नई दिल्ली: भारत की गलियों, राजनीति और इतिहास को अपनी आवाज से दुनिया तक पहुँचाने वाले दिग्गज पत्रकार सर मार्क टली का रविवार को नई दिल्ली में निधन हो गया। वे 90 वर्ष के थे। उनके पूर्व सहयोगी सतीश जैकब ने इस दुखद समाचार की पुष्टि की है। टली पिछले कुछ समय से अस्वस्थ थे, लेकिन भारत के प्रति उनका प्रेम अंतिम सांस तक बना रहा।
एक रिपोर्टर जिसने इतिहास को बनते देखा
मार्क टली महज एक पत्रकार नहीं थे, वे उस दौर के जीवित गवाह थे जिसने आधुनिक भारत की नींव को बनते और बदलते देखा। 1964 में बीबीसी से जुड़ने के बाद, उन्होंने लगभग 30 वर्षों तक भारत में ब्यूरो चीफ के रूप में सेवा दी।
उनके करियर की कुछ ऐसी रिपोर्टिंग हैं, जिन्होंने दुनिया को हिलाकर रख दिया था:
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जुल्फिकार अली भुट्टो की फांसी: पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री की फांसी को उन्होंने जिस बारीकी से कवर किया, वह आज भी पत्रकारिता के छात्रों के लिए एक मिसाल है।
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इंदिरा गांधी की हत्या: 1984 में जब देश में संचार के साधन सीमित थे, तब पूरा भारत मार्क टली की आवाज के इंतजार में रेडियो से चिपका रहता था। ऑपरेशन ब्लू स्टार से लेकर इंदिरा गांधी की हत्या तक, उनकी रिपोर्टिंग को सबसे विश्वसनीय माना जाता था।
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अयोध्या और बाबरी विध्वंस: उन्होंने भारत के कई बड़े सांप्रदायिक और राजनीतिक बदलावों को बहुत करीब से देखा और दुनिया के सामने निष्पक्षता से रखा।
वीर सांघवी ने जताया शोक: “बीबीसी को दिलाई पहचान“
वरिष्ठ पत्रकार वीर सांघवी ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा, “मार्क टली अपनी पीढ़ी के महानतम रेडियो पत्रकार थे। उन्होंने भारत को दुनिया तक पहुँचाया और बीबीसी को वह विश्वसनीयता दिलाई, जो शायद ही पहले कभी किसी के पास थी।”
भारत से अटूट लगाव
मार्क टली का जन्म कोलकाता में हुआ था और भले ही वे ब्रिटिश नागरिक थे, लेकिन उनका दिल हमेशा भारतीय रहा। बीबीसी से इस्तीफा देने के बाद भी उन्होंने भारत नहीं छोड़ा और एक स्वतंत्र पत्रकार व लेखक के रूप में यहीं बस गए। भारत सरकार ने उन्हें पद्म श्री और पद्म भूषण जैसे प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा था।








