रायपुर, 29 जुलाई 2026: इस वर्ष रक्षाबंधन का त्योहार छत्तीसगढ़ के लिए बेहद खास होने जा रहा है। राज्य के गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में बिहान योजना से जुड़ी महिला स्व-सहायता समूहों ने एक अनूठा नवाचार किया है। महिलाएं यहाँ के प्रसिद्ध और सुगंधित विष्णु भोग चावल और रंग-बिरंगे धागों का उपयोग करके बेहद आकर्षक, कलात्मक और पारंपरिक राखियां तैयार कर रही हैं। यह पहल न केवल भाई-बहन के पवित्र रिश्ते को जोड़ेगी, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और महिला सशक्तिकरण की एक नई मिसाल भी पेश करेगी।

इस पहल की मुख्य विशेषताएँ
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स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा: जीपीएम (गौरेला-पेंड्रा-मरवाही) जिले के खास ‘विष्णु भोग’ चावल की महक और विशिष्टता अब कलात्मक राखियों के जरिए देश-विदेश तक पहुँचेगी।
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विशेष प्रशिक्षण और कौशल विकास: जिला प्रशासन द्वारा महिलाओं को आधुनिक राखी निर्माण, गुणवत्ता नियंत्रण और विपणन (मार्केटिंग) का विशेष प्रशिक्षण दिया गया है।
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सीधी बिक्री (बिचौलियों से मुक्ति): इन राखियों की बिक्री के लिए रेलवे स्टेशनों, कलेक्ट्रेट परिसरों और ग्राम संगठन परिसरों में विशेष विक्रय केंद्र (स्टॉल) लगाए जा रहे हैं, जिससे महिलाओं को सीधा और उचित मुनाफा मिल सके।
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आर्थिक स्वावलंबन: इस पहल से ग्रामीण महिलाओं को घर बैठे रोजगार और अतिरिक्त आय का जरिया मिल रहा है, जिससे वे आर्थिक रूप से अधिक आत्मनिर्भर बन रही हैं।
यह नवाचार पारंपरिक कृषि उत्पादों के मूल्य संवर्धन (Value Addition) का एक बेहतरीन उदाहरण है, जो सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करते हुए ग्रामीण परिवारों के जीवन स्तर को ऊँचा उठा रहा है।








