Latest News
गणेशोत्सव जुलूस के दौरान डीजे पर नाचने को लेकर विवाद, चाकूबाजी में 16 वर्षीय किशोर की मौत भारत की थाली का सच: क्या भारत केवल शाकाहारी देश है? BRICS डिनर, राहुल गांधी का दावा और भारतीय खान-पान का इतिहास कैल्शियम स्कोर सही, तो भी दिल की बीमारी का खतरा? जानिए क्या कहती है 10 साल की यह नई रिसर्च कोरबा में आसमान में दिखा अद्भुत नजारा: अर्धचंद्र के ऊपर चमका बेहद खूबसूरत तारा, जानें क्या है इसका खगोलीय सच बालको मेडिकल सेंटर के चौथे वार्षिक बीएमसी छत्तीसगढ़ कैंसर कॉन्क्लेव में शामिल होंगे देश-दुनिया के कैंसर विशेषज्ञ गणेशोत्सव से पहले कोरबा पुलिस का बड़ा एक्शन: एक ही दिन में 105 अपराधियों पर कार्रवाई, 60 वारंटी भेजे गए जेल
Home » छत्तीसगढ़ » गेंदा फूल की महक से बदली किसान की किस्मत: धान की पारंपरिक खेती छोड़ हेमचंद साहू ने कमाया 2 लाख का शुद्ध मुनाफा

गेंदा फूल की महक से बदली किसान की किस्मत: धान की पारंपरिक खेती छोड़ हेमचंद साहू ने कमाया 2 लाख का शुद्ध मुनाफा

Share:

 राष्ट्रीय बागवानी मिशन का कमाल: 0.48 हेक्टेयर में गेंदा उगाकर हेमचंद बने इलाके के प्रेरणास्रोत

रायपुर / छुरा | 1 अगस्त 2026 Farmer Success Story :  छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के छुरा विकासखण्ड अंतर्गत ग्राम कसेकेरा से एक प्रेरणादायक सफलता की कहानी सामने आई है। यहाँ के एक साधारण किसान हेमचंद साहू ने अपनी पारंपरिक खेती के ढर्रे को बदलकर आधुनिक बागवानी को अपनाया और आज वे अन्य किसानों के लिए एक नजीर बन चुके हैं। कभी धान की परंपरागत खेती पर निर्भर रहकर सीमित आय से अपने परिवार का गुजर-बसर करने वाले हेमचंद ने गेंदा फूल की व्यावसायिक खेती कर न केवल अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत की है, बल्कि करीब 2 लाख रुपये का शुद्ध लाभ भी अर्जित किया है।

Advt

धान की सीमित आय से आगे बढ़कर लिया बड़ा फैसला

किसान हेमचंद साहू बताते हैं कि पहले वे पारंपरिक रूप से केवल धान की खेती करते थे। मौसम की अनिश्चितता और बढ़ती लागत के बीच धान से मिलने वाली आय से परिवार की दैनिक आवश्यकताओं और जरूरतों को पूरा करना बेहद कठिन हो गया था। इसी स्थिति से उबरने के लिए उन्होंने कुछ नया और व्यावसायिक करने का विचार किया।

आधुनिक तकनीक और राष्ट्रीय बागवानी मिशन का मिला साथ

हेमचंद की किस्मत तब बदली जब उन्होंने उद्यानिकी विभाग से संपर्क किया। राष्ट्रीय बागवानी मिशन योजना के अंतर्गत विभाग के अधिकारियों ने उन्हें आधुनिक तरीकों से फूलों की खेती करने की सलाह दी।

  • क्षेत्रफल: उन्होंने मात्र 0.48 हेक्टेयर (लगभग 1.2 एकड़) क्षेत्र में गेंदा फूल की खेती शुरू की।

  • तकनीक: विभाग के मार्गदर्शन में उन्होंने ड्रिप सिंचाई (टपक सिंचाई) और प्लास्टिक मल्चिंग तकनीक का उपयोग किया।

  • फायदा: ड्रिप सिंचाई से पानी और उर्वरक की बचत हुई, वहीं मल्चिंग तकनीक से खरपतवार नियंत्रित रहा और मिट्टी की नमी बनी रही। वैज्ञानिक पद्धति अपनाने से लागत में कमी आई और फूलों की गुणवत्ता व उत्पादन दोनों में भारी उछाल आया।

रायपुर और स्थानीय बाजारों में बिक्री, 2 लाख का मुनाफा

फसल तैयार होने के बाद हेमचंद ने गेंदा फूलों की बिक्री अपने स्थानीय बाजारों के साथ-साथ राज्य की राजधानी रायपुर के बड़े मंडियों और बाजारों में भी की। फूलों की बेहतर गुणवत्ता और मांग के चलते उन्हें बहुत कम समय में लगभग दो लाख रुपये का शुद्ध लाभ प्राप्त हुआ।

किसान हेमचंद साहू के शब्द:

“पहले धान से उतनी आय नहीं हो पाती थी कि परिवार के भविष्य के लिए बचत कर सकें। लेकिन उद्यानिकी विभाग के सही समय पर मिले मार्गदर्शन और गेंदा फूल की खेती ने मेरी जिंदगी बदल दी है। अब मेरी आर्थिक स्थिति पहले से कहीं ज्यादा मजबूत और सुरक्षित है।”

आसपास के किसानों के लिए बने प्रेरणास्रोत

हेमचंद साहू की इस अभूतपूर्व सफलता को देखकर आसपास के गांवों के किसान भी काफी प्रभावित हो रहे हैं। कम जमीन और कम समय में अधिक मुनाफा देने वाली इस तकनीक को देखने के लिए कई किसान उनके खेत पहुंच रहे हैं और अब वे भी गेंदा फूल की व्यावसायिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित हो रहे हैं।

उद्यानिकी विभाग का संदेश

उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों के अनुसार, कम भूमि वाले किसानों के लिए फूलों की खेती एक बेहद लाभदायक और सुरक्षित विकल्प है। ड्रिप सिंचाई और मल्चिंग जैसी आधुनिक तकनीकों से न केवल जल संरक्षण होता है, बल्कि फसल की गुणवत्ता भी बाजार के मानकों के अनुरूप मिलती है। हेमचंद साहू की सफलता इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि यदि सरकारी योजनाओं का सही उपयोग, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और तकनीकी मार्गदर्शन मिले, तो किसानों की आय कई गुना बढ़ सकती है।

📍

Leave a Comment

latest news