जबरन उठाया, जानवरों की तरह पीटा और फिर वसूली… क्या रक्षक ही भक्षक बन गए हैं?
कोरबा 11 जून । छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के हरदीबाजार इलाके से न्याय व्यवस्था को झकझोर देने वाली एक खौफनाक तस्वीर सामने आई है। ग्राम नेवसा के दो युवकों—रफीक मोहम्मद (22) और दीपेश निर्मलकर (23)—ने हरदीबाजार पुलिस के कथित अत्याचार, बेरहम पिटाई और अवैध वसूली से तंग आकर अपनी जान दांव पर लगा दी है। दोनों युवक पेट्रोल लेकर पानी की टंकी पर चढ़ गए हैं और आत्मदाह की धमकी दे रहे हैं। दोपहर ढाई बजे तक दोनों युवक टंकी पर ही डटे रहे, जबकि नीचे आक्रोशित ग्रामीणों का हुजूम पुलिस प्रशासन के खिलाफ गगनभेदी नारेबाजी कर रहा है।
Advt

खौफनाक दास्तान: थर्ड डिग्री टॉर्चर और ₹23,500 की ‘लूट’
पीड़ितों और ग्रामीणों ने हरदीबाजार थाना प्रभारी (TI) प्रमोद कुमार डनसेना और उनकी टीम पर जो आरोप लगाए हैं, वो किसी भी सभ्य समाज को दहलाने के लिए काफी हैं:
-
रास्ते से उठाकर बेदम पिटाई: पीड़ितों का आरोप है कि पुलिस ने उन्हें रास्ते से जबरन अगवा किया और थाने ले जाकर लाठी, डंडों और बेल्ट से जानवरों की तरह पीटा। युवकों के शरीर पर नीले पड़े जख्म और पिटाई के खौफनाक निशान पुलिसिया बर्बरता की गवाही खुद दे रहे हैं।
-
झूठा केस और अवैध वसूली: जुआ खेलाने का झूठा आरोप लगाकर पुलिस पर 23,500 रुपये की भारी रिश्वत वसूलने का संगीन आरोप है।
-
जुल्म छुपाने की साजिश: हद तो तब हो गई जब जुल्म को छुपाने के लिए पुलिस ने दोनों युवकों से जबरन कोरे कागज पर लिखवा लिया कि वे “भागते हुए खुद गिरकर घायल हुए हैं”।
-
एक और गंभीर आरोप: पुलिस की गुंडागर्दी यहीं नहीं रुकी, एक अन्य महिला शफीना बेगम ने भी पुलिस पर अपने पति अनवर अली को गायब करने का बेहद गंभीर आरोप लगाया है। ग्रामीणों का कहना है कि पुलिस जुआ पकड़ने के नाम पर घरों में घुसकर बेकसूरों को उठाती है और मोटी रकम लेकर छोड़ती है।
मौके पर मचा हड़कंप, TI को सस्पेंड करने की मांग पर अड़े ग्रामीण
गुरुवार सुबह जैसे ही दोनों युवक हाथ में पेट्रोल की बोतल लिए पानी टंकी पर चढ़े, प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए। मौके पर तहसीलदार और पुलिस की भारी टीम उन्हें नीचे उतारने की मिन्नतें कर रही है। लेकिन, दूसरी तरफ ग्रामीणों का गुस्सा सातवें आसमान पर है। गुस्साए ग्रामीणों ने साफ कह दिया है कि जब तक दोषी अधिकारियों पर गाज नहीं गिरती, वे पीछे नहीं हटेंगे।
TI का पल्ला झाड़ने वाला बयान: हालांकि, पूरे मामले पर हरदीबाजार TI प्रमोद कुमार डनसेना ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इन्हें झूठा और निराधार बताया है। लेकिन, सोशल मीडिया पर वायरल पीड़ितों के दर्दनाक बयान और उनके बदन पर छपे चोट के निशान पुलिसिया दावों की धज्जियां उड़ा रहे हैं।
आक्रोशित जनता की दो टूक मांगें:
-
पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय न्यायिक जांच तुरंत शुरू हो।
-
वर्दी की आड़ में गुंडागर्दी करने वाले दोषी पुलिस अधिकारियों को बिना देरी किए सस्पेंड (निलंबित) किया जाए।
📍








