रायपुर, 09 जुलाई 2026
छत्तीसगढ़ में राजस्व प्रशासन अब फाइलों के पारंपरिक चक्रव्यूह और दफ्तरों के लंबे इंतजार से पूरी तरह मुक्त हो चुका है। राज्य सरकार के राजस्व, आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विभाग ने आधुनिक तकनीक के दम पर जमीन से जुड़ी जन-सेवाओं का पूरी तरह कायाकल्प कर दिया है। राज्य की ‘ऑटो म्यूटेशन’ (स्वतः नामांतरण) और ‘ऑटो डायवर्सन’ (स्वतः व्यवर्तन) जैसी प्रणालियों ने मानवीय हस्तक्षेप को समाप्त कर पारदर्शिता का एक नया दौर शुरू किया है, जिससे आम नागरिकों को मानसिक व शारीरिक प्रताड़ना से स्थायी आजादी मिली है।
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अब रजिस्ट्री होते ही नामांतरण की प्रक्रिया स्वतः शुरू हो जाती है, जिससे पटवारियों और तहसील कार्यालयों के चक्कर काटने और जमीनी धोखाधड़ी जैसी समस्याओं पर लगाम लगी है। छत्तीसगढ़ का यह डिजिटल गवर्नेंस मॉडल आज पूरे देश के लिए एक अनुकरणीय उदाहरण बन गया है।
आंकड़ों की जुबानी: सफलता की नई गाथा
राजस्व विभाग द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़े इस बात की तस्दीक करते हैं कि यह बदलाव कितना व्यापक है:
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ऑटो म्यूटेशन (स्वतः नामांतरण): प्रदेश में अब तक कुल 1,40,607 पंजीकृत विलेखों में से रिकॉर्ड 1,40,536 मामलों का सफलतापूर्वक स्वतः नामांतरण किया जा चुका है। वर्तमान में पूरे प्रदेश में केवल 71 मामले प्रक्रियाधीन हैं, जिससे विभाग ने 99.95% की अभूतपूर्व सफलता दर हासिल की है।
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ऑटो डायवर्सन (स्वतः व्यवर्तन): भूमि उपयोग परिवर्तन के लिए कुल 5,661 आवेदन दर्ज किए गए, जिनमें से 4,739 मामलों का त्वरित निपटारा कर 83.71% की निस्तारण दर दर्ज की गई है।
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टेक्निकल लॉक सिस्टम’ से बढ़ेगी प्रशासनिक जवाबदेही
इस पारदर्शी व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) द्वारा एक कड़ा तकनीकी लॉक सिस्टम तैयार किया गया है। इसके तहत, यदि किसी संपत्ति का पुराना ऑटो म्यूटेशन लंबित है, तो संबंधित सब-रजिस्ट्रार कार्यालय में उस संपत्ति की अगली रजिस्ट्री तब तक लॉक रहेगी, जब तक कि पुराना म्यूटेशन क्लियर नहीं हो जाता। यह व्यवस्था निचले स्तर के प्रशासनिक अमले को सीधे तौर पर जवाबदेह बनाती है।
जिला-वार प्रदर्शन: ‘कोरिया’ जिला रहा अव्वल
ऑटो डायवर्सन के क्रियान्वयन में राज्य के जिलों के बीच एक स्वस्थ और परिणाम-उन्मुख प्रतिस्पर्धा देखने को मिल रही है:
| स्थान | जिला | कुल प्रकरण | निराकृत प्रकरण | सफलता दर |
|---|---|---|---|---|
| 1 | कोरिया | 59 | 59 | 100% |
| 2 | कोरबा | – | – | 98.46% |
| 3 | मुंगेली | – | – | 94.16% |
| 4 | बालोद | – | – | 93.72% |
| 5 | धमतरी | 165 | 153 | 92.73% |
आगामी तकनीकी सुधार और नए डिजिटल मॉड्यूल्स
विभाग वर्तमान उपलब्धियों से आगे बढ़कर एक पूर्ण ‘डिजिटल इकोसिस्टम’ बनाने की दिशा में काम कर रहा है, जिसके तहत कई नए मॉड्यूल्स लाइव होने जा रहे हैं:
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NGDRS API Integration: इसके जरिए सरकारी गाइडलाइन दरें सीधे पोर्टल से लिंक हो चुकी हैं, जिससे प्रीमियम का निर्धारण बिना मानवीय हस्तक्षेप के पूरी तरह स्वचालित हो गया है।
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‘Diverted to Diverted’ मॉड्यूल: यदि पहले से डायवर्टेड भूमि का आंतरिक उपयोग बदलना हो (जैसे आवासीय से व्यावसायिक), तो इसके निस्तारण के लिए 15 दिनों की समय सीमा तय की गई है।
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‘मल्टीपल खसरा’ मॉड्यूल (समय सीमा: जुलाई 2026): एक से अधिक खसरों वाली भूमि के लिए एक ही आवेदन में अनेक खसरों का चयन, स्वतः शुल्क गणना और ई-चालान की सुविधा मिलेगी।
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‘रिकवरी’ मॉड्यूल (समय सीमा: अगस्त 2026): पुराने लंबित मामलों के निपटारे के लिए शेष प्रीमियम की गणना, भू-राजस्व मांग और एक उच्च स्तरीय रिकवरी डैशबोर्ड तैयार किया जा रहा है।
विजन दिसंबर 2026: सैटेलाइट और ड्रोन मैपिंग
छत्तीसगढ़ सरकार ने दिसंबर 2026 तक का एक दूरदर्शी रोडमैप तैयार किया है। इसके तहत राज्य के सभी क्षेत्रों की सैटेलाइट/ड्रोन मैपिंग, टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (TNCP) से एनओसी (NOC) लिंकिंग और मुख्य भू-अभिलेख पोर्टल का वृहद् अपग्रेडेशन किया जाएगा। तकनीक और संवेदनशीलता का यह मेल छत्तीसगढ़ को डिजिटल राजस्व प्रशासन में देश का नंबर वन राज्य बनाने के लिए अग्रसर है।








