Latest News
ममता बनर्जी का बदला राजनीतिक अंदाज: दिल्ली की रैली में सोनिया गांधी को बताया अपनी नेता, विपक्षी समीकरणों पर टकटकी ‘ये हिंदुस्तान आपके अब्बू जान का नहीं…’: रामलीला मैदान रैली पर बीजेपी का राहुल गांधी पर तीखा पलटवार, मेगा रैली को बताया ‘फ्लॉप शो’  वोट बचाओ, देश बचाओ’ के नारे से गूंजा रामलीला मैदान: विपक्ष ने दिखाई एकजुटता, 10 लाख की भीड़ का दावा .. देखें तस्वीर छत्तीसगढ़ स्थापना दिवस: प्रधानमंत्री मोदी की शुभकामनाओं से मिली नई ऊर्जा, मुख्यमंत्री साय ने जताया आभार कोरबा कलेक्टर ने की बड़ी कार्रवाई: काम में लापरवाही और अनुपस्थिति पर पटवारी निलंबित 32 साल बाद बड़े पर्दे पर फिर लौटेगी ‘मोहरा’: जानिए कैसे एक ‘अंधे विलेन’ के दम पर बनी थी 90 के दशक की ऑल-टाइम ब्लॉकबस्टर!
Home » छत्तीसगढ़ » कोरबा: वन विकास निगम में 28 करोड़ के पौधरोपण में ‘खेल’, राज्यपाल के निर्देश पर अब केंद्र की टीम करेगी जांच

कोरबा: वन विकास निगम में 28 करोड़ के पौधरोपण में ‘खेल’, राज्यपाल के निर्देश पर अब केंद्र की टीम करेगी जांच

Share:

कोरबा/रायपुर 13 अप्रैल। छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम (CGFDC) के कोरबा मंडल में पौधरोपण और विभिन्न निर्माण कार्यों में ₹28 करोड़ की कथित अनियमितता का मामला अब गरमा गया है।

प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) तक पहुंची शिकायत के बाद महामहिम राज्यपाल सचिवालय ने इस पर कड़ा संज्ञान लिया है। राज्यपाल के अवर सचिव ने वाणिज्य एवं उद्योग विभाग के सचिव को पत्र लिखकर इस पूरे प्रकरण की जांच के लिए केंद्रीय स्तर की संयुक्त टीम गठित करने का आदेश दिया है।

Advt

क्या है पूरा मामला?

प्राप्त जानकारी के अनुसार वित्तीय वर्ष 2022-23 से 2024-25 के बीच कोरबा क्षेत्र की प्रमुख औद्योगिक इकाइयों जैसे NTPC, SECL (कुसमुंडा, दीपका, गेवरा क्षेत्र) और CSPGCL के माध्यम से प्राप्त ₹28 करोड़ 38 लाख के आबंटन से डिपाजिट रोपण और अन्य कार्य कराए जाने थे। शिकायत के अनुसार, इन कार्यों में बड़े पैमाने पर वित्तीय गड़बड़ी की गई है।

जांच के दायरे में प्रमुख कार्य:

  • औद्योगिक क्षेत्रों में पौधरोपण और उनका रखरखाव।

  • ग्रासबेड और फेंसिंग कार्य।

  • वर्मीकम्पोस्ट की खरीदी।

  • सेफ्टीजोन, कंटूर ट्रेंच खुदाई और चेकडैम निर्माण।

  • पत्थर बोल्डर और बांध निर्माण कार्य।

स्थानीय स्तर पर जांच में ‘खानापूर्ति’ के आरोप

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार शिकायतकर्ता का आरोप है कि स्थानीय वन मंडल और क्षेत्रीय कार्यालय (बिलासपुर) के अधिकारियों ने मामले को दबाने की कोशिश की। जांच के नाम पर शिकायतकर्ता पर ही साक्ष्य देने का दबाव बनाया गया, जबकि नियमों के अनुसार फील्ड स्तर पर भौतिक सत्यापन जरूरी था। आरोप यह भी है कि तत्कालीन मंडल प्रबंधकों और लंबे समय से जिले में जमे रेंजरों को बचाने के लिए विभागीय अधिकारियों ने जांच में पारदर्शिता नहीं बरती।

PMO और राजभवन का हस्तक्षेप

राज्य स्तरीय जांच एजेंसियों से भरोसा उठने के बाद मामले की शिकायत प्रधानमंत्री कार्यालय से की गई। इसके बाद राजभवन ने सक्रियता दिखाते हुए मंत्रालय को कड़े निर्देश जारी किए हैं। राज्यपाल सचिवालय के आदेश के बाद अब सवा साल से अटकी जांच में तेजी आने की उम्मीद है। सूत्रों का कहना है कि फील्ड स्तर पर कई स्थानों पर पौधे मानक से अधिक मर चुके हैं और निर्माण कार्यों की गुणवत्ता बेहद खराब है।

अपेक्षित कार्रवाई: केंद्रीय जांच टीम की रिपोर्ट के बाद तत्कालीन जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों पर बड़ी गाज गिर सकती है। शासन की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत इस जांच को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


।।।

latest news