● समीक्षा बैठक में दो टूक: निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और समय-सीमा से समझौता बर्दाश्त नहीं ● अगले शैक्षणिक सत्र से पहले स्कूल-कॉलेज भवनों को पूर्ण करने का अल्टीमेटम ● संरक्षण देने वाले अधिकारियों पर भी गिरेगी गाज, जवाबदेही तय
Korba CollectorAction : जिले में शासकीय निर्माण कार्यों की कछुआ चाल और गुणवत्ता में अनदेखी पर नवपदस्थ कलेक्टर कुणाल दुदावत ने सर्जिकल स्ट्राइक शुरू कर दी है। सोमवार को कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में आयोजित समीक्षा बैठक के दौरान कलेक्टर ने सख्त लहजे में स्पष्ट कर दिया कि अब मनमानी का दौर खत्म हो चुका है। उन्होंने निर्देश दिए कि जो भी एजेंसी समय पर काम पूरा नहीं करेगी, उसका अनुबंध तत्काल निरस्त कर उसे ब्लैकलिस्ट किया जाए। आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज।
लापरवाह ठेकेदारों में हड़कंप, रडार पर अधिकारी
कलेक्टर के इस सख्त अल्टीमेटम के बाद उन ठेकेदारों की नींद उड़ गई है जो वर्षों से निर्माण कार्यों को अधर में लटकाए बैठे थे। बैठक में कलेक्टर ने केवल ठेकेदारों को ही नहीं, बल्कि उन्हें संरक्षण देने वाले विभागीय अधिकारियों को भी आड़े हाथों लिया। उन्होंने साफ कहा कि कार्यों में लेटलतीफी के लिए संबंधित अधिकारियों की भी जवाबदेही तय की जाएगी। आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज।
शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़े निर्माणों पर फोकस
कलेक्टर ने लोक निर्माण विभाग (PWD), राष्ट्रीय राजमार्ग (NH), सेतु निगम और PMGSY सहित सभी निर्माण विभागों के कार्यों की बारीकी से पड़ताल की। उन्होंने कड़े निर्देश दिए कि:
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शिक्षा: सभी निर्माणाधीन स्कूल, कॉलेज और छात्रावासों का काम अगले शैक्षणिक सत्र से पहले अनिवार्य रूप से पूर्ण हो।
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सड़कें: राष्ट्रीय राजमार्गों की मरम्मत और सड़कों के निर्माण में तेजी लाई जाए। दूरस्थ क्षेत्र लैंगा में काम की गति बढ़ाने के लिए मौके पर ही वीटी प्लांट स्थापित किया जाए।
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उच्च शिक्षा: बंजारी महाविद्यालय के लंबित भवन और छात्रावास का काम जल्द पूरा हो। एप्रोच रोड और बाउंड्री वॉल के लिए डीएमएफ (DMF) से तत्काल प्रस्ताव मांगे गए हैं।
जमीनी विवादों का तत्काल निपटारा
निर्माण कार्यों में आ रही बाधाओं को दूर करने के लिए कलेक्टर ने एसडीएम (SDM) स्तर पर समन्वय स्थापित कर भूमि विवादों को सुलझाने के निर्देश दिए। पीएमजीएसवाई और सेतु विभाग को मशीनरी और श्रमिकों की संख्या बढ़ाकर समानांतर रूप से कार्य शुरू करने को कहा गया है, ताकि डेडलाइन के भीतर काम खत्म किया जा सके।
“गुणवत्ता से समझौता किसी भी स्तर पर स्वीकार्य नहीं है। जो एजेंसियां काम में रुचि नहीं ले रही हैं, उन्हें बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा। प्रशासन का उद्देश्य जिले में पारदर्शिता और समयबद्धता के साथ विकास कार्यों को धरातल पर उतारना है।” — कुणाल दुदावत, कलेक्टर








