की संसद है, जिसे 90 करोड़ हिंदुस्तानी चुनते हैं। राहुल गांधी ने 90 करोड़ हिंदुस्तानियों के खिलाफ जंग का ऐलान किया है।” कॉकरोच जनता पार्टी और लोकतंत्र पर विचार सीजेपी (कॉकरोच जनता पार्टी) के आंदोलन पर बात करते हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार का दायित्व हर नागरिक की बात सुनना है और यह नागरिकों का संवैधानिक अधिकार है। लोकतंत्र की ताकत कड़वी बातें सुनने में भी है। उन्होंने कहा, “उन्हें आप कॉकरोच कहें या कुछ भी कहें, जब वे जमीन पर ताकत आजमाते हैं तो जनता उन्हें बूथ पर हराती है।” “अब लड़ाई अमेठी में नहीं, सीधे राजधानी में है” जब उनसे पूछा गया कि क्या वे 2029 में एक बार फिर राहुल गांधी के खिलाफ चुनाव लड़ेंगी, तो उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी यह तय करती है कि कौन कहां से चुनाव लड़ेगा, लेकिन वे देश के हित के लिए हमेशा तैयार रहती हैं। अमेठी की राजनीति पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि अब लड़ाई सिर्फ अमेठी तक सीमित नहीं रह गई है। उन्होंने दावा किया कि देश की राजधानी में कुछ लोगों द्वारा ‘रिजीम चेंज’ (सत्ता परिवर्तन) की मांग करने और आतंक का समर्थन करने वालों के चलते अब असली रणभूमि दिल्ली बन चुकी है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी स्पष्ट किया है कि यह कुर्सी किसी की जागीर नहीं है, इसे जनता ही देती है और वही वापस लेती है।

गढ़ में बड़ी हार: क्या वाराणसी और नागपुर के चुनावी नतीजों से कमजोर हुआ राहुल गांधी का ‘वोट चोरी’ नैरेटिव?

नई दिल्ली 29/10/2026 Politics:  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के मुख्यालय नागपुर में हालिया विधान परिषद (MLC) चुनावों के परिणाम ने भारतीय राजनीति में एक नई बहस छेड़ दी है। आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज इन मजबूत राजनीतिक गढ़ों में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की हार ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के उस ‘वोट चोरी’ और चुनावी व्यवस्था पर उठाए जा रहे सवालों के नैरेटिव पर एक बड़ा राजनीतिक सवालिया निशान लगा दिया है। वाराणसी और नागपुर में क्या रहा चुनावी हाल? वाराणसी (मोदी का काशी): प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गढ़ में समाजवादी पार्टी ने शिक्षक और स्नातक—दोनों विधान परिषद सीटों पर अपनी जीत का परचम लहराया है। इससे यह साफ हुआ कि स्थानीय चुनावों में अजेय माने जाने वाले क्षेत्रों में भी सत्ताधारी दल को मात दी जा सकती है। नागपुर (RSS का मुख्यालय): वैचारिक रूप से संघ के इस मुख्य केंद्र पर कांग्रेस उम्मीदवार अभिजीत वंजारी ने BJP के सुधाकर कोहाले को शिकस्त दी। यह जीत विपक्षी खेमे के लिए एक बड़ा प्रतीकात्मक संदेश साबित हुई है। क्या राहुल गांधी के ‘वोट चोरी’ नैरेटिव को लगे झटके? राहुल गांधी लगातार देश की चुनावी प्रक्रिया, मतदाता सूचियों की पारदर्शिता और ईवीएम या मतदान प्रणाली को लेकर सवाल खड़े करते रहे हैं। आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज उनका यह नैरेटिव अक्सर यह संदेश देने की कोशिश करता है कि पूरी चुनावी व्यवस्था सत्ताधारी दल के पक्ष में काम करती है। लेकिन, इन राजनीतिक गढ़ों में BJP की हार इस व्यापक दावे के सामने एक तार्किक सवाल खड़ा करती है: यदि चुनावी व्यवस्था पूरी तरह से एकतरफा और बीजेपी के पक्ष में होती, तो पार्टी वाराणसी और नागपुर जैसी प्रतिष्ठित सीटें कैसे हार जाती? मतपत्रों (Ballot Papers) से जुड़े चुनाव और व्यवस्था का फर्क राजनीतिक विश्लेषकों का यह भी मानना है कि ये MLC चुनाव आम लोकसभा या विधानसभा चुनावों से अलग हैं। ये चुनाव इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) की बजाय पारंपरिक मतपत्रों (Ballot Papers) के जरिए हुए थे, जिनमें केवल विशिष्ट और पंजीकृत शिक्षक व स्नातक मतदाता ही हिस्सा लेते हैं। आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज इसलिए, इन स्थानीय परिणामों को सीधे तौर पर आम चुनावों की पूरी प्रक्रिया से जोड़कर देखना पूरी तरह सही नहीं होगा। निष्कर्ष: जीत-हार बनाम वास्तविक पारदर्शिता वाराणसी और नागपुर के नतीजे यह साबित करते हैं कि मजबूत राजनीतिक दुर्गों में भी सेंध लगाई जा सकती है और विपक्ष चुनाव जीत सकता है। यह परिणाम राहुल गांधी के ‘वोट चोरी’ वाले व्यापक नैरेटिव को चुनौती जरूर देता है, लेकिन चुनावी पारदर्शिता और अनियमितताओं के दावों का अंतिम फैसला किसी दल की जीत या हार से नहीं, बल्कि ठोस दस्तावेजों, सबूतों और स्वतंत्र जांच से ही संभव है। 🔴

भाजपा ने पांच राज्यों में किए सोशल मीडिया संगठन में बदलाव, छत्तीसगढ़ के दो नेताओं को मिली बड़ी जिम्मेदारी

