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बिलासपुर में ‘नक्शा घोटाला’ महाविस्फोट: कागजों में 60 फ्लैट, जमीन पर 90; फर्जी आर्किटेक्ट के नाम पर 400 नक्शे पास

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बिलासपुर | 15 मार्च, 2026 छत्तीसगढ़ की न्यायधानी बिलासपुर में शहरी विकास के नाम पर एक संगठित भ्रष्टाचार का बड़ा खुलासा हुआ है। प्राप्त जानकारी के अनुसार नगर पालिक निगम और टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (TCP) विभाग की नाक के नीचे चल रहे इस खेल में नियमों को ताक पर रखकर करोड़ों के वारे-न्यारे करने का आरोप लगा है। मामला  शहर के  बिल्डर और उसके प्रोजेक्ट से जुड़ा है, जिसमें 60 फ्लैट की अनुमति लेकर 90 फ्लैट का नक्शा पास कराने की गंभीर अनियमितता सामने आई है।

घोटाले के मुख्य बिंदु:

  • नियमों का उल्लंघन: प्रोजेक्ट के एरिया स्टेटमेंट में 4 मंजिल और 60 फ्लैट दर्शाए गए थे, लेकिन विभाग ने रहस्यमयी तरीके से 6 मंजिल और 90 फ्लैट का नक्शा मंजूर कर दिया।

  • अदृश्य आर्किटेक्ट का मायाजाल: 

  • प्राप्त जानकारी के अनुसार ‘विकास सिं नामक जिस आर्किटेक्ट के नाम पर 400 से अधिक नक्शे और 150 लेआउट पास हुए, उसका शहर में कोई अस्तित्व ही नहीं है। ‘इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ आर्किटेक्ट्स’ ने भी इस नाम के किसी व्यक्ति के पंजीकृत होने से इनकार किया है।

  • EWS कोटे में फर्जीवाड़ा: बिल्डर ने गरीबों के लिए (EWS) आवास बनाने हेतु जिस जमीन का शपथपत्र दिया, राजस्व रिकॉर्ड में वह जमीन बिल्डर के नाम पर है ही नहीं।

  • सुपरफास्ट मंजूरी: विभाग की कार्यप्रणाली पर तब सवाल उठे जब एक ही दिन में 29 लेआउट फाइलों को हरी झंडी दे दी गई, जो सामान्य प्रक्रिया में नामुमकिन माना जाता है।


फर्जी पहचान और निगम की कार्रवाई

जांच में खुलासा हुआ कि इसी ‘विकास सिंह’ नाम की आईडी का उपयोग एक होटल जैसे अवैध निर्माणों के लिए भी किया गया था। होटल पर बुलडोजर चलने के बाद निगम ने जुलाई 2025 में इस लाइसेंस को ब्लैकलिस्ट किया था, लेकिन तब तक सैकड़ों संदिग्ध नक्शे इसी पहचान के जरिए सिस्टम से बाहर निकल चुके थे।

करोड़ों के लेनदेन की आशंका

विशेषज्ञों के अनुसार, लेआउट और नक्शा पास कराने की सरकारी और निजी फीस के गणित को देखा जाए, तो इस पूरे खेल में करोड़ों रुपये के अवैध लेनदेन की आशंका है। एक एकड़ के लेआउट में ही लाखों का खर्च आता है, ऐसे में 150 से अधिक लेआउट की फाइलें बड़े वित्तीय भ्रष्टाचार की ओर इशारा करती हैं।

“यह केवल एक प्रोजेक्ट की चूक नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की मिलीभगत है। अगर एक गैर-मौजूद आर्किटेक्ट के नाम पर शहर की सैकड़ों इमारतें खड़ी हो गईं, तो उनकी तकनीकी सुरक्षा और वैधता की गारंटी कौन लेगा?” — शहरी नियोजन विशेषज्ञ

आगे क्या?

इस खुलासे के बाद रियल एस्टेट सेक्टर और प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है। मांग उठ रही है कि बिल्डर  और संबंधित विभागीय अधिकारियों के विरुद्ध आपराधिक मामला दर्ज कर उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच कराई जाए। अब गेंद शासन के पाले में है कि वह इस ‘काले खेल’ के असली किरदारों पर क्या कार्रवाई करता है।


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