West Asia War : पश्चिम एशिया के रणक्षेत्र से उठी चिंगारी ने अब वैश्विक अर्थव्यवस्था को अपनी चपेट में ले लिया है। अमेरिका और इजरायल के ईरान पर हमलों के बाद शुरू हुआ यह युद्ध चौथे हफ्ते में प्रवेश कर चुका है, और इसका सबसे खौफनाक मंजर डीजल की कीमतों में दिख रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड $100 प्रति बैरल के पार निकल चुका है, जिससे दुनिया के कई देशों में हाहाकार मचा है।
एशिया और यूरोप की बिगड़ी हालत आयात पर निर्भर देशों के लिए यह स्थिति किसी दुःस्वप्न से कम नहीं है:
फिलीपींस: डीजल के दाम में 80% का ऐतिहासिक उछाल।
नाइजीरिया: यहाँ भी कीमतें 78% तक चढ़ गई हैं।
मलेशिया और वियतनाम: क्रमशः 58% और 46% की भारी बढ़ोत्तरी।
अमेरिका और कनाडा: विकसित देशों में भी 37% से 40% की तेजी ने महंगाई बढ़ा दी है।
कौन है इस तूफान के बीच सुरक्षित? जहाँ पूरी दुनिया डीजल की बढ़ती कीमतों से त्रस्त है, वहीं भारत, रूस और सऊदी अरब ने अपनी रणनीतियों और घरेलू नीतियों के दम पर कीमतों को स्थिर रखा है। हालांकि, विशेषज्ञों की चेतावनी है कि अगर कच्चा तेल लंबे समय तक $100 के ऊपर रहा, तो ट्रांसपोर्ट और इंडस्ट्रियल सेक्टर के लिए मुश्किलें बढ़ना तय है।
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