नई दिल्ली /रायपुर 29 अक्टूबर 2026 BJP, Social Media Team :भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने आगामी चुनावी तैयारियों और संगठन को मजबूत करने के उद्देश्य से पांच राज्यों में अपने सोशल मीडिया ढांचे में फेरबदल करते हुए नई नियुक्तियां की हैं। पार्टी के राष्ट्रीय सोशल मीडिया संयोजक दीपक महस्के द्वारा जारी इस सूची में छत्तीसगढ़ के दो युवा नेताओं को दूसरे राज्यों में अहम प्रभार सौंपे गए हैं। प्रमुख नियुक्तियां: उत्तर प्रदेश: पंकज शुक्ला को सोशल मीडिया प्रभारी बनाया गया है, जबकि छत्तीसगढ़ के मितुल कोठारी को भी यहां सोशल मीडिया से जुड़ी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है। उत्तराखंड: मनन दानी को प्रभारी नियुक्त किया गया है, और छत्तीसगढ़ के सोमेश पांडे को भी उत्तराखंड में सोशल मीडिया का दायित्व सौंपा गया है। पंजाब: चेतन ब्रागटा को सोशल मीडिया प्रभारी की जिम्मेदारी मिली है। अन्य राज्य: इसके अलावा गोवा और मणिपुर में भी सोशल मीडिया टीम के लिए नए प्रभारियों और सदस्यों की नियुक्तियां की गई हैं। पार्टी द्वारा यह संगठनात्मक कदम विभिन्न राज्यों में चुनावी तैयारियों को तेज करने और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपनी पकड़ मजबूत करने की रणनीति के तहत उठाया गया है। सभी नियुक्तियां तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई हैं।

गौरव भाटिया का नसीरुद्दीन शाह पर तंज: बोले— ‘जिसे एसीपी राठौड़ समझा, वो निकला गुलफाम हसन’

नई दिल्ली 29 अक्टूबर 2026:   भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय प्रवक्ता गौरव भाटिया ने वरिष्ठ अभिनेता नसीरुद्दीन शाह के बयान पर तीखा हमला बोला है। यह विवाद तब शुरू हुआ जब नसीरुद्दीन शाह ने दिल्ली की जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी में विरोध-प्रदर्शन कर रहे छात्रों के समर्थन में एक वीडियो जारी किया और खुद को ‘दिमागी नक्सल’ बताया। भाटिया ने शाह के इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए 1999 की मशहूर बॉलीवुड फिल्म ‘सरफरोश’ का उदाहरण दिया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा: “जिसे हम एसीपी राठौड़ समझे थे, वह असल जिंदगी में गुलफाम हसन निकला।” गौरतलब है कि फिल्म ‘सरफरोश’ में आमिर खान ने ईमानदार पुलिस अधिकारी एसीपी अजय सिंह राठौड़ का किरदार निभाया था, जबकि नसीरुद्दीन शाह ने ‘गुलफाम हसन’ की भूमिका निभाई थी—जो कि एक पाकिस्तानी गजल गायक के रूप में भारत विरोधी गतिविधियों में शामिल जासूस था। नसीरुद्दीन शाह ने क्या कहा था? नसीरुद्दीन शाह ने जामिया मिलिया इस्लामिया के प्रदर्शनकारी छात्रों का समर्थन करते हुए एक वीडियो मैसेज साझा किया था। इस वीडियो में उन्होंने सरकार की नीतियों और रवैये पर सवाल उठाए और कहा कि आलोचकों को ‘राष्ट्र-विरोधी’ या ‘टुकड़े-टुकड़े गैंग’ का टैग दे दिया जाता है।  वो कहते हैं, ‘मैं फख्र के साथ कहता हूं, मैं दिमागी नक्सल हूं। दिमागी नक्सल के अलावा मालूम नहीं क्या-क्या लकब दिए हैं चौकीदार ने मुझ जैसे लोगों को, एंटी-नेशनल, टुकड़े-टुकड़े गैंग और मालूम नहीं क्या-क्या।’ उन्होंने आगे कहा, ‘टुकड़े-टुकड़े गैंग अगर इस मुल्क में कोई है, तो वो ये नाजायज हुकूमत है और मैं इस हुकूमत से एक सवाल पूछना चाहता हूं। और क्या-क्या करोगे तुम? हमारे मुल्क के नौजवानों की हिम्मत को तोड़ने के लिए, शिक्षा संस्थानों को बर्बाद करने के लिए और हमारे लोकतंत्र को खतरे में डालने के लिए, कितना करोगे? तुम और तुमने अपने इर्द-गिर्द जो बेवकूफ, बेईमानों की पलटन इकट्ठी की है, कहां तक जाओगे?’ इसके अलावा, शाह ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU), सत्यजीत रे फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट (SRFTI) और जामिया के छात्र आंदोलनों का जिक्र करते हुए कहा कि छात्रों के साथ किया गया बर्ताव भुलाया नहीं जा सकता। क्या है जामिया मिलिया इस्लामिया का विवाद? जामिया मिलिया इस्लामिया के छात्र विश्वविद्यालय में छात्र संघ चुनाव (Students’ Union Elections) को फिर से बहाल करने की मांग को लेकर लंबे समय से आंदोलन कर रहे हैं। प्रदर्शनकारी छात्रों की मुख्य मांगों में: छात्र संघ चुनाव दोबारा कराना। यूनिवर्सिटी के चीफ प्रॉक्टर को पद से हटाना। आंदोलन में शामिल छात्रों पर की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई को वापस लेना। मांगों के न माने जाने पर कुछ छात्रों ने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल भी शुरू कर दी है।

