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सावरकर अगर अंग्रेजों से समझौता करते, तो 1946 में ही बन जाते प्रधानमंत्री: राहुल गांधी मानहानि केस में सत्यकी सावरकर का बड़ा दावा

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पुणे 15 जुलाई : कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ दायर आपराधिक मानहानि मामले में नया मोड़ आ गया है। पुणे की स्पेशल MP/MLA कोर्ट में चल रही सुनवाई के दौरान वीर सावरकर के पोते (ग्रैंड-नेफ्यू) सत्यकी सावरकर ने एक बड़ा और राजनीतिक रूप से संवेदनशील बयान दिया है। क्रॉस-एग्जामिनेशन (जिरह) के दौरान सत्यकी ने कहा कि अगर उनके दादाजी विनायक दामोदर सावरकर ने तत्कालीन ब्रिटिश हुकूमत के साथ कोई समझौता किया होता या अपनी विचारधारा से समझौता किया होता, तो अंग्रेज उन्हें 1946 में ही भारत का प्रधानमंत्री बना देते।

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राहुल गांधी के वकील मिलिंद पवार द्वारा स्पेशल जज अमोल शिंदे के सामने की जा रही जिरह में सत्यकी सावरकर ने इन दावों के जरिए वीर सावरकर पर लगने वाले ‘ब्रिटिश एजेंट’ के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया।

27 साल की सजा काटने वाला ब्रिटिश एजेंट कैसे हो सकता है?

अदालत में राहुल गांधी के वकील के तीखे सवालों का जवाब देते हुए सत्यकी सावरकर ने कहा:

“अगर सावरकर ने 1946 में अंग्रेजों से हाथ मिलाया होता, तो उन्हें देश का प्रधानमंत्री बनाकर पुरस्कृत किया जाता। यह मेरी निजी राय है और यह कहना पूरी तरह गलत है कि मेरे पास इस राय को साबित करने के लिए ऐतिहासिक सबूत नहीं हैं।”

सत्यकी ने सावरकर के स्वतंत्रता संग्राम में योगदान को रेखांकित करते हुए दलील दी कि:

  • ब्रिटिश सरकार ने वीर सावरकर की सभी जमीनें और आवासीय संपत्तियां जब्त कर ली थीं।

  • उनकी बैरिस्टर (वकालत) की डिग्री तक रद्द कर दी गई थी।

  • उन्हें 27 साल की कठोर कारावास और नजरबंदी की सजा सुनाई गई थी।

उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि कोई भी शासक अपने करीबी या एजेंट को इतनी कड़ी सजा नहीं देता, बल्कि उन्हें ऊंचे पदों से नवाजता है। सावरकर को मिली सजाएं ही इस बात का सबूत हैं कि वह अंग्रेजों के करीबी नहीं थे।

पंडित नेहरू और सुभाष चंद्र बोस को लेकर बड़ा दावा

सत्यकी सावरकर ने जिरह के दौरान देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की नीतियों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि नेहरू ने कई मौकों पर ब्रिटिश सरकार के पक्ष में काम किया था। अपने दावे के समर्थन में सत्यकी ने नेहरू के एक पुराने बयान का हवाला देते हुए कहा:

“जवाहरलाल नेहरू ने कहा था कि ‘हिटलर और जापान भाड़ में जाएं, मैं उनसे आखिरी दम तक लडूंगा… और अगर सुभाष चंद्र बोस जापान के साथ भारत आते हैं, तो मैं उनसे और उनकी पार्टी से भी लडूंगा।’ बोस की नीयत भले अच्छी हो, लेकिन उनका रास्ता गलत था।”

सत्यकी के मुताबिक, नेहरू का यह रुख साफ करता है कि वह नेताजी सुभाष चंद्र बोस के खिलाफ थे और अप्रत्यक्ष रूप से ब्रिटिश सरकार की नीतियों को बल दे रहे थे।

महात्मा गांधी के ‘मासिक भत्ते’ पर कोर्ट में तीखी बहस

सुनवाई के दौरान वीर सावरकर को अंग्रेजों से मिलने वाले कथित ‘गुजारा भत्ते’ का मुद्दा भी उठा। सत्यकी ने दावा किया कि ऐसा कोई पुख्ता सबूत नहीं है जिससे साबित हो कि सावरकर को ब्रिटिश सरकार से कोई मासिक भत्ता मिलता था। इसके उलट, उन्होंने दावा किया कि महात्मा गांधी ने अंग्रेजों से मासिक भत्ता पाने के लिए पत्र लिखे थे, हालांकि सत्यकी ने माना कि उनके पास इसका कोई ऑन-रिकॉर्ड दस्तावेज़ नहीं है।

इस दावे पर पलटवार करते हुए राहुल गांधी के वकील मिलिंद पवार ने कोर्ट के सामने दो ऐतिहासिक पत्र पेश किए:

  1. जून 1930 का पत्र: बॉम्बे सरकार के गृह विभाग के सचिव द्वारा भारत सरकार के सचिव को लिखा गया पत्र, जिसमें गांधीजी को गुजारे के लिए 100 रुपये भत्ता देने के ब्रिटिश सरकार के फैसले का उल्लेख था।

  2. मई 1930 का पत्र: यह पत्र खुद महात्मा गांधी ने अंग्रेजों को लिखा था, जिसमें उन्होंने 100 रुपये का मासिक भत्ता लेने से साफ इनकार कर दिया था। गांधीजी ने अंग्रेजों से आग्रह किया था कि उन्हें कोई भत्ता न दिया जाए, बल्कि सिर्फ दैनिक भोजन और कुछ अखबार उपलब्ध कराए जाएं।

विपक्षी नेताओं ने भी की सावरकर की तारीफ

सत्यकी ने कोर्ट को बताया कि सावरकर की देशभक्ति पर सवाल उठाना गलत है क्योंकि इतिहास में मैडम कामा, शहीद भगत सिंह और नेताजी सुभाष चंद्र बोस जैसे महान क्रांतिकारियों ने उनकी सराहना की है। इतना ही नहीं, आजादी के बाद कांग्रेस की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी, पूर्व रक्षा मंत्री यशवंतराव चव्हाण और राकांपा (SP) प्रमुख शरद पवार जैसे दिग्गज नेताओं ने भी सावरकर के योगदान की तारीफ की है।

सत्यकी के वकील ने कोर्ट में राहुल गांधी के वकील द्वारा पूछे जा रहे सवालों पर यह कहते हुए आपत्ति जताई कि उनके मुवक्किल से ‘बेमतलब के सवाल’ पूछे जा रहे हैं। हालांकि, कोर्ट ने कहा कि इन सभी आपत्तियों पर अंतिम सुनवाई के समय विचार किया जाएगा।

इस हाई-प्रोफाइल आपराधिक मानहानि मामले में सत्यकी सावरकर की अगली क्रॉस-एग्जामिनेशन 30 जुलाई को जारी रहेगी।

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