नई दिल्ली | 24 जुलाई
संसद के मानसून सत्र के बीच पेपर लीक का मुद्दा देश भर में लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा जारी किए गए हालिया वीडियो संदेश पर तीखा हमला बोला है। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश में पेपर लीक मामलों पर कड़ी कार्रवाई का आश्वासन दिया था, लेकिन विपक्ष ने इस वीडियो संदेश को पूरी तरह से नकार दिया है।
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राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री की पहल को “दिखावा” बताते हुए कहा कि लाखों युवाओं का भविष्य अधर में लटका है और सरकार केवल खोखले वादों से मामले को दबाना चाहती है।
राहुल गांधी की 3 प्रमुख मांगें
संसद परिसर में मीडिया से बात करते हुए कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने स्पष्ट किया कि जब तक सरकार ठोस कदम नहीं उठाती, तब तक विरोध शांत नहीं होगा। उन्होंने सरकार के सामने तीन प्रमुख शर्तें रखी हैं:
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शिक्षा मंत्री का इस्तीफा: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को तुरंत अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए, क्योंकि वे इस पूरी व्यवस्थागत विफलता की नैतिक जिम्मेदारी लें।
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लाठीचार्ज करने वालों पर कार्रवाई: शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस द्वारा किए गए बर्बर लाठीचार्ज की जांच हो और दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
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प्रधानमंत्री माफी मांगें: देश के लाखों पीड़ित छात्रों और उनके अभिभावकों से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं सार्वजनिक रूप से माफी मांगें।
“मोदी जी, देश के छात्र धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से कम कुछ भी स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं। इस तरह के आधी रात के वीडियो जारी करके भारत के युवाओं की बुद्धि और उनके संघर्ष का अपमान न करें।”
— राहुल गांधी (नेता प्रतिपक्ष, लोकसभा)
“छात्रों की मांग को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता”
राहुल गांधी ने कहा कि पेपर लीक की वजह से लाखों योग्य उम्मीदवारों की सालों की मेहनत पर पानी फिर गया है। इस समय छात्रों और उनके परिवारों के बीच भारी गुस्सा और निराशा का माहौल है। उन्होंने मांग की कि संसद के मौजूदा मानसून सत्र में अन्य सभी कार्यों को रोककर पेपर लीक मुद्दे पर विस्तृत और बिना किसी समय सीमा के चर्चा कराई जाए।
विपक्ष के भारी हंगामे और विरोध प्रदर्शनों के कारण संसद के दोनों सदनों में गतिरोध बना हुआ है। सड़क से लेकर संसद तक छात्र संगठन और विपक्षी दल लगातार सरकार को घेर रहे हैं।








