महाराष्ट्र Chhatrapati Sambhajinagar Tragedy : एक खिलौने की ज़िद में बचपन रूठता है, लेकिन क्या कोई ज़िद इतनी बड़ी हो सकती है कि वो पूरे परिवार का नामो-निशान मिटा दे? छत्रपति संभाजीनगर (देवलाई) की एक 400-500 फीट ऊंची पहाड़ी पर शुक्रवार को जो कुछ हुआ, उसने इंसानियत और रिश्तों के वजूद को झकझोर कर रख दिया। एक 19 साल के बेटे की आईफोन (iPhone) पाने की नासमझी भरी ज़िद ने पल भर में एक घर के चिराग के साथ-साथ उसके मां-बाप को भी मौत की खौफनाक खाई में धकेल दिया।

19 वर्षीय कुणाल चांदगुडे सुबह 10 बजे रूठकर पहाड़ी के मुहाने पर जा खड़ा हुआ था। पिता मुरलीधर चांदगुडे, जो पेशे से एक साधारण ड्राइवर थे, और मां संगीता गिड़गिड़ाते रहे। दमकलकर्मी, पुलिस और गांव वाले तीन घंटे तक मिन्नतें करते रहे—”बेटा, तुम पढ़े-लिखे हो, अपने भविष्य का सोचो!” लेकिन ज़िद के अंधेपन में उसे अपनों का प्यार, उनकी मजबूरी और अपनी जिंदगी कुछ नज़र नहीं आ रही थी। नीचे सुरक्षा जाल बिछाने की हर कोशिश नाकाम हो रही थी क्योंकि वो बार-बार चट्टान के किनारे पर अपनी जगह बदल रहा था।
दोपहर में अनहोनी को टालने की आखिरी कोशिश में जब पिता अचानक बेटे को सुरक्षित पकड़ने आगे बढ़े, तो असंतुलन के एक दर्दनाक झटके ने पिता और बेटे दोनों को सैकड़ों फीट गहरी खाई में गिरा दिया। अपनी आंखों के सामने अपनी पूरी दुनिया—पति और औलाद—को हवा में विलीन होते देख मां का कलेजा फट गया। बेबस और बेसुध मां ने भी बिना एक पल गंवाए उसी खाई में छलांग लगा दी। देखते ही देखते, पर्यटकों और ग्रामीणों की भीड़ के सामने पूरा परिवार खत्म हो गया।
पुलिस ने तीनों के शव बरामद कर पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिए हैं। एक साधारण ड्राइवर पिता जो शायद अपने खून-पसीने की कमाई से बेटे के हर सपने को पूरा करने की कोशिश करता था, आज अपनी ही औलाद की बेतुकी ज़िद की कीमत अपनी और अपनी पत्नी की जान देकर चुका गया।








