बिगड़े बोल: “एक बाप की औलाद हो तो…”
इंदौर 9 अप्रैल 2026 : मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर के नगर निगम में बुधवार को लोकतंत्र की मर्यादा उस वक्त तार-तार हो गई, जब 8400 करोड़ रुपये के भारी-भरकम बजट पर चर्चा की जगह ‘वंदे मातरम’ को लेकर भीषण संग्राम छिड़ गया। विवाद इतना बढ़ा कि भाषा की मर्यादा टूट गई और अंततः एक कांग्रेसी पार्षद को सदन से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया।
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वंदे मातरम पर रार और निष्कासन नगर निगम के दो दिवसीय बजट सम्मेलन के दूसरे दिन की शुरुआत राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ से हुई। प्रश्नकाल के दौरान जब देरी से पहुंचीं कांग्रेसी पार्षद फौजिया शेख को सवाल पूछने का मौका नहीं मिला, तो उन्होंने राष्ट्रगीत को लेकर विवादित टिप्पणी कर दी। फौजिया ने स्पष्ट कहा कि “इस्लाम में इसे गाने की इजाजत नहीं है और संविधान में इसे अनिवार्य नहीं किया गया है।” इस बयान ने सदन में बारूद का काम किया। भाजपा पार्षदों के भारी विरोध और हंगामे को देखते हुए सभापति मुन्नालाल यादव ने फौजिया शेख को पूरे दिन के लिए सदन से निष्कासित कर दिया।
बिगड़े बोल: “एक बाप की औलाद हो तो…” हंगामा यहीं नहीं थमा। फौजिया शेख के समर्थन में उतरीं दूसरी कांग्रेसी पार्षद रूबीना खान ने सदन में बेहद अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल किया। उन्होंने भाजपा पार्षदों को खुली चुनौती देते हुए कहा, “एक बाप की औलाद हो तो बुलवाकर दिखाओ।” रूबीना ने यहीं बस नहीं किया, बल्कि धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाली टिप्पणियां भी कीं। इस दौरान सदन में व्यक्तिगत हमलों का दौर भी चला, जहां पार्षदों ने एक-दूसरे के लिए ‘कुत्ते जैसा भौंकना’, ‘धृतराष्ट्र’ और ‘गद्दार’ जैसे शब्दों का प्रयोग किया।
विकास के बजट पर भारी पड़ा विवाद शहर के विकास के लिए पेश किए गए करोड़ों के बजट पर सार्थक बहस करने के बजाय पार्षद घंटों तक सभापति की आसंदी के सामने धरने पर बैठे रहे और एक-दूसरे को नीचा दिखाते रहे। भाजपा ने इसे कांग्रेस की ‘तुष्टीकरण की राजनीति’ बताया है, जबकि कांग्रेस पार्षदों ने इसे अपनी धार्मिक स्वतंत्रता और संवैधानिक अधिकार का मामला करार दिया।
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