UP MLC Election Results: वाराणसी-आगरा में झटका, गोरखपुर में फंसा पेंच; नतीजों से BJP की चिंता बढ़ी

लखनऊ 29/10/2026 UP Politics : उत्तर प्रदेश में विधान परिषद (MLC) की 11 शिक्षक और स्नातक सीटों पर आए नतीजों व रुझानों ने प्रदेश की सियासत में हलचल तेज कर दी है। आगामी 2027 के विधानसभा चुनावों से ठीक पहले आए इन नतीजों में बीजेपी को अपनी पारंपरिक सीटों पर कड़ी टक्कर का सामना करना पड़ा है। अब तक सामने आए आंकड़ों के मुताबिक, बीजेपी 5 सीटों पर जीत दर्ज कर चुकी है और 1 सीट पर बढ़त बनाए हुए है। आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज वहीं, समाजवादी पार्टी (सपा) 2 सीटों पर जीत हासिल कर चुकी है और 3 अन्य सीटों पर आगे चल रही है। कुल मिलाकर नतीजों का यह आंकड़ा 2020 के चुनाव जैसा ही नजर आ रहा है, जहाँ बीजेपी की सीटों की संख्या में कोई इजाफा नहीं हो सका है, जबकि सपा को फायदा होता दिख रहा है। वाराणसी और आगरा में फिर लगा झटका वाराणसी और आगरा की शिक्षक सीटों पर बीजेपी को एक बार फिर हार का मुंह देखना पड़ा है। 2020 में भी ये सीटें पार्टी के हाथ से निकल गई थीं। इस बार इन सीटों को वापस हासिल करने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जनसभाओं से लेकर मंत्रियों और विधायकों की पूरी फौज मैदान में उतारी गई थी, लेकिन शिक्षकों का भरोसा जीतने में सपा उम्मीदवार ही कामयाब रहे। झांसी और लखनऊ में सपा को बढ़त स्नातक सीटों की बात करें तो झांसी और लखनऊ में बीजेपी पिछड़ती नजर आ रही है। आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज लखनऊ स्नातक सीट पर 2020 में बीजेपी ने परचम लहराया था, लेकिन इस बार सपा उम्मीदवार ने मजबूत पकड़ बना ली है। दोनों ही सीटों पर बीजेपी के सांसदों और मंत्रियों के सघन चुनाव प्रचार के बावजूद सपा की लीड बरकरार है। सीएम योगी के गढ़ गोरखपुर में कांटे की टक्कर सबसे दिलचस्प और चौंकाने वाला मुकाबला गोरखपुर शिक्षक सीट पर देखने को मिल रहा है। मुख्यमंत्री के गृह क्षेत्र में बीजेपी के उम्मीदवार ध्रुव त्रिपाठी और निर्दलीय प्रत्याशी राजीव यादव के बीच बेहद करीबी मुकाबला चल रहा है। बीजेपी यहाँ केवल कुछ वोटों के मामूली अंतर से आगे है। इस सीट पर निर्दलीय प्रत्याशी के कड़े रुख ने बीजेपी खेमे में तनाव बढ़ा दिया है। 2027 के चुनाव से पहले बीजेपी के लिए सबक 11 सीटों का यह चुनाव राज्य के लगभग 72 जिलों को कवर करता है। बीजेपी ने अपनी पूरी संगठनात्मक ताकत इस चुनाव में झोंक दी थी। आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज हालांकि सीटों के गणित के लिहाज से बीजेपी का आंकड़ा 6 पर ही टिकता दिख रहा है, लेकिन भारी-भरकम प्रचार के बावजूद सीटें न बढ़ा पाना और वाराणसी-गोरखपुर जैसे क्षेत्रों में संघर्ष करना, पार्टी के लिए एक बड़ा राजनीतिक संदेश माना जा रहा है। 📍

कर्नाटक MLC चुनाव: कांग्रेस का ‘सूपड़ा साफ’, NDA गठबंधन ने चारों सीटों पर फहराया परचम

बेंगलुरु 29/10/2026 Karnataka MLC Elections: कर्नाटक विधान परिषद (MLC) की चार सीटों पर हुए चुनावों में राज्य की सत्ताधारी कांग्रेस पार्टी को करारी हार का सामना करना पड़ा है। कांग्रेस इस चुनाव में अपना खाता तक नहीं खोल पाई, जबकि भारतीय जनता पार्टी (BJP) और जनता दल (सेक्युलर) यानी JD(S) के राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने चारों सीटों पर शानदार जीत हासिल की है। 23 अक्टूबर को हुए इस चुनाव को BJP और JD(S) गठबंधन के बीच तालमेल की बड़ी परीक्षा के रूप में देखा जा रहा था, जिसमें यह गठबंधन 100 प्रतिशत सफलता के साथ खरा उतरा है। शिक्षकों और स्नातकों के बीच NDA का दबदबा चुनाव परिणामों से साफ हो गया है कि कांग्रेस पार्टी शिक्षकों और स्नातकों के वर्ग में अपना विश्वास बनाने में नाकाम रही। NDA गठबंधन ने चारों क्षेत्रों में एकतरफा बढ़त बनाई: उत्तर-पूर्व शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र: BJP उम्मीदवार शशील जी. नमोशी ने कांग्रेस के शरणप्पा मत्तूर को मात देकर अपनी पांचवीं जीत दर्ज की। उल्लेखनीय है कि यह क्षेत्र (कलबुर्गी) कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे का गृह क्षेत्र है। दक्षिण-पूर्व स्नातक निर्वाचन क्षेत्र: BJP के के.एम. सुरेश ने कांग्रेस के उम्मीदवार शशि हुलिकुंटे मुट्ट को पराजित किया। पश्चिम स्नातक निर्वाचन क्षेत्र: BJP के एस.वी. संकानूर ने कांग्रेस के मोहन लिम्बिकाई को शिकस्त दी। बेंगलुरु शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र: NDA के सहयोगी दल JD(S) ने इस सीट पर कब्जा जमाया। राजनीतिक प्रभाव यद्यपि इन नतीजों से कर्नाटक की सत्ताधारी कांग्रेस सरकार की स्थिरता पर कोई सीधा संकट नहीं आएगा, लेकिन विपक्ष को 2023 में सत्ता में आई कांग्रेस सरकार को घेरने और हमलावर होने का नया राजनीतिक हथियार मिल गया है। विधान परिषद का गणित 75 सदस्यों वाली कर्नाटक विधान परिषद में वर्तमान स्थिति इस प्रकार है: कांग्रेस: 38 BJP: 24 JD(S): 6 निर्दलीय: 1 सभापति: 1 मनोनीत सीटें (खाली): 5

