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“बीमा धारकों की बड़ी जीत: अगर आपकी कंपनी भी क्लेम में अड़ा रही है रोड़ा, तो बिलासपुर का यह फैसला बनेगा आपकी ढाल!”

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बिलासपुर, छत्तीसगढ़ 21 जनवरी 2026| अक्सर बीमा कंपनियाँ लुभावने वादे कर पॉलिसी तो बेच देती हैं, लेकिन जब क्लेम देने की बारी आती है, तो ‘बारीक अक्षरों’ में लिखी शर्तों और पुरानी बीमारियों का बहाना बनाकर हाथ खड़े कर लेती हैं। लेकिन बिलासपुर जिला उपभोक्ता आयोग ने मैक्स लाइफ इंश्योरेंस के खिलाफ जो फैसला सुनाया है, उसने देशभर की बीमा कंपनियों की नींद उड़ा दी है।

मामला सिर्फ 1 करोड़ का नहीं, भरोसे का है: आयोग ने स्पष्ट कर दिया है कि अगर पॉलिसी जारी करने से पहले कंपनी ने खुद मेडिकल जांच कराई है, तो बाद में वह किसी भी पुराने रिकॉर्ड का बहाना बनाकर क्लेम खारिज नहीं कर सकती। आयोग के अध्यक्ष आनंद कुमार सिंघल की पीठ ने इसे ‘सेवा में गंभीर कमी’ माना है।

क्या हुआ था? कौशल प्रसाद कौशिक ने अपनी पत्नी के लिए पॉलिसी ली, प्रीमियम भरा, और जब कोविड से पत्नी की मृत्यु हुई, तो कंपनी ने मदद के बजाय ‘हृदय रोग’ का पुराना बहाना बनाकर क्लेम रिजेक्ट कर दिया। कंपनी की इस ‘शॉर्टकट’ वाली मानसिकता पर अब आयोग ने 12% ब्याज का जुर्माना लगाकर यह संदेश दिया है कि उपभोक्ता के हक से खिलवाड़ महंगा पड़ेगा।

अब क्या होगा? कंपनी को न केवल 1 करोड़ रुपये देने होंगे, बल्कि 2020 से अब तक का मोटा ब्याज और 2 लाख रुपये की मानसिक क्षतिपूर्ति भी देनी होगी। यह फैसला उन सभी लोगों के लिए उम्मीद की किरण है जो बीमा कंपनियों के दफ्तरों के चक्कर काट-काट कर थक चुके हैं।

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