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सरगुजा में फूटा आदिवासी समाज का गुस्सा: पूर्व ST आयोग अध्यक्ष के खिलाफ मोर्चा, माफी की मांग

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अम्बिकापुर/सरगुजा | 21 जनवरी, 2026 सरगुजा की शांत वादियों में उस समय आक्रोश की लहर दौड़ गई, जब अनुसूचित जनजाति आयोग के पूर्व अध्यक्ष भानुप्रताप सिंह पर आदिवासी ग्रामीणों के साथ अभद्र व्यवहार और गाली-गलौज करने के आरोप लगे। साल्ही मोड़ के पास हुई इस घटना ने अब एक बड़े सामाजिक विरोध का रूप ले लिया है। आदिवासी समाज ने इसे अपनी अस्मिता और गरिमा पर सीधा प्रहार करार देते हुए सिंह से सार्वजनिक माफी की मांग की है।

क्या है पूरा मामला?

मिली जानकारी के अनुसार, भानुप्रताप सिंह अपने समर्थकों के साथ राजनीतिक दौरे पर गांव के भीतर प्रवेश करने की कोशिश कर रहे थे। स्थानीय ग्रामीणों ने साल्ही मोड़ पर उन्हें रोककर शांतिपूर्ण तरीके से वापस जाने का आग्रह किया। ग्रामीणों का आरोप है कि इस पर भानुप्रताप सिंह आपा खो बैठे और उन्होंने बुजुर्गों व महिलाओं की मौजूदगी में अमर्यादित भाषा का प्रयोग किया।

सड़कों पर उतरा समाज: “बाहरी लोग वापस जाओ” के नारे

घटना के विरोध में आदिवासी समुदाय ने एक विशाल रैली निकाली। प्रदर्शनकारियों के हाथों में तख्तियां थीं और हवा में “भानुप्रताप सिंह वापस जाओ” और “आदिवासी अपमान बर्दाश्त नहीं करेगा” जैसे नारे गूंज रहे थे। समाज के प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया कि यह विरोध किसी राजनीतिक दल के खिलाफ नहीं, बल्कि उस सामंती मानसिकता के खिलाफ है जो आदिवासियों को दोयम दर्जे का नागरिक समझती है।

समाज की दो टूक: “अब आदेश नहीं, संवाद चाहिए”

 

आदिवासी नेताओं ने कड़े लहजे में कहा कि एक संवैधानिक पद पर रह चुके व्यक्ति से इस तरह के आचरण की अपेक्षा नहीं थी। उन्होंने संदेश दिया कि:

  • आदिवासी समाज अब अपने अधिकारों और सम्मान के प्रति पूरी तरह जागरूक है।

  • शिक्षा, रोजगार और विकास उनकी प्राथमिकता है, न कि किसी का राजनीतिक एजेंडा।

  • भविष्य में इस तरह की बदसलूकी होने पर सामाजिक के साथ-साथ कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।

निष्कर्ष: सरगुजा की इस घटना ने स्पष्ट कर दिया है कि अब आदिवासी समाज अपमान की राजनीति को स्वीकार करने के मूड में नहीं है। उनका सीधा संदेश है— “हमें राजनीति नहीं, प्रगति चाहिए और बदसलूकी नहीं, सम्मान चाहिए।”