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RSS विवाद पर बी.एल. संतोष का पलटवार: ‘संगठन रजिस्ट्रेशन से नहीं, लाखों लोगों के भरोसे से चलता है’

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भारत को आजादी केवल नमक सत्याग्रह या चरखा चलाने से तोहफे में नहीं मिली : बी.एल. संतोष

बेंगलुरु / नई दिल्ली: RSS Registration Controversy : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के पंजीकरण (रजिस्ट्रेशन) को लेकर जारी राजनीतिक घमासान के बीच भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) बी.एल. संतोष ने कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खरगे के बयान पर तीखा हमला बोला है। ‘हिंदू जागरण वेदिके’ द्वारा आयोजित ‘अखंड भारत संकल्प दिवस’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि RSS को अपना अस्तित्व साबित करने के लिए किसी सरकारी रजिस्ट्रेशन की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि यह संगठन दशकों से लाखों लोगों के अटूट विश्वास के बल पर काम कर रहा है।

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स्वतंत्रता संग्राम और रजाकारों के इतिहास का जिक्र

बी.एल. संतोष ने स्वतंत्रता संग्राम में क्रांतिकारियों के योगदान पर जोर देते हुए कहा कि भारत को आजादी केवल नमक सत्याग्रह या चरखा चलाने से तोहफे में नहीं मिली, बल्कि मदन लाल ढींगरा, चंद्रशेखर आजाद, भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु जैसे हजारों देशभक्तों के बलिदान से हासिल हुई है।

प्रियांक खरगे को इतिहास की याद दिलाते हुए बीजेपी नेता ने दावा किया कि हैदराबाद के रजाकारों के अत्याचारों के कारण मल्लिकार्जुन खरगे के परिवार को अपना गांव छोड़कर गुलबर्गा (कलबुर्गी) भागना पड़ा था। उन्होंने कहा कि उस समय रजाकारों का मुकाबला RSS के कार्यकर्ताओं ने ही किया था।

हिंदू आबादी और ‘अखंड भारत’ का विजन

संतोष ने अपने संबोधन में जनसांख्यिकी (Demographic) बदलावों पर चिंता जताते हुए कहा कि जिस भी क्षेत्र में हिंदू आबादी घटती है, वहां देश से जुड़ाव की भावना कमजोर होने लगती है और देश-विरोधी तत्व पनपने लगते हैं। उन्होंने बेंगलुरु की शिवाजीनगर और चामराजपेट सीटों का उदाहरण देते हुए राजनीतिक दलों को चुनौती दी कि वे वहां से हिंदू उम्मीदवार मैदान में उतारें।

उन्होंने ‘अखंड भारत’ के विचार को एक सांस्कृतिक और राष्ट्रवादी सपना बताते हुए कहा कि यह कोई असंभव लक्ष्य नहीं है। पूर्वी और पश्चिमी जर्मनी के एकीकरण, वियतनाम तथा इज़राइल का उदाहरण देते हुए उन्होंने आह्वान किया कि देश के हर नागरिक को अखंड भारत के निर्माण का संकल्प लेना चाहिए।

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