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कोरबा IOCL डिपो बना ‘ऑयल माफिया’ का गढ़: रोज लाखों के तेल की चोरी, सच दिखाने पर पंप कर्मियों पर जानलेवा हमला

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कोरबा 3 जुलाई । औद्योगिक नगरी कोरबा का गोपालपुर स्थित ‘इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड’ (IOCL) का डिपो इन दिनों तेल चोरों, दबंग ड्राइवरों और संगठित अपराधियों का सबसे सुरक्षित ठिकाना बन चुका है। जानकारी  के अनुसार डिपो के ठीक बाहर से हर दिन लाखों रुपये का डीजल-पेट्रोल गायब किया जा रहा है। हैरत की बात यह है कि स्थानीय पुलिस और डिपो प्रबंधन इस महा-घोटाले से अनजान बने हुए हैं।

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जब लगातार हो रहे नुकसान के बाद पेट्रोल पंप संचालकों ने अपने निजी कर्मचारियों को डिपो के बाहर भेजकर सीधे टैंकरों की निगरानी शुरू करवाई, तो चोर गिरोह बौखला गया। पिछले 2-3 दिनों से डिपो के बाहर खुलेआम खूनी खेल खेला जा रहा है। अवैध कमाई बंद होते ही लाठी-डंडों से लैस बदमाशों ने पेट्रोल पंप के सुरक्षाकर्मियों को घेरकर जानलेवा हमला करना शुरू कर दिया है। शुक्रवार को ऐसे ही दो अलग-अलग मामलों में दर्री थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई है।

प्रति टैंकर 20-30 हजार की चोरी, पुलिस गश्त पर उठे सवाल

प्राप्त जानकारी के अनुसार डिपो से निकलने वाले ज्यादातर टैंकर विभिन्न ट्रांसपोर्टरों के हैं, जिन्हें तेल परिवहन का ठेका मिला हुआ है। नियमानुसार, डिपो से निकलने के बाद टैंकर को बिना रुके सीधे निर्धारित पेट्रोल पंप पर पहुंचना चाहिए। लेकिन हकीकत इसके उलट है। डिपो से निकलते ही चालक और स्थानीय तेल माफिया मिलकर प्रत्येक टैंकर से प्रतिदिन 20,000 से 30,000 रुपये का ईंधन बीच रास्ते में ही पार कर देते हैं। इतने बड़े पैमाने पर होने वाली इस चोरी की भनक स्थानीय पुलिस को न होना, उनके खुफिया तंत्र और गश्त पर बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।

आखिर किसके संरक्षण में डिपो की नाक के नीचे यह समानांतर अवैध कारोबार फल-फूल रहा है?

जब मालिकों ने संभाली कमान, तो ड्राइवरों ने शुरू की गुंडागर्दी

लगातार हो रहे आर्थिक नुकसान से तंग आकर पेट्रोल पंप संचालकों ने कानून-व्यवस्था पर भरोसा करने के बजाय अपने स्तर पर निजी कर्मचारियों को तैनात किया। इन कर्मचारियों की जिम्मेदारी डिपो से टैंकर निकलते ही उसे सुरक्षित सीधे पंप तक पहुंचाना है।

सुरक्षाकर्मियों की इस घेराबंदी से जैसे ही ड्राइवरों की अवैध कमाई का रास्ता बंद हुआ, वे गुंडागर्दी पर उतर आए। शुक्रवार को दो अलग-अलग पेट्रोल पंप के कर्मचारियों के साथ डिपो के पास मंदिर के सामने क्रूरतापूर्वक मारपीट की गई। बदमाशों ने खुलेआम घेराबंदी कर लाठी-डंडों से उन्हें पीटा और जान से मारने की धमकी दी।

पुलिस की कार्रवाई सिर्फ ‘खानापूर्ति’, मूल समस्या जस की तस

इस खूनी संघर्ष के बाद पीड़ित कर्मचारियों ने हिम्मत दिखाकर दर्री थाना में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने विभिन्न धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कर, प्रतिबंधात्मक कार्रवाई करते हुए 3 बदमाशों को गिरफ्तार कर जेल तो भेज दिया है, लेकिन यह कार्रवाई केवल ऊपरी परत को छूती है।

  • बड़ा सवाल: पुलिस ने मारपीट करने वाले प्यादों को तो पकड़ लिया, लेकिन उस बड़े ‘ऑयल माफिया नेटवर्क’ के आकाओं पर हाथ क्यों नहीं डाला?

  • अगर डिपो के बाहर 2-3 दिनों से लगातार तनाव का माहौल था, तो पुलिस ने वहां नियमित पेट्रोलिंग क्यों नहीं बढ़ाई?

  • पंप मालिकों को अपने कर्मचारियों की जान जोखिम में क्यों डालनी पड़ रही है?

अगर दर्री पुलिस और जिला प्रशासन ने इन सुलगते सवालों का जवाब ढूंढकर सख्त कदम नहीं उठाए, तो यह छोटी सी मारपीट आने वाले समय में किसी बड़े गैंगवार या वीभत्स हत्याकांड का रूप ले सकती है।

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