रायपुर 26 जनवरी 2026 : छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग से हिंसा के बादलों को चीरकर लोकतंत्र की एक ऐतिहासिक तस्वीर सामने आई है। दशकों तक माओवादी साये में रहे बीजापुर, नारायणपुर और सुकमा जिले के 47 अति-संवेदनशील गांवों में इस वर्ष 26 जनवरी को पहली बार गणतंत्र दिवस का आधिकारिक उत्सव मनाया जाएगा। यह उन क्षेत्रों के लिए एक नई शुरुआत है जहां कभी राष्ट्रीय ध्वज फहराना तो दूर, लोकतंत्र की बात करना भी जोखिम भरा था।
सुरक्षा कैंपों ने बदली सूरत
राज्य और केंद्र सरकार की संयुक्त रणनीति के तहत बीते दो वर्षों में नक्सल प्रभावित अंचलों में 59 नए सुरक्षा कैंप स्थापित किए गए हैं। इन कैंपों ने न केवल माओवादियों के आधार को कमजोर किया है, बल्कि प्रशासन की सीधी पहुंच ग्रामीणों तक सुनिश्चित की है। पिछले वर्ष जहां 53 गांवों ने पहली बार तिरंगा फहराया था, वहीं इस साल यह सूची और लंबी होकर 47 नए गांवों तक पहुंच गई है।
इन गांवों में मनेगा ‘आजादी’ का जश्न
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बीजापुर: पुजारीकांकेर, गुंजेपर्ती, भीमाराम, ताड़पाला हिल्स, संगमेटा, पिल्लूर और बेलनार सहित 16 गांव।
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नारायणपुर: एडजूम, जटलूर, धोबे, लंका, काकुर, बालेबेडा और मांदोडा समेत 21 गांव।
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सुकमा: गोगुंडा, नागाराम, बंजलवाही, वीरागंगरेल और पालीगुड़ा सहित 10 गांव।
बंदूक की जगह अब विकास की गूंज
सुरक्षा बलों की उपस्थिति से अब इन अंचलों में सड़कें, मोबाइल टावर, स्कूल और आंगनबाड़ियां सुचारू रूप से काम करने लगी हैं। हाल ही में धुर नक्सल प्रभावित जगरगुंडा में बैंकिंग सेवाओं की बहाली प्रशासन की बड़ी जीत मानी जा रही है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस बदलाव पर कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ सरकार बस्तर को भयमुक्त कर विकास की मुख्यधारा से जोड़ रही है।
“बस्तर के इन गांवों में फहराने वाला तिरंगा केवल कपड़ा नहीं, बल्कि शांति, विकास और लोकतंत्र की विजय का प्रतीक है।” — विष्णु देव साय, मुख्यमंत्री








