कोरबा: जिले में प्रशासनिक कसावट और जनहित के मामलों में लापरवाही पर कलेक्टर कुणाल दुदावत ने सख्त रुख अपनाया है। जनदर्शन के आवेदनों के समय पर निराकरण में हीला-हवाली और शासन की महत्वाकांक्षी निःशुल्क पाठ्यपुस्तक योजना की धीमी प्रगति पर गहरी नाराजगी जताते हुए, कलेक्टर ने जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) टी.पी. उपाध्याय को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। प्रशासन ने दो टूक चेतावनी दी है कि जनहित से जुड़े कार्यों में किसी भी स्तर पर ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

मुख्य बिंदु: टीएल बैठक में सामने आई गंभीर खामियां
28 जुलाई को आयोजित टीएल (Time Limit) बैठक के दौरान शिक्षा विभाग से जुड़े कई महत्वपूर्ण मामलों में भारी लापरवाही उजागर हुई, जिसके आधार पर यह कार्रवाई की गई:
-
जनदर्शन आवेदनों की अनदेखी: जनदर्शन में प्राप्त शिकायतों का न तो तय समय-सीमा में निराकरण किया गया और न ही विभाग की ओर से संतोषजनक जानकारी प्रस्तुत की गई।
-
भर्ती और भुगतान के मामले लंबित: हाईस्कूल गोपालपुर में मानदेय व्याख्याता (गणित) भर्ती में कथित अनियमितता, एक सेवानिवृत्त शिक्षक के बकाये भुगतान का मामला, और मेरिट में होने के बावजूद चयन से वंचित एक अभ्यर्थी की शिकायत लंबे समय से लंबित पाई गई।
-
छात्र सुरक्षा बीमा योजना: योजना के तहत मिलने वाली सहायता राशि के प्रकरणों पर भी समय रहते कार्रवाई नहीं की गई, जिससे पीड़ितों को राहत मिलने में देरी हुई।
-
निःशुल्क पाठ्यपुस्तक योजना में सुस्ती: शैक्षणिक सत्र 2026-27 के तहत कक्षा 1 से 10 तक की निःशुल्क पाठ्यपुस्तकों की स्कैनिंग और प्रगति रिपोर्ट बेहद धीमी और असंतोषजनक पाई गई।
छत्तीसगढ़ सिविल सेवा नियम के तहत कार्रवाई
कलेक्टर ने जिला शिक्षा अधिकारी के इस रवैये को छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के नियम-3 के पूरी तरह विपरीत माना है।
DEO को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे तीन दिनों के भीतर संबंधित अभिलेखों और जिम्मेदार अधिकारियों के साथ स्वयं उपस्थित होकर अपना तथ्यात्मक स्पष्टीकरण प्रस्तुत करें। नोटिस में चेतावनी दी गई है कि निर्धारित समयावधि में संतोषजनक जवाब न मिलने की स्थिति में एकपक्षीय अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासन का कड़ा संदेश: “जनदर्शन की शिकायतों का त्वरित समाधान, शासन की योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन और प्रशासनिक जवाबदेही हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। जनहित के मामलों में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ आगे भी ऐसी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।” — कुणाल दुदावत, कलेक्टर, कोरबा








