Bihar Politics 11अप्रैल । बिहार की राजनीति इस वक्त एक ऐतिहासिक मोड़ पर है। चर्चाएं गर्म हैं कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 14 अप्रैल को अपने पद से इस्तीफा दे सकते हैं और राज्यसभा जा सकते हैं।
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एनडीए के नए फॉर्मूले के तहत बिहार में भाजपा का मुख्यमंत्री और JDU का उपमुख्यमंत्री होने की संभावना जताई जा रही है। इस रेस में सबसे चौंकाने वाला और मजबूत नाम बिहार की खेल मंत्री श्रेयसी सिंह का उभरकर सामने आया है।
कौन हैं श्रेयसी सिंह? (शिक्षा और पृष्ठभूमि)
29 अगस्त 1991 को जन्मी श्रेयसी सिंह बिहार भाजपा का एक युवा और प्रभावशाली चेहरा हैं।
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शिक्षा: उन्होंने दिल्ली के हंसराज कॉलेज से ग्रेजुएशन और फरीदाबाद की मानव रचना यूनिवर्सिटी से MBA की डिग्री ली है।
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पहचान: वे एक कुशल राजनेता के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर की शूटर (निशानेबाज) भी हैं।
पारिवारिक विरासत: राजनीति और खेल का मेल
श्रेयसी सिंह की रगों में राजनीति और खेल दोनों बसते हैं:
पिता: स्वर्गीय दिग्विजय सिंह (पूर्व केंद्रीय मंत्री)।
मां: पुतुल कुमारी (पूर्व सांसद, बांका)।
दादा: कुमार सुरेंद्र सिंह (निशानेबाजी से गहरा जुड़ाव)।
खेल जगत में लहराया परचम
राजनीति में आने से पहले श्रेयसी ने खेलों की दुनिया में भारत का मान बढ़ाया:
2014 कॉमनवेल्थ गेम्स: सिल्वर मेडल।
2018 कॉमनवेल्थ गेम्स: गोल्ड मेडल।
सम्मान: खेल के क्षेत्र में योगदान के लिए उन्हें ‘अर्जुन पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया है।
सियासी सफर: जमुई से कैबिनेट तक
2020: भाजपा में शामिल हुईं और जमुई विधानसभा सीट से 41,000 से अधिक वोटों से जीत दर्ज की।
2025: 20 नवंबर 2025 को उन्हें बिहार सरकार में खेल और सूचना प्रौद्योगिकी (IT) मंत्री बनाया गया।
क्यों लगा सकती है भाजपा उन पर दांव? (जातिगत और राजनीतिक समीकरण)
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सवर्ण वोट बैंक: राजपूत (क्षत्रिय) समाज से आने वाली श्रेयसी के जरिए भाजपा सवर्ण मतदाताओं को साध सकती है।
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महिला सशक्तिकरण: श्रेयसी एक शिक्षित और युवा महिला आइकन हैं, जो नीतीश कुमार के महिला वोट बैंक में सेंध लगा सकती हैं।
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बेदाग छवि: उनकी स्पोर्ट्समैन स्पिरिट और ‘क्लीन इमेज’ उन्हें अन्य पारंपरिक नेताओं से अलग बनाती है।
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धर्मशीला गुप्ता का नाम भी चर्चा में: श्रेयसी के साथ-साथ राज्यसभा सांसद धर्मशीला गुप्ता (वैश्य समाज) का नाम भी चर्चा में है, जो महिलाओं के बीच अच्छी पकड़ रखती हैं।
निष्कर्ष
अगर भाजपा श्रेयसी सिंह को मुख्यमंत्री चुनती है, तो यह न केवल बिहार की राजनीति में एक ‘यूथ आइकन’ का उदय होगा, बल्कि देशभर में महिला नेतृत्व का एक बड़ा संदेश भी जाएगा।
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