कोरबा 7 जुलाई । सड़क दुर्घटनाएं केवल सरकारी आंकड़े नहीं होतीं, बल्कि ये किसी हंसते-खेलते परिवार की खुशियां पल भर में छीन लेने वाली एक भयानक त्रासदी होती हैं। छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में इन्हीं हादसों पर प्रभावी रोक लगाने और एक सुरक्षित व सुगम यातायात व्यवस्था सुनिश्चित करने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में आयोजित जिला सड़क सुरक्षा समिति की इस समीक्षा बैठक में कलेक्टर कुणाल दुदावत और पुलिस अधीक्षक (SP) सिद्धार्थ तिवारी ने कड़े तेवर दिखाए। दोनों उच्चाधिकारियों ने स्पष्ट संदेश दिया कि सड़क सुरक्षा अब केवल सरकारी विभागों की कागजी कार्रवाई तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसे पूरे समाज की एक साझा जिम्मेदारी बनाना होगा।
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दुर्घटना के कारणों पर गंभीर मंथन और विभागों को सख्त निर्देश
बैठक के दौरान जिले में होने वाले हादसों की प्रमुख वजहों पर बेहद गंभीर चर्चा हुई। इनमें दुर्घटना संभावित ब्लैक स्पॉट, सड़कों के खराब किनारे (शोल्डर्स), आवश्यक संकेतकों (साइन बोर्ड) की कमी, सड़कों पर अतिक्रमण, वाहनों की ओवरस्पीडिंग और शराब पीकर वाहन चलाना शामिल हैं। कलेक्टर कुणाल दुदावत ने इन सभी समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए संबंधित विभागों को समयबद्ध (Time-bound) कार्रवाई करने के कड़े निर्देश दिए। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि सड़क सुरक्षा से जुड़े कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि समय पर काम पूरा नहीं हुआ, तो सीधे तौर पर जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी और उन पर सख्त एक्शन लिया जाएगा।
PWD की धीमी कार्यप्रणाली पर फूटा गुस्सा, इन संवेदनशील रूटों पर काम तेज करने के निर्देश
समीक्षा के दौरान लोक निर्माण विभाग (PWD) की सुस्त और धीमी कार्यप्रणाली को लेकर कलेक्टर ने गहरी नाराजगी व्यक्त की। लापरवाही और काम में देरी को देखते हुए उन्होंने PWD के कार्यपालन अभियंता (EE) को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए हैं। बैठक में जिले के कुछ बेहद संवेदनशील और दुर्घटना संभावित क्षेत्रों में लंबित सुरक्षा कार्यों को तुरंत पूरा करने का अल्टीमेटम दिया गया, जिनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
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भैंसमा स्कूल से सक्ती मोड़
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बालको ऐश डेक रोड
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रिस्दी ब्रिज से बजरंग चौक
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दीपका-झाबर रोड
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दीपका थाना चौक
SP के निर्देश: नियम तोड़ने वालों पर होगी सख्त कानूनी कार्रवाई
पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ तिवारी ने पुलिस और यातायात अमले को फील्ड पर उतरकर सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि सड़कों पर हुड़दंग और लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी। इसके लिए जिले में एक विशेष अभियान चलाया जाएगा, जिसके तहत निम्नलिखित मामलों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी:
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शराब पीकर वाहन चलाना (Drunken Driving)
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तय सीमा से अधिक तेज गति (Overspeeding)
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बिना हेलमेट दुपहिया वाहन चलाना
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बाइक पर तीन सवारी (Triple Riding) बैठना
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बिना नंबर प्लेट या दोषपूर्ण नंबर प्लेट वाले वाहन
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नाबालिगों द्वारा वाहन चलाना (Minor Driving)
स्कूलों और कॉलेजों के जरिए बनेगा जनआंदोलन
इस बैठक का सबसे दूरगामी और महत्वपूर्ण निर्णय यह रहा कि सड़क सुरक्षा को अब एक सरकारी योजना के बजाय एक ‘जनआंदोलन’ का रूप दिया जाएगा। इसके लिए जिले के सभी स्कूलों और कॉलेजों को इस मुहिम से जोड़ा जा रहा है। युवाओं और छात्रों में यातायात नियमों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए एक व्यापक रणनीति तैयार की गई है, जिसके अंतर्गत:
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बड़े पैमाने पर हेलमेट रैलियां निकाली जाएंगी।
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नुक्कड़ नाटकों के जरिए लोगों को जागरूक किया जाएगा।
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शैक्षणिक संस्थानों में क्विज (प्रश्नोत्तरी) और निबंध प्रतियोगिताएं होंगी।
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इस पूरे अभियान में एनसीसी (NCC) और स्काउट गाइड के कैडेट्स की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। इस पहल का मुख्य उद्देश्य आने वाली पीढ़ी को सड़कों पर चलने के तौर-तरीके सिखाना और उन्हें देश का जिम्मेदार नागरिक बनाना है।
निष्कर्ष: समाज की सोच में बदलाव ही असली समाधान
प्रशासन का मानना है कि सड़कें केवल तब सुरक्षित हो सकती हैं, जब सरकारी तंत्र मुस्तैद हो और देश के नागरिक भी अपनी जिम्मेदारी को समझें। यातायात नियमों का पालन करना जैसे—हेलमेट पहनना, कार में सीट बेल्ट लगाना, गति सीमा के भीतर गाड़ी चलाना और नशे की हालत में स्टीयरिंग को हाथ न लगाना—केवल चालान से बचने की कानूनी मजबूरी नहीं है, बल्कि यह खुद के और दूसरों के जीवन की रक्षा करने का नैतिक कर्तव्य है।
सड़क सुरक्षा किसी एक विभाग की बंद फाइल का हिस्सा नहीं है, यह सड़क पर चलने वाले हर एक इंसान और उसके परिवार से जुड़ा विषय है। यदि एक तरफ प्रशासन की यह कड़ाई और दूसरी तरफ आम नागरिकों की जागरूकता एक साथ मिल जाए, तो कोरबा जिले में सड़क दुर्घटनाओं के ग्राफ को तेजी से नीचे गिराया जा सकता है।
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