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सियासी संन्यास के संकेत: दिग्विजय सिंह अब थामेंगे अध्यात्म की राह, कारसेवक संतोष दुबे होंगे धार्मिक यात्रा के मुख्य अतिथि

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Madhya Pradesh Politics   : मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने अपनी भविष्य की राजनीति और जीवन की दिशा को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला ऐलान किया है। उन्होंने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि वे अब सक्रिय चुनावी राजनीति से धीरे-धीरे दूरी बना रहे हैं और उनका पूरा ध्यान धर्म-कर्म व अध्यात्म पर रहेगा।

दिग्विजय सिंह ने एक गैर-राजनीतिक धार्मिक यात्रा की घोषणा की है, जिसमें किसी भी राजनीतिक दल के झंडे की जगह सर्वधर्म समभाव के प्रतीक सभी धर्मों के झंडे शामिल होंगे।

‘अब उम्र 80 की, राज्यसभा में भी कहा था- नए चेहरों को मौका दें’

अपने राजनीतिक सफर और उम्र का जिक्र करते हुए दिग्विजय सिंह ने बेहद भावुक अंदाज में कहा:

“मैं अब 80 साल का हो चुका हूँ। मुझे मेरी पार्टी ने सब कुछ दिया—सांसद, विधायक और सूबे का मुख्यमंत्री भी रहा। अब मेरी कोई व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा नहीं बची है।”

उन्होंने खुलासा किया कि हाल ही में हुए राज्यसभा चुनाव के दौरान भी उन्होंने खुद कांग्रेस संगठन से कहा था कि अब उनकी जगह किसी नए और युवा चेहरे को मौका दिया जाना चाहिए।

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दशहरे से शुरू होगी यात्रा, सोशल मीडिया पर भी रहेगा ‘मौन’

दिग्विजय सिंह ने अपनी इस आगामी यात्रा की रूपरेखा साझा करते हुए बताया कि पहले यह यात्रा 2 अक्टूबर से शुरू होने वाली थी, लेकिन अब इसे बदलकर दशहरे (विजयादशमी) के पावन पर्व से शुरू करने का निर्णय लिया गया है।

यात्रा की मुख्य बातें:

  • नो पॉलिटिक्स: यात्रा में कांग्रेस या किसी अन्य दल का झंडा इस्तेमाल नहीं होगा।

  • सर्वधर्म समभाव: यात्रा में सभी धर्मों के झंडे शामिल किए जाएंगे।

  • कोई प्रवचन नहीं: वे यात्रा के दौरान कोई राजनीतिक या धार्मिक भाषण नहीं देंगे।

  • डिजिटल दूरी: सोशल मीडिया पर भी इस यात्रा को लेकर कोई प्रचार या पोस्ट नहीं की जाएगी।

कारसेवक संतोष दुबे को ‘चीफ गेस्ट’ बनाकर चला बड़ा दांव

इस यात्रा का सबसे दिलचस्प और सियासी गलियारों में हलचल मचाने वाला पहलू इसके मुख्य अतिथि (Chief Guest) का चयन है। दिग्विजय सिंह ने ऐलान किया है कि अयोध्या आंदोलन के समय चार गोलियां खाने वाले प्रखर कारसेवक संतोष दुबे इस यात्रा के मुख्य अतिथि होंगे। संतोष दुबे को साथ लेकर दिग्विजय ने एक ऐसा दांव खेला है, जिसने विश्लेषकों को भी सोचने पर मजबूर कर दिया है।

बयान के सियासी मायने: ‘मार्गदर्शक’ की भूमिका में दिग्गी राजा?

दिग्विजय सिंह का यह बयान ऐसे समय में आया है जब कांग्रेस के भीतर पीढ़ी परिवर्तन (Generation Shift) का दौर चल रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि उनका यह ‘धार्मिक टर्न’ असल में सक्रिय संसदीय राजनीति से संन्यास लेने और खुद को ‘मार्गदर्शक’ की भूमिका में स्थापित करने का संकेत है। अब देखना यह होगा कि उनकी यह ‘गैर-राजनीतिक’ यात्रा मध्यप्रदेश की सियासत में क्या नए समीकरण पैदा करती है।

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