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भाजपा महिला मोर्चा की लिस्ट में लगा ‘तीखी मिर्च’ का तड़का: कोरबा शहर में मलाई, ग्रामीण बेल्ट में सन्नाटा!

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कोरबा। जिला भाजपा महिला मोर्चा ने अपनी नई कार्यकारिणी की जो सूची जारी की है, वह कार्यकर्ताओं के लिए किसी ‘भरी दोपहर में तीखी लाल मिर्च’ चखने जैसी साबित हो रही है। संगठन ने 65 नामों का जो गुलदस्ता सजाया है, उसकी महक नहीं, बल्कि उसकी ‘झांस’ ने पार्टी के पुराने और निष्ठावान कार्यकर्ताओं की आँखों में आंसू ला दिए हैं।

शहर को ‘हवा’, गांवों को ‘दगा’

सूत्रों की मानें तो यह सूची कोरबा विधानसभा के लिए ‘शक्कर की चाशनी’ और बाकी क्षेत्रों के लिए ‘कड़वा चिरायता’ बनकर उभरी है। 40 पदाधिकारी सिर्फ शहर से? इस आंकड़े ने पाली-तानाखार, रामपुर और कटघोरा के कार्यकर्ताओं के स्वाभिमान पर ‘तीखा प्रहार’ किया है। वे अब पूछ रहे हैं कि क्या शहर से बाहर पार्टी का काम करने वाले सिर्फ दरी बिछाने के लिए हैं?

पाली-तानाखार और रामपुर: ‘सांत्वना पुरस्कार’ से संतोष

बता दे कि जहाँ गोंडवाना और कांग्रेस का झंडा बुलंद है, वहाँ भाजपा ने अपनी महिला सेना को ‘टोकन’ के रूप में 3 और 9 पदों की भीख… क्षमा करें, प्रतिनिधित्व दिया है। रणनीतिकार शायद यह भूल गए कि जिन किलों को  मजबूत  बनाना है, वहां नाम मात्र का प्रतिनिधित्व दिया गया हैं। आदिवासी बेल्ट की इस अनदेखी पर कार्यकर्ताओं के बीच चल रही चर्चाएं अब ‘फुसफुसाहट’ से ‘चिल्लाहट’ में बदलने लगी हैं। साथ ही आरोप लग रहे हैं कि नेतृत्व उन आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों में कैसे काम करेगा, जहाँ संगठन को मजबूत करने की सबसे ज्यादा जरूरत है, यह एक बड़ा सवाल है।

क्या डैमेज कंट्रोल हो पायेगा 

इस सूची ने संगठन के भीतर ‘तीखापन’ बढ़ा दिया है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि जिलाध्यक्ष असंतुष्टों को ‘मीठा’ खिलाकर मनाती हैं या फिर यह ‘मिर्च’ आने वाले चुनावों में पार्टी का स्वाद और बिगाड़ देगी।

 वरिष्ठ कार्यकर्ता 

“जब संगठन को मजबूत करने की जरूरत है, तब एक ही क्षेत्र को इतनी प्राथमिकता देना समझ से परे है। क्या बाकी विधानसभाओं में योग्य महिलाएं नहीं थीं?” — (नाम न छापने की शर्त पर एक वरिष्ठ कार्यकर्ता)


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