नई दिल्ली 29 जुलाई : देश में ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने और कमर्शियल कोल माइनिंग (Commercial Coal Mining) को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार ने एक और बड़ा कदम उठाया है। संसद के मौजूदा सत्र के दौरान लोकसभा में कोयला मंत्रालय ने वाणिज्यिक कोयला खदानों की नीलामी को लेकर विस्तृत जानकारी साझा की है। सरकार के इस कदम से देश के कई राज्यों में खनन गतिविधियों और औद्योगिक विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है।

15वें दौर की नीलामी में 12 खदानें शामिल
कोयला मंत्रालय द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, 15वें दौर की वाणिज्यिक कोयला खदान नीलामी के तहत देश भर से कुल 12 कोयला खदानों को निवेशकों और खनन कंपनियों के लिए पेश किया गया है।
इनमें सबसे खास बात यह है कि इन 12 खदानों में से सबसे अधिक 3 खदानें छत्तीसगढ़ राज्य से संबंधित हैं। छत्तीसगढ़ के इन प्रमुख कोयला ब्लॉकों में निम्नलिखित नाम शामिल हैं:
-
त तारा (संशोधित) कोयला ब्लॉक
-
माही वेस्ट कोयला ब्लॉक
-
तेरम कोयला ब्लॉक
यह पूरी जानकारी कोरबा से लोकसभा सांसद ज्योत्सना महंत द्वारा पूछे गए एक लिखित प्रश्न के लिखित उत्तर में कोयला मंत्रालय की ओर से प्रदान की गई है।
अब तक का अपडेट: 6 खदानों के लिए मिलीं 18 बोलियां
मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, इस नीलामी प्रक्रिया के तहत अब तक 12 में से 6 कोयला खदानों के लिए निवेशकों की तरफ से कुल 18 बोलियां (Bids) प्राप्त हुई हैं।
फिलहाल यह पूरी प्रक्रिया तकनीकी मूल्यांकन (Technical Evaluation) चरण में है। इस चरण के सफलतापूर्वक पूरा होने के बाद पात्र बोलीदाताओं के बीच ई-नीलामी (E-Auction) आयोजित की जाएगी, जिसके अंत में सफल कंपनियों के नामों की आधिकारिक घोषणा की जाएगी।
खदान संचालन के लिए समय-सीमा तय (40 से 52 महीने)
सरकार ने पारदर्शिता और समयबद्धता सुनिश्चित करने के लिए खदानों के विकास और पूर्व-प्रचालन (Pre-operational) गतिविधियों के लिए स्पष्ट समय-सीमा तय की है:
-
पूर्ण रूप से अन्वेषित (Fully Explored) खदानें: इनके लिए सभी पूर्व-प्रचालन शर्तें पूरी करने की अधिकतम समय-सीमा 40 महीने निर्धारित की गई है।
-
आंशिक रूप से अन्वेषित (Partially Explored) खदानें: इनके लिए यह समय-सीमा 52 महीने तय की गई है।
पूरी तरह ऑनलाइन और पारदर्शी प्रक्रिया
कोयला मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि यह पूरी नीलामी प्रक्रिया एमएसटीसी (MSTC) ई-नीलामी पोर्टल के माध्यम से दो-चरणीय ऑनलाइन प्रणाली के जरिए संचालित की जा रही है।
सरकार का उद्देश्य पात्रता मानदंडों, स्पष्ट राजस्व साझेदारी और समयबद्ध प्रक्रियाओं के जरिए इस पूरी प्रणाली में पूरी तरह पारदर्शिता बनाए रखना है।
वैधानिक नियमों और पर्यावरण सुरक्षा का कड़ा पालन
सरकार ने यह भी साफ कर दिया है कि खनन परियोजनाओं के आवंटن के साथ पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय अधिकारों से जुड़े नियमों का सख्ती से पालन करना अनिवार्य होगा। इनमें प्रमुख प्रावधान शामिल हैं:
📍पर्यावरणीय स्वीकृति और वन स्वीकृति📍पर्यावरण प्रभाव आकलन (EIA)📍पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन (R&R) नीतियां📍पेसा (PESA) और वन अधिकार अधिनियम (FRA) के प्रावधान📍वैज्ञानिक तरीकों से खनन (Scientific Mining)📍कार्बन फुटप्रिंट को कम करना📍फर्स्ट-माइल कनेक्टिविटी (Coal Evacuation Infrastructure)📍खदान बंद होने के बाद भूमि का पुनर्वास (Mine Closure Land Rehabilitation)
छत्तीसगढ़ के लिए क्या हैं मायने?
छत्तीसगढ़ के तीन प्रमुख कोयला ब्लॉकों का इस नीलामी में शामिल होना राज्य के औद्योगिक और आर्थिक परिदृश्य के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, इन खदानों का अंतिम आवंटन, निवेश और वास्तविक उत्पादन की तस्वीर ई-नीलामी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही पूरी तरह स्पष्ट हो पाएगी।
📍








