खिदिरपुर: पश्चिम बंगाल की राजनीति में इन दिनों ‘भरोसे’ की भारी किल्लत चल रही है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपनी ही पुलिस को सरेआम ‘धो डाला’ है। खिदिरपुर की जनसभा में दीदी का गुस्सा सातवें आसमान पर था। उन्होंने मंच से दहाड़ते हुए कहा कि बंगाल की खाकी अब बीजेपी की गुलाबी रंगत में रंग चुकी है। ऐसा लगता है कि राज्य की पुलिस मुख्यमंत्री का पता भूलकर अब ‘कमल’ के एड्रेस पर चिट्ठियां भेज रही है। आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज।
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ममता दीदी के ‘डर’ और ‘दावे’: एक नजर में
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पुलिस ही हो गई पराई: दीदी ने साफ कह दिया, “यहां की पुलिस भी अब बीजेपी की हो गई है, वे मुझे भूल चुके हैं।” मतलब, जिस पुलिस को अब तक विपक्ष ‘टीएमसी का कैडर’ कहता था, दीदी ने एक ही झटके में उन्हें ‘बीजेपी का एजेंट’ घोषित कर दिया। बेचारे पुलिस वाले अब सोच रहे होंगे कि ड्यूटी करें तो किसकी? आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज।
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EVM की ‘जादुई’ सेटिंग: दीदी के पास पक्की खबर है कि मशीनें बिगड़ैल हो गई हैं। बटन कोई भी दबाओ, प्यार ‘बीजेपी’ पर ही बरसेगा। इसीलिए उन्होंने महिलाओं को सलाह दी है— “चूल्हा-चौका छोड़ो, मशीन पकड़ो!” यानी खाना बने न बने, EVM का पहरा सख्त होना चाहिए। भूखे पेट ही सही, लोकतंत्र की रक्षा जरूरी है!
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‘मोटा भाई’ को चुनौती: अमित शाह का नाम लिए बिना दीदी ने ‘मोटा भाई’ पर निशाना साधा और कहा कि महिलाओं ने उनकी सारी प्लानिंग को ‘पंचर’ कर दिया है। साथ ही NRC और वक्फ संपत्ति के मुद्दे पर अपनी पुरानी कसम फिर दोहराई।
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सेटिंग का शोर: जब वामपंथियों ने ‘दीदी-मोदी सेटिंग’ का ताना मारा, तो दीदी ने पुराना हिसाब खोल दिया। उन्होंने पूछा कि जब संकट के समय लोग रो रहे थे, तब ये ‘कॉमरेड’ कहाँ लुका-छिपी खेल रहे थे?
चुटकी भरा विश्लेषण: रक्षात्मक हमला!
राजनीतिक पंडितों का मानना है कि दीदी का यह अंदाज ‘अटैक इज द बेस्ट डिफेंस’ वाली रणनीति है। 142 सीटों की इस ‘करो या मरो’ की जंग में जब उन्हें अपनी ही पुलिस पर शक होने लगे, तो समझ लीजिए कि मामला गंभीर है। EVM पर सवाल उठाना पुराना पैंतरा है—अगर जीत गए तो ‘जनता की ताकत’, और हार गए तो ‘मशीन की शरारत’!
कुल मिलाकर, दीदी ने साफ कर दिया है कि इस बार चुनाव सिर्फ वोटों का नहीं, बल्कि ‘मशीनों की निगरानी’ और ‘अपनों की गद्दारी’ को पकड़ने का है।
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