गाजियाबाद में शव की गलत शिनाख्त ने पुलिस और परिवार को चकराया, अब असली मृतक की तलाश शुरू।
गाजियाबाद, [26 जून 2026]: उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से एक ऐसा फिल्मी और सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने पुलिस प्रशासन, फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स और स्थानीय लोगों के होश उड़ा दिए हैं। जिस व्यक्ति को परिवार ने मृत मानकर उसका अंतिम संस्कार कर दिया था और जिसकी आत्मा की शांति के लिए घर में तेरहवीं का भोज चल रहा था, वह अचानक जीवित होकर अपने ही घर लौट आया।
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विवाद के बाद गए थे जेल, रिहाई के बाद हुए लापता
पूरा मामला वैशाली के ‘कल्पना अपार्टमेंट’ का है। यहाँ रहने वाले 38 वर्षीय गिरधर सिंह बिष्ट का बीती 16 मई को स्थानीय दुकानदारों से किसी बात पर विवाद हुआ था। पुलिस ने शांति भंग की आशंका (धारा 151) में उन्हें गिरफ्तार कर डासना जेल भेज दिया था। 21 मई को जेल से रिहा होने के बाद गिरधर अपने घर नहीं पहुंचे, जिसके बाद चिंतित परिजनों ने कौशाम्बी थाने में उनकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई।
शव की गलत पहचान और हत्या का मुकदमा
मामले में मोड़ तब आया जब 13 जून को मसूरी थाना क्षेत्र में पुलिस को एक लावारिस शव मिला। सूचना पाकर पहुंचे गिरधर के परिजनों ने जल्दबाजी या मानसिक तनाव के चलते उस शव की पहचान गिरधर के रूप में कर दी।
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परिजनों ने पुलिस पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कौशाम्बी थाने पर जमकर हंगामा किया।
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भारी दबाव के बीच पुलिस ने मसूरी थाने में अज्ञात लोगों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया।
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इसके बाद परिजनों ने शव का बाकायदा अंतिम संस्कार भी कर दिया।
जब तेरहवीं के भोज के बीच हुई ‘मृतक’ की एंट्री
कहानी का सबसे बड़ा ट्विस्ट 25 जून की रात को आया। घर में गिरधर की तेरहवीं की रस्में चल रही थीं, तभी अचानक गिरधर सिंह बिष्ट सही-सलामत दरवाजे पर आकर खड़े हो गए। उन्हें जिंदा देख परिजनों और सोसाइटी के लोगों के पैरों तले जमीन खिसक गई। जो माहौल गमगीन था, वह पल भर में कौतूहल में बदल गया। गिरधर ने बताया कि वह परिवार से नाराज होकर पंजाब के एक सत्संग में चले गए थे और उन्हें इस पूरे घटनाक्रम की भनक तक नहीं थी।
कानूनी और प्रशासनिक व्यवस्था पर बड़े सवाल
गिरधर के जिंदा लौटने के बाद अब कई गंभीर कानूनी सवाल खड़े हो गए हैं:
असली मृतक कौन? परिजनों ने जिस शव का अंतिम संस्कार किया, वह आखिर किसका था?
जांच में लापरवाही: क्या पुलिस ने शव सौंपने से पहले DNA टेस्ट या उंगलियों के निशान (Fingerprints) जैसी वैज्ञानिक पहचान प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया?
दर्ज मुकदमे का क्या होगा? जो हत्या का मुकदमा दर्ज हुआ था, अब उस पर क्या कार्रवाई होगी?
अधिकारियों का क्या कहना है?
“परिजनों की शिनाख्त के आधार पर ही पोस्टमार्टम के बाद शव उन्हें सौंपा गया था। अब 25 जून को गिरधर सिंह जीवित लौट आए हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि वह शव किसका था? इसकी पहचान के लिए पुलिस ने नए सिरे से अलग से जांच शुरू कर दी है।” — अभिषेक श्रीवास्तव, ACP इंदिरापुरम
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