जबलपुर/भोपाल, [26 जून 2026]: मध्य प्रदेश की सियासत का एक लंबा और बेहद चर्चित कानूनी विवाद आखिरकार गुरुवार को बेहद सौहार्दपूर्ण मोड़ पर समाप्त हो गया। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और केंद्रीय मंत्री व सूबे के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के बेटे कार्तिकेय सिंह चौहान के बीच चल रहा मानहानि का मामला आपसी रजामंदी के बाद हमेशा के लिए खत्म हो गया है।
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क्या था पूरा विवाद? (2018 का झाबुआ चुनावी भाषण)
यह पूरा मामला साल 2018 के मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान शुरू हुआ था।
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झाबुआ में एक चुनावी जनसभा को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने कथित तौर पर विश्व प्रसिद्ध ‘पनामा पेपर्स लीक’ प्रकरण का जिक्र किया था।
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इस दौरान उनके मुंह से तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के बेटे कार्तिकेय सिंह चौहान का नाम निकल गया था।
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अपने नाम के दुरुपयोग और प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचने का आरोप लगाते हुए कार्तिकेय चौहान ने भोपाल की विशेष सांसद-विधायक अदालत (MP-MLA Court) में राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दर्ज करा दिया था।
दिसंबर 2024 में जारी हुआ था समन
इस मामले में लंबी कानूनी प्रक्रिया चली। भोपाल की अदालत ने सुनवाई करते हुए दिसंबर 2024 में राहुल गांधी को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश होने के लिए समन जारी किया था। निचली अदालत के इस आदेश के खिलाफ राहुल गांधी ने राहत के लिए मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय (High Court) का दरवाजा खटखटाया था।
हाई कोर्ट में राहुल गांधी ने जताया खेद, कहा- ‘भूलवश निकला नाम’
गुरुवार को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान राहुल गांधी की ओर से एक आवेदन दायर किया गया। इस आवेदन में राहुल गांधी ने साल 2018 की उस घटना पर गहरा खेद व्यक्त किया। उन्होंने कोर्ट के सामने स्पष्ट किया:
“उस वक्त चुनावी माहौल में भूलवश (गलती से) उनके मुंह से कार्तिकेय सिंह चौहान का नाम निकल गया था, जबकि उनका आशय किसी अन्य व्यक्ति की तरफ था। उनका मकसद कार्तिकेय की छवि खराब करना नहीं था।”
कार्तिकेय चौहान ने दिखाया बड़ा दिल, दी माफी
राहुल गांधी द्वारा अपनी गलती स्वीकार करने और लिखित में खेद जताने के बाद कार्तिकेय सिंह चौहान ने भी बड़ा दिल दिखाया। कार्तिकेय ने राहुल गांधी के खेद को सहर्ष स्वीकार कर लिया और मामले को आगे न बढ़ाने का फैसला किया। दोनों पक्षों के बीच आपसी सहमति बनने के बाद कोर्ट ने इस हाई-प्रोफाइल मामले को औपचारिक रूप से बंद कर दिया।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज
इस रजामंदी के साथ ही अब इस प्रकरण में आगे की सभी कानूनी लड़ाइयों के रास्ते पूरी तरह बंद हो गए हैं। मध्य प्रदेश और देश के राजनीतिक गलियारों में इस सौहार्दपूर्ण समाधान की काफी तारीफ हो रही है। नेताओं का मानना है कि व्यक्तिगत स्तर पर इस तरह के विवादों का बातचीत से सुलझना भारतीय लोकतंत्र की एक खूबसूरत तस्वीर पेश करता है।
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