टेक्नोलॉजी

क्या AI खत्म कर देगा पारंपरिक बैंकिंग? शेखर कपूर के सवाल पर छिड़ी नई बहस

नई दिल्ली 16 अक्टूबर 2026 Artificial Intelligence : आने वाले समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) बैंकिंग सेक्टर के कामकाज और कारोबार को पूरी तरह से बदल सकता है। मशहूर फिल्म निर्माता शेखर कपूर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म लिंक्डइन पर एक विचारोत्तेजक पोस्ट शेयर करते हुए सवाल उठाया है—“अगर एआई खुद लोगों के पैसे संभालने, निवेश के बेहतर विकल्प खोजने और अधिक ब्याज दिलाने का काम करने लगे, तो फिर पारंपरिक बैंकों की जरूरत ही क्यों पड़ेगी?” शेखर कपूर की इस पोस्ट ने इंटरनेट पर एक नई बहस को जन्म दे दिया है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि एआई बैंकिंग उद्योग को बड़ा नुकसान पहुंचा सकता है, वहीं अन्य का कहना है कि बैंक बंद नहीं होंगे, बल्कि उनका काम करने का तरीका पूरी तरह बदल जाएगा। Advt बैंकों की कमाई पर कैसे पड़ेगा असर? शेखर कपूर के अनुसार, बैंक जमाकर्ताओं के पैसे को कर्ज या निवेश में लगाकर बड़ी कमाई करते हैं और उसके बदले ग्राहकों को बहुत कम ब्याज देते हैं। बैंकों का मुनाफा उन ग्राहकों से भी होता है, जो आलस या झंझट के कारण बेहतर ब्याज दरों की तलाश में अपना पैसा दूसरी जगह ट्रांसफर नहीं करते। लेकिन अगर AI एजेंट हर रात ग्राहक के फंड के लिए खुद ही सबसे ज्यादा ब्याज देने वाले विकल्प खोजने लगें, तो ग्राहकों को खुद मेहनत नहीं करनी पड़ेगी। ऐसे में बैंक ग्राहकों को कम ब्याज दर देकर पहले की तरह आसानी से मुनाफा नहीं कमा सकेंगे। क्या AI पूरी तरह से बैंकों की जगह ले सकता है? बहस में शामिल कई विशेषज्ञों का मानना है कि सिर्फ एआई बैंकिंग का विकल्प नहीं बन सकता। सुरक्षा और जिम्मेदारी: लिंक्डइन यूजर अनय महिमकर ने लिखा कि एआई वित्तीय फैसले लेने में मदद तो कर सकता है, लेकिन कर्ज देना, जोखिम उठाना, सरकारी नियमों (Compliance) का पालन करना और भरोसा कायम रखना बैंकों की प्राथमिक जिम्मेदारी रहेगी। सटीक लोन प्रक्रिया: विशेषज्ञ कृष्णा लक्मसानी का कहना है कि एआई ग्राहकों की आमदनी और खर्चों का विश्लेषण करके उधार देने वालों और लेने वालों के बीच सीधा संपर्क बना सकता है। इससे बिचौलियों का असर कम होगा और एआई एजेंट ग्राहकों की ओर से बेहतर ब्याज दरों के लिए बातचीत (Negotiation) भी कर सकेंगे। बैंकों का भविष्य: क्या होंगी नई चुनौतियां? विशेषज्ञों का मानना है कि पैसों की सुरक्षा, डिजिटल पेमेंट और सरकारी योजनाओं के लाभ के लिए बैंकों की प्रासंगिकता बनी रहेगी। हालाँकि, बैंकों के सामने सबसे बड़ी चुनौती ग्राहकों को अपने साथ बनाए रखने की होगी। जो बैंक नई तकनीक, बेहतर ब्याज दरें और एआई-आधारित सेवाएं अपनाएंगे, वे ही भविष्य की बैंकिंग रेस में आगे टिक पाएंगे। 📍

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स्मृति ईरानी का बड़ा हमला: राहुल गांधी की उम्र पर तंज, कहा- “अब लड़ाई अमेठी तक सीमित नहीं, सीधे राजधानी में आ गई है”

