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शिवाय हॉस्पिटल कोरबा में कमाल: पेट में बना 1.5 लीटर का सिस्ट, जटिल सर्जरी से बची 31 वर्षीय युवक की जान

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कोरबा 8 जुलाई। अत्यधिक शराब के सेवन से मौत के मुहाने पर खड़े एक 31 वर्षीय युवक को कोरबा के नया बस स्टैंड स्थित शिवाय हॉस्पिटल ने नया जीवन दिया है। कई अस्पतालों के चक्कर काटकर थक चुके मरीज रामखिलावन के पैंक्रियाज (स्वादुपिंड) के पास डेढ़ लीटर तरल पदार्थ से भरा ‘पैनक्रिएटिक सूडोसिस्ट’ बन चुका था। गैस्ट्रो सर्जन डॉ. हिमांशु कोल्हे ने बेहद जटिल सिस्टोगैस्ट्रोस्टॉमी सर्जरी कर मरीज की जान बचाने में सफलता हासिल की है।

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सालभर दर्द से तड़पता रहा मरीज, जांच में खुली पोल

मरीज रामखिलावन पिछले एक साल से पेट के असहनीय दर्द से जूझ रहा था। कई जगह इलाज के बाद भी जब आराम नहीं मिला और हालत बिगड़ने लगी, तब परिजन उसे शिवाय हॉस्पिटल लेकर आए। डॉ. हिमांशु कोल्हे की देखरेख में जब सीटी स्कैन व अन्य विशेष जांचें की गईं, तो डॉक्टर भी हैरान रह गए। पैंक्रियाज के ठीक ऊपर 1 से 1.5 लीटर मवाद और तरल पदार्थ से भरा एक बड़ा सिस्ट बन चुका था, जो अत्यधिक शराब पीने का नतीजा था। समय पर इलाज न मिलने पर यह जानलेवा साबित हो सकता था।

क्या होती है सिस्टोगैस्ट्रोस्टॉमी सर्जरी? कैसे बची जान?

मरीज की गंभीर स्थिति को देखते हुए डॉ. कोल्हे ने परिजनों की सहमति से लैप्रोटॉमी एवं सिस्टोगैस्ट्रोस्टॉमी जैसी जटिल सर्जरी का फैसला लिया।

  • तरल पदार्थ को निकाला: ऑपरेशन के जरिए सिस्ट में जमा करीब डेढ़ लीटर खतरनाक तरल पदार्थ को सुरक्षित बाहर निकाला गया।

  • भविष्य के लिए सुरक्षा: यह समस्या दोबारा न हो, इसके लिए सिस्ट की दीवार को अंदर ही अंदर पेट (स्टमक) से जोड़ दिया गया।

चमत्कारी रिकवरी: सफल ऑपरेशन के महज 2 दिनों के भीतर मरीज सामान्य रूप से भोजन करने लगा। पूरी तरह स्वस्थ होने के बाद भावुक परिजनों ने डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ का आभार जताते हुए मरीज को घर ले गए।

“शराब की लत को हल्के में न लें” — डॉ. हिमांशु कोल्हे

मरीज की जान बचाने वाले गैस्ट्रो सर्जन डॉ. हिमांशु कोल्हे ने आम जनता से अपील करते हुए कहा:

“लगातार शराब का सेवन पैंक्रियाज सहित शरीर के कई मुख्य अंगों को डैमेज कर देता है। अगर लंबे समय तक पेट दर्द, उल्टी या भूख न लगने की समस्या हो, तो उसे मामूली गैस का दर्द समझकर नजरअंदाज न करें। नशे से दूर रहें और समय पर विशेषज्ञ डॉक्टर से सलाह लें।”

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