प्रयागराज: ज्योतिष पीठ के स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की ‘शंकराचार्य’ उपाधि को लेकर छिड़े विवाद में अब भारतीय जनता पार्टी की वरिष्ठ नेता उमा भारती की एंट्री हो गई है। उमा भारती ने इस मामले में प्रशासन के रुख पर कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे अधिकार क्षेत्र से बाहर बताया है।
प्रशासन की कार्रवाई पर उठाए सवाल
उमा भारती ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा किसी से उनके ‘शंकराचार्य’ होने का प्रमाण मांगना उनकी मर्यादाओं और अधिकारों का खुला उल्लंघन है। उन्होंने जोर देकर कहा:
“यह तय करने का अधिकार कि कौन शंकराचार्य है, केवल अन्य शंकराचार्यों और विद्वत परिषद के पास है। प्रशासन को धार्मिक उपाधियों की वैधता जांचने का कोई अधिकार नहीं है।”
क्या है पूरा विवाद?
यह विवाद तब गरमाया जब माघ मेले के दौरान मौनी अमावस्या के अवसर पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अपने समर्थकों के साथ संगम स्नान के लिए जा रहे थे। आरोप है कि पुलिस और मेला प्रशासन ने उन्हें बीच में ही रोक दिया।
धरना प्रदर्शन: रोके जाने से नाराज अविमुक्तेश्वरानंद ने अपने शिविर के बाहर धरना शुरू कर दिया और वरिष्ठ अधिकारियों से माफी की मांग की।
प्रशासन का नोटिस: इस घटना के बाद मेला प्रशासन ने उन्हें एक नोटिस जारी किया। नोटिस में उनसे पूछा गया कि वे किस आधार पर ‘ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य’ की उपाधि का उपयोग कर रहे हैं।
समाधान की उम्मीद
विवाद के बीच उमा भारती ने उम्मीद जताई है कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उत्तर प्रदेश सरकार के बीच जल्द ही कोई सकारात्मक बातचीत होगी और इस मसले का सम्मानजनक समाधान निकाल लिया जाएगा।