नई दिल्ली 30/10/2026: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने हाल ही में रिपब्लिक टीवी को दिए एक इंटरव्यू में विपक्ष पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने राहुल गांधी की उम्र, सीजेपी (कॉकरोच जनता पार्टी) के आंदोलन और देश की राजनीति से जुड़े कई अहम मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखी। राहुल गांधी और ‘यूथ’ राजनीति पर तंज स्मृति ईरानी ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए उनकी उम्र पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, “56 साल का आदमी यूथ बनकर घूम रहा है। वो अपने आप को यूथ कह दें, इससे हकीकत नहीं बदलती।” सीजेपी नेताओं पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने आगे कहा कि 31 साल के लोग खुद को युवा बता रहे हैं, और इस हिसाब से तो मल्लिकार्जुन खरगे जी बाल अवस्था में हैं। “संसद के खिलाफ जंग का ऐलान कर चुके हैं राहुल” स्मृति ईरानी ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने चुनाव आयोग और सुप्रीम कोर्ट का अपमान किया है। उन्होंने कहा कि यह कोई रैंडम सोच नहीं, बल्कि सोच-समझकर किया गया कृत्य है। उन्होंने राहुल गांधी के उस बयान का जिक्र किया जिसमें उन्होंने कथित तौर पर ‘इंडियन स्टेट’ के खिलाफ लड़ने की बात कही थी। ईरानी ने कहा, “इंडियन स्टेट भारत की संसद है, जिसे 90 करोड़ हिंदुस्तानी चुनते हैं। राहुल गांधी ने 90 करोड़ हिंदुस्तानियों के खिलाफ जंग का ऐलान किया है।” कॉकरोच जनता पार्टी और लोकतंत्र पर विचार सीजेपी (कॉकरोच जनता पार्टी) के आंदोलन पर बात करते हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार का दायित्व हर नागरिक की बात सुनना है और यह नागरिकों का संवैधानिक अधिकार है। लोकतंत्र की ताकत कड़वी बातें सुनने में भी है। उन्होंने कहा, “उन्हें आप कॉकरोच कहें या कुछ भी कहें, जब वे जमीन पर ताकत आजमाते हैं तो जनता उन्हें बूथ पर हराती है।” “अब लड़ाई अमेठी में नहीं, सीधे राजधानी में है” जब उनसे पूछा गया कि क्या वे 2029 में एक बार फिर राहुल गांधी के खिलाफ चुनाव लड़ेंगी, तो उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी यह तय करती है कि कौन कहां से चुनाव लड़ेगा, लेकिन वे देश के हित के लिए हमेशा तैयार रहती हैं। अमेठी की राजनीति पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि अब लड़ाई सिर्फ अमेठी तक सीमित नहीं रह गई है। उन्होंने दावा किया कि देश की राजधानी में कुछ लोगों द्वारा ‘रिजीम चेंज’ (सत्ता परिवर्तन) की मांग करने और आतंक का समर्थन करने वालों के चलते अब असली रणभूमि दिल्ली बन चुकी है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी स्पष्ट किया है कि यह कुर्सी किसी की जागीर नहीं है, इसे जनता ही देती है और वही वापस लेती है।

गढ़ में बड़ी हार: क्या वाराणसी और नागपुर के चुनावी नतीजों से कमजोर हुआ राहुल गांधी का ‘वोट चोरी’ नैरेटिव?

नई दिल्ली 29/10/2026 Politics:  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के मुख्यालय नागपुर में हालिया विधान परिषद (MLC) चुनावों के परिणाम ने भारतीय राजनीति में एक नई बहस छेड़ दी है। आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज इन मजबूत राजनीतिक गढ़ों में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की हार ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के उस ‘वोट चोरी’ और चुनावी व्यवस्था पर उठाए जा रहे सवालों के नैरेटिव पर एक बड़ा राजनीतिक सवालिया निशान लगा दिया है। वाराणसी और नागपुर में क्या रहा चुनावी हाल? वाराणसी (मोदी का काशी): प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गढ़ में समाजवादी पार्टी ने शिक्षक और स्नातक—दोनों विधान परिषद सीटों पर अपनी जीत का परचम लहराया है। इससे यह साफ हुआ कि स्थानीय चुनावों में अजेय माने जाने वाले क्षेत्रों में भी सत्ताधारी दल को मात दी जा सकती है। नागपुर (RSS का मुख्यालय): वैचारिक रूप से संघ के इस मुख्य केंद्र पर कांग्रेस उम्मीदवार अभिजीत वंजारी ने BJP के सुधाकर कोहाले को शिकस्त दी। यह जीत विपक्षी खेमे के लिए एक बड़ा प्रतीकात्मक संदेश साबित हुई है। क्या राहुल गांधी के ‘वोट चोरी’ नैरेटिव को लगे झटके? राहुल गांधी लगातार देश की चुनावी प्रक्रिया, मतदाता सूचियों की पारदर्शिता और ईवीएम या मतदान प्रणाली को लेकर सवाल खड़े करते रहे हैं। आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज उनका यह नैरेटिव अक्सर यह संदेश देने की कोशिश करता है कि पूरी चुनावी व्यवस्था सत्ताधारी दल के पक्ष में काम करती है। लेकिन, इन राजनीतिक गढ़ों में BJP की हार इस व्यापक दावे के सामने एक तार्किक सवाल खड़ा करती है: यदि चुनावी व्यवस्था पूरी तरह से एकतरफा और बीजेपी के पक्ष में होती, तो पार्टी वाराणसी और नागपुर जैसी प्रतिष्ठित सीटें कैसे हार जाती? मतपत्रों (Ballot Papers) से जुड़े चुनाव और व्यवस्था का फर्क राजनीतिक विश्लेषकों का यह भी मानना है कि ये MLC चुनाव आम लोकसभा या विधानसभा चुनावों से अलग हैं। ये चुनाव इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) की बजाय पारंपरिक मतपत्रों (Ballot Papers) के जरिए हुए थे, जिनमें केवल विशिष्ट और पंजीकृत शिक्षक व स्नातक मतदाता ही हिस्सा लेते हैं। आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज इसलिए, इन स्थानीय परिणामों को सीधे तौर पर आम चुनावों की पूरी प्रक्रिया से जोड़कर देखना पूरी तरह सही नहीं होगा। निष्कर्ष: जीत-हार बनाम वास्तविक पारदर्शिता वाराणसी और नागपुर के नतीजे यह साबित करते हैं कि मजबूत राजनीतिक दुर्गों में भी सेंध लगाई जा सकती है और विपक्ष चुनाव जीत सकता है। यह परिणाम राहुल गांधी के ‘वोट चोरी’ वाले व्यापक नैरेटिव को चुनौती जरूर देता है, लेकिन चुनावी पारदर्शिता और अनियमितताओं के दावों का अंतिम फैसला किसी दल की जीत या हार से नहीं, बल्कि ठोस दस्तावेजों, सबूतों और स्वतंत्र जांच से ही संभव है। 🔴

