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सज्जन कुमार के निधन के बाद फिर चर्चा में आई 1984 सिख विरोधी दंगों में चाम कौर की रोंगटे खड़े कर देने वाली गवाही

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    नई दिल्ली 21 अगस्त:  कांग्रेस के पूर्व सांसद सज्जन कुमार के निधन के बाद 1984 के सिख विरोधी दंगों के गहरे जख्म और अदालती कार्यवाहियों के दर्दनाक किस्से एक बार फिर सुर्खियों में हैं। उम्रकैद की सजा काट रहे सज्जन कुमार को दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां 20 अगस्त 2026 को उनका निधन हो गया। उनके जाने के बाद अदालत में दर्ज कराई गई पीड़िता चाम कौर की वह गवाही विशेष रूप से याद की जा रही है, जिसने इस मामले को कानूनी तौर पर एक निर्णायक मोड़ दिया था।

नवंबर 2018 में दिल्ली की एक अदालत में सुनवाई के दौरान चाम कौर ने सज्जन कुमार की सीधे पहचान की थी। उन्होंने अपने बयान में बताया कि 1 नवंबर 1984 को जब वह घर से बाहर निकली थीं, तब उन्होंने सज्जन कुमार को उग्र भीड़ को यह कहते हुए उकसाते सुना था, “सिखों ने हमारी मां (इंदिरा गांधी) को मारा है, इन्हें मत छोड़ो, मार डालो।” चाम कौर ने स्पष्ट किया था कि वह राशन कार्ड और अन्य सरकारी कागजी काम-काज के सिलसिले में सज्जन कुमार के दफ्तर जाती रहती थीं, इसलिए भीड़ के बीच उन्हें पहचानने में कोई चूक नहीं हुई।

इस गवाही का सबसे दर्दनाक पहलू वह हमला था, जो अगले ही दिन चाम कौर के परिवार पर हुआ। उन्होंने अदालत को बताया कि 2 नवंबर को उग्र भीड़ ने उनके घर की दूसरी मंजिल पर छिपे उनके बेटे कपूर सिंह और पिता सरदारजी सिंह को खींचकर बाहर निकाला। भीड़ ने दोनों के साथ बेरहमी से मारपीट की और उन्हें छत से नीचे फेंक दिया, जिससे दोनों की मौत हो गई। इस हमले में चाम कौर पर भी जानलेवा हमला किया गया था। इस मामले में चाम कौर के अलावा शीला कौर भी एक प्रमुख चश्मदीद गवाह थीं, जिन्होंने अदालत में सज्जन कुमार की भूमिका की पुष्टि की थी।

इन्हीं गवाहियों और साक्ष्यों के आधार पर दिल्ली हाईकोर्ट ने दिसंबर 2018 में सज्जन कुमार को दिल्ली कैंट और पालम कॉलोनी क्षेत्र में पांच सिखों की हत्या तथा गुरुद्वारा जलाने के अपराध में उम्रकैद की सजा सुनाई थी। सुप्रीम कोर्ट से अपील खारिज होने के बाद वे तिहाड़ जेल में अपनी सजा काट रहे थे। फरवरी 2025 में उन्हें 1984 हिंसा से जुड़े एक अन्य मामले में भी आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी।

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