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छत्तीसगढ़ में रेत माफियाओं पर बड़ी स्ट्राइक: साय कैबिनेट ने खत्म किया निजी एकाधिकार, CMDC संभालेगी कमान

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रायपुर 16 अप्रैल। छत्तीसगढ़ की विष्णुदेव साय सरकार ने प्रदेश के खनिज संसाधनों के दोहन और रेत की कालाबाजारी को जड़ से मिटाने के लिए एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। कैबिनेट की हालिया बैठक में छत्तीसगढ़ गौण खनिज नियम में बड़े बदलावों को मंजूरी दी गई है। इस फैसले का सीधा असर रेत के सिंडिकेट पर पड़ेगा और आम जनता को राहत मिलेगी।

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प्रमुख फैसले: एक नजर में

सरकार ने रेत खदानों के संचालन और दंड के प्रावधानों में निम्नलिखित ऐतिहासिक बदलाव किए हैं:

  • सरकारी नियंत्रण: अब रेत खदानें निजी पट्टेदारों के बजाय छत्तीसगढ़ मिनरल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (CMDC) जैसे सार्वजनिक उपक्रमों के लिए आरक्षित की जा सकेंगी। इससे खदानों पर किसी एक व्यक्ति या समूह का एकाधिकार (Monopoly) समाप्त होगा।

  • अवैध खनन पर भारी जुर्माना: अवैध उत्खनन, परिवहन और भंडारण करने वालों की अब खैर नहीं। सरकार ने जुर्माने की राशि बढ़ाकर न्यूनतम 25 हजार से अधिकतम 5 लाख रुपये तक कर दी है।

  • 30 साल बाद भाटक (Rent) में वृद्धि: राजस्व बढ़ाने के उद्देश्य से अनिवार्य भाटक दरों (Dead Rent) में तीन दशकों के लंबे अंतराल के बाद बढ़ोतरी की गई है।

  • बंद खदानों पर ‘लैप्स’ की गाज: जो खदानें बिना किसी ठोस कारण के बंद पड़ी हैं, उन्हें अब ‘लैप्स’ (निरस्त) घोषित कर दिया जाएगा। इससे संसाधनों का सुव्यवस्थित दोहन सुनिश्चित होगा।

  • एकसमान नियम (Ease of Doing Business): पूरे प्रदेश में रॉयल्टी चुकता प्रमाण पत्र के नियमों को एकसमान कर दिया गया है, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी।

माफियाओं की कमर तोड़ने की तैयारी

अवैध परिवहन के मामलों में पकड़ी गई गाड़ियों को छुड़ाना अब और भी महंगा होगा। सरकार ने इसके लिए भारी जमानत राशि की शर्तें लागू की हैं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का यह कदम न केवल राज्य के राजस्व को बढ़ाने वाला है, बल्कि दुर्गम क्षेत्रों में भी सस्ती और सुलभ रेत उपलब्ध कराने की दिशा में बड़ा प्रहार माना जा रहा है।

“राज्य के खनिज संसाधनों पर पहला हक जनता का है। रेत की कालाबाजारी रोकने और पारदर्शिता लाने के लिए नियमों को सख्त किया गया है।”


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