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ऐतिहासिक उपलब्धि: कोरबा में मिली 368 वर्ष पुरानी पांडुलिपियाँ; ‘ज्ञानभारतम’ एप से हुआ डिजिटल संरक्षण

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कोरबा, 27 अप्रैल 2026 – छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को सहेजने की दिशा में जिला प्रशासन और “ज्ञानभारतम” राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान को एक बड़ी सफलता मिली है। कलेक्टर कुणाल दुदावत के मार्गदर्शन में जिले के पाली विकासखंड स्थित ग्राम शिवपुर (फुलवारीपारा) में 368 वर्ष पुरानी दुर्लभ हस्तलिखित पांडुलिपियाँ प्राप्त हुई हैं।

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प्रमुख खोज और महत्वपूर्ण ग्रंथ

सर्वेक्षण के दौरान कुल 25 प्राचीन पांडुलिपियों का डिजिटलीकरण किया गया। इनमें सबसे प्रमुख ग्रंथ निम्नलिखित हैं:

  • खूब तमाशा: औरंगजेब कालीन साहित्यिक ग्रंथ, जिसे सन 1658 में गोपाल मिश्र ने लिखा था।

  • नासकेतु ग्रंथ: मनीराम अग्रवाल द्वारा वर्ष 1829 में रचित।

  • वैदेकीय पोथी: चिकित्सा और आयुर्वेद से संबंधित (वर्ष 1831)।

  • वेदारत्न पंच प्रकाश: गोस्वामी जनार्दन भट्टाचार्य द्वारा वर्ष 1852 में लिखित।

ये सभी दुर्लभ पांडुलिपियाँ संस्कृत भाषा और देवनागरी लिपि में हैं, जिन्हें अब डिजिटल रूप में भविष्य के लिए सुरक्षित कर लिया गया है।

आचार्य रमेन्द्र नाथ मिश्र का सम्मान

इस अवसर पर आयोजित विशेष कार्यक्रम में भाषाविद और छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के पूर्व कार्यकारी अध्यक्ष आचार्य डॉ. रमेन्द्र नाथ मिश्र को सम्मानित किया गया। उन्होंने पिछले 60 वर्षों से इन अनमोल धरोहरों को सहेज कर रखा है। डॉ. मिश्र ने ग्रामीणों को प्रेरित करते हुए कहा कि ये पांडुलिपियाँ हमारे इतिहास और संस्कृति की नींव हैं, जिन्हें आने वाली पीढ़ियों के लिए बचाना हमारा धर्म है।

डिजिटल तकनीक से संरक्षण

जिला समन्वयक सतीश प्रकाश सिंह ने बताया कि “ज्ञानभारतम” एप के माध्यम से मौके पर ही इन पांडुलिपियों के फोटो अपलोड कर उन्हें सुरक्षित किया गया। डिप्टी कलेक्टर टी.आर. भारद्वाज ने आम जनता से अपील की है कि यदि उनके पास भी ऐसी कोई प्राचीन पांडुलिपि या धरोहर है, तो उसे नष्ट होने से बचाने के लिए सर्वेक्षण टीम का सहयोग करें।

उपस्थिति

कार्यक्रम में पुरातत्वविद एवं सेवानिवृत्त उप संचालक जी.एल. रायकवार, सुभाष दत्त झा, शोधार्थी मनोज कुमार नायक, तहसीलदार भूषण सिंह मंडावी, नायब तहसीलदार सुजीत पाटले, राशिका अग्रवाल, विकासखंड शिक्षा अधिकारी पाली एस.एन. साहू तथा जिला संग्रहालय कोरबा के मार्गदर्शक हरि सिंह क्षत्रिय सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण, शिक्षक एवं अन्य अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।

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