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व्यास गद्दी से सिंहगर्जना: ‘मुझमें दम है, चरणदास महंत आकर ले लें मेरे ज्ञान की परीक्षा’— चिरमिरी में भड़के जगद्गुरु रामभद्राचार्य

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“राम विरोधियों को मिर्ची लग रही है, लगने दो!”

चिरमिरी 26 मई । छत्तीसगढ़ के कोयलांचल क्षेत्र चिरमिरी में चल रही भव्य रामकथा के दौरान उस समय आस्था का पंडाल राजनीतिक और धार्मिक महासंग्राम का कुरुक्षेत्र बन गया, जब प्रख्यात संत जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने प्रदेश के नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत के बयान पर सीधे व्यास गद्दी से सिंहगर्जना कर दी। मंच से बरसते हुए जगद्गुरु ने मर्यादाओं की लक्ष्मण रेखा लांघने वाले राजनेताओं को न केवल खरी-खोरी सुनाई, बल्कि खुले मंच से अपनी योग्यता की परीक्षा लेने की चुनौती भी दे डाली।

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“22 भाषाओं का ज्ञाता हूँ, खैरात में नहीं मिली जगद्गुरु की उपाधि”

कथा मंडप में उमड़े हजारों श्रद्धालुओं के सामने अपने चिरपरिचित आक्रामक अंदाज में जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने कहा कि कुछ लोगों को संतों की गरिमा और सनातन परंपरा का ककहरा भी नहीं मालूम है। उन्होंने गरजते हुए कहा:

“मेरे जगतगुरु होने का जिसे भी शक हो, वह आकर मेरा पूर्ण परीक्षण कर ले। जगद्गुरु की उपाधि खैरात में नहीं मिलती; इसके लिए सनातन धर्म के तीन मुख्य ग्रंथों (प्रस्थानत्रयी) पर भाष्य लिखना अनिवार्य होता है। मैंने वह कठोर मापदंड पूरा किया है और देश के सभी अखाड़ों ने सर्वसम्मति से इसका समर्थन किया है।”

उन्होंने अपनी अद्वितीय विद्वता का हवाला देते हुए आगे कहा, “मैं 22 भाषाओं में धाराप्रवाह बोल सकता हूँ। जिन लोगों को संतों के बारे में बात करने का सामान्य ज्ञान (Common Sense) तक नहीं है, वे मेरी योग्यता पर सवाल उठा रहे हैं।”

“राम विरोधियों को मिर्ची लग रही है, लगने दो!”

चरणदास महंत द्वारा खुद को ‘भाजपा का प्रचारक’ बताए जाने वाले तंज पर सीधा प्रहार करते हुए रामभद्राचार्य ने साफ कहा कि प्रभु श्री राम की बात करने पर जिन्हें दर्द हो रहा है, वे अपना दर्द दबाकर रखें। उन्होंने दो टूक लहजे में कहा:

  • “इनको मिर्ची लग रही है, तो लगती रहे, मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता।”

  • “मेरा संकल्प केवल रामजी के लिए है। जो भी रामजी से सच्चा प्रेम करेगा, उसे व्यास पीठ और मेरा खुलकर आशीर्वाद मिलेगा।”

जैसे ही जगद्गुरु ने ये तीखे बाण चलाए, पूरा कथा पंडाल ‘जय श्री राम’ और ‘जगद्गुरु रामभद्राचार्य की जय’ के गगनभेदी नारों से गूंज उठा।

क्या था चरणदास महंत का वो बयान, जिससे भड़का यह आक्रोश?

इस पूरे सियासी और धार्मिक भूचाल की जड़ में कांग्रेस के दिग्गज नेता और छत्तीसगढ़ विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत का एक विवादित बयान है। महंत ने हाल ही में जगद्गुरु रामभद्राचार्य पर निशाना साधते हुए कहा था कि वे रामभद्राचार्य को ‘जगतगुरु’ नहीं मानते, क्योंकि उनका आचरण संतों जैसा नहीं बल्कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) के एक राजनैतिक स्टार प्रचारक जैसा है।

महंत के इसी बयान पर पलटवार करते हुए जगद्गुरु ने अब आर-पार की लड़ाई छेड़ दी है। इस करारे जवाब के बाद छत्तीसगढ़ के सियासी गलियारों में हड़कंप मच गया है, और चिरमिरी के स्थानीय श्रद्धालुओं से लेकर सोशल मीडिया तक, हर जगह इस महा-संग्राम की चर्चा तेज हो गई है।

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