कोरबा, 13 अगस्त 2026। लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री श्यामबिहारी जायसवाल ने आज कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में बिलासपुर संभाग (कोरबा, बिलासपुर, रायगढ़, जांजगीर-चांपा, जीपीएम, सक्ती, सारंगढ़-बिलाईगढ़) की संभाग स्तरीय स्वास्थ्य समीक्षा बैठक ली। अपेक्षित प्रगति न मिलने पर उन्होंने अधिकारियों के प्रति कड़ी नाराजगी व्यक्त की और स्पष्ट निर्देश दिए कि “स्वास्थ्य सेवाओं में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।”
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बैठक में उद्योग मंत्री श्री लखनलाल देवांगन, स्वास्थ्य सचिव श्री अमित कटारिया, एनएचएम प्रबंध निदेशक श्री संजीव झा और कलेक्टर श्री कुणाल दुदावत सहित संभाग के सभी जिलों के सीएमएचओ और डीपीएम उपस्थित रहे।
समीक्षा बैठक के मुख्य बिंदु व कड़े निर्देश:
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बायोमेट्रिक उपस्थिति न होने पर वेतन कटौती: मंत्री ने सभी स्वास्थ्य केंद्रों में बायोमेट्रिक अटेंडेंस अनिवार्य करने के निर्देश दिए। ऑनलाइन एंट्री और उपस्थिति में लापरवाही बरतने पर नियमानुसार वेतन कटौती की कार्रवाई होगी।
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कुष्ठ रोग में लापरवाही पर नोटिस: कुष्ठ रोग उन्मूलन में अपेक्षित प्रगति न होने पर बिलासपुर, सक्ती और कोरबा जिले के जिम्मेदार अधिकारियों को नोटिस जारी करने का आदेश दिया गया।
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गंभीर बीमारियों की शत-प्रतिशत स्क्रीनिंग: मलेरिया, टीबी, कुष्ठ और सिकलसेल जैसी बीमारियों के लिए अभियान चलाकर शत-प्रतिशत स्क्रीनिंग व उपचार सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया। 25 दिसंबर तक राज्य के प्रत्येक जिले के कम से कम एक विकासखंड को पूरी तरह ‘क्षय सुरक्षित’ बनाने का लक्ष्य तय किया गया।
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संस्थागत प्रसव और मातृ स्वास्थ्य सर्वोच्च प्राथमिकता: गर्भवती महिलाओं की समय पर ANC जांच, शत-प्रतिशत संस्थागत प्रसव और आपात स्थिति में तत्काल रक्त उपलब्ध कराने के कड़े निर्देश दिए गए। मितानिनों की प्रोत्साहन राशि में वृद्धि के लिए स्वास्थ्य सचिव को आवश्यक पहल करने को कहा गया।
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दूरस्थ क्षेत्रों में एम्बुलेंस व ‘मायका’ (बर्थ वेटिंग होम): कोरबा के दूरस्थ कोरबी-पसान, लेमरू-श्यांग और सिरमिना क्षेत्रों में एम्बुलेंस सेवाएं बढ़ाई जाएंगी। साथ ही दुर्गम क्षेत्रों की गर्भवती महिलाओं के लिए ‘बर्थ वेटिंग होम’ स्थापित करने के प्रस्ताव मांगे गए हैं। विशेष रूप से PVTG परिवारों को शत-प्रतिशत स्वास्थ्य सुविधाओं से जोड़ने का निर्देश दिया गया।
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डेंगू-मलेरिया व मौसमी बीमारियां: मच्छरदानी के उपयोग, नियमित DDT छिड़काव, स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था तथा डायरिया व सर्पदंश के मरीजों को तत्काल इलाज मुहैया कराने के निर्देश दिए गए।
स्वास्थ्य मंत्री का संदेश: “स्वास्थ्य विभाग सीधे आम जनता के जीवन से जुड़ा है। शासन के पास संसाधनों और बजट की कोई कमी नहीं है। अधिकारी समन्वय व टीम भावना से काम करें ताकि मरीजों को अस्पताल में अनावश्यक इंतजार न करना पड़े।”








