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छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता (UCC) की तैयारी: सरकार ने गठित की 5 सदस्यीय विशेषज्ञ समिति, जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई बनीं अध्यक्ष

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रायपुर 26 जून । छत्तीसगढ़ की विष्णुदेव साय सरकार ने राज्य में समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code – UCC) लागू करने की दिशा में एक बहुत बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है। राज्य सरकार ने यूसीसी के तमाम कानूनी पहलुओं, संभावनाओं और इसे लागू करने के लिए जरूरी व्यवस्थाओं का बारीकी से अध्ययन करने के लिए 5 सदस्यीय उच्च स्तरीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया है। सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) द्वारा इस संबंध में औपचारिक अधिसूचना भी जारी कर दी गई है।

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सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जज करेंगी समिति की अध्यक्षता

सरकार द्वारा गठित इस हाई-पावर कमेटी की कमान सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई को सौंपी गई है। जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई इससे पहले उत्तराखंड में यूसीसी का ड्राफ्ट तैयार करने वाली समिति की भी अध्यक्षता कर चुकी हैं। इस समिति में कानून, प्रशासन और शिक्षा जगत के दिग्गज चेहरों को शामिल किया गया है।

समिति के सदस्यों की पूरी सूची:

  1. न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) रंजना प्रकाश देसाई — अध्यक्ष (पूर्व जज, सुप्रीम कोर्ट)

  2. शत्रुघ्न सिंह (सेवानिवृत्त IAS) — सदस्य (पूर्व वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी)

  3. एम. के. राउत (सेवानिवृत्त IPS) — सदस्य (पूर्व वरिष्ठ पुलिस अधिकारी)

  4. मोहन पवार — सदस्य (वरिष्ठ अधिवक्ता एवं विधि विशेषज्ञ)

  5. ज्योति रानी सिंह (सेवानिवृत्त प्राचार्य) — महिला सदस्य (शिक्षाविद)

समिति के जिम्मे सौंपे गए ये महत्वपूर्ण कार्य

यह विशेषज्ञ समिति छत्तीसगढ़ की सामाजिक और भौगोलिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए यूसीसी का एक व्यापक खाका तैयार करेगी। समिति को मुख्य रूप से निम्नलिखित जिम्मेदारियां दी गई हैं:

  • कानूनी स्थिति का अध्ययन: समिति राज्य में वर्तमान में लागू विभिन्न पर्सनल लॉ और कानूनी स्थिति का गहराई से अध्ययन करेगी।

  • प्रमुख विषयों पर सुझाव: विवाह (शादी), तलाक, भरण-पोषण (गुजारा भत्ता), उत्तराधिकार (संपत्ति का अधिकार) और दत्तक ग्रहण (बच्चा गोद लेना) जैसे संवेदनशील विषयों पर एक समान नीति के लिए सुझाव देगी।

  • जनता और विशेषज्ञों से संवाद: समिति राज्य के नागरिकों, विभिन्न सामाजिक संगठनों, आदिवासी समूहों, कानूनी विशेषज्ञों और अन्य हितधारकों (Stakeholders) से मुलाकात कर उनकी राय और सुझाव लेगी।

  • अन्य राज्यों के मॉडल का अध्ययन: उत्तराखंड समेत जिन राज्यों में यूसीसी लागू है या प्रस्तावित है, वहां की व्यवस्थाओं का अध्ययन किया जाएगा।

  • फाइनल ड्राफ्ट और सिफारिशें: सभी पहलुओं को परखने के बाद समिति यूसीसी का एक अंतिम प्रारूप (Draft) तैयार करेगी और आवश्यक विधायी व प्रशासनिक सिफारिशों के साथ अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपेगी।

क्या है समान नागरिक संहिता (UCC)?

समान नागरिक संहिता का सीधा अर्थ है— देश या राज्य में रहने वाले सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून होना, चाहे वे किसी भी धर्म, जाति या समुदाय के हों।

वर्तमान व्यवस्था में भारत के अलग-अलग धार्मिक समुदायों के लिए शादी, तलाक और संपत्ति के बंटवारे जैसे मामलों में अपने-अपने पर्सनल लॉ (जैसे हिंदू कोड बिल, मुस्लिम पर्सनल लॉ आदि) लागू हैं। यूसीसी आने के बाद ये सभी व्यक्तिगत मामले एक ही कानून के दायरे में आ जाएंगे।

भाजपा के चुनावी वादे को पूरा करने की ओर कदम

छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अपने संकल्प पत्र (घोषणा पत्र) में यह वादा किया था कि राज्य में सरकार बनने पर समान नागरिक संहिता लागू की जाएगी। राज्य में साय सरकार के गठन के बाद इसे इस दिशा में पहला बड़ा और औपचारिक कदम माना जा रहा है।

उत्तराखंड के बाद छत्तीसगढ़ की तैयारी:

आपको बता दें कि उत्तराखंड देश का पहला ऐसा राज्य है जिसने समान नागरिक संहिता कानून को अपने यहां पूरी तरह लागू किया है, जहां जनवरी 2025 से यूसीसी प्रभावी हो चुका है। अब छत्तीसगढ़ भी उन चुनिंदा राज्यों की कतार में शामिल हो गया है, जहां यूसीसी को लेकर आधिकारिक और कानूनी प्रक्रिया तेज हो गई है।

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