रायपुर 9 अप्रैल 2026 : छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले में आज एक बड़ा कानूनी मोड़ आया है। विशेष अदालत ने मामले की मुख्य आरोपियों में शुमार सौम्या चौरसिया और केके श्रीवास्तव की जमानत अर्जी मंजूर कर ली है। लंबे समय से सलाखों के पीछे बंद इन दोनों आरोपियों के लिए बुधवार का यह फैसला किसी बड़ी संजीवनी से कम नहीं है।
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पिंजरे से बाहर, पर कड़े पहरे में
अदालत ने राहत तो दी है, लेकिन उनकी आजादी पर शर्तों की ‘बेड़ियाँ’ भी कसी हैं। आरोपियों को जेल से बाहर आने के लिए निम्नलिखित नियमों का पालन करना होगा:
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पासपोर्ट जब्ती: दोनों आरोपियों को अपना पासपोर्ट कोर्ट में सरेंडर करना होगा।
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देश छोड़ने पर पाबंदी: बिना अदालत की लिखित अनुमति के वे भारत की सीमा से बाहर नहीं जा सकेंगे।
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जांच में सहयोग: ट्रायल के दौरान जब भी जांच एजेंसियां बुलाएंगी, उन्हें उपस्थित होना अनिवार्य होगा।
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क्या है यह ‘सिंडिकेट’ विवाद?
यह पूरा मामला छत्तीसगढ़ में एक संगठित सिंडिकेट के जरिए शराब के अवैध लेन-देन और करोड़ों रुपये के भ्रष्टाचार से जुड़ा है। जांच एजेंसियों का दावा है कि इस घोटाले के तार शासन और प्रशासन के शीर्ष स्तर तक जुड़े थे। सौम्या चौरसिया की गिरफ्तारी इस मामले की सबसे बड़ी कार्रवाई मानी गई थी, जिसके बाद अब उन्हें मिली जमानत राज्य की राजनीति और कानूनी गलियारों में चर्चा का विषय बन गई है।
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