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ममता दीदी को लगा अब तक का सबसे बड़ा झटका! ‘छोटी दीदी’ सयानी घोष भी बागी 20 सांसदों की लिस्ट में शामिल, जानें चड्डी बयान से लेकर शिवलिंग विवाद की पूरी कहानी

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बंगाल की राजनीति में ‘महा-खेला’: कभी राघव चड्ढा को कहा था- ‘मैं चड्ढा नहीं जो चड्डी बन जाऊं’, अब खुद थामने जा रही हैं विरोधियों का हाथ?

कोलकाता/नई दिल्ली 11 जून : पश्चिम बंगाल की सियासत में इन दिनों हाई-वोल्टेज ड्रामा चल रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (TMC) का किला ताश के पत्तों की तरह ढहता नजर आ रहा है। विधायक से लेकर सांसद तक, एक-एक करके दीदी का साथ छोड़ रहे हैं।(आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज) लेकिन इस सियासी ड्रामे के बीच सबसे बड़ा और चौंकाने वाला झटका लगा है सयानी घोष के रूप में।

कभी किसी ने सपने में भी नहीं सोचा था कि ममता बनर्जी की सबसे करीबी और भरोसेमंद सिपहसालार सयानी घोष एक दिन बगावत का बिगुल फूंक देंगी। टीएमसी के जो 20 बागी सांसद चर्चा में हैं, उनमें अब सयानी घोष का नाम भी जुड़ चुका है। आपको बता दें कि सयानी घोष को बंगाल की राजनीति में ‘दूसरी ममता’ यानी ‘छोटी दीदी’ के नाम से जाना जाता था।

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सयानी घोष और विवादों का ‘चोली-दामन’ का साथ

सयानी घोष सिर्फ एक नेता नहीं, बल्कि बयानों का वो बारूद हैं जो जहां भी गिरता है, सियासत में आग लगा देता है। (आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज) विवादों से उनका नाता बेहद पुराना और गहरा है। कोलकाता की विधानसभा हो, चुनावी रैलियां हों या फिर देश का संसद भवन—सयानी के तीखे तेवरों की चर्चा हर जगह रही है। शायद इसी आक्रामक अंदाज ने उन्हें बहुत ही कम समय में टीएमसी और बंगाल का सबसे लोकप्रिय और चर्चित चेहरा बना दिया था।

आइए नजर डालते हैं सयानी घोष के उन 5 सबसे बड़े विवादों पर, जिन्होंने भारतीय राजनीति में खलबली मचा दी थी:

1. “मैं चड्ढा नहीं हूं जो ‘चड्डी’ बन जाऊंगी…”

सयानी घोष का यह बयान आज उनके खुद के लिए सबसे बड़ा ‘यू-टर्न’ साबित होने जा रहा है। यह वाकया तब का है जब आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा को लेकर सियासी गलियारों में सुगबुगाहट तेज थी। एक चुनावी जनसभा के दौरान सयानी ने बेहद तीखा तंज कसते हुए कहा था— “मैं चड्ढा नहीं हूं जो ‘चड्डी’ बन जाऊंगी, घोष हमेशा घोष ही रहेगा।”  (आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज) इस बयान पर बीजेपी ने कड़ी आपत्ति जताते हुए कानूनी कार्रवाई तक की चेतावनी दी थी। लेकिन राजनीति का चक्र देखिए, आज सयानी खुद उसी पाले में जाने को तैयार बैठी हैं।

2. महाशिवरात्रि पर शिवलिंग वाली विवादित पोस्ट

साल 2015 में सयानी घोष के सोशल मीडिया अकाउंट से एक बेहद आपत्तिजनक और मॉर्फ्ड (छेड़छाड़ की गई) तस्वीर शेयर की गई थी। इस तस्वीर में एक व्यक्ति को पवित्र शिवलिंग का अपमान करते हुए दिखाया गया था। महाशिवरात्रि के मौके पर आई इस पोस्ट के बाद हिंदूवादी संगठनों ने सयानी के खिलाफ देशव्यापी मोर्चा खोल दिया था और भारी हंगामा हुआ था। (आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज) हालांकि, चौतरफा घिरने के बाद सयानी ने इस पर सार्वजनिक माफी मांग ली थी।

3. सुवेंदु अधिकारी को कहा था ‘बी-ग्रेड’ और ‘सी-ग्रेड’ का नेता

बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान जब सुवेंदु अधिकारी टीएमसी छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए थे, तब सयानी घोष ने उन पर गद्दारी का ठप्पा लगाया था। सयानी ने मंच से सुवेंदु को ‘बी-ग्रेड’ और ‘सी-ग्रेड’ का नेता करार देते हुए कहा था कि उन्होंने ममता बनर्जी की पीठ में छुरा घोंपा है।

4. त्रिपुरा में ‘खेला होबे’ का नारा और गिरफ्तारी

साल 2021 में जब त्रिपुरा विधानसभा चुनाव का माहौल गरमाया हुआ था, तब सयानी घोष वहां टीएमसी के प्रचार के लिए पहुंची थीं। एक नुक्कड़ सभा के पास से गुजरते हुए उन्होंने गाड़ी से ‘खेला होबे’ का नारा बुलंद कर दिया। (आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज) इस नारे के बाद वहां माहौल बिगड़ गया और अगरतला के एक पुलिस थाने में मुकदमा दर्ज कर सयानी घोष को गिरफ्तार कर लिया गया था, जिसने राष्ट्रीय मीडिया में खूब सुर्खियां बटोरी थीं।

5. ‘दिल में काबा और आंखों में मदीना’

पश्चिम बंगाल के चुनावों के दौरान सयानी घोष का एक चुनावी अंदाज सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ था। वह अपनी हर रैली में एक खास गाना गाती थीं, जिसके बोल थे— “दिल में काबा और आंखों में मदीना…”। इस गाने को लेकर भी ध्रुवीकरण की राजनीति तेज हुई थी और विपक्ष ने उन पर तुष्टीकरण के गंभीर आरोप लगाए थे।

क्या अब थामेंगी बीजेपी का दामन?

जिस नेता ने करियर की शुरुआत से लेकर अब तक बीजेपी और उसके नेताओं पर सबसे तीखे और विवादित हमले किए, आज उसी नेता का नाम बागी सांसदों की सूची में शीर्ष पर है। (आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज) राजनीति के पंडित भी हैरान हैं कि ‘छोटी दीदी’ का अगला कदम क्या होगा? क्या वो वाकई उस विचारधारा के साथ खड़ी होंगी जिसके खिलाफ उन्होंने हमेशा आग उगली, या फिर बंगाल की राजनीति में कोई नया तीसरा मोर्चा जन्म लेने वाला है? ‘खेला’ अभी जारी है!

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