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MP सरकार का बड़ा फैसला: सरकारी नौकरी के लिए ‘दो बच्चों का नियम’ खत्म, CM मोहन यादव का ऐतिहासिक निर्णय

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भोपाल, 11 जून: मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राज्य के शासकीय कर्मचारियों और सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के हित में एक बेहद महत्वपूर्ण फैसला लिया है। राज्य सरकार ने शासकीय सेवाओं में सीधी भर्ती और विभागीय नियुक्तियों के लिए लागू ‘दो बच्चों की अधिकतम सीमा’ वाले कड़े प्रावधान को पूरी तरह से समाप्त करने का निर्णय लिया है।

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मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद सामान्य प्रशासन विभाग ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिए हैं और पुराने नियमों के प्रारूप को पोर्टल से हटाने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।

### क्या है नया फैसला और इसके मायने?

  • 3 बच्चों वाले भी होंगे पात्र: अब यदि किसी उम्मीदवार के तीन बच्चे भी हैं, तो वह मध्य प्रदेश में शासकीय सेवा (सरकारी नौकरी) के लिए पूरी तरह पात्र माना जाएगा।

  • नया प्रारूप होगा जारी: मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सामान्य प्रशासन विभाग को निर्देश दिए हैं कि प्रस्तावित मध्य प्रदेश सिविल सेवा नियम के प्रारूप को तत्काल निरस्त किया जाए और दो से अधिक जीवित संतान होने पर अपात्र माने जाने वाले प्रावधान को हटाकर नया संशोधित प्रारूप विधिवत प्रकाशित किया जाए।

⚠️ महत्वपूर्ण नोट: यह नई व्यवस्था पुराने मामलों पर लागू नहीं होगी। यानी जिन लोगों पर पहले ही इस नियम के तहत कार्रवाई हो चुकी है या जो पूर्व में अपात्र हो चुके हैं, उन्हें इसका लाभ (बैकडेट से) नहीं मिलेगा।

### 25 साल पुराना इतिहास: क्यों और कब लागू हुआ था यह नियम?

यह नियम आज से करीब 25 साल पहले वर्ष 2001 में तत्कालीन मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के कार्यकाल में जनसंख्या नियंत्रण के उद्देश्य से लागू किया गया था।

  • लागू होने की तारीख: यह नियम 26 जनवरी 2001 से प्रभावी हुआ था।

  • कड़े प्रावधान: ‘मध्य प्रदेश सिविल सेवा नियम, 1961’ के तहत 26 जनवरी 2001 या उसके बाद दो से अधिक जीवित संतान वाले उम्मीदवारों को नौकरी के लिए अपात्र माना जाता था।

  • कदाचार की श्रेणी: ‘मध्य प्रदेश सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965’ के तहत सरकारी कर्मचारी के दो से अधिक बच्चे होने को ‘कदाचार’ (Misconduct) माना जाता था।

### 25 सालों में इस नियम का क्या रहा असर?

इस कड़े नियम के कारण पिछले ढाई दशकों में हजारों कर्मचारियों और नौकरी के आकांक्षी युवाओं को गंभीर परिणाम भुगतने पड़े थे:

  • नौकरी से बर्खास्तगी: नियम का उल्लंघन करने के कारण दो ट्रेनी न्यायाधीशों (Judges) और तीन चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को अपनी सेवा से हाथ धोना पड़ा था।

  • 30 हजार शिक्षक हुए वंचित: लगभग 30,000 से अधिक शिक्षक इस नियम के दायरे में आने के कारण सरकारी भर्ती से वंचित रह गए थे।

  • पदोन्नति और वेतनवृद्धि पर रोक: कई सेवारत कर्मचारियों की सैलरी हाइक (वेतनवृद्धि) और प्रमोशन (पदोन्नति) सिर्फ इसलिए रोक दी गई थी क्योंकि उनके दो से अधिक बच्चे थे।

  • जानकारी छिपाने की मजबूरी: अपनी नौकरी बचाने के डर से कई शासकीय कर्मचारियों को अपने तीसरे बच्चे की जानकारी तक विभाग से छिपानी पड़ रही थी।

अब मोहन यादव सरकार के इस फैसले से राज्य के लाखों कर्मचारियों और युवाओं को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

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