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अतिक्रमण की भेंट चढ़ी कोरबा की नहर: 7.49 करोड़ का टेंडर पर काम शुरू होना मुश्किल

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कोरबा 9 अप्रैल 2026 । शहर के बीच से गुजरने वाली बांयीं तट नहर (LBC) की बदहाली अब सिंचाई विभाग और प्रशासन के लिए गले की फांस बन गई है। नहर की जर्जर हालत को सुधारने के लिए तीसरी बार 7.49 करोड़ रुपए का टेंडर जारी किया गया है, लेकिन धरातल पर काम शुरू होने की राह में ‘अतिक्रमण’ सबसे बड़ा रोड़ा बना हुआ है।

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इससे पहले दूसरी बार जारी किए गए टेंडर में किसी भी ठेकेदार ने रुचि नहीं दिखाई थी। वजह साफ है—नहर के दोनों किनारों पर इस कदर कब्जा हो चुका है कि मशीनें उतारने या मरम्मत कार्य के लिए जगह ही नहीं बची है।

खतरे में सड़क और सिंचाई व्यवस्था

दर्री बराज से निकलने वाली यह नहर सुनालिया, सीतामढ़ी और इमलीडूग्गू जैसे व्यस्त इलाकों से गुजरती है। स्थिति यह है कि:

  • नहर की लाइनिंग टूटने से उसके ऊपर बनी सड़क अंदर से खोखली हो गई है।

  • पिछली बारिश में लगभग 50 मीटर सड़क और सेफ्टीवॉल नहर में समा चुके हैं।

  • नहर की क्षमता 4200 क्यूसेक है, लेकिन मेड़ टूटने के डर से इसमें केवल 3000 से 3500 क्यूसेक पानी ही छोड़ा जा रहा है, जिससे किसानों को नुकसान हो रहा है।

अवैध निर्माण ने रोका रास्ता

नहर के एक तरफ व्यस्त सड़क है तो दूसरी तरफ लोगों ने मेड़ तक पर मकान, दुकानें और यहाँ तक कि शौचालय तक बना लिए हैं। इसके अलावा सब-स्टेशन और सामुदायिक भवन भी नहर की जमीन पर खड़े हैं। अधिकारियों की अनदेखी के कारण शनि मंदिर के आगे अभी भी अवैध कब्जा जारी है।

फंसा हुआ है 45 करोड़ का प्रोजेक्ट

बांयीं तट नहर की मरम्मत के लिए कुल 45 करोड़ रुपए के 10 कार्य मंजूर किए गए हैं, जिनमें से 3 काम कोरबा जिले के हिस्से में आते हैं। सिंचाई विभाग के मुताबिक, 18 किलोमीटर का हिस्सा कोरबा और बाकी हिस्सा जांजगीर-चांपा व सक्ती जिले के अधीन है। हालांकि फंड मंजूर है, लेकिन जब तक अतिक्रमण नहीं हटता, मरम्मत कार्य शुरू होना नामुमकिन नजर आ रहा है।

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अगर मानसून से पहले काम शुरू नहीं हुआ, तो रेलवे स्टेशन मार्ग पर स्थित यह सड़क कभी भी बड़े हादसे का सबब बन सकती है।

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