भाजपा ने पांच राज्यों में किए सोशल मीडिया संगठन में बदलाव, छत्तीसगढ़ के दो नेताओं को मिली बड़ी जिम्मेदारी

नई दिल्ली /रायपुर 29 अक्टूबर 2026 BJP, Social Media Team :भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने आगामी चुनावी तैयारियों और संगठन को मजबूत करने के उद्देश्य से पांच राज्यों में अपने सोशल मीडिया ढांचे में फेरबदल करते हुए नई नियुक्तियां की हैं। पार्टी के राष्ट्रीय सोशल मीडिया संयोजक दीपक महस्के द्वारा जारी इस सूची में छत्तीसगढ़ के दो युवा नेताओं को दूसरे राज्यों में अहम प्रभार सौंपे गए हैं। प्रमुख नियुक्तियां: उत्तर प्रदेश: पंकज शुक्ला को सोशल मीडिया प्रभारी बनाया गया है, जबकि छत्तीसगढ़ के मितुल कोठारी को भी यहां सोशल मीडिया से जुड़ी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है। उत्तराखंड: मनन दानी को प्रभारी नियुक्त किया गया है, और छत्तीसगढ़ के सोमेश पांडे को भी उत्तराखंड में सोशल मीडिया का दायित्व सौंपा गया है। पंजाब: चेतन ब्रागटा को सोशल मीडिया प्रभारी की जिम्मेदारी मिली है। अन्य राज्य: इसके अलावा गोवा और मणिपुर में भी सोशल मीडिया टीम के लिए नए प्रभारियों और सदस्यों की नियुक्तियां की गई हैं। पार्टी द्वारा यह संगठनात्मक कदम विभिन्न राज्यों में चुनावी तैयारियों को तेज करने और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपनी पकड़ मजबूत करने की रणनीति के तहत उठाया गया है। सभी नियुक्तियां तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई हैं।

गौरव भाटिया का नसीरुद्दीन शाह पर तंज: बोले— ‘जिसे एसीपी राठौड़ समझा, वो निकला गुलफाम हसन’

नई दिल्ली 29 अक्टूबर 2026:   भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय प्रवक्ता गौरव भाटिया ने वरिष्ठ अभिनेता नसीरुद्दीन शाह के बयान पर तीखा हमला बोला है। यह विवाद तब शुरू हुआ जब नसीरुद्दीन शाह ने दिल्ली की जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी में विरोध-प्रदर्शन कर रहे छात्रों के समर्थन में एक वीडियो जारी किया और खुद को ‘दिमागी नक्सल’ बताया। भाटिया ने शाह के इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए 1999 की मशहूर बॉलीवुड फिल्म ‘सरफरोश’ का उदाहरण दिया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा: “जिसे हम एसीपी राठौड़ समझे थे, वह असल जिंदगी में गुलफाम हसन निकला।” गौरतलब है कि फिल्म ‘सरफरोश’ में आमिर खान ने ईमानदार पुलिस अधिकारी एसीपी अजय सिंह राठौड़ का किरदार निभाया था, जबकि नसीरुद्दीन शाह ने ‘गुलफाम हसन’ की भूमिका निभाई थी—जो कि एक पाकिस्तानी गजल गायक के रूप में भारत विरोधी गतिविधियों में शामिल जासूस था। नसीरुद्दीन शाह ने क्या कहा था? नसीरुद्दीन शाह ने जामिया मिलिया इस्लामिया के प्रदर्शनकारी छात्रों का समर्थन करते हुए एक वीडियो मैसेज साझा किया था। इस वीडियो में उन्होंने सरकार की नीतियों और रवैये पर सवाल उठाए और कहा कि आलोचकों को ‘राष्ट्र-विरोधी’ या ‘टुकड़े-टुकड़े गैंग’ का टैग दे दिया जाता है।  वो कहते हैं, ‘मैं फख्र के साथ कहता हूं, मैं दिमागी नक्सल हूं। दिमागी नक्सल के अलावा मालूम नहीं क्या-क्या लकब दिए हैं चौकीदार ने मुझ जैसे लोगों को, एंटी-नेशनल, टुकड़े-टुकड़े गैंग और मालूम नहीं क्या-क्या।’ उन्होंने आगे कहा, ‘टुकड़े-टुकड़े गैंग अगर इस मुल्क में कोई है, तो वो ये नाजायज हुकूमत है और मैं इस हुकूमत से एक सवाल पूछना चाहता हूं। और क्या-क्या करोगे तुम? हमारे मुल्क के नौजवानों की हिम्मत को तोड़ने के लिए, शिक्षा संस्थानों को बर्बाद करने के लिए और हमारे लोकतंत्र को खतरे में डालने के लिए, कितना करोगे? तुम और तुमने अपने इर्द-गिर्द जो बेवकूफ, बेईमानों की पलटन इकट्ठी की है, कहां तक जाओगे?’ इसके अलावा, शाह ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU), सत्यजीत रे फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट (SRFTI) और जामिया के छात्र आंदोलनों का जिक्र करते हुए कहा कि छात्रों के साथ किया गया बर्ताव भुलाया नहीं जा सकता। क्या है जामिया मिलिया इस्लामिया का विवाद? जामिया मिलिया इस्लामिया के छात्र विश्वविद्यालय में छात्र संघ चुनाव (Students’ Union Elections) को फिर से बहाल करने की मांग को लेकर लंबे समय से आंदोलन कर रहे हैं। प्रदर्शनकारी छात्रों की मुख्य मांगों में: छात्र संघ चुनाव दोबारा कराना। यूनिवर्सिटी के चीफ प्रॉक्टर को पद से हटाना। आंदोलन में शामिल छात्रों पर की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई को वापस लेना। मांगों के न माने जाने पर कुछ छात्रों ने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल भी शुरू कर दी है।

