कोरबा 13 जून। बुधवारी बाईपास से बलगी मार्ग तक 5 दिन पहले बदमाशों द्वारा मचाए गए बर्बर तांडव ने आखिरकार एक बेकसूर की जान ले ली। बदमाशों की बोलेरो की टक्कर से गंभीर रूप से घायल हुए एएसआई रात्रे के युवा पुत्र चंद्रमणि रात्रे ने शुक्रवार की शाम रायपुर के अस्पताल में दम तोड़ दिया। इस दर्दनाक खबर के बाद जहां पूरे जिले में शोक की लहर है, वहीं आम जनता, पीड़ित परिवार के समाज और खुद खाकी परिवार के भीतर भारी आक्रोश पनप रहा है।
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लेकिन सबसे हैरान और शर्मसार कर देने वाली बात यह है कि इस जघन्य वारदात के 5 दिन बीत जाने के बाद भी कोरबा पुलिस के हाथ पूरी तरह खाली हैं।
“सजग कोरबा, सतर्क कोरबा” अभियान पर उठे गंभीर सवाल
एक तरफ कोरबा पुलिस शहर में सुरक्षा का ढोल पीटते हुए “सजग कोरबा सतर्क कोरबा” अभियान चला रही है, तो दूसरी तरफ बेखौफ अपराधियों ने पुलिसिंग की धज्जियां उड़ाकर रख दी हैं। जनता अब सीधे सवाल पूछ रही है कि:
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जिस दुस्साहसिक घटना में खुद एक पुलिसवाले का युवा बेटा शिकार हो जाए और दम तोड़ दे, उसमें भी पुलिस 5 दिनों तक एक भी आरोपी को क्यों नहीं दबोच पाई?
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जब खाकी वर्दी वालों के अपने परिवार सुरक्षित नहीं हैं, तो आम नागरिकों की सुरक्षा का भरोसा कौन देगा?
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क्या पुलिस सिर्फ कागजी दावों में ही सजग और सतर्क है?
चौथा स्तंभ भी लहूलुहान, पत्रकार से लूटपाट
इस खूनी खेल में न सिर्फ एएसआई के बेटे को कुचला गया, बल्कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को भी सरेआम निशाना बनाया गया। घटना के बाद आरोपियों की बोलेरो गाड़ी का पीछा कर रहे युवा पत्रकार अरविंद राठौर को 25-30 गुंडों ने घेर लिया। अपराधियों ने पत्रकार की कनपटी पर पिस्तौल तानकर न केवल जानलेवा हमला किया, बल्कि उन्हें मरा हुआ समझकर:₹1 लाख नकद,आईफोन और सोने की चेन और अंगूठी भी लूट ली।
कबाड़, कोयला और डीजल माफिया से कनेक्शन?
शुरुआती ढुलमुल रवैये के बाद, अब पुलिस इस मामले में कबाड़, कोयला और डीजल के गोरखधंधे (अवैध व्यापार) से जुड़े कनेक्शन की बात कह रही है। लेकिन बड़ा सवाल यह उठता है कि इन अपराधियों को आखिर किसका राजनीतिक या प्रशासनिक संरक्षण (शह) मिल रहा है, जो इनके हौसले इतने बुलंद हैं?
परिजनों और समाज का अल्टीमेटम
चंद्रमणि की मौत की खबर मिलते ही उनके गृह जिले और समाज में शोक के साथ-साथ भारी गुस्सा फैल गया है। समाज के प्रतिनिधियों और पीड़ित परिवार ने दो टूक शब्दों में ऐलान कर दिया है कि “जब तक चंद्रमणि की जान लेने वाले कबाड़ चोरों और आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हो जाती, तब तक मृतक का अंतिम संस्कार नहीं किया जाएगा।”
निष्कर्ष: अब पानी सिर से ऊपर जा चुका है। खोखली कागजी कार्यवाहियों और अभियानों से इतर, रायपुर में दम तोड़ने वाले चंद्रमणि रात्रे और घायल पत्रकार अरविंद राठौर को न्याय दिलाने के लिए पुलिस को अब वो ‘सख्त एक्शन’ दिखाना होगा, जो अपराधियों की रूह कंपा दे। वरना, “सजग कोरबा सतर्क कोरबा” का नारा महज एक भद्दा मजाक बनकर रह जाएगा।








