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हवा में जहर घोलती उद्योगों की राख: सांसद महंत ने पूछा- कब थमेगी कोरबा में अवैध डंपिंग और प्रदूषण की मार?

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नई दिल्ली/कोरबा: औद्योगिक नगरी कोरबा में बिजली संयंत्रों से निकलने वाली राख और उससे होने वाले प्रदूषण का मुद्दा एक बार फिर संसद में गूंजा। कांग्रेस सांसद ज्योत्सना महंत ने लोकसभा में केंद्र सरकार को घेरते हुए कोरबा जिले के बिगड़ते पर्यावरण, दूषित होते जल स्रोतों और स्थानीय नागरिकों के गिरते स्वास्थ्य पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कड़े शब्दों में पूछा कि 100 प्रतिशत फ्लाई ऐश उपयोग का लक्ष्य पूरा न करने वाले उद्योगों पर अब तक क्या ठोस कार्रवाई की गई है।

सांसद महंत ने विशेष रूप से वन क्षेत्रों और जनजातीय बस्तियों में हो रही अवैध ऐश डंपिंग का मुद्दा उठाया। उन्होंने सरकार से मांग की कि पिछले तीन वर्षों में ऐश पॉन्ड में जमा ‘लेगेसी ऐश’ (पुरानी राख) की मात्रा और उसके वैज्ञानिक निपटान की स्पष्ट समय-सीमा बताई जाए। सांसद का कहना था कि राख की समस्या अब एक गंभीर मानवीय संकट बनती जा रही है और इसका स्थायी समाधान अनिवार्य है।

सांसद के सवालों का जवाब देते हुए केंद्रीय पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री कीर्तिवर्धन सिंह ने सदन को बताया कि 31 दिसंबर 2021 की अधिसूचना के अनुसार सभी ताप विद्युत गृहों को शत-प्रतिशत राख उपयोग के आदेश दिए गए हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वर्तमान में कोरबा के किसी भी प्लांट पर पर्यावरणीय मुआवजा (जुर्माना) नहीं लगाया गया है, क्योंकि वर्ष 2022 से 2025 तक का पहला अनुपालन चक्र अभी पूरा होना बाकी है।

मंत्री ने डेटा साझा करते हुए बताया कि कोरबा में वर्तमान में 210.64 लाख मीट्रिक टन लेगेसी ऐश जमा है, जिसे निपटाने के लिए संयंत्रों को 1 अप्रैल 2022 से 10 वर्ष का समय दिया गया है। साथ ही, अब सभी संयंत्रों को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के पोर्टल पर अपनी राख उत्पादन और उपयोग की मासिक जानकारी अनिवार्य रूप से देनी होगी। सांसद ज्योत्सना महंत ने सरकार से यह भी मांग की कि प्रदूषण फैलाने वालों से वसूले गए जुर्माने की राशि का उपयोग विशेष रूप से पर्यावरण सुधार और प्रभावित लोगों के स्वास्थ्य लाभ के लिए किया जाए।


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