UP MLC Election Results: वाराणसी-आगरा में झटका, गोरखपुर में फंसा पेंच; नतीजों से BJP की चिंता बढ़ी

लखनऊ 29/10/2026 UP Politics : उत्तर प्रदेश में विधान परिषद (MLC) की 11 शिक्षक और स्नातक सीटों पर आए नतीजों व रुझानों ने प्रदेश की सियासत में हलचल तेज कर दी है। आगामी 2027 के विधानसभा चुनावों से ठीक पहले आए इन नतीजों में बीजेपी को अपनी पारंपरिक सीटों पर कड़ी टक्कर का सामना करना पड़ा है। अब तक सामने आए आंकड़ों के मुताबिक, बीजेपी 5 सीटों पर जीत दर्ज कर चुकी है और 1 सीट पर बढ़त बनाए हुए है। आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज वहीं, समाजवादी पार्टी (सपा) 2 सीटों पर जीत हासिल कर चुकी है और 3 अन्य सीटों पर आगे चल रही है। कुल मिलाकर नतीजों का यह आंकड़ा 2020 के चुनाव जैसा ही नजर आ रहा है, जहाँ बीजेपी की सीटों की संख्या में कोई इजाफा नहीं हो सका है, जबकि सपा को फायदा होता दिख रहा है। वाराणसी और आगरा में फिर लगा झटका वाराणसी और आगरा की शिक्षक सीटों पर बीजेपी को एक बार फिर हार का मुंह देखना पड़ा है। 2020 में भी ये सीटें पार्टी के हाथ से निकल गई थीं। इस बार इन सीटों को वापस हासिल करने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जनसभाओं से लेकर मंत्रियों और विधायकों की पूरी फौज मैदान में उतारी गई थी, लेकिन शिक्षकों का भरोसा जीतने में सपा उम्मीदवार ही कामयाब रहे। झांसी और लखनऊ में सपा को बढ़त स्नातक सीटों की बात करें तो झांसी और लखनऊ में बीजेपी पिछड़ती नजर आ रही है। आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज लखनऊ स्नातक सीट पर 2020 में बीजेपी ने परचम लहराया था, लेकिन इस बार सपा उम्मीदवार ने मजबूत पकड़ बना ली है। दोनों ही सीटों पर बीजेपी के सांसदों और मंत्रियों के सघन चुनाव प्रचार के बावजूद सपा की लीड बरकरार है। सीएम योगी के गढ़ गोरखपुर में कांटे की टक्कर सबसे दिलचस्प और चौंकाने वाला मुकाबला गोरखपुर शिक्षक सीट पर देखने को मिल रहा है। मुख्यमंत्री के गृह क्षेत्र में बीजेपी के उम्मीदवार ध्रुव त्रिपाठी और निर्दलीय प्रत्याशी राजीव यादव के बीच बेहद करीबी मुकाबला चल रहा है। बीजेपी यहाँ केवल कुछ वोटों के मामूली अंतर से आगे है। इस सीट पर निर्दलीय प्रत्याशी के कड़े रुख ने बीजेपी खेमे में तनाव बढ़ा दिया है। 2027 के चुनाव से पहले बीजेपी के लिए सबक 11 सीटों का यह चुनाव राज्य के लगभग 72 जिलों को कवर करता है। बीजेपी ने अपनी पूरी संगठनात्मक ताकत इस चुनाव में झोंक दी थी। आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज हालांकि सीटों के गणित के लिहाज से बीजेपी का आंकड़ा 6 पर ही टिकता दिख रहा है, लेकिन भारी-भरकम प्रचार के बावजूद सीटें न बढ़ा पाना और वाराणसी-गोरखपुर जैसे क्षेत्रों में संघर्ष करना, पार्टी के लिए एक बड़ा राजनीतिक संदेश माना जा रहा है। 📍

कर्नाटक MLC चुनाव: कांग्रेस का ‘सूपड़ा साफ’, NDA गठबंधन ने चारों सीटों पर फहराया परचम

