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इजरायल चुनाव: बंपर वोटिंग के बाद एग्जिट पोल में त्रिशंकु का इशारा, बेंजामिन नेतन्याहू और गादी आइजनकोट में कांटे की टक्कर

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Israel Election 2026: 7 अक्टूबर, 2023 के हमास हमले और उसके बाद गाजा, लेबनान तथा ईरान में चले भीषण युद्ध के बाद इजरायल में हुआ पहला आम चुनाव अब बेहद दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गया है। वर्ष 1988 (और हाल के दशकों में 1999 के रिकॉर्ड स्तर 77.7%) के बाद इस चुनाव में ऐतिहासिक रूप से रिकॉर्ड तोड़ वोटिंग दर्ज की गई है। मतदान की प्रक्रिया समाप्त होने के बाद अब नतीजों और रुझानों पर दुनिया भर की नजरें टिकी हुई हैं।

एग्जिट पोल और शुरुआती रुझान: किसी भी गठबंधन को स्पष्ट बहुमत नहीं

120 सीटों वाली इजरायली संसद (नेसेट) में सरकार बनाने के लिए जादूई आंकड़ा 61 सीटें है। शुरुआती मतगणना और प्रमुख इजरायली टीवी चैनलों के एग्जिट पोल से स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं कि देश में त्रिशंकु संसद (Hang Parliament) की स्थिति बन सकती है:

  • बेंजामिन नेतन्याहू का लिकुड गठबंधन: एग्जिट पोल और 80% से अधिक मतों की गिनती के बाद नेतन्याहू के दक्षिणपंथी गठबंधन को 50 से 55 सीटें मिलती नजर आ रही हैं।

  • गादी आइजनकोट का विपक्षी गठबंधन (यशर! व सहयोगी): इजरायल डिफेंस फोर्सेज (IDF) के पूर्व प्रमुख गादी आइजनकोट के नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन को 48 से 53 सीटें मिलती दिख रही हैं।

  • अरब पार्टियां (किंगमेकर भूमिका): इस चुनाव में अरब-इजरायली पार्टियों (जैसे जॉइंट लिस्ट व राअम) ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 16 से 18 सीटों पर बढ़त बनाई है, जिससे वे किंगमेकर की भूमिका में आ गई हैं।

मुख्य बात: वर्तमान में न तो नेतन्याहू और न ही आइजनकोट का गुट 61 सीटों का आंकड़ा पार कर सका है। ऐसे में अगले कुछ दिनों तक गठबंधन बनाने के लिए भारी राजनीतिक सौदेबाजी (Coalition Negotiations) देखने को मिल सकती है।

नेतन्याहू बनाम आइजनकोट और नफ्ताली बेनेट की चुनौती

मौजूदा प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू, जो इजरायल के इतिहास में सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले पीएम हैं, के लिए यह चुनाव अस्तित्व की लड़ाई बन चुका है।

  1. गादी आइजनकोट (Gadi Eisenkot): पूर्व सेना प्रमुख और ‘यशर’ पार्टी के प्रमुख गादी आइजनकोट ने नेतन्याहू को सीधे चुनौती दी है। उन्होंने दावा किया कि इजरायली जनता ने नेतन्याहू के शासन के खिलाफ जनादेश दिया है।

  2. नफ्ताली बेनेट (Naftali Bennett): पूर्व प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट के ‘टुगेदर’ (Together) गठबंधन ने भी अच्छी बढ़त बनाई है और वे इस चुनाव में एक निर्णायक धड़े के रूप में उभरे हैं।

इस चुनाव के 5 सबसे प्रमुख मुद्दे

  1. 7 अक्टूबर का सुरक्षा हमला और गाजा जंग: हमास हमले में खुफिया व सैन्य विफलता को लेकर जनता में नाराजगी और साथ ही गाजा व लेबनान में इजरायल की सुरक्षा रणनीति मुख्य मुद्दा रही।

  2. सैन्य सेवा (Haredi Draft): अल्ट्रा-ऑर्थोडॉक्स यहूदियों को दी जाने वाली सैन्य छूट समाप्त करने और सुरक्षा बलों में सबकी भागीदारी पर तीखी बहस।

  3. न्यायिक सुधार (Judicial Reforms): नेतन्याहू सरकार के प्रस्तावित न्यायिक सुधारों का विरोध और न्यायपालिका की स्वतंत्रता।

  4. बंधकों की रिहाई व युद्धविराम: गाजा में बचे इजरायली बंधकों को वापस लाने और दीर्घकालिक शांति पर राजनीतिक दलों का रुख।

  5. अर्थव्यवस्था और जीवनयापन की लागत: जंग के चलते उपजे आर्थिक दबाव, महंगाई और बजट घाटा।

आगे क्या होगा?

यदि अंतिम आधिकारिक आंकड़ों में भी दोनों में से कोई भी गठबंधन 61 सीटों तक नहीं पहुंच पाता है, तो पूर्व पीएम नफ्ताली बेनेट, अन्य स्वतंत्र दल और अरब गठबंधन के समर्थन पर ही अगली सरकार का दारोमदार निर्भर करेगा। ऐसी भी संभावनाएं हैं कि यदि कोई सहमति नहीं बनी, तो देश में एक बार फिर गतिरोध की स्थिति बन सकती है।