रायपुर 1 अगस्त Reservation Controversy : छत्तीसगढ़ के जनसंपर्क विभाग की पत्रिका के सलाहकार संपादक डॉ. अनिल द्विवेदी द्वारा सोशल मीडिया पर आरक्षण व्यवस्था को लेकर की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणी पर राज्य का राजनीतिक माहौल गरमा गया है। विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने इस सोशल मीडिया पोस्ट पर कड़ा आक्रोश व्यक्त करते हुए इसे प्रदेश के करोड़ों आरक्षित वर्ग के नागरिकों का सीधा अपमान करार दिया है।
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संविधान और सामाजिक न्याय का खुला उल्लंघन
डॉ. चरणदास महंत ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि आरक्षण देश के संविधान द्वारा प्रदत्त सामाजिक न्याय का एक मौलिक अधिकार है। आरक्षण प्राप्त करने वाले वर्गों की तुलना आपत्तिजनक और अमर्यादित शब्दों से करना किसी व्यक्ति विशेष का नहीं, बल्कि संपूर्ण वंचित और आरक्षित समाज का अपमान है। उन्होंने कहा कि विवाद बढ़ने के बाद पोस्ट हटा लेना या केवल खेद प्रकट कर देना इस कृत्य के गंभीर प्रभाव को कम नहीं करता। नेता प्रतिपक्ष ने बड़ा सवाल उठाते हुए पूछा कि इतनी संकीर्ण और आपत्तिजनक मानसिकता रखने वाले व्यक्ति को शासन के जनसंपर्क विभाग में इतने महत्वपूर्ण पद की जिम्मेदारी कैसे सौंपी गई?
मुख्यमंत्री की चुप्पी पर खड़े किए गंभीर सवाल
नेता प्रतिपक्ष ने सीधे तौर पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को घेरते हुए कहा कि जनसंपर्क विभाग का प्रभार स्वयं मुख्यमंत्री के पास है, और वे खुद आदिवासी समाज का नेतृत्व करते हैं। इसके अलावा, मंत्रिमंडल में भी अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के कई प्रमुख चेहरे शामिल हैं। ऐसी स्थिति में इस अत्यंत संवेदनशील मामले पर मुख्यमंत्री की लंबी चुप्पी से प्रदेश के आरक्षित वर्गों के बीच बेहद गलत और नकारात्मक संदेश जा रहा है। सरकार की यह खामोशी दुर्भाग्यपूर्ण और सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
सड़क से सदन तक उग्र आंदोलन का ऐलान
संत रविदास जयंती जैसे पवित्र अवसर का जिक्र करते हुए डॉ. महंत ने कहा कि जहाँ एक ओर पूरा देश सामाजिक समरसता और समानता का संदेश दे रहा है, वहीं शासन के एक जिम्मेदार पद पर बैठा व्यक्ति इस तरह की अपमानजनक टिप्पणियां कर रहा है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी कि कांग्रेस पार्टी इस गंभीर मुद्दे को शांत नहीं बैठने देगी। पार्टी प्रदेश के हर शहर, कस्बे और गांव तक जाकर इस मामले में सरकार से कड़ा जवाब मांगेगी। उन्होंने दो टूक कहा कि सामाजिक न्याय के अधिकार और आरक्षित वर्ग के सम्मान के साथ किसी भी प्रकार का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।