बेंगलुरु 29/10/2026 Karnataka MLC Elections: कर्नाटक विधान परिषद (MLC) की चार सीटों पर हुए चुनावों में राज्य की सत्ताधारी कांग्रेस पार्टी को करारी हार का सामना करना पड़ा है। कांग्रेस इस चुनाव में अपना खाता तक नहीं खोल पाई, जबकि भारतीय जनता पार्टी (BJP) और जनता दल (सेक्युलर) यानी JD(S) के राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने चारों सीटों पर शानदार जीत हासिल की है। 23 अक्टूबर को हुए इस चुनाव को BJP और JD(S) गठबंधन के बीच तालमेल की बड़ी परीक्षा के रूप में देखा जा रहा था, जिसमें यह गठबंधन 100 प्रतिशत सफलता के साथ खरा उतरा है। शिक्षकों और स्नातकों के बीच NDA का दबदबा चुनाव परिणामों से साफ हो गया है कि कांग्रेस पार्टी शिक्षकों और स्नातकों के वर्ग में अपना विश्वास बनाने में नाकाम रही। NDA गठबंधन ने चारों क्षेत्रों में एकतरफा बढ़त बनाई: उत्तर-पूर्व शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र: BJP उम्मीदवार शशील जी. नमोशी ने कांग्रेस के शरणप्पा मत्तूर को मात देकर अपनी पांचवीं जीत दर्ज की। उल्लेखनीय है कि यह क्षेत्र (कलबुर्गी) कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे का गृह क्षेत्र है। दक्षिण-पूर्व स्नातक निर्वाचन क्षेत्र: BJP के के.एम. सुरेश ने कांग्रेस के उम्मीदवार शशि हुलिकुंटे मुट्ट को पराजित किया। पश्चिम स्नातक निर्वाचन क्षेत्र: BJP के एस.वी. संकानूर ने कांग्रेस के मोहन लिम्बिकाई को शिकस्त दी। बेंगलुरु शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र: NDA के सहयोगी दल JD(S) ने इस सीट पर कब्जा जमाया। राजनीतिक प्रभाव यद्यपि इन नतीजों से कर्नाटक की सत्ताधारी कांग्रेस सरकार की स्थिरता पर कोई सीधा संकट नहीं आएगा, लेकिन विपक्ष को 2023 में सत्ता में आई कांग्रेस सरकार को घेरने और हमलावर होने का नया राजनीतिक हथियार मिल गया है। विधान परिषद का गणित 75 सदस्यों वाली कर्नाटक विधान परिषद में वर्तमान स्थिति इस प्रकार है: कांग्रेस: 38 BJP: 24 JD(S): 6 निर्दलीय: 1 सभापति: 1 मनोनीत सीटें (खाली): 5

धर्म

चारधाम यात्रा 2026: श्रद्धालुओं का ऐतिहासिक रिकॉर्ड, 60 लाख से अधिक भक्तों ने किए दर्शन

देहरादून 23 अक्टूबर 2026 Char Dham Yatra 2026 : उत्तराखंड की प्रसिद्ध चारधाम यात्रा इस वर्ष अपने अंतिम चरण में प्रवेश कर चुकी है। हिमालयी तीर्थस्थलों के दर्शन के लिए इस सीजन में आस्था का जनसैलाब उमड़ा, जिसने पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस सीजन में अब तक 60 लाख (6 मिलियन) से अधिक तीर्थयात्री चारों पवित्र धामों—बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री—के दर्शन कर चुके हैं। बद्रीनाथ धाम शीर्ष पर, केदारनाथ दूसरे स्थान पर प्रशासन द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष श्रद्धालुओं की पहली पसंद बद्रीनाथ धाम रहा, जहाँ सबसे अधिक 20,69,866 तीर्थयात्री पहुँचे। आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज वहीं, केदारनाथ धाम 17,75,059 श्रद्धालुओं की उपस्थिति के साथ दूसरे स्थान पर रहा। उल्लेखनीय है कि पिछले वर्षों की तुलना में इस बार श्रद्धालुओं की संख्या में भारी वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2023 में 56 लाख और वर्ष 2024 में 50 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने दर्शन किए थे, जबकि इस बार यह संख्या 60 लाख के पार पहुँच गई है। 16 नवंबर को कपाट बंद होने के साथ समाप्त होगा ग्रीष्मकालीन चरण 19 अप्रैल 2026 को शुरू हुई यह पवित्र यात्रा आगामी 16 नवंबर को बद्रीनाथ धाम के कपाट बंद होने के साथ ही शीतकाल के लिए विश्राम लेगी। हालांकि, इसके बाद शीतकालीन चारधाम यात्रा का शुभारंभ होगा। आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज उत्तरकाशी के जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने बताया कि प्रशासन शीतकालीन यात्रा की तैयारियों पर मुस्तैदी से काम कर रहा है। माँ गंगा के मुखबा और माँ यमुना के खरसाली स्थित शीतकालीन निवासों पर विराजमान होने के बाद भक्त वहाँ दर्शन कर सकेंगे। इसी तरह केदारनाथ धाम के कपाट बंद होने के बाद उखीमठ में श्रद्धालु बाबा केदार के दर्शन जारी रख सकेंगे। मानसून और आपदा की चुनौतियों के बीच सुगम संचालन इस वर्ष मानसून के दौरान प्राकृतिक आपदाओं की चुनौतियाँ सामने आईं, लेकिन राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन के त्वरित प्रयासों से यात्रा को सुरक्षित रूप से जारी रखा गया। श्रद्धालुओं के लिए मार्गों पर स्वास्थ्य, सुरक्षा, यातायात और आपातकालीन सुविधाओं को मुस्तैद किया गया था। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा: “60 लाख से अधिक श्रद्धालुओं का आगमन उत्तराखंड की पवित्रता और लोगों की अटूट आस्था को दर्शाता है। राज्य सरकार हर श्रद्धालु की यात्रा को सुरक्षित, सुगम और सुव्यवस्थित बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत है।”

मां बम्लेश्वरी के भक्तों के लिए बड़ी खबर: डोंगरगढ़ नवरात्रि मेले में 1100 जवानों का पहरा, पदयात्रियों को मिलेंगे 20 हजार रेडियम स्टिकर, जानें सुरक्षा और ट्रैफिक का पूरा प्लान

रायपुर/राजनांदगांव 11 अक्टूबर 2025 Dongargarh Navratri Mela:  शारदीय नवरात्रि के पावन अवसर

रामदेव पीर जयंती पर भव्य समारोह: गुजराती समाज की नवीन कार्यकारिणी का हुआ शपथ ग्रहण, कैबिनेट मंत्री लखनलाल देवांगन ने की 20 लाख की घोषणा

समारोह में कैबिनेट मंत्री लखनलाल देवांगन,जिला भाजपाध्यक्ष गोपाल मोदी एवं निगम सभापति

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