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‘स्वामी विवेकानंद से ऊपर कोई नहीं’… बागेश्वर बाबा के ‘पाखंडी’ वाले बयान पर भड़की बीजेपी!

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कोलकाता 9 सितंबर :पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा से ठीक पहले खान-पान और संस्कृति को लेकर सियासी और धार्मिक घमासान छिड़ गया है। बागेश्वर धाम के कथावाचक धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री (बागेश्वर बाबा) द्वारा बंगालियों के मांसाहार पर दिए बयान के बाद राजनीति गरमा गई है। प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य और विपक्षी दलों ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी है।

दुर्गा पूजा के दौरान मांसाहार पर धीरेंद्र शास्त्री का बयान

हावड़ा के लिलुआ वर्कशॉप ग्राउंड में आयोजित तीन दिवसीय हनुमंत कथा के समापन पर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि दुर्गा पूजा के दौरान बंगालियों को मांसाहार नहीं करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग इस दौरान मांसाहार करते हैं, वे ‘पाखंडी’ हैं।

‘स्वामी विवेकानंद से ऊपर कोई नहीं’: समिक भट्टाचार्य का पलटवार

धीरेंद्र शास्त्री के इस बयान का जवाब देते हुए पश्चिम बंगाल बीजेपी अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने साफ लहजे में कहा कि कोई भी राजनीतिक दल या साधु-संत यह तय नहीं कर सकता कि बंगाली क्या खाएंगे।

पत्रकारों से बातचीत में समिक भट्टाचार्य ने कहा:

  • सांस्कृतिक परंपरा: “नवरात्रि में बंगाली अष्टमी के दिन लुची (पूड़ी) खाते हैं और नवमी के दिन मटन खाते हैं। मां काली को यहां  भोग चढ़ाया जाता है।”

  • खान-पान की आजादी: “क्या बंगाली मछली या मांस नहीं खा सकते? बंगाली वही खाएंगे जो उनका मन करेगा।”

  • स्वामी विवेकानंद का हवाला: “हम सिर्फ स्वामी विवेकानंद को मानते हैं। जब उन्होंने इस पर कभी आपत्ति नहीं जताई, तो हम किसी और की बात क्यों सुनें? जब स्वामी विवेकानंद ने इसे स्वीकार किया है, तो उनसे ऊपर कौन है?”

उन्होंने आगे कहा कि धीरेंद्र शास्त्री भले ही काफी मशहूर हों और बंगाल में लोग उनकी कथा सुनते हों, लेकिन किसी साधु या मौलवी के कहने से बंगाल की संस्कृति और खान-पान का तरीका नहीं बदलेगा।

टीएमसी और कांग्रेस ने साधा निशाना

धीरेंद्र शास्त्री को कोलकाता में बीजेपी नेता शुभेंदु अधिकारी द्वारा डिनर पर आमंत्रित किए जाने को लेकर तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने हमला बोला। TMC ने बयान जारी कर सवाल उठाया कि भव्य स्वागत के बाद बंगालियों से नॉन-वेज छोड़ने की अपील की गई, क्या बीजेपी बंगालियों की थाली से उनका पारंपरिक भोजन छीनना चाहती है?

वहीं, कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष शुभांकर सरकार ने भी धीरेंद्र शास्त्री को इतनी तवज्जो दिए जाने की आलोचना की और राज्य सरकार व बीजेपी पर निशाना साधा।