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मतदाता सूची में अनियमितताओं की जांच की मांग वाली याचिका खारिज

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नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को उस जनहित याचिका (PIL) को खारिज कर दिया, जिसमें विपक्ष के नेता राहुल गांधी की ओर से मतदाता सूची में अनियमितताओं के आरोपों की SIT से जांच की मांग की गई थी। जस्टिस सूर्याकांत और जॉयमाल्या बागची की पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता अपनी शिकायत का समाधान कहीं और कर सकता है, लेकिन पीआईएल के जरिए कोर्ट में नहीं। याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया, ‘चुनाव आयोग को प्रतिनिधित्व दिया गया था, लेकिन उस पर विचार नहीं किया गया।’ इस पर कोर्ट ने साफ किया, ‘जनहित के नाम पर दायर रिट याचिका पर विचार नहीं किया जाएगा।’ कोर्ट ने याचिका को खारिज करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता उपलब्ध दूसरे उपायों के लिए स्वतंत्र है।

याचिका में तर्क दिया गया कि मतदाता सूचियों में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियों ने निष्पक्ष चुनाव की संवैधानिक गारंटी को प्रभावित किया है। इसमें दावा किया गया कि बेंगलुरु सेंट्रल संसदीय सीट के महादेवपुरा विधानसभा क्षेत्र में हजारों डुप्लिकेट, अवैध और फर्जी एंट्री पाई गईं, जिसने ‘एक व्यक्ति, एक वोट’ के सिद्धांत को कमजोर किया। यह भी कहा गया कि कई मतदाता एक ही EPIC नंबर के तहत कई निर्वाचन क्षेत्रों में रजिस्टर्ड पाए गए। कुछ लोग एक ही निर्वाचन क्षेत्र में अलग-अलग पहचान नंबरों के साथ कई बार दर्ज थे।

याचिका में क्या दिया गया तर्क
PIL के मुताबिक, महादेवपुरा में 40 हजार से अधिक अवैध मतदाता, 10 हजार से अधिक डुप्लिकेट एंट्री और हजारों मतदाता एक ही मकान नंबर या पिता के नाम जैसे समान विवरणों के साथ पाए गए। महाराष्ट्र में भी इसी तरह की अनियमितताओं का आरोप लगाया गया, जहां चार महीनों में लगभग 39 लाख नए मतदाता जोड़े गए। चंद्रपुर में करीब 80 मतदाता एक ही खाली पते पर दिखाए गए। याचिका में कर्नाटक के कलबुर्गी में FIR का भी जिक्र किया गया, जहां संदिग्ध मतदाता सूची में वृद्धि का पता चला था। याचिका में 63 वर्षीय महिला के मामले को भी उजागर किया गया, जिसका नाम हटाया गया था जबकि उसने ऐसी कोई अपील नहीं की थी। दावा किया गया कि इस तरह की हेराफेरी संविधान के अनुच्छेद 324, 325 और 326 का उल्लंघन करती